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प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य

भारतीय रिज़र्व बैंक ने 8 जून 2023 के विकासात्मक और विनियामकीय नीति पर अपने वक्तव्य के एक भाग के रूप में, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित एक्सपोज़र के संबंध में समाधान योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु मौजूदा विवेकपूर्ण मानदंडों को युक्तिसंगत बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की घोषणा की थी, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ विभिन्न विनियमित संस्थाओं (आरई) पर लागू विनियामकीय निर्देशों में सामंजस्य स्थापित करना शामिल था। मौजूदा विनियामकीय निर्देशों की व्यापक समीक्षा के आधार पर, जिसमें दायरा, कवरेज और विवेकपूर्ण आवश्यकताएं शामिल हैं, सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए निम्नलिखित मसौदा निदेश जारी किए जा रहे हैं।

  1. वाणिज्यिक बैंक - प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय

  2. लघु वित्त बैंक - प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय

  3. स्थानीय क्षेत्र बैंक - प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय

  4. शहरी सहकारी बैंक - प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय

  5. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक - प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय

  6. ग्रामीण सहकारी बैंक - प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय

  7.  गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां - प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय

  8. अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान - प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय

2.  मसौदा दिशानिर्देशों में निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं :

  1. दिशानिर्देशों में एक सिद्धांत-आधारित संकल्प-व्यवस्था की परिकल्पना की गई है, जिसमें संकल्प योजना के डिजाइन और कार्यान्वयन के संबंध में आरई को पूर्ण विवेकाधिकार प्रदान किया गया है और जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी)/जिला परामर्शदात्री समिति (डीसीसी) के निर्णयों को ध्यान में रखा गया है।

  2. ऐसे एक्सपोज़र जो प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं और जो 'मानक' हैं लेकिन प्राकृतिक आपदा की घटना की तारीख से 30 दिनों तक चूक गए हैं, यथा 'एसएमए-0', वे दिशानिर्देशों के तहत राहत के लिए विचार किए जाने के पात्र होंगे।

  3. राहत उपायों के समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, लागू होने के बाद, संकल्प योजना (आरपी) के कार्यान्वयन के लिए निर्धारित की गई एक अलग विंडो के साथ-साथ संकल्प ढांचा लागू करने हेतु एक समर्पित विंडो निर्धारित की गई है।

  4. राहत कार्यों के एक भाग के रूप में पुनर्गठित एक्सपोज़र, अन्य पुनर्गठित एक्सपोज़र की तुलना में घटे हुए अतिरिक्त विशिष्ट प्रावधानीकरण के साथ, उपार्जन आधार पर आय निर्धारण संबंधी 'मानक' के रूप में वर्गीकृत रहेंगे।

  5. प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ प्रदान करने के लिए आरई वैकल्पिक व्यवस्थाएँ करेंगे।

3. ये दिशा-निर्देश 01 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

4. जनसामान्य/हितधारकों से 17 फरवरी 2026 तक मसौदा दिशानिर्देशों पर टिप्पणियाँ आमंत्रित की जाती हैं। टिप्पणियाँ/प्रतिक्रियाएँ रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध 'Connect2Regulate' खंड के अंतर्गत दिए गए लिंक के माध्यम से भेजी जा सकती हैं। वैकल्पिक रूप से, उक्त टिप्पणियाँ मुख्य महाप्रबंधक, ऋण जोखिम समूह, विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, 12वीं/13वीं मंजिल शहीद भगत सिंह मार्ग, फोर्ट, मुंबई – 400 001 को या ईमेल पर भेजी जा सकती हैं।

(ब्रिज राज)     
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1996

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