FAQs on Overseas Direct Investment
उत्तर:
(i) लेनदेनों के बडे भाग का निपटान प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों द्वारा यथासंभव अन्य सहभागी देशों में बैंकों के साथ और इसके विपरित रखे गये खातों के जरिये सीधे ही किया जाना चाहिए, किसी एक दिशा में प्रभाव विस्तार का निपटान संबंधित देशों में केंद्रीय बैंकों द्वारा समाशोधन संघ के जरिये किया जाना आवश्यक है। हर समय एसीयू-डॉलर, एसीयू-यूरो तथा एसीयू-येन खाते में रखी गयी शेष राशियाँ उनके सामान्य विदेशी मुद्रा कारोबार की आवश्यकताओं के अनुरुप होनी चाहिए। 1 जुलाई 2016 से यूरो में किए जाने वाले व्यापार लेनदेन सहित सभी पात्र चालू खाता लेनदेनों का अगली सूचना जारी किए जाने तक एसीयू तंत्र के बाहर निपटान करने की अनुमति है।
(ii) प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंकों को वाणिज्यिक और अन्य पात्र लेनदेनों के निपटान अन्य सामान्य विदेशी मुद्रा लेनदेनों की तरह करने के लिए अनुमति दी गयी है।
उत्तर: हां, एडी बैंक को बैंकिंग विनियमन विभाग द्वारा जारी किए गए मौजूदा अनुदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए।
उत्तर. एलईआई को सभी गैर-व्यक्तिगत एनईएफटी/आरटीजीएस संदेशों/लेनदेनों के लिए दर्ज किया जाएगा। एलईआईएल द्वारा https://www.ccilindia-lei.co.in/Documents/FAQs.pdf पर इकाई प्रकारों की सांकेतिक सूची दी गई है।
उत्तर : हाँ; विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खातों के परिचालन के लिए चेक सुविधा उपलब्ध है।
उत्तर
नहीं। 'आधारभूत बचत बैंक जमा खाता' को शाखाओं के माध्यम से सभी ग्राहकों के लिए उपलब्ध एक सामान्य बैंकिंग सेवा के रूप में माना जाना चाहिए।
उत्तर. गैर-बैंक लगातार और सक्रिय रूप से वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं और सीपीएस तक सीधी पहुंच उन्हें प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने और अपने उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प प्रदान करने में सक्षम बनाती है।
भुगतान परिदृश्य में निपटान जोखिम के प्रबंधन के अलावा, गैर-बैंकों की पहुंच और भागीदारी का विस्तार एक प्रगतिशील कदम है और यह भुगतान पारितंत्र की विविधता और आघात सहनीयता में परिणत होता है।
उत्तर: मोटे तौर पर ट्रेड्स के माध्यम से वित्तपोषण / छूट देने के दौरान निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं:
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फैक्टरिंग यूनिट (एफ़यू) का सृजन – इन्वॉइस (इन्वॉइसेज़) अथवा बिल (बिल्स) ऑफ एक्सचेंज के लिए प्रयुक्त मानक नाम – जिसमें ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर एमएसएमई विक्रेता (फैक्टरिंग के मामले में) अथवा क्रेता (रिवर्स फैक्टरिंग के मामले) में इन्वॉइसेज़ / बिल्स ऑफ एक्सचेंज (वस्तुओं की बिक्री के साक्ष्य / एमएसएमई विक्रेताओं द्वारा खरीददारों को सेवाएं) के विवरण शामिल हैं;
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काउंटर्पार्टी द्वारा एफ़यू की स्वीकृति - खरीदार अथवा विक्रेता, जैसा भी मामला हो;
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फाइनेंसरों द्वारा बोली लगाना;
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विक्रेता या खरीदार द्वारा सर्वश्रेष्ठ बोली का चयन, जैसा भी मामला हो;
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एमएसएमई विक्रेता को वित्तपोषण / छूट के संबंध में सहमति दर पर फाइनेंसर द्वारा किया गया भुगतान (चयनित बोली का);
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क्रेता द्वारा देय तिथि को फाइनेंसर को भुगतान।
समाधान ढांचे के अनुबंध के क्रमश पैराग्राफ 7 और 10 में पात्र व्यक्तिगत ऋणों के संबंध में आरंभ और कार्यान्वयन की परिभाषाएं दी गई हैं। अन्य पात्र ऋणों के संबंध में, ‘सक्रिय’ का तात्पर्य समाधान ढांचे के अनुबंध के पैराग्राफ 14 और 15 के अनुसार होगा जबकि ‘कार्यान्वयन’ दबावग्रस्त आस्तियों के समाधान के लिए विवेकपूर्ण ढांचा विषय पर 7 जून, 2019 को जारी परिपत्र के पैराग्राफ 14-16 में दिए गए व्याख्या के अनुसार किया जाएगा ।
उत्तर: यदि कोई कार्डधारक भुगतान की नियत तारीख के भीतर कुल देय राशि का भुगतान नहीं करता है, तो ब्याज मुक्त क्रेडिट अवधि समाप्त हो जाएगी, और ब्याज लेनदेन की तारीख से बकाया राशि (क्रेडिट होने पर भुगतान/रिफंड/रिवर्स लेनदेन के लिए समायोजित) पर लगाया जा सकता है, न कि कुल देय राशि पर। इसके अलावा, देर से भुगतान शुल्क और भुगतान में देरी से संबंधित अन्य शुल्क भुगतान की नियत तारीख के बाद केवल बकाया राशि (भुगतान/रिफंड/रिवर्स लेनदेन के लिए समायोजित) पर लगाए जाएंगे, न कि कुल देय राशि पर।
उत्तर: ग्राहक/जमाकर्ता द्वारा डीईए निधि से धन वापसी का दावा करने के लिए योजना में कोई विशिष्ट समय सीमा निर्धारित नहीं है। हालाँकि, ग्राहक/जमाकर्ता अथवा उत्तराधिकारियों (मृत जमाकर्ता के मामले में) को दावा न की गई राशि के बारे में पता चलते ही ऐसी राशि का दावा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
उत्तर: यूडीआरएन बैंकों द्वारा कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (सीबीएस) के माध्यम से उत्पन्न एक अद्वितीय (unique) संख्या है और इसे आरबीआई के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) निधि में हस्तांतरित प्रत्येक अदावी खाते/जमा राशि को सौंपा जाता है। इस नंबर का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि खाताधारक अथवा जिस बैंक शाखा में खाता है, उसे कोई तीसरा पक्ष पहचान न सके। यूडीआरएन बैंक शाखाओं को उन ग्राहकों/जमाकर्ताओं से प्राप्त दावों को निर्बाध रूप से निपटाने में सक्षम बनाता है, जिन्होंने उद्गम (UDGAM) पोर्टल में उक्त दावों की सफल खोज की है। उद्गम (UDGAM) पोर्टल पर शामिल सभी 30 बैंकों द्वारा पोर्टल के विकास के दौरान यूडीआरएन जनरेट करने के लिए आवश्यक अनिवार्यताओं को बनाए रखने का अनुरोध किया गया है।
उत्तर: नहीं।
उत्तर: भारत से नेपाल धन हस्तांतरण की योजना के तहत प्रेषण भारत में एनईएफटी-सक्षम बैंक शाखाओं में से किसी भी शाखा से किया जा सकता है। एनईएफटी प्रणाली में भाग लेने वाली बैंक-वार शाखाओं की सूची आरबीआई की वेबसाइट http://www.rbi.org.in/Scripts/bs_viewcontent.aspx?Id=2009 पर उपलब्ध है।
एनईएफटी के तहत भारत-नेपाल प्रेषण लेनदेन शुरू करने वाली बैंक शाखाएं इसे किसी भी अन्य एनईएफटी लेनदेन की तरह संसाधित करेंगी, केवल अंतर यह है कि ये लेनदेन बाद में भारत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की नामित शाखा में जमा/एकत्रित किए जाएंगे। दिन के अंत में, प्रेषण जानकारी एसबीआई द्वारा एनएसबीएल को एक सुरक्षित मोड में इलेक्ट्रॉनिक रूप से दी जाती है। यदि लाभार्थी एनएसबीएल का खाता धारक है तो एनएसबीएल लाभार्थी के बैंक खाते में क्रेडिट की व्यवस्था करता है। अन्यथा, एनएसबीएल प्राधिकृत मनी ट्रांसफर कंपनी (प्रभु मनी ट्रांसफर) के माध्यम से लाभार्थी को नकद में धनराशि वितरित करता है। लाभार्थी को मनी ट्रांसफर कंपनी की स्थानीय शाखा से संपर्क करना होगा, यूटीआर नंबर प्रस्तुत करना होगा (इसे विशिष्ट लेनदेन संदर्भ संख्या भी कहा जाता है जो विशिष्ट रूप से एनईएफटी प्रणाली में लेनदेन की पहचान करता है जिसे प्रेषक से प्राप्त किया जा सकता है), और उसकी पहचान साबित करने के लिए एक फोटो पहचान दस्तावेज़ प्रस्तुत करना होगा (आमतौर पर नेपाल नागरिकता प्रमाणपत्र)।
यदि लाभार्थी लेन-देन की तारीख से एक सप्ताह के भीतर मनी ट्रांसफर कंपनी से संपर्क नहीं करता है, तो मनी ट्रांसफर कंपनी प्रवर्तक को प्रेषण की वापसी की व्यवस्था करेगी।
उत्तर. विप्रेषण के प्रत्येक चरण में केवल दो ही पक्ष होंगे, अतः प्राधिकृत व्यापारी बैंक को उक्त परिपत्र के अनुसार एल.ई.आई. प्राप्त करना अपेक्षित है।
उत्तर: समय-समय पर संशोधित, 19 अप्रैल, 2022 को बैंकों द्वारा चालू खाते और सीसी/ओडी खाते खोलने पर समेकित परिपत्र में निहित अनुदेशों के अधीन, बैंकों को हरित जमाराशि के बदले ग्राहकों को ओवरड्राफ्ट सुविधा प्रदान करने की अनुमति है।
उत्तर: विप्रेषक द्वारा फॉर्म ए-2 में की गई घोषणा के अनुसार लेनदेन के स्वरूप के बारे में प्राधिकृत व्यापारी अवगत होगा और तद्पश्चात वह प्रमाणित करेगा कि विप्रेषण रिज़र्व बैंक द्वारा इस संबंध में, समय-समय पर, जारी अनुदेशों के अनुसार है। तथापि विद्यमान फेमा नियमों/ विनियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने का अंतिम दायित्व विप्रेषक का होगा।
उत्तर: पीओएस टर्मिनल पर एक कार्ड को अंदर डाला जा सकता है (चिप आधारित कार्ड), टैप किया जा सकता है (संपर्क रहित नियर फील्ड कम्युनिकेशन {एनएफसी} कार्ड) या स्वाइप किया जा सकता है (मैग्नेटिक-स्ट्राइप कार्ड)।
उत्तर: बीमा शुल्क एपीआर की गणना में केवल उस बीमा के लिए शामिल किया जाएगा जो ऋण उत्पादों से जुड़ा/ एकीकृत है, ऐसा इसलिए क्योंकि ये शुल्क ऐसे डिजिटल उधार की प्रकृति में अंतर्निहित हैं।
उत्तर: खंड 36 में उपाय केवल ऋणों के हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाने के लिए है जहां परिचालन अथवा अन्य बाधाओं के कारण, हस्तांतरिती ऋण स्तर की उचित जांच नहीं करता है। यह व्यक्तिगत ऋण स्तर पर विवेकपूर्ण मानदंडों को लागू करने के लिए खंड 46 के तहत आवश्यकता के प्रति पूर्वाग्रह के बिना है।
उत्तर: प्रश्न 1 और प्रश्न 3 में उत्तर दिया गया है।
उत्तर: नही।
हाँ, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा पेंशन वितरण के लिए पेंशन भुगतानकर्ता बैंकों को अनुदेश जारी किए हैं कि वे नीचे दी गई कुछ प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पेंशन की आहरण की अनुमति दें:
बूढ़े/बीमार/अशक्त/अक्षम पेंशनरों द्वारा पेंशन का आहरण
(i) बीमार और अशक्त पेंशनरों द्वारा बैंकों से पेंशन/परिवार पेंशन आहरित करने में आ रही समस्याओं/कठिनाइयों को ध्यान में रखने के क्रम में एजेंसी बैंक ऐसे पेंशनरों को निम्नलिखित रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं :-
(ए) पेंशनर, जो इतना बीमार है कि चेक पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता / बैंक में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं हो सकता है।
(बी) पेंशनर, जो न केवल बैंक में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होने में असमर्थ है बल्कि कुछ शारीरिक दोष/अक्षमता के कारण चेक/आहरण फार्म पर अपने हस्ताक्षर करने/अंगूठा का निशान लगाने में भी असमर्थ है।
(ii) ऐसे बूढ़े/बीमार/अक्षम पेंशनरों को ध्यान में रखते हुए उनके खातों के परिचालन के लिए बैंक निम्नलिखित प्रक्रिया अपना सकते हैं: -
(ए) जहाँ कहीं बूढ़े/बीमार पेंशनर का हाथ का अंगूठा/ पैर का अंगूठा का निशान प्राप्त किया जाए तो इसकी पहचान बैंक को ज्ञात दो स्वतंत्र गवाहों द्वारा की जानी चाहिए और इसमें से एक बैंक का जिम्मेदार अधिकारी होना चाहिए।
(बी) जहाँ पेंशनर अपने हाथ का अंगूठा/पैर का अंगूठा का निशान नहीं लगा सकता और बैंक में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होने में भी अमसर्थ है तो चेक/आहरण फार्म पर एक निशान लिया जाए और दो स्वतंत्र गवाहों द्वारा इसकी पहचान की जानी चाहिए और इसमें से एक बैंक का जिम्मेदार अधिकारी होना चाहिए।
बैंक का जिम्मेदार अधिकारी उसी बैंक, अधिमानतः उसी शाखा से होना चाहिए, जहां पेंशनभोगी का पेंशन खाता है। एजेंसी बैंकों से अनुरोध है कि वे अपनी शाखाओं को यह अनुदेश दें कि वे इस संबंध में जारी अनुदेश अपने नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करें ताकि बीमार और अक्षम पेंशनर इन सुविधाओं का पूर्ण रूप से उपयोग कर सकें।
उत्तर: भारत के बाहर निवासी व्यक्ति जिसका भारत में कारोबारी हित निहित है, वह भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी या भारत से बाहर उसकी किसी शाखा में, भारत में निवासी व्यक्ति के साथ अधिनियम और अधिनियम के तहत बनाए गए नियमावली और विनियमावली के अनुसार अनुमत चालू और पूंजी खाता लेनदेन, और भारत से बाहर निवासी व्यक्ति के साथ किसी भी लेनदेन के लिए विशेष अनिवासी रुपया खाता (एसएनआरआर) खोल सकता है।
एसएनआरआर खाता और एनआरओ खाता के बीच का अंतर नीचे बताया गया है :
| ब्योरा |
विशेष अनिवासी |
सामान्य अनिवासी |
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(1) |
(2) |
(3) |
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खाता कौन खोल सकता है? |
भारत के बाहर का निवासी कोई भी व्यक्ति जिसका भारत में कारोबारी हित निहित है, वह रूपये में वास्तविक लेनदेन करने के लिए यह खाता खोल सकता है। |
भारतीय रूपयों में मूल्यवर्गीकृत राशियों में वास्तविक लेनदेन हेतु भारत के बाहर का निवासी कोई भी व्यक्ति। |
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खाते का प्रकार |
ब्याज रहित खाता |
चालू, बचत, आवर्ती, सावधि जमा |
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अनुमत लेनदेन |
खाते में डेबिट/ क्रेडिट खाताधारक के कारोबारी प्रचालनो कें अनुरूप विशिष्ट/ प्रासंगिक होंगे। |
जमा (क्रेडिट) : |
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अवधि |
खाते की अवधि खाताधारक की संविदा/ प्रचालन की अवधि / कारोबार की अवधि के अनुरूप होगी। |
इन खातों पर अवधि संबंधी कोई रोक नहीं है। |
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संप्रत्यावर्तनीयता |
संप्रत्यावर्तनीय हैं। |
वर्तमान आय; एनआरआई/ पीआईओ द्वारा फेमा 13(आर) के प्रावधानों के अनुसरण में प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 1(एक) मिलियन अमेरिकी डॉलर तक विप्रेषण को छोड़ कर अन्य प्रयोजनों के लिए यह खाता संप्रत्यावर्तनीय नहीं है |
बैंकों को सूचित किया गया है कि वे अपने निदेशक मंडल द्वारा विधिवत अनुमोदित एमएसई क्षेत्र के लिए ऋण सुविधाएं प्रदान करने वाली ऋण नीतियां बनाएं (दिनांक 04 मई 2009 के परिपत्र ग्राआऋवि.एसएमई और एनएफएस.बीसी.सं.102/06.04.01/2008-09 को देखें)। तथापि, बैंकों को सूचित किया गया है कि वे उधारकर्ताओं के व्यापार चक्र और अल्पकालिक ऋण आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उनकी वास्तविक कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के उचित मूल्यांकन के बाद ऋण सीमाओं को मंजूरी दें। नायक समिति की रिपोर्ट के अनुसार, लघु उद्योग इकाइयों के लिए कार्यशील पूंजी सीमा की गणना उनके अनुमानित कुल कारोबार के न्यूनतम 20% के आधार पर ₹5 करोड़ की क्रेडिट सीमा तक की जाती है।
उत्तर. यह स्पष्ट किया जाता है कि परिपत्र में सभी समान किस्त आधारित वैयक्तिक ऋणों को शामिल किया गया है, भले ही वे बाहरी बेंचमार्क अथवा आंतरिक बेंचमार्क से जुड़े हों।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022