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पूर्वदत्त भुगतान लिखतों (पीपीआई)

उत्तर. पीपीआई बैंकों और गैर-बैंकों द्वारा जारी किए जा सकते हैं। बैंक आरबीआई से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद पीपीआई जारी कर सकते हैं। गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ता भारत में निगमित और कंपनी अधिनियम, 1956/2013 के तहत पंजीकृत कंपनियां हैं। वे आरबीआई से प्राधिकरण प्राप्त करने के बाद व्यक्तियों/संगठनों को पीपीआई जारी करने के लिए भुगतान प्रणाली का परिचालन कर सकते हैं।

जिस संस्था के प्रति उधारदाता संस्थाओं का एक्सपोजर है, उसके संबंध में आईसीए की आवश्यकता, दिनांक 7 जून 2019 के दबावग्रस्त आस्तियों के समाधान के लिए विवेकपूर्ण ढांचे की, और परिणामस्वरूप समाधान ढांचे की भी एक बुनियादी विशेषता है। उधारदाता संस्थाओं को विधिक संस्था, जिसके प्रति उनका एक्सपोजर है, के संबंध में आईसीए तैयार करने के लिए पर्याप्त छुट दी गयी है, जिसमें मामले-दर-मामले के आधार पर प्रत्येक उधारकर्ता की विशिष्ट आवश्यकताओं को संबोधित किया जा सकता है. आईसीए के भीतर एक ही उधारकर्ता की विभिन्न परियोजनाओं के लिए विभिन्न समाधान पद्धतियो को डिजाइन किया जाना भी शामिल है। इसी प्रकार, समाधान ढांचे में अपेक्षित विधिक संस्था स्तर पर खोले जाने वाले एस्क्रो खाते के अलावा, यदि ऋणदाता चाहें तो प्रत्येक परियोजना स्तर पर अतिरिक्त अलग-अलग एस्क्रो खाते स्थापित करने में कोई प्रतिबंध नहीं है। केवल स्थावर संपदा क्षेत्र से संबंधित उधारकर्ताओं, जिनके आवासीय और वाणिज्यिक स्थावर संपदा व्यवसाय दोनों हैं, के संबंध में वित्तीय मापदंडों के लिए निर्धारित थ्रेशहोल्ड परियोजना स्तर पर लागू किए जा सकते हैं।

जीएएच को एनडीएस-ओएम की उसी आर्डर बुक का एक्‍सेस उपलब्ध होगा जो प्राथमिक सदस्‍यों को होता है। जीएएच अपने आर्डर पर नियंत्रण रखने की बेहतर स्थिति में होंगे (आर्डर देने/संशोधन करने/कैंसल करने/रोकने/रिलिज करने) और उन्‍हें बाजार में रियल टाइम लाइव दरें उपलब्‍ध होंगी। चूंकि निष्‍पादित किये गये आर्डर की सूचना और विभिन्‍न प्रश्‍न जीएएच को आनलाइन उपलब्‍ध है इसलिए वे अपनी पोजिशन्‍स का बेहतर ढंग से प्रबंध कर सकते हैं। वेब पर आधारित इंटरफेस पहले ही से कस्‍टोडियन बैंकों/प्राथमिक व्‍यापारियों के साथ रखे गिल्‍ट खातो को लिवरेज देता है इसलिए खुदरा सहभागियों को एक कुशल सिस्‍टम उपलब्‍ध कराता है।

उत्तर: क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने के इरादे को दर्शाने वाली ग्राहक द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया जैसे कि पिन जेनरेशन, लेनदेन नियंत्रण में संशोधन, इंटरएक्टिव वॉयस उत्तर, ग्राहक सेवा केंद्र पर रिकॉर्ड की गई कॉल और एसएमएस को सक्रियण के रूप में माना जा सकता है। हालाँकि, यदि कार्ड जारी करने की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक कार्डधारक द्वारा सक्रिय नहीं किया जाता है, तो कार्ड जारीकर्ता एमडी के पैरा 6 (क) (vi) के अनुरूप वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) आधारित सहमति मांगी जाएगी।

उत्तर: बैंकों को उपरोक्त प्रश्न संख्या 2 में निर्दिष्ट खातों में क्रेडिट शेष को लगातार निष्क्रिय अथवा दावा न की गई की स्थिति में 10 वर्ष पूरे होने के उपरांत महीने के अंतिम कार्य दिवस पर डीईए निधि में स्थानांतरित करना आवश्यक है।
उदाहरण के लिए, अप्रैल के महीने में डीईए निधि में स्थानांतरित होने वाली जमा राशि (अर्थात्, 10 वर्षों के लिए दावा न की गई) को मई के महीने में अंतिम कार्य दिवस पर डीईए निधि में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

उत्तर: सभी अदावी जमाराशियाँ/खाते जो आरबीआई के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) निधि का हिस्सा हैं, उन्हें उद्गम (UDGAM) पोर्टल में खोजा जा सकता है। [कृपया डीईए निधि योजना, 2014 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न देखें।].

यदि स्‍वर्ण का बाज़ार भाव कम हो जाता है तो पूंजीगत हानि होने का जोखिम हो सकता है। लेकिन स्‍वर्ण की जितनी मात्रा के लिए निवेशक ने पैसे दिए हैं उस मात्रा में कोई कमी नहीं आती।
सरकारी प्रति‍भूति वि‍नि‍यमावली, 2007 को, सरकारी प्रतिभूति अधिनियम के उद्देशों को सुचारु रूप से कार्यान्वित करने के लि‍ए, आरबीआई द्वारा बनाया गया है ।
It is not necessary that individual alongwith his related parties have shareholding in the NOFHC. However, if any individual belonging to the Promoter Group chooses to become a promoter of the NOFHC, he along with his relatives (as defined in Section 6 of the Companies Act 1956) and along with entities in which he and / or his relatives hold not less than 50 per cent of the voting equity shares can hold voting equity shares not exceeding 10 per cent of the total voting equity shares of the NOFHC. [para 2 ( C ) (ii) (a) of the guidelines]

सरफेसी अधिनियम, 2002 में आस्ति के कब्जे को प्रतीकात्मक अथवा प्रत्यक्ष के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है, और ये ऐसी परंपराएँ हैं जो समयानुसार विकसित हुई हैं। तदनुसार, आरई को सरफेसी अधिनियम, 2002 की धारा 13 (4) के तहत प्रतिभूति आस्तियों पर जानकारी प्रदर्शित करेगा। इसमें आरई की वेबसाइट पर प्रतीकात्मक और प्रत्यक्ष रूप से मौजूद आस्तियों का प्रकाशन शामिल है।

भारत में म्युचुअल फंड (एमएफ) कंपनियों को इस सर्वेक्षण में भाग लेने की आवश्यकता हैं।

वर्तमान में यूपीआई-पेनाउ लिंकेज के माध्यम से प्रेषण हेतु भारत में निम्नलिखित बैंक सक्षम हैं:

  • आईसीआईसीआई बैंक

  • इंडियन बैंक

  • इंडियन ओवरसीज बैंक

  • भारतीय स्टेट बैंक

जी हाँ। ₹2000/- बैंकनोट का वैध मुद्रा का दर्जा बना रहेगा।

उत्तर: नहीं। आरई द्वारा एक बार उद्धरित डीएलजी राशि और ऋण वसूली की राशि को वापस नहीं किया जा सकता है। कृपया प्रश्न 1 पर हमारा उत्तर भी देखें। कृपया अंत मेंउदाहरण देखें।

उत्तर: यदि प्रेषक का भारत में किसी भी एनईएफटी सक्षम बैंक-शाखा में खाता है तो प्रेषण की कोई सीमा नहीं है। वॉक-इन/गैर-ग्राहकों को ₹50,000 प्रति प्रेषण की सीमा के साथ एक वर्ष में 12 प्रेषण भेजने की अनुमति है।

उत्तर. यदि किसी अनिवासी के भारत में रखे खाते में या खाते से कोई क्रेडिट अथवा डेबिट किसी निवासी के साथ लेनदेन के परिणामस्वरूप होता है तो उस पर विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) के प्रावधान लागू होते हैं अतः ऐसे मामलों में उक्त परिपत्र में निहित प्रावधान भी लागू होंगे।

उत्तर: (ए) मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार चलनिधि लिखत लेवल 1 उच्च गुणवत्ता वाली चलनिधि आस्ति हैं।

(बी) आरई अस्थायी रूप से हरित जमाराशि की आय, हरित गतिविधियों/परियोजनाओं के लिए लंबित आवंटन, एक वर्ष तक की अधिकतम परिपक्वता वाले चलनिधि लिखतों में बनाए रख सकते हैं (इसे वित्तीय ढांचा (फाइनेंसिंग फ्रेमवर्क) (एफएफ) के तहत निर्दिष्ट करना होगा)।

(सी) ढांचे में हरित गतिविधियों/परियोजनाओं के लिए आय के गैर-आवंटन के लिए किसी दंड की परिकल्पना नहीं की गई है; हालाँकि, यह पर्यवेक्षी समीक्षा के अधीन होगा।

उत्तर: डेबिट कार्ड का उपयोग एटीएम से नकदी निकालने, बिक्री के बिंदु (पीओएस) टर्मिनलों या ई-कॉमर्स (ऑनलाइन खरीद) पर वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए किया जा सकता है। उनका उपयोग घरेलू या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जा सकता है।

उत्तर: इलेक्‍ट्रॉनिक तरीके से किए जाने वाले अनुमत फोरेक्‍स लेनदेन केवल भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्‍ट अनुबंधों और शर्तों के अनुसार केवल इस प्रयोजन के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत इलेक्‍ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्‍लेटफार्म (ईटीपी) अथवा मान्‍यताप्राप्‍त स्‍टॉक एक्‍सचेंजों (नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज ऑफ इंडिया लि. (एनएसई), बीएसई लि. (बीएसई) और मेट्रोपोलिटन स्‍टॉक एक्‍सचेंज ऑफ इंडिया लि. (एमएसई)) पर ही किए जाने चाहिएI प्राधिकृत ईटीपी की सूची यहां उपलब्‍ध है। फेमा के अनुसार निवासी व्‍यक्तियों को अप्राधिकृत ईटीपी पर फोरेक्‍स लेनदेन की अनुमति नहीं हैं।

अप्राधिकृत ईटीपी पर फोरेक्‍स लेनदेन करने वाले निवासी व्‍यक्ति स्‍वयं को फेमा तहत दंडात्‍मक कार्रवाई का भागी बना लेंगे।

आरबीआई ने दिनांक 12 अप्रैल 2010 को ‘संपार्श्विक मुक्त ऋण - शिक्षा ऋण योजना’ पर परिपत्र ग्राआऋवि.एसएमई और एनएफएस.बीसी.सं.69/06.12.05/2009-10 जारी किया है जिसमे बैंकों को 4 लाख तक के शिक्षा ऋण के मामले में संपार्श्विक जमानत प्राप्त नहीं करने को अनिवार्य बनाया गया है।

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पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022

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