शिक्षा ऋण
भारतीय रिज़र्व बैंक के दिनांक 09 नवंबर 2012 के परिपत्र ग्राआऋवि.एमएसएमई और एनएफएस.बीसी.सं.46/06.12.05/2012-13 के तहत बैंकों को सूचित किया गया है कि वे किसी भी शिक्षा ऋण आवेदन को इस कारण से अस्वीकार न करें कि उधारकर्ता का निवास बैंक के सेवा क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता है।
उत्तर: फ्लोटिंग रेट ऋणों के मामले में, एपीआर का खुलासा केएफएस के प्रारूप के अनुसार प्रचलित दर के आधार पर उत्पत्ति के समय पर किया जा सकता है। हालांकि, जब भी फ्लोटिंग दर बदलती है, संशोधित एपीआर लागू होने पर हर बार एसएमएस / ई-मेल के माध्यम से ग्राहक को केवल संशोधित एपीआर का खुलासा किया जाए।
उत्तर: आदर्श रूप में, हस्तांतरण के समय और उचित मूल्यांकन कट-ऑफ तारीख के बीच का अंतर न्यूनतम होना चाहिए और बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए। तथापि, ऐसे परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए और इस शर्त का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कि अध्याय-III के प्रावधानों के अंतर्गत चूक में कोई ऋण हस्तांतरित नहीं किया जाता है, उधारदाताओं को सभी संगत पहलुओं को शामिल करते हुए बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति तैयार करने की सूचना दी जाती है।
उत्तर: वर्तमान में मानकीकृत अवधि प्रक्रिया का प्रयोग करते हुए सरकारी प्रतिभूति के लिए बाज़ार जोखिम पूंजीगत प्रभार की गणना की जाती है। यह विधि नाममात्र ब्याज दरों (संशोधित अवधि) के संबंध में मूल्य संवेदनशीलता पर आधारित है। यह प्रक्रिया आईआईबी पर भी लागू होगी। नामिक ब्याज दर दो कारकों से बनाए गए हैं : वास्तविक ब्याज दर और मुद्रास्फीति अपेक्षाएँ। आईआईबी में वास्तविक दरों में केवल परिवर्तन का जोखिम है। अतः, नामिक प्रतिफल के संबंध में गणना किए गए मूल्य संवेदनशीलता आईआईबी का वास्तविक जोखिम उपलब्ध नहीं कराएगा। इस प्रकार आईआईबी के मामले में, वास्तविक प्रतिफल में परिवर्तन के मामले में मूल्य संवेदनशीलता को आईआईबी के लिए गणना की जानी चाहिए।
हां, पेंशनभोगी जीवन प्रमाण का उपयोग करके शाखा में जाए बिना जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं, बशर्ते कि पेंशन स्वीकृति प्राधिकरण प्लेटफॉर्म पर मौजूद हो। इसके अलावा, बैंकों को यह भी सलाह दी गई है कि वे सुपर सीनियर सिटीजन (70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगी) और दिव्यांग या अशक्त व्यक्तियों (जिनकी चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित पुरानी बीमारी या विकलांगता है) जिनमें दृष्टिबाधित व्यक्ति भी शामिल हैं, को ऐसे ग्राहकों के परिसर/निवास पर जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की सुविधा प्रदान करें।
उत्तर: भारत की यात्रा कर रहे गैर-भारतीय मूल के विदेशी नागरिक बैंकिंग चैनल के माध्यम से भारत के बाहर से विप्रेषित निधियों या उसके द्वारा भारत में लाई गई विदेशी मुद्रा की बिक्री से एनआरओ (चालू/ बचत) खाता खोल सकता है। भारत से प्रस्थान करते समय एनआरओ खाते में शेष जमाराशि का भुगतान खाताधारक को किया जा सकता है, बशर्ते कि खाता छह माह से अनधिक की अवधि के लिए रखा गया है और खाते में उस पर उपचित ब्याज से इतर कोई स्थानीय निधियां जमा नहीं की गई हैं।
उत्तर: कोई निवासी व्यष्टि निम्नलिखित मामलों में भारत से बाहर किसी बैंक में विदेशी मुद्रा खाता खोल सकता है:
1) कोई निवासी छात्र जो विदेश में अध्ययन हेतु वहाँ रहने गया हो,ऐसे मामलों में इन खातों में भारत से किए जाने वाले सभी निक्षेप फेमा और उसके तहत बनाए गए नियमों और विनियमों के अनुसार किए जाने चाहिए। पढ़ाई पूरी करने के बाद उस छात्र के भारत लौटने पर, ऐसे खाते को उदारीकृत विप्रेषण योजना (LRS) के तहत खोला गया खाता माना जाएगा।
2) कोई निवासी यदि निश्चित अवधि के लिए विदेश में रहने के उद्देश्य से विदेश यात्रा पर गया हो, ऐसे मामलों में खाताधारक के भारत लौटने पर खाते में शेष राशि भारत में संप्रत्यावर्तित की जाएगी।
3) किसी प्रदर्शनी / व्यापार मेले में भाग लेने के लिए विदेश गया कोई व्यक्ति वहाँ अपने माल की बिक्री से प्राप्त हुई आय को जमा करने हेतु खाता खोल सकता है। ऐसी प्रदर्शनी/ व्यापार मेले के बंद होने की तिथि से एक माह के भीतर शेष राशि भारत में संप्रत्यावर्तित कर दी जाए।
4) एक निवासी व्यष्टि, जो निर्यातक है, माल या सेवाओं के निर्यात के लिए निर्यातक द्वारा पूर्ण निर्यात मूल्य की वसूली तथा अग्रिम धन-विप्रेषण की प्राप्ति।
5) निम्नलिखित व्यक्ति भारत में उसे देय अपना संपूर्ण वेतन विप्रेषित करने/ प्राप्त करने के लिए खाता खोल सकता है:
(ए) भारत में निवासी कोई विदेशी नागरिक, जो किसी विदेशी कंपनी का कर्मचारी है और भारत में उस कंपनी के कार्यालय/ शाखा/ अनुषंगी/ संयुक्त उद्यम/ समूह कंपनी में प्रतिनियुक्ति पर है;
(बी) कोई ऐसा व्यक्ति जो भारतीय नागरिक है और किसी विदेशी कंपनी का कर्मचारी है और भारत में उस कंपनी के कार्यालय / शाखा / अनुषंगी / संयुक्त उद्यम / समूह कंपनी में प्रतिनियुक्ति पर है; तथा
(सी) कोई विदेशी नागरिक, जो भारत में निवासी है और किसी भारतीय कंपनी में कार्यरत है।
6) उदारीकृत विप्रेषण योजना के तहत राशि विप्रेषित करने के लिए ।
परिपत्र के पैरा 3(i) के संदर्भ में, निर्धारित दिशानिर्देश ऋण खाते में ब्याज की चक्रवृद्धि के लिए सामान्य प्रक्रियाओं को प्रभावित नहीं करेंगे। इसलिए, आरई भुगतान की तारीख तक अदत्त ब्याज (अदत्त ईएमआई सहित) पर ब्याज की अनुबंधित दर पर ब्याज ले सकते हैं, न कि दंडात्मक ब्याज दर पर।
उत्तर: नहीं। इन निदेशों के पैरा 9.1.6 के अनुसार, बैंक के स्टाफ सदस्य/सेवानिवृत्त स्टाफ सदस्य द्वारा अकेले या परिवार के सदस्यों के साथ संयुक्त रूप से रखे गए सावधि जमाराशियों पर अतिरिक्त ब्याज का लाभ तभी उपलब्ध होगा जब स्टाफ सदस्य/सेवानिवृत्त स्टाफ सदस्य प्रमुख खाताधारक हो।
‘’उप ओम्बड्समैन’’ से आशय आरबीआई द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी से है जो शिकायतों के समाधान और कुछ शिकायतों और योजना के तहत सौंपे गए कार्यों के संचलन में आरबीआई ओम्बड्समैन (प्रश्न 4 देखें) की सहायता करता है। उप ओम्बड्समैन सुकरीकरण या समाधान या मध्यस्थता के माध्यम से शिकायतकर्ता और आरई के बीच समझौते के द्वारा और प्रश्न 24 में चर्चा के अनुसार शिकायतों का निपटान करने का प्रयास करता है।
उत्तर: यदि कंपनी के खातों को, प्रस्तुत करने की देय तिथि अर्थात 15 जुलाई से पहले ऑडिट नहीं किया जाता है तो आईटीईएस सर्वेक्षण प्रश्नावली गैर-लेखापरीक्षित (अनंतिम) खाते के आधार पर प्रस्तुत की जानी चाहिए।
उत्तर: मास्टर निदेशों के अनुसार केवल रिपोर्टिंग एनबीएफसी/एचएफसी से संबंधित समूह इकाइयों (सहायक/सहबद्ध/संयुक्त उद्यम आदि) में की गई धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग की आवश्यकता है। दूसरे शब्दों में, रिपोर्टिंग की आवश्यकता व्यापक समूह की अन्य इकाइयों पर लागू नहीं होती है, जिससे रिपोर्टिंग एनबीएफसी/एचएफसी संबंधित है, जो रिपोर्टिंग एनबीएफसी/एचएफसी की सहायक/सहबद्ध/संयुक्त उद्यम आदि नहीं हैं।
उत्तर: नकदी निकालने के अलावा एटीएम/डबल्यूएलए ग्राहकों को कई अन्य सेवाएं/सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें से कुछ सेवाएँ निम्नलिखित हैं:
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खाता संबंधी जानकारी
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नकद जमा (डबल्यूएलए में नकदी जमा को स्वीकार करने की अनुमति नहीं है)
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नियमित बिल भुगतान (डबल्यूएलए में अनुमति नहीं है)
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मोबाइलों के लिये रीलोड वाउचरों की खरीद (डबल्यूएलए में अनुमति नहीं है)
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छोटा / लघु विवरण
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पिन परिवर्तन
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चेक बुक के लिए अनुरोध
उत्तर: यह अनिवार्य रूप से एक बैंक-से-बैंक स्तर की व्यवस्था है जो कॉरिस्पॉण्डेंट बैंकिंग व्यवस्था के समान ही है।
उत्तर. किसी व्यक्ति द्वारा खाता खोलने के लिए निम्नलिखित दस्तावेज़ आवश्यक हैं:
(ए) निम्नलिखित आधिकारिक रूप से मान्य दस्तावेज़ों (ओवीडी) में से कोई एक अथवा उसके समतुल्य ई-दस्तावेज़, जिसमें उसके नाम और पते का विवरण हो, जैसे:
• पासपोर्ट,
• ड्राइविंग लाइसेंस,
• आधार संख्या होने का प्रमाण,
• भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मतदाता पहचान पत्र,
• राज्य सरकार के किसी अधिकारी द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित नरेगा के अंतर्गत जारी जॉब कार्ड, और
• राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) द्वारा जारी पत्र।
(बी) स्थायी खाता संख्या (पैन) अथवा उसके समतुल्य ई-दस्तावेज अथवा आयकर नियम, 1962 में परिभाषित फॉर्म संख्या 60; और
(सी) ग्राहक के व्यवसाय की प्रकृति और वित्तीय स्थिति के संबंध में अन्य दस्तावेज अथवा उसके समतुल्य ई-दस्तावेज, जैसा कि आरई द्वारा अपेक्षित हो।
उत्तर: इस योजना के तहत एक समय में न्यूनतम 10 ग्राम कच्चा सोना ( पत्थरों और अन्य धातुओं को छोड़कर बार, सिक्के, आभूषण) जमा किया जा सकता है और इसकी अधिकतम सीमा नहीं है। जमा किए गए सोने की मात्रा को एक ग्राम के तीन दशमलव तक व्यक्त किया जाएगा।
आईओआरएस ऐसे नवोन्मेषों का समर्थन करता है जिनके लिए कई विनियामकों के बीच सहयोग की आवश्यकता होती है, जबकि विनियामकों के अलग-अलग सैंडबॉक्स एक ही विनियामक के दायरे में समाधानों को पूरा करते हैं। इस प्रकार, आईओआरएस एक एकीकृत तंत्र है जो विभिन्न वित्तीय क्षेत्र के विनियामकों के विशिष्ट विनियामक सैंडबॉक्स रूपरेखाओं की जटिलताओं को दूर करता है और अंतर-क्षेत्रीय नवोन्मेष को बढ़ावा देने में सहायता करता है।
उत्तर. जी हाँ, परिपत्र का उद्देश्य ग्राहक को लागू प्रभार के अधीन अस्थायी दर ऋण से निश्चित दर ऋण अथवा इसके विपरीत स्विच करने हेतु लचीलापन प्रदान करना है। बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अंतर्गत विनियमित संस्था को यह निर्दिष्ट करना आवश्यक है कि उधारकर्ता को ऋण की अवधि के दौरान कितनी बार स्विच करने के विकल्प का प्रयोग करने की अनुमति दी जाएगी।
उत्तर: हाँ। शमन के लिए सभी आवेदनों को ₹10,000/- (साथ में यथालागू जीएसटी, जो वर्तमान में 18% है) के निर्धारित शुल्क के साथ प्रस्तुत किया जाएगा जिसका भुगतान “भारतीय रिज़र्व बैंक” के पक्ष में आहरित और संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय/ सीओ सेल, नई दिल्ली/ केंद्रीय कार्यालय में भुगतान योग्य डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से अथवा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (NEFT) के माध्यम से या किसी अन्य स्वीकार्य इलेक्ट्रॉनिक या ऑनलाइन भुगतान माध्यम से किया जाना चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान करने के लिए आवश्यक ब्योरा ‘निदेश- फेमा 1999 के तहत उल्लंघनों का शमन’ के अनुबंध I में दिया गया है। यदि आवेदन शुल्क राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (NEFT) अथवा किसी अन्य स्वीकार्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम से किया जाता है तो ‘निदेश- फेमा 1999 के तहत उल्लंघनों का शमन’ के अनुबंध I के पैरा बी में दिए गए टेम्पलेट में यथाशीघ्र, लेकिन भुगतान समय से 2 घंटे के भीतर उल्लंघन के शमन की राशि के भुगतान की सूचना ई-मेल के माध्यम से भेजनी सुनिश्चित की जाए।
यह भी नोट किया जाए कि यदि किसी कारणवश शमन आवेदन वापस लौटा दिया जाता है तो, आवेदन शुल्क की राशि, यदि इसका भुगतान किया जा चुका है, की वापसी नहीं की जाएगी। हालांकि, यदि इस प्रकार के आवेदन पुन: किए जाते हैं तो आवेदन शुल्क का भुगतान दोबारा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे 30 सितंबर 2012 से केवल सीटीएस-2010 मानक के अनुरूप चेक जारी करें। पहले, गैर- सीटीएस चेक के लिए अलग समाशोधन सत्र होते थे। हालांकि, 31 दिसंबर 2018 से इन्हें समाप्त कर दिया गया। वर्तमान में, गैर- सीटीएस चेक को सीटीएस में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। बैंकों को सलाह दी गई है कि वे ग्राहकों से गैर- सीटीएस चेक वापस लें। फिर भी, एक गैर- सीटीएस चेक लेन-देन योग्य साधन के रूप में वैध माना जाता है।
उत्तर: ई₹ वॉलेट एंड्रॉइड और आईओएस मोबाइल डिवाइस दोनों पर उपलब्ध और समर्थित है।
उत्तर. पीपीआई जारीकर्ताओं की सूची आरबीआई की वेबसाइट पर https://www.rbi.org.in/Scripts/bs_viewcontent.aspx?Id=2491 (बैंक-पीपीआई जारीकर्ता) और https://www.rbi.org.in/Scripts/PublicationsView.aspx?id=12043 (गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ता) लिंक के तहत उपलब्ध है।
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अंतिम मासिक डबल्यूपीआई को कैलेंडर माह के पहली तारीख के लिए संदर्भित डबल्यूपीआई के रूप में प्रयोग किया जाएगा। आंतरायिक दिनों के लिए संदर्भ डब्ल्यूपीआई यानी लगातार दो महीनों के पहले दिनों के बीच 1 तारीखों के बीच की तारीखों की गणना प्रक्षेप के माध्यम से की जाएगी।
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अंतर्वेशन के लिए, दो माह के अंतिम डबल्यूपीआई पूरे माह में उपलब्ध होने चाहिए। जैसा कि अंतिम डबल्यूपीआई ढाई माह का उपलब्ध है (उदाहरण: फरवरी 2013 का अंतिम डबल्यूपीआई मध्य मई 2013 में जारी होगा), अंतिम दो माह का डबल्यूपीआई चार माह के लिए केवल उपलब्ध होगा।
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ऊपर को देखते हुए, चार माह के समय को अंतिम डबल्यूपीआई के लिए चुना गया जिससे कैलेंडर माह के पहले दिन के लिए संदर्भित डबल्यूपीआई के रूप में विचार किया जाए। उदाहरण के लिए दिसंबर 2012 का अंतिम डबल्यूपीआई को 1 मई 2013 के लिए संदर्भित डबल्यूपीआई के रूप में लिया जाएगा और जनवरी 2013 अंतिम डबल्यूपीआई को 1 जून 2013 के लिए सदर्भ डबल्यूपीआई के रूप में लिए जाएगा।
उत्तर: आईडीएफ-एनबीएफसी को प्रायोजित करने के लिए एनबीएफसी-आईएफसी को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा:
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प्रायोजक आईएफसी को आईडीएफ-एनबीएफसी की इक्विटी में अधिकतम 49 प्रतिशत योगदान करने की अनुमति होगी, जिसमें आईडीएफ-एनबीएफसी की इक्विटी का 30 प्रतिशत न्यूनतम इक्विटी होल्डिंग होगा:
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आईडीएफ-एनबीएफसी में निवेश के बाद, प्रायोजक एनबीएफसी-आईएफसी को आईएफसी के लिए निर्धारित न्यूनतम सीआरएआर और एनओएफ बनाए रखना चाहिए
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आईएफसी के संबंध में कोई पर्यवेक्षी चिंता नहीं है।
ग्राहक को कोई भी लेन-देन करने से पहले बैंक के सीसीपी को जानने का अधिकार है।
बैंक उसके व्यापक नोटिस बोर्ड में उस राशि का खुलासा करने के लिए बाध्य है, जिस तक बाहरी चेक का तत्काल क्रेडिट पेश किया जाता है, जिसे बैंक की प्रत्येक शाखा में प्रदर्शित किया जाना है। बैंक को स्थानीय/बाहरी लिखतों की वसूली के लिए समय-सीमा और विलंबित वसूली के लिए देय मुआवजे के लिए नीति का खुलासा करना भी आवश्यक है। यह सूचना पुस्तिकाओं में उपलब्ध होगा जो सभी बैंक शाखाओं में उपलब्ध होनी चाहिए। यदि ग्राहक चाहे तो बैंक के सीसीपी की एक प्रति प्राप्त करने का भी हकदार है। बैंकों को भी अपनी वेबसाइट पर अपना सीसीपी प्रदर्शित करना होता है।
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शोधन पर, निवेशक मूलधन एवं चक्रवृद्धि ब्याज अर्जित करेगा।
उत्तर : भारत में निवासी व्यक्ति भारत के बाहर उन मामलों में कोई विदेशी मुद्रा खाता रख सकता है, यदि उसने वह खाता अपने भारत के बाहर निवासी होने की स्थिति में खोला हो, या भारत के बाहर निवासी किसी व्यक्ति से इसे विरासत में पाया हो।
उत्तर: एनईएफटी प्रणाली में भाग लेने वाले किसी भी सदस्य बैंक के साथ खाते रखने वाले व्यक्ति, फर्म और कॉरपोरेट, एनईएफटी प्रणाली में भाग लेने वाले देश के किसी भी अन्य बैंक के खाते वाले किसी भी व्यक्ति, फर्म या कॉर्पोरेट को इलेक्ट्रॉनिक रूप से धन हस्तांतरित कर सकते हैं।
एनईएफटी में भाग लेने वाली बैंक-वार शाखाओं की सूची आरबीआई की वेबसाइट /en/web/rbi/-/list-of-neft-enabled-bank-branches-bank-wise-indian-financial-system-code-updated-as-on-june-30-2023-2009-1 पर उपलब्ध है।
आवेदक कंपनियों को अपनी निवल स्वामित्व निधि (एनओएफ) की गणना निम्नानुसार करनी चाहिए:-
ए. स्वामित्व वाली निधि - (प्रदत्त पूंजी + निर्बाध आरक्षित निधियां + लाभ एवं हानि खाते में क्रेडिट शेष) में से घटाएं (उपचित हानि शेष, आस्थगित राजस्व व्यय एवं अन्य अमूर्त आस्तियां)
बी. निवल स्वामित्व निधि - स्वामित्व वाली निधियों में से घटाई गई वह राशियाँ जिसमें इसकी सहायक कंपनियों के शेयरों में निवेश की राशि शामिल है, इसके अलावा एक ही समूह की कंपनियों, सभी (अन्य) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों तथा डिबेंचरों, बांडों, बकाया ऋण एवं अग्रिम, जो उनकी सहायक कंपनियों और उसी समूह के कंपनियों में स्वामित्व निधि के 10% से अधिक जमा किए गए हो, शामिल है।
उत्तर: विदेश यात्रा करने के लिए विदेशी मुद्रा किसी प्राधिकृत व्यक्ति से रु. 50,000 से कम राशि का रुपये में नकद भुगतान कर खरीद सकते हैं। तथापि यदि विदेशी मुद्रा की बिक्री रु. 50,000 के समतुल्य अथवा उससे अधिक राशि के लिए है तो समग्र भुगतान रेखांकित चेक/ बैंकर्स चेक/ पे ऑर्डर/ डिमांड ड्राफ्ट/ क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड/ प्रीपैड कार्ड के माध्यम से किया
उत्तर: सभी विप्रेषण भारत में लागू करों के भुगतानों के अधीन होंगे। प्राधिकृत व्यापारियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे यथा लागू कर क़ानूनों की अपेक्षाओं का पालन करें।
सीटीएस को क्रमशः 1 फरवरी, 2008, 24 सितंबर, 2011 और 27 अप्रैल, 2013 से नई दिल्ली, चेन्नई और मुंबई में लागू किया गया है। सम्पूर्ण चेकों को सीटीएस में स्थानांतरित करने के बाद, चेक समाशोधन के पारंपरिक तंत्र को देश भर में बंद कर दिया गया है। इसके अलावा, बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि सभी शाखाएं सीटीएस से जुड़ी हों।
सीटीएस के तहत, भारत में चेक प्रसंस्करण स्थानों को चेन्नई, मुंबई और नई दिल्ली में तीन ग्रिडों में समेकित किया गया है।
प्रत्येक ग्रिड अपने संबंधित क्षेत्राधिकार के तहत सभी बैंकों को प्रसंस्करण और समाशोधन सेवाएं प्रदान करता है। इस बात पर ध्यान दिए बिना कि वर्तमान में चेक समाशोधन या अन्यथा के लिए कोई औपचारिक व्यवस्था मौजूद है या नहीं, ग्रिड के अधिकार क्षेत्र में आने वाले छोटे / दूरस्थ स्थानों पर स्थित बैंक, शाखाएं और ग्राहक लाभान्वित होंगे। तीन ग्रिडों का निदर्शी अधिकार क्षेत्र नीचे दर्शाया गया है:
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चेन्नई ग्रिड : आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी।
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मुंबई ग्रिड : महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़।
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नई दिल्ली ग्रिड : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र नई दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, राजस्थान और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़।
उत्तर:
(i) लेनदेनों के बडे भाग का निपटान प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों द्वारा यथासंभव अन्य सहभागी देशों में बैंकों के साथ और इसके विपरित रखे गये खातों के जरिये सीधे ही किया जाना चाहिए, किसी एक दिशा में प्रभाव विस्तार का निपटान संबंधित देशों में केंद्रीय बैंकों द्वारा समाशोधन संघ के जरिये किया जाना आवश्यक है। हर समय एसीयू-डॉलर, एसीयू-यूरो तथा एसीयू-येन खाते में रखी गयी शेष राशियाँ उनके सामान्य विदेशी मुद्रा कारोबार की आवश्यकताओं के अनुरुप होनी चाहिए। 1 जुलाई 2016 से यूरो में किए जाने वाले व्यापार लेनदेन सहित सभी पात्र चालू खाता लेनदेनों का अगली सूचना जारी किए जाने तक एसीयू तंत्र के बाहर निपटान करने की अनुमति है।
(ii) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों को वाणिज्यिक और अन्य पात्र लेनदेनों के निपटान अन्य सामान्य विदेशी मुद्रा लेनदेनों की तरह करने के लिए अनुमति दी गयी है।
उत्तर: हां, एडी बैंक को बैंकिंग विनियमन विभाग द्वारा जारी किए गए मौजूदा अनुदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए।
उत्तर. एलईआई को सभी गैर-व्यक्तिगत एनईएफटी/आरटीजीएस संदेशों/लेनदेनों के लिए दर्ज किया जाएगा। एलईआईएल द्वारा https://www.ccilindia-lei.co.in/Documents/FAQs.pdf पर इकाई प्रकारों की सांकेतिक सूची दी गई है।
उत्तर : हाँ; विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खातों के परिचालन के लिए चेक सुविधा उपलब्ध है।
उत्तर
नहीं। 'आधारभूत बचत बैंक जमा खाता' को शाखाओं के माध्यम से सभी ग्राहकों के लिए उपलब्ध एक सामान्य बैंकिंग सेवा के रूप में माना जाना चाहिए।
उत्तर. गैर-बैंक लगातार और सक्रिय रूप से वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं और सीपीएस तक सीधी पहुंच उन्हें प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने और अपने उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प प्रदान करने में सक्षम बनाती है।
भुगतान परिदृश्य में निपटान जोखिम के प्रबंधन के अलावा, गैर-बैंकों की पहुंच और भागीदारी का विस्तार एक प्रगतिशील कदम है और यह भुगतान पारितंत्र की विविधता और आघात सहनीयता में परिणत होता है।
उत्तर: मोटे तौर पर ट्रेड्स के माध्यम से वित्तपोषण / छूट देने के दौरान निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं:
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फैक्टरिंग यूनिट (एफ़यू) का सृजन – इन्वॉइस (इन्वॉइसेज़) अथवा बिल (बिल्स) ऑफ एक्सचेंज के लिए प्रयुक्त मानक नाम – जिसमें ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर एमएसएमई विक्रेता (फैक्टरिंग के मामले में) अथवा क्रेता (रिवर्स फैक्टरिंग के मामले) में इन्वॉइसेज़ / बिल्स ऑफ एक्सचेंज (वस्तुओं की बिक्री के साक्ष्य / एमएसएमई विक्रेताओं द्वारा खरीददारों को सेवाएं) के विवरण शामिल हैं;
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काउंटर्पार्टी द्वारा एफ़यू की स्वीकृति - खरीदार अथवा विक्रेता, जैसा भी मामला हो;
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फाइनेंसरों द्वारा बोली लगाना;
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विक्रेता या खरीदार द्वारा सर्वश्रेष्ठ बोली का चयन, जैसा भी मामला हो;
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एमएसएमई विक्रेता को वित्तपोषण / छूट के संबंध में सहमति दर पर फाइनेंसर द्वारा किया गया भुगतान (चयनित बोली का);
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क्रेता द्वारा देय तिथि को फाइनेंसर को भुगतान।
समाधान ढांचे के अनुबंध के क्रमश पैराग्राफ 7 और 10 में पात्र व्यक्तिगत ऋणों के संबंध में आरंभ और कार्यान्वयन की परिभाषाएं दी गई हैं। अन्य पात्र ऋणों के संबंध में, ‘सक्रिय’ का तात्पर्य समाधान ढांचे के अनुबंध के पैराग्राफ 14 और 15 के अनुसार होगा जबकि ‘कार्यान्वयन’ दबावग्रस्त आस्तियों के समाधान के लिए विवेकपूर्ण ढांचा विषय पर 7 जून, 2019 को जारी परिपत्र के पैराग्राफ 14-16 में दिए गए व्याख्या के अनुसार किया जाएगा ।
उत्तर: यदि कोई कार्डधारक भुगतान की नियत तारीख के भीतर कुल देय राशि का भुगतान नहीं करता है, तो ब्याज मुक्त क्रेडिट अवधि समाप्त हो जाएगी, और ब्याज लेनदेन की तारीख से बकाया राशि (क्रेडिट होने पर भुगतान/रिफंड/रिवर्स लेनदेन के लिए समायोजित) पर लगाया जा सकता है, न कि कुल देय राशि पर। इसके अलावा, देर से भुगतान शुल्क और भुगतान में देरी से संबंधित अन्य शुल्क भुगतान की नियत तारीख के बाद केवल बकाया राशि (भुगतान/रिफंड/रिवर्स लेनदेन के लिए समायोजित) पर लगाए जाएंगे, न कि कुल देय राशि पर।
उत्तर: ग्राहक/जमाकर्ता द्वारा डीईए निधि से धन वापसी का दावा करने के लिए योजना में कोई विशिष्ट समय सीमा निर्धारित नहीं है। हालाँकि, ग्राहक/जमाकर्ता अथवा उत्तराधिकारियों (मृत जमाकर्ता के मामले में) को दावा न की गई राशि के बारे में पता चलते ही ऐसी राशि का दावा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
उत्तर: यूडीआरएन बैंकों द्वारा कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) के माध्यम से उत्पन्न एक अद्वितीय (unique) संख्या है और इसे आरबीआई के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) निधि में हस्तांतरित प्रत्येक अदावी खाते/जमा राशि को सौंपा जाता है। इस नंबर का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि खाताधारक अथवा जिस बैंक शाखा में खाता है, उसे कोई तीसरा पक्ष पहचान न सके। यूडीआरएन बैंक शाखाओं को उन ग्राहकों/जमाकर्ताओं से प्राप्त दावों को निर्बाध रूप से निपटाने में सक्षम बनाता है, जिन्होंने उद्गम (UDGAM) पोर्टल में उक्त दावों की सफल खोज की है। उद्गम (UDGAM) पोर्टल पर शामिल सभी 30 बैंकों द्वारा पोर्टल के विकास के दौरान यूडीआरएन जनरेट करने के लिए आवश्यक अनिवार्यताओं को बनाए रखने का अनुरोध किया गया है।
उत्तर: नहीं।
उत्तर: भारत से नेपाल धन हस्तांतरण की योजना के तहत प्रेषण भारत में एनईएफटी-सक्षम बैंक शाखाओं में से किसी भी शाखा से किया जा सकता है। एनईएफटी प्रणाली में भाग लेने वाली बैंक-वार शाखाओं की सूची आरबीआई की वेबसाइट http://www.rbi.org.in/Scripts/bs_viewcontent.aspx?Id=2009 पर उपलब्ध है।
एनईएफटी के तहत भारत-नेपाल प्रेषण लेनदेन शुरू करने वाली बैंक शाखाएं इसे किसी भी अन्य एनईएफटी लेनदेन की तरह संसाधित करेंगी, केवल अंतर यह है कि ये लेनदेन बाद में भारत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की नामित शाखा में जमा/एकत्रित किए जाएंगे। दिन के अंत में, प्रेषण जानकारी एसबीआई द्वारा एनएसबीएल को एक सुरक्षित मोड में इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी जाती है। यदि लाभार्थी एनएसबीएल का खाता धारक है तो एनएसबीएल लाभार्थी के बैंक खाते में क्रेडिट की व्यवस्था करता है। अन्यथा, एनएसबीएल प्राधिकृत मनी ट्रांसफर कंपनी (प्रभु मनी ट्रांसफर) के माध्यम से लाभार्थी को नकद में धनराशि वितरित करता है। लाभार्थी को मनी ट्रांसफर कंपनी की स्थानीय शाखा से संपर्क करना होगा, यूटीआर नंबर प्रस्तुत करना होगा (इसे विशिष्ट लेनदेन संदर्भ संख्या भी कहा जाता है जो विशिष्ट रूप से एनईएफटी प्रणाली में लेनदेन की पहचान करता है जिसे प्रेषक से प्राप्त किया जा सकता है), और उसकी पहचान साबित करने के लिए एक फोटो पहचान दस्तावेज़ प्रस्तुत करना होगा (आमतौर पर नेपाल नागरिकता प्रमाणपत्र)।
यदि लाभार्थी लेन-देन की तारीख से एक सप्ताह के भीतर मनी ट्रांसफर कंपनी से संपर्क नहीं करता है, तो मनी ट्रांसफर कंपनी प्रवर्तक को प्रेषण की वापसी की व्यवस्था करेगी।
उत्तर. विप्रेषण के प्रत्येक चरण में केवल दो ही पक्ष होंगे, अतः प्राधिकृत व्यापारी बैंक को उक्त परिपत्र के अनुसार एल.ई.आई. प्राप्त करना अपेक्षित है।
उत्तर: समय-समय पर संशोधित, 19 अप्रैल, 2022 को बैंकों द्वारा चालू खाते और सीसी/ओडी खाते खोलने पर समेकित परिपत्र में निहित अनुदेशों के अधीन, बैंकों को हरित जमाराशि के बदले ग्राहकों को ओवरड्राफ्ट सुविधा प्रदान करने की अनुमति है।
उत्तर: विप्रेषक द्वारा फॉर्म ए-2 में की गई घोषणा के अनुसार लेनदेन के स्वरूप के बारे में प्राधिकृत व्यापारी अवगत होगा और तद्पश्चात वह प्रमाणित करेगा कि विप्रेषण रिज़र्व बैंक द्वारा इस संबंध में, समय-समय पर, जारी अनुदेशों के अनुसार है। तथापि विद्यमान फेमा नियमों/ विनियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने का अंतिम दायित्व विप्रेषक का होगा।
उत्तर: पीओएस टर्मिनल पर एक कार्ड को अंदर डाला जा सकता है (चिप आधारित कार्ड), टैप किया जा सकता है (संपर्क रहित नियर फील्ड कम्युनिकेशन {एनएफसी} कार्ड) या स्वाइप किया जा सकता है (मैग्नेटिक-स्ट्राइप कार्ड)।
उत्तर: बीमा शुल्क एपीआर की गणना में केवल उस बीमा के लिए शामिल किया जाएगा जो ऋण उत्पादों से जुड़ा/ एकीकृत है, ऐसा इसलिए क्योंकि ये शुल्क ऐसे डिजिटल उधार की प्रकृति में अंतर्निहित हैं।
उत्तर: खंड 36 में उपाय केवल ऋणों के हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाने के लिए है जहां परिचालन अथवा अन्य बाधाओं के कारण, हस्तांतरिती ऋण स्तर की उचित जांच नहीं करता है। यह व्यक्तिगत ऋण स्तर पर विवेकपूर्ण मानदंडों को लागू करने के लिए खंड 46 के तहत आवश्यकता के प्रति पूर्वाग्रह के बिना है।
उत्तर: प्रश्न 1 और प्रश्न 3 में उत्तर दिया गया है।
उत्तर: नही।
हाँ, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा पेंशन वितरण के लिए पेंशन भुगतानकर्ता बैंकों को अनुदेश जारी किए हैं कि वे नीचे दी गई कुछ प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पेंशन की आहरण की अनुमति दें:
बूढ़े/बीमार/अशक्त/अक्षम पेंशनरों द्वारा पेंशन का आहरण
(i) बीमार और अशक्त पेंशनरों द्वारा बैंकों से पेंशन/परिवार पेंशन आहरित करने में आ रही समस्याओं/कठिनाइयों को ध्यान में रखने के क्रम में एजेंसी बैंक ऐसे पेंशनरों को निम्नलिखित रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं :-
(ए) पेंशनर, जो इतना बीमार है कि चेक पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता / बैंक में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं हो सकता है।
(बी) पेंशनर, जो न केवल बैंक में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होने में असमर्थ है बल्कि कुछ शारीरिक दोष/अक्षमता के कारण चेक/आहरण फार्म पर अपने हस्ताक्षर करने/अंगूठा का निशान लगाने में भी असमर्थ है।
(ii) ऐसे बूढ़े/बीमार/अक्षम पेंशनरों को ध्यान में रखते हुए उनके खातों के परिचालन के लिए बैंक निम्नलिखित प्रक्रिया अपना सकते हैं: -
(ए) जहाँ कहीं बूढ़े/बीमार पेंशनर का हाथ का अंगूठा/ पैर का अंगूठा का निशान प्राप्त किया जाए तो इसकी पहचान बैंक को ज्ञात दो स्वतंत्र गवाहों द्वारा की जानी चाहिए और इसमें से एक बैंक का जिम्मेदार अधिकारी होना चाहिए।
(बी) जहाँ पेंशनर अपने हाथ का अंगूठा/पैर का अंगूठा का निशान नहीं लगा सकता और बैंक में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होने में भी अमसर्थ है तो चेक/आहरण फार्म पर एक निशान लिया जाए और दो स्वतंत्र गवाहों द्वारा इसकी पहचान की जानी चाहिए और इसमें से एक बैंक का जिम्मेदार अधिकारी होना चाहिए।
बैंक का जिम्मेदार अधिकारी उसी बैंक, अधिमानतः उसी शाखा से होना चाहिए, जहां पेंशनभोगी का पेंशन खाता है। एजेंसी बैंकों से अनुरोध है कि वे अपनी शाखाओं को यह अनुदेश दें कि वे इस संबंध में जारी अनुदेश अपने नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करें ताकि बीमार और अक्षम पेंशनर इन सुविधाओं का पूर्ण रूप से उपयोग कर सकें।
उत्तर: भारत के बाहर निवासी व्यक्ति जिसका भारत में कारोबारी हित निहित है, वह भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी या भारत से बाहर उसकी किसी शाखा में, भारत में निवासी व्यक्ति के साथ अधिनियम और अधिनियम के तहत बनाए गए नियमावली और विनियमावली के अनुसार अनुमत चालू और पूंजी खाता लेनदेन, और भारत से बाहर निवासी व्यक्ति के साथ किसी भी लेनदेन के लिए विशेष अनिवासी रुपया खाता (एसएनआरआर) खोल सकता है।
एसएनआरआर खाता और एनआरओ खाता के बीच का अंतर नीचे बताया गया है :
| ब्योरा |
विशेष अनिवासी |
सामान्य अनिवासी |
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(1) |
(2) |
(3) |
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खाता कौन खोल सकता है? |
भारत के बाहर का निवासी कोई भी व्यक्ति जिसका भारत में कारोबारी हित निहित है, वह रूपये में वास्तविक लेनदेन करने के लिए यह खाता खोल सकता है। |
भारतीय रूपयों में मूल्यवर्गीकृत राशियों में वास्तविक लेनदेन हेतु भारत के बाहर का निवासी कोई भी व्यक्ति। |
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खाते का प्रकार |
ब्याज रहित खाता |
चालू, बचत, आवर्ती, सावधि जमा |
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अनुमत लेनदेन |
खाते में डेबिट/ क्रेडिट खाताधारक के कारोबारी प्रचालनो कें अनुरूप विशिष्ट/ प्रासंगिक होंगे। |
जमा (क्रेडिट) : |
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अवधि |
खाते की अवधि खाताधारक की संविदा/ प्रचालन की अवधि / कारोबार की अवधि के अनुरूप होगी। |
इन खातों पर अवधि संबंधी कोई रोक नहीं है। |
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संप्रत्यावर्तनीयता |
संप्रत्यावर्तनीय हैं। |
वर्तमान आय; एनआरआई/ पीआईओ द्वारा फेमा 13(आर) के प्रावधानों के अनुसरण में प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 1(एक) मिलियन अमेरिकी डॉलर तक विप्रेषण को छोड़ कर अन्य प्रयोजनों के लिए यह खाता संप्रत्यावर्तनीय नहीं है |
बैंकों को सूचित किया गया है कि वे अपने निदेशक मंडल द्वारा विधिवत अनुमोदित एमएसई क्षेत्र के लिए ऋण सुविधाएं प्रदान करने वाली ऋण नीतियां बनाएं (दिनांक 04 मई 2009 के परिपत्र ग्राआऋवि.एसएमई और एनएफएस.बीसी.सं.102/06.04.01/2008-09 को देखें)। तथापि, बैंकों को सूचित किया गया है कि वे उधारकर्ताओं के व्यापार चक्र और अल्पकालिक ऋण आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उनकी वास्तविक कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के उचित मूल्यांकन के बाद ऋण सीमाओं को मंजूरी दें। नायक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, लघु उद्योग इकाइयों के लिए कार्यशील पूंजी सीमा की गणना उनके अनुमानित कुल कारोबार के न्यूनतम 20% के आधार पर ₹5 करोड़ की क्रेडिट सीमा तक की जाती है।
उत्तर. यह स्पष्ट किया जाता है कि परिपत्र में सभी समान किस्त आधारित वैयक्तिक ऋणों को शामिल किया गया है, भले ही वे बाहरी बेंचमार्क अथवा आंतरिक बेंचमार्क से जुड़े हों।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022