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बैंकिंग सेवाओं में अंतर्राष्‍ट्रीय कारोबार पर सर्वेक्षण: 2012-13

17 फरवरी 2014

बैंकिंग सेवाओं में अंतर्राष्‍ट्रीय कारोबार पर सर्वेक्षण: 2012-13

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी वेबसाइट पर बैंकिंग सेवाओं में अंतर्राष्‍ट्रीय कारोबार पर सर्वेक्षण: 2012-13 के परिणाम से संबंधित आंकड़े जारी किए।

बैंकिंग सेवाओं में अंतर्राष्‍ट्रीय कारोबार पर वार्षिक सर्वेक्षण का अभिप्राय विदेशों में परिचालनरत भारतीय बैंकों की शाखाओं/सहायक संस्‍थाओं तथा भारत में परिचालनरत विदेशी बैंकों की शाखाओं/ सहायक संस्‍थाओं के संबंध में भारत के लिए बैंकिंग सेवाओं में अंतर्राष्‍ट्रीय कारोबार(आईटीबीएस) पर जानकारी उपलब्‍ध कराना है। ग्राहकों को प्रभारित स्‍पष्‍ट/अस्‍पष्‍ट शुल्‍क/कमीशन पर आधारित बैंकों द्वारा दी गई वित्‍तीय सहायक सेवाओं (इन सेवाओं के ब्‍योरे अनुलग्‍नक में वर्णित हैं) पर संगत और तुलनीय आंकड़े शामिल किए गए हैं। इस सर्वेक्षण में भारतीय बैंकों की 170 समुद्रपारीय शाखाओं, 184 समुद्रपारीय संस्‍थाओं और भारत में परिचालनरत विदेशी बैंकों की 316 शाखाओं को शामिल किया गया है।

मुख्‍य निष्‍कर्ष :

  • रोजगार वितरण और वृद्धि : विदेशों में परिचालनरत भारतीय बैंकों की शाखाओं ने स्‍थानीय स्रोतों से 64.5 प्रतिशत कर्मचारियों, भारत से 32.5 प्रतिशत और शेष 3.0 प्रतिशत कर्मचारियों को अन्‍य देशों से नियोजित किया है। भारत में कार्यरत विदेशी बैंकों के मामले में कुल कर्मचारियों में स्‍थानीय कर्मचारियों का हिस्‍सा वर्ष 2012-13 में 99.6 प्रतिशत था। विदेशों में परिचालनरत भारतीय बैंकों के कर्मचारियों की कुल संख्‍या वर्ष 2012-13 में 7.8 प्रतिशत बढ़ी है। भारत में परिचालनरत विदेशी बैंकों के मामले में कर्मचारियों की संख्‍या में 8.1 प्रतिशत की कमी आई है [सारणी 1]।

  • ऋण और जमा वृद्धि : विदेशों में परिचालनरत भारतीय बैंकों की शाखाओं द्वारा प्रदान किया गया ऋण 31.7 प्रतिशत बढ़कर 5,855.7 बिलियन (107.7 बिलियन अमरीकी डालर) हो गया है। भारत में परिचालनरत विदेशी बैंकों द्वारा प्रदान किया गया ऋण वर्ष 2012-13 के दौरान 27.5 प्रतिशत बढ़कर 3,077.0 बिलियन (56.6 बिलियन अमरीकी डालर) हो गया है। विदेशों में परिचालनरत भारतीय बैंकों द्वारा प्राप्‍त जमाराशि वर्ष 2012-13 में 45.5 प्रतिशत तक बढ़ी है। भारत में परिचालनरत विदेशी बैंकों के मामले में प्राप्‍त जमाराशि में वृद्धि पिछले वर्ष के 14.3 प्रतिशत की तुलना में कम होकर 3.2 प्रतिशत हो गई है [सारणी 2]।

  • आय और व्‍यय : वर्ष 2012-13 के दौरान विदेशों में कार्यरत भारतीय बैंकों की शाखाओं की कुल आय 28.1 प्रतिशत बढ़कर 365.6 बिलियन (6.7 बिलियन अमरीकी डालर) हो गई। भारत में परिचालनरत विदेशी बैंकों के मामले में कुल आय 13.1 प्रतिशत बढ़कर अमरीकी डालर 528.4 बिलियन (9.7 बिलियन अमरीकी डालर) हो गई। कुल व्‍यय विदेशों में कार्यरत भारतीय बैंकों की शाखाओं और भारत में परिचालनरत विदेशी बैंकों की कुल आय का क्रमश: 75 प्रतिशत और 71 प्रतिशत रहा [सारणी 3]।

  • शुल्‍क आय का निर्माण : भारतीय बैंकों की विदेशों में कार्यरत 170 शाखाओं की कुल शुल्‍क आय 2011-12 में 68.0 बिलियन (1.4 बिलियन अमरीकी डॉलर) से बढ़कर वर्ष 2012-13 के दौरान 93.5 बिलियन (1.7 बिलियन अमरीकी डॉलर) हो गया। भारत में परिचालनरत विदेशी बैंकों की कुल शुल्‍क आय पिछले वर्ष के 94.3 बिलियन (2.0 बिलियन अमरीकी डालर) से घटकर 74.5 बिलियन (1.4 बिलियन अमरीकी डालर) हो गई [सारणी 4]।

  • गतिविधि-वार बैंकिंग सेवाएं : विदेशों में कार्यरत भारतीय बैंकों की शाखाओं ने ऋण संबंधी सेवाएं तथा व्‍यापार वित्‍त संबंधी सेवाएं प्रदान करते हुए शुल्‍क आय के बड़े हिस्‍से का निर्माण किया। 'डेरिवेटीव, स्‍टॉक, प्रतिभूति, विदेशी मुद्रा कारोबार सेवाएं' तथा 'वित्‍तीय परामर्शी और सलाहकार सेवाएं' भारत में परिचालनरत विदेशी बैंकों के लिए शुल्‍क आय का प्रमुख स्रोत थीं [सारणी 4]।

  • देश-वार बैंकिंग सेवाएं : बहरीन, बेल्जियम, हांगकांग, जापान, सिंगापुर, श्रीलंका, यूएई, यूके, और यूएसए ऐसे प्रमुख देश हैं जिनका विदेशों में परिचालनरत भारतीय बैंकों की शाखाओं की बैंकिंग सेवाओं में कुल कारोबार लगभग 92.2 प्रतिशत रहा है [सारणी 5]।

संगीता दास
निदेशक

प्रेस प्रकाशनी : 2013-2014/1647

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