भारतीय रिज़र्व बैंक ने सहकारी बैंकों के लिए कारोबार प्राधिकार संबंधी निदेश जारी किए
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भारतीय रिज़र्व बैंक ने समय-समय पर सहकारी बैंकों, अर्थात्, प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (यूसीबी), राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को कारोबार के स्थान, नाम में संशोधन और अनुसूची में नाम शामिल करने की अनुमति से संबंधित कतिपय अनुदेश/ दिशानिर्देश जारी किए हैं। उपर्युक्त अनुदेशों/ दिशानिर्देशों को सुसंगत बनाने और उन्हें एक ही स्थान पर समेकित करने के उद्देश्य से, 28 जुलाई 2025 को बैंकों और अन्य हितधारकों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए सहकारी बैंकों के लिए कारोबार प्राधिकार (निदेश), 2025 संबंधी मास्टर निदेश (एमडी) का मसौदा जारी किया गया। 2. एमडी के मसौदा पर प्राप्त प्रतिक्रिया की जांच की गई है और परिणामस्वरूप अंतिम निदेशों में उपयुक्त रूप से संशोधन शामिल किए गए हैं। मास्टर निदेश के मसौदा पर प्राप्त प्रतिक्रिया संबंधी विवरण अनुबंध में दिया गया है। 3. तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज वर्तमान निदेशों/ दिशानिर्देशों को प्रतिस्थापित/ संशोधित करने के लिए निम्नलिखित अंतिम निदेश / दिशानिर्देश जारी किए हैं: (2)भारतीय रिज़र्व बैंक (शहरी सहकारी बैंक - शाखा प्राधिकार) निदेश, 2025 (3)भारतीय रिज़र्व बैंक (ग्रामीण सहकारी बैंक - शाखा प्राधिकार) निदेश, 2025 (4)भारतीय रिज़र्व बैंक (ग्रामीण सहकारी बैंक - विविध) (संशोधन) निदेश, 2025 4. इस संशोधन में एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसके माध्यम से सहकारी बैंकों को मजबूत सुरक्षा व्यवस्था को कार्यान्वित करते हुए परिचालन स्वायत्तता को और बढ़ाकर सशक्त बनाया जा सके। प्राधिकार संबंधी मानदंडों में सुविचारित रियायत ने सहकारी बैंकों के लिए ऋण आउटरीच का विस्तार करके, प्रौद्योगिकी संचालित समाधानों का उपयोग करते हुए और स्थानीय विकास प्राथमिकताओं को समर्थन देते हुए भारत के आर्थिक विकास में सक्रिय रूप से योगदान करने का मार्ग तैयार किया है।
(ब्रिज राज) प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1627 |
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