अपने ग्राहक को जानिए (केवाइसी) मानदंड/धनशोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी)/धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के अंतर्गत बैंकों का दायित्व – धारा 13(2) में संशोधन
आरबीआई/2013-14/441 09 जनवरी 2014 अध्यक्ष/मुख्य कार्यपालक अधिकारी महोदय /महोदया अपने ग्राहक को जानिए (केवाइसी) मानदंड/धनशोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी)/धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के अंतर्गत बैंकों का दायित्व – धारा 13(2) में संशोधन कृपया आप 18 फरवरी 2005 के हमारे दो परिपत्र ग्राआऋवि.सं.आरआरबी.बीसी.सं.81/03.05.33(ई)/2004-05 और ग्राआऋवि.एएमएल. बीसी.सं.80/07.40.00/2004-05 और अपने ग्राहक को जानिए (केवाइसी) मानदंड/ धनशोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी)/ पीएमएलए, 2002 के अंतर्गत बैंकों के दायित्व पर समय समय पर जारी परिपत्र देखें। 2. धनशोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम 2012 के लागू होने तथा अधिनियम की धारा 13 में संशोधन करने के साथ जिसमें 'जुर्माना लगाने के लिए निदेशक के अधिकार' का प्रावधान है, धारा 13(2) का पाठ अब निम्नानुसार होगा: "किसी भी जांच के दौरान यदि निदेशक यह पाता है कि रिपोर्टिंग संस्था या बोर्ड में उसका नामित निदेशक या उसका कोई कर्मचारी इस अध्याय के अंतर्गत आने वाले दायित्वों का अनुपालन करने में असफल रहता है तब इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत संभावित किसी अन्य कार्रवाई को प्रभावित किए बिना वह – ए. लिखित में चेतावनी जारी कर सकता है; या बी. ऐसी रिपोर्टिंग संस्था या बोर्ड में उसके नामित निदेशक या उसके किसी कर्मचारी को विनिर्दिष्ट अनुदेशों का पालन करने का निदेश दे सकता है; या सी. ऐसी रिपोर्टिंग संस्था या बोर्ड में उसके नामित निदेशक या उसके किसी कर्मचारीको उसके द्वारा किए जाने वाले उपायों के संबंध मं निर्धारित अंतराल पर रिपोर्ट भेजने के निदेश दे सकता है; या डी. ऐसी रिपोर्टिंग संस्था या बोर्ड में उसके नामित निदेशक या उसके किसी कर्मचारी पर आदेश जारी करके जुर्माना लगा सकता है जो प्रत्येक चूक के लिए दस हजार रुपये सेकम नहीं होगा लेकिन उसे बढ़ाकर एक लाख रुपये तक किया जा सकता है।" 3. उपर्युक्त संशोधन को ध्यान में रखते हुए, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक / राज्य और केंद्रीय सहकारी बैंक धनशोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम (पीएमएलए) 2012 के अंतर्गत अपने दायित्वों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अपने बोर्ड पर 'नामित निदेशक' के रूप में एक निदेशक को नामित करें। भवदीय (ए. उद्गाता) |
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