भारतीय रिज़र्व बैंक ने ऋण सूचना कंपनियों को ऋण सूचना प्रस्तुत करने के लिए आंकड़ा फार्मेट संबंधी रिपोर्ट पर आम जनता से अभिमत मांगा
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22 मार्च 2014 भारतीय रिज़र्व बैंक ने ऋण सूचना कंपनियों को ऋण सूचना प्रस्तुत करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने आम जनता से अभिमत के लिए आज अपनी वेबसाइट पर ऋण सूचना कंपनियों को ऋण सूचना प्रस्तुत करने के लिए आंकड़ा फार्मेट संबंधी रिपोर्ट जारी की। अभिमत मुख्य महाप्रबंधक, बैंकिंग परिचालन और विकास विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, शहीद भगत सिंह मार्ग, मुंबई-400001 को 30 अप्रैल 2014 अथवा इससे पहले ईमेल अथवा डाक से भेजे जा सकते हैं। इस समिति ने ऋण सूचना जैसेकि इसकी व्यापकता को बढ़ाने, रिपोर्टों के फार्मेट और ऋण संस्थाओं द्वारा पालन की जाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं, ऋण सूचना कंपनियों (सीआईसी) और रिज़र्व बैंक से संबंधित मुद्दों पर व्यापक सिफारिश की हैं। ऋण सूचना को और अधिक उपयोगी बनाना समिति ने कहा है कि सदस्य संस्थाओं और अन्य विशिष्ट उपयोगकर्ताओं द्वारा ऋण सूचना के कम उपयोग का अपेक्षित ऋण सूचना के साथ उनके डेटाबेस को लोकप्रिय बनाने के लिए अपेक्षित ऋण सूचना कंपनियों द्वारा समाधान किए जाने की जरूरत है ताकि विशिष्ट उपयोगकर्ताओं द्वारा की गई पूछताछ पर वांछित जानकारी मिल सके। इसने अनुशंसा की है कि यह सदस्यता (सभी ऋण संस्थाएं सभी ऋण सूचना कंपनियों की सदस्य बने) और उत्पाद (सीपी और ऐसे अन्य उत्पादों में चूक भी) के अनुसार ऋण सूचना की व्यापकता को बढ़ाने और ऋण सूचना रिपोर्टों (सीआईआर) के बारे में जागरूकता सृजित करने के द्वारा की जा सकती है। ऋण सूचना रिपोर्ट ऋण सूचना रिपोर्टों के संबंध में समिति की अनुशंसाएं इस प्रकार हैं:
इसके अतिरिक्त समिति ने यह सुझाव दिया कि उनकी ऋण सूचना रिपोर्ट की एक प्रति निशुल्क देने से ऋण अनुशासन की ज़रूरत के बारे में जागरूकता पैदा करने, ग्राहकों को उनके व्यवहार में सुधार में सहायता करने तथा किसी भी प्रकार के नए ऋण के उपभोग की उनकी योजना बनाने के पूर्व उनकी उपलब्धि में सुधार करने, शुरूआत में ही चोरी का पता लगाने में सहायता करने, ऋण सूचना कंपनियों में सुधार में सहायता करने और अपने डेटाबेस को वैध बनाने और आगे चलकर अपने कारोबार को बढ़ाने में सहायता मिलेगी। समिति ने उल्लेख किया है कि फार्मेट में अतिरिक्त जानकारी जैसेकि विवाद कोड, विवाद पर उपभोक्ता की टिप्पणी, संपार्श्विक आदि के ब्योरे सहित सामान्य आंकड़ा फार्मेटों के उपयोग तथा आंकड़ा फार्मेटों में परिवर्तन हेतु जारी व्यवस्था को संस्थागत बनाने से आंकड़ा गुणवत्ता में सुधार होगा। समिति ने एक सामान्य आंकड़ा गुणवत्ता सूचकांक की सिफारिश की है जो उनके आंकड़ों में अंतरालों के निर्धारण में ऋण संस्थाओं की सहायता करेगा तथा किसी अवधि के दौरान उनके कार्यनिष्पादन में सुधार लाएगा। पृष्ठभूमि भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही की समीक्षा 2012-13 (अक्टूबर 2012) में कहा गया था कि ऋण संस्थाएं अपने उधारकर्ताओं पर समयबद्ध और सटीक ऋण सूचना प्रस्तुत करें और अपनी ऋण मूल्यांकन प्रक्रिया के भाग के रूप में उपलब्ध ऋण सूचना का व्यापक उपयोग करें। नीति के बाद रिज़र्व बैंक की बैंकरों के साथ अक्टूबर 2012 में बैठक में आंकड़ा संग्रह फार्मेट की आवश्यकता और दुहरीकरण कम करने के लिए सीआईसी के बीच समरूपता/संकेंद्रण पर जोर दिया गया। रिज़र्व बैंक ने बाद में ऋण सूचना कंपनियों के प्रमुखों से भी बैठक की और यह सुझाव दिया गया कि कुछ बैंकों, ऋण सूचना कंपनियों और भारतीय बैंक संघ को शामिल करते हुए एक समिति का गठन एक अद्यतन आंकड़ा फार्मेट को अंतिम रूप देने के लिए किया जाए। तब इस समिति का गठन ऋण सूचना कंपनियों के प्रधानों, निजी क्षेत्र के बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, विदेशी बैंक, शहरी सहकारी बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी, एमएफआई, आईबीए और रिज़र्व बैंक के विधि विभाग से प्रत्येक के एक प्रतिनिधि को सदस्य के रूप में रखते हुए किया गया। श्री आदित्य पूरी, प्रबंध निदेशक, एसडीएफसी बैंक ने समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया जबकि श्री राजेश वर्मा, मुख्य महाप्रबंधक, बैंकिंग परिचालन और विकास विभाग इसके सदस्य-सचिव थे। इस समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट रिज़र्व बैंक को सौंप दी है। अल्पना किल्लावाला प्रेस प्रकाशनी : 2013-2014/1869 |
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