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भारतीय रिज़र्व बैंक ने जम्मू एण्ड कश्मीर बैंक लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 1 दिसंबर 2025 के आदेश द्वारा जम्मू एण्ड कश्मीर बैंक लिमिटेड (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम) की धारा 26ए के प्रावधानों के उल्लंघन तथा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी ‘आंतरिक ओम्बड्समैन योजना 2018’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹99.30 लाख (निन्यानबे लाख तीस हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बीआर अधिनियम की धारा 46 (4) (i) के साथ पठित धारा 47ए(1) (सी) के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2024 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक का पर्यवेक्षी मूल्यांकन हेतु सांविधिक निरीक्षण किया गया। बीआर अधिनियम के प्रावधानों, आरबीआई के निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और इससे संबंधित पत्राचार के आधार पर, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया जिसमें उससे यह पूछा गया कि वह कारण बताए कि बीआर अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन तथा उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।

नोटिस पर बैंक के उत्तर, इसके द्वारा की गई अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

  1. बैंक ने अपने आंतरिक शिकायत तंत्र द्वारा आंशिक रूप से / पूर्ण रूप से अस्वीकृत कुछ शिकायतों को अंतिम निर्णय के लिए आंतरिक ओम्बुड्समैन को प्रस्तुत नहीं किया;

  2. बैंक ने अपने ग्राहकों को उनकी शिकायतों के निपटान के संबंध में अंतिम पत्र नहीं भेजे, जिसके कारण यह सुनिश्चित नहीं किया गया कि ग्राहकों को यह जानकारी दी जाए कि यदि वे बैंक के उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं, तो उनके पास बैंकिंग ओम्बुड्समैन से संपर्क करने का अधिकार है।

  3. बैंक ने निर्धारित अवधि के भीतर कुछ खातों की पात्र राशि को जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता (डीईए) निधि में अंतरित नहीं किया; और

  4. बैंक के पास वीडियो-आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया (वी-सीआईपी) में चेहरे के मिलान की तकनीक नहीं थी और वह वी-सीआईपी के दौरान ग्राहक द्वारा प्रस्तुत आर्थिक और वित्तीय प्रोफाइल/जानकारी की पुष्टि भी नहीं कर सका।

यह कार्रवाई, संविधिक एवं विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 

(ब्रिज राज)    
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1648

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