डिजिटल उधार दिशानिर्देश
उत्तर: बकाया उधार के मामले में, जहां नितांत आवश्यक हो, आरई नकदी में ऋणों की वसूली के लिए भौतिक इंटरफेस का उपयोग कर सकते हैं। आरई को परिचालन संबंधी नम्यता वहन करने के लिए, ऐसे लेनदेन को आरई के बैंक खाते में ऋण के सीधे पुनर्भुगतान की आवश्यकता से छूट दी गई है। हालांकि, नकदी द्वारा की गई किसी भी वसूली को उधारकर्ता के खाते में विधिवत रूप से दर्शाया जाना चाहिए और आरई यह सुनिश्चित करेंगे कि एलएसपी को देय कोई भी शुल्क, शुल्क आदि का भुगतान सीधे उनके (आरई) द्वारा किया जाएगा और एलएसपी द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उधारकर्ता से वसूली की राशि से शुल्क नहीं लिया जाएगा।
उत्तर: कोई भी बहुपक्षीय संगठन, जिसका भारत एक सदस्य देश है अथवा उसकी सहायक संस्थाएं/ सम्बद्ध निकाय और उनके भारत में पदस्थ अधिकारी भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास अपना खाता खोल सकते हैं।
उत्तर. जी हाँ, यह परिपत्र मौजूदा उधारकर्ताओं पर भी लागू होगा।
नहीं। दंडात्मक शुल्क की राशि और कारण को आरई द्वारा ग्राहकों को ऋण करार और सबसे महत्वपूर्ण नियम और शर्तों (एमआईटीसी) / मुख्य तथ्य विवरण (केएफएस), जैसा भी लागू हो, में स्पष्ट रूप से बताना होगा।
उत्तर: नहीं। इन निदेशों के पैरा 29.8 की अनुसूची-I की मद (iv) के अनुसार सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (एसआरए, 1860) के तहत पंजीकृत समितियां अथवा राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश में लागू किसी अन्य कानून के तहत पंजीकृत समितियां, जिनका उद्देश्य साहित्यिक, वैज्ञानिक और धर्मार्थ गतिविधियों को बढ़ावा देना है, वह बैंकों में बचत बैंक खाता खोलने के लिए पात्र हैं। तदनुसार, किसी अन्य सोसाइटी/सोसाइटियों के नाम पर बचत बैंक खाते नहीं खोले जा सकते।
नहीं, संपर्क केंद्र के माध्यम से शिकायतें दर्ज नहीं की जा सकती हैं, लेकिन संपर्क केंद्र सीएमएस पोर्टल पर या भौतिक माध्यम से शिकायत दर्ज करने में शिकायतकर्ता की सहायता कर सकता है। यह आरबीआई द्वारा स्थापित वैकल्पिक शिकायत निवारण तंत्र के बारे में स्पष्टीकरण/ विवरण भी प्रदान करेगा।
बुनियादी बचत बैंक जमा खाते' पीएमएल अधिनियम और नियमावली के उपबंध की शर्त पर होंगे और उन पर बैंक खाते खोलने के लिए अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) / धन शोधन निवारण (एएमएल) के संबंध में समय-समय पर जारी रिज़र्व बैंक के अनुदेश लागू होंगे। बीएसबीडीए सरलीकृत केवाईसी मानदंडों के साथ भी खोले जा सकेंगे। तथापि, यदि सरलीकृत केवाइसी के आधार पर बीएसबीडीए खोला जाता है तो इन खातों को अतिरिक्त रुप से 'बीएसबीडीए – छोटा खाता' माना जाए और इस पर ऐसे खातों के लिए निर्दिष्ट की गई 01 जुलाई 2013 के हमारे मास्टर परिपत्र सं.शबैवि.बीपीडी(पीसीबी)माप.सं.16/12.05.001/2013-14 के अनुच्छेद 2.6(iii) में उल्लिखित शर्तें लागू होंगी।
उत्तर: कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं की चार प्रमुख व्यवसायिक गतिविधियाँ उनके उप वर्गीकरणों के साथ सर्वेक्षण प्रश्नावली के अंतर्गत आती हैं। विवरण सर्वेक्षण प्रश्नावली से प्राप्त किया जा सकता है।
यदि किसी ग्राहक को किसी बैंक के खिलाफ भुगतान न करने या भुगतान या चेक की वसूली में अत्यधिक देरी के कारण शिकायत है, तो संबंधित बैंक में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यदि बैंक 30 दिनों के भीतर जवाब देने में विफल रहता है, तो आप "रिज़र्व बैंक-एकीकृत ओम्बड्समैन योजना (आरबी-आईओएस 2021)" के तहत शिकायत कर सकते हैं। शिकायतें https://cms.rbi.org.in पर ऑनलाइन दर्ज की जा सकती हैं, या समर्पित ई-मेल के माध्यम से, या भौतिक मोड में आरबीआई, चौथी मंजिल, सेक्टर 17 में स्थापित 'केंद्रीकृत रसीद और प्रसंस्करण केंद्र' को भेजी जा सकती हैं। चंडीगढ़ - 160 017 निम्नलिखित पथ पर दिए गए प्रारूप में - /documents/87730/38689832/RBIOS2021_12112021_A.pdf। एक टोल-फ्री नंबर - 14448 (सुबह 9:30 बजे से शाम 5:15 बजे तक), बहुभाषी समर्थन के साथ शिकायत दर्ज करने और शिकायत निवारण पर जानकारी दर्ज करने में सहायता लेने के लिए ग्राहकों के लिए उपलब्ध है।
उत्तर: जी, हां। ई₹ को सप्ताह में 24 घंटे x 7 दिन, बैंक खाते से ई₹ वॉलेट में/ से लोड/रिडीम/ट्रांसफर किया जा सकता है।
उत्तर: हाँ।
उत्तर. ऐसे मामले में, खाता खोलने के लिए पूर्ववर्ती नाम का एक ओवीडी के साथ राजपत्र अधिसूचना की एक प्रति , अथवा राज्य सरकार द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र, जैसा भी लागू हो, नाम में परिवर्तन का उल्लेख करते हुए प्रस्तुत किया जा सकता है।
उत्तर: नहीं। एमटीजीडी/एलटीजीडी का नवीकरण 26 मार्च 2025 से बंद कर दिया गया है।
वित्तीय क्षेत्र के उदारीकरण के अंतर्गत, ब्याज वसूलने सहित बैंकों के सभी ऋण संबंधी मामलों को आरबीआई द्वारा अविनियमित किया गया है और यह बैंकों द्वारा उनकी अपनी उधार नीतियों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
मौद्रिक नीति संचारण में सुधार की दृष्टि से, बैंकों को सूचित किया गया है कि वे सूक्ष्म और लघु उद्यमों के ऋणों को 01 अक्टूबर 2019 से एक बाहरी बेंचमार्क से लिंक करें (दिनांक 04 सितंबर 2019 के परिपत्र बैंविवि.डीआईआर.बीसी.सं.14/13.03.00/2019 को देखें)। मौद्रिक नीति दरों के संचारण में और सुधार करने के लिए, यह निर्णय लिया गया है कि 01 अप्रैल 2020 से मध्यम उद्यमों को ऋण बाहरी बेंचमार्क से जोड़ा जाएगा। (दिनांक 26 फरवरी 2020 के परिपत्र विवि.डीआईआर.बीसी.सं.39/ 13.03.00/2019-20 को देखें)
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नियंत्रित, कम जोखिम वाले वातावरण में नवीन समाधानों का परीक्षण किया जा सकेगा।
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विभिन्न क्षेत्रों में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एकल खिड़की के माध्यम से कई विनियामकों के साथ वार्तालाप संभव होगा।
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विनियामकों से प्रतिक्रिया और सैंडबॉक्स परीक्षण के आधार पर उत्पादों को परिष्कृत करने का अवसर प्राप्त होगा।
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नवीन समाधानों के लिए बाजार में आने में लगने वाला समय में घटाव ।
उत्तर: धन-शोधन निवारण, आतंकवाद का वित्तपोषण अथवा राष्ट्र की सार्वभौमिकता और अखंडता को प्रभावित करने की आशंका वाले गंभीर उल्लंघनों को संवेदनशील उल्लंघन माना जाता है। इन उल्लंघनों का शमन भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नहीं किया जाएगा।
उत्तर. पीएसएस अधिनियम 2007 की धारा 2(1) (i) मे परिभाषित अनुसार भुगतान प्रणाली का अर्थ है एक ऐसी प्रणाली जो भुगतानकर्ता और लाभार्थी के बीच भुगतान को प्रभावित करने में सक्षम बनाती है, जिसमें समाशोधन, भुगतान या निपटान सेवा या उनमें से सभी शामिल हैं, लेकिन इसमें स्टॉक एक्सचेंज शामिल नहीं है (पीएसएस अधिनियम 2007 की धारा 34 में कहा गया है कि इसके प्रावधान स्टॉक एक्सचेंजों या स्टॉक एक्सचेंजों के तहत स्थापित समाशोधन निगमों पर लागू नहीं होंगे)। एक स्पष्टीकरण के माध्यम से आगे कहा गया है कि एक "भुगतान प्रणाली" में क्रेडिट कार्ड संचालन, डेबिट कार्ड संचालन, स्मार्ट कार्ड संचालन, धन हस्तांतरण संचालन या इसी तरह के संचालन को सक्षम करने वाली प्रणालियाँ शामिल हैं।
सभी प्रणालियाँ (स्टॉक एक्सचेंजो और स्टॉक एक्सचेंजों के तहत स्थापित समाशोधन निगमों को छोड़कर) या तो समाशोधन या निपटान या भुगतान संचालन करती हैं या उन सभी को भुगतान प्रणाली माना जाता है। ऐसी प्रणालियों का संचालन करने वाली सभी संस्थाओं को सिस्टम प्रदाता के रूप में जाना जाएगा। साथ ही धन हस्तांतरण प्रणाली या कार्ड भुगतान प्रणाली या इसी तरह की प्रणाली संचालित करने वाली सभी संस्थाएं सिस्टम प्रदाता की परिभाषा के अंतर्गत आती हैं। यह तय करने के लिए कि कोई विशेष संस्था भुगतान प्रणाली का संचालन करती है या नहीं, उसे या तो समाशोधन या निपटान या भुगतान कार्य या उन सभी को निष्पादित करना होगा।
बैंकों को चेक फॉर्म पर स्टांप लगाते समय सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि यह तारीख, प्राप्तकर्ता का नाम, राशि और हस्ताक्षर जैसी महत्वपूर्ण जानकारी में हस्तक्षेप न करे। रबर स्टांप आदि का उपयोग करते समय इन बुनियादी विशेषताओं की स्पष्ट छवि पर कोई असर न पड़े। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान चेक के सभी आवश्यक तत्वों की छवि में सही तरह से तस्वीर ली जाए और इस संबंध में बैंकों/ग्राहकों को उचित सावधानी बरतनी चाहिए। बैंकों को सीटीएस-2010 मानक के अतिरिक्त सुरक्षा विशेषताओं को भी सत्यापित करना आवश्यक है, जिन्हें स्वेछानुसार लागू किया गया है।
Ans: Yes. ECS can be used to transfer funds to NRE and NRO accounts in the country. This, however, is subject to the adherence to the provisions of the Foreign Exchange Management Act, 2000 (FEMA) and Wire Transfer Guidelines.
उत्तर:
i) नेपाल में किसी आयातक निवासी, जिसे नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा में भुगतान करने के लिए अनुमति दी गयी है, द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं के मामले में किये जा रहे अपवादों को छोड़कर नेपाल और भारत तथा भूटान और भारत के बीच के भुगतान। ऐसे भुगतानों का निपटान एशियाई समाशोधन संघ (एसीयू) व्यवस्था के बाहर किया जाए; तथा
ii) रिज़र्व बैंक और अन्य सहभागियों के बीच पारस्परिक रुप से सहमत किये गए भुगतानों को छोड़कर ऐसे भुगतान जो कि एसीयू सदस्य देशों के बीच निर्यात/ आयात लेनदेन के कारण नहीं किए जा रहे हैं; तथा
iii) ईरान के साथ व्यापार लेनदेन सहित सभी पात्र चालू खाता लेनदेन का निपटान अगली सूचना प्राप्त होने तक किसी भी अनुमेय मुद्रा में एसीयू व्यवस्था के बाहर किया जाए।
उत्तर: एनईएफटी प्रणाली पूरे वर्ष चौबीसों घंटे अर्थात 24x7x365 आधार पर उपलब्ध है। एनईएफटी वर्तमान में पूरे दिन आधे घंटे के अंतराल पर बैचों में काम करता है। किसी भी कारण से एनईएफटी की अनुपलब्धता के मामले में, आरबीआई द्वारा सभी सिस्टम प्रतिभागियों को उपयुक्त संदेश प्रसारित किया जाएगा।
भारतीय रिज़र्व बैंक को अधिकार है कि वह प्राधिकृत व्यक्ति को फेमा 1999 की धारा 10(1) के तहत प्रदत्त लाइसेंस कभी भी रद्द कर सकता है, यदि रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट हो कि-
ए. ऐसा किया जाना लोक हित में है; या
बी. प्राधिकृत व्यक्ति ऐसी किसी शर्त का अनुपालन करने में असफल रहा है, जिसके लिए प्राधिकार दिया गया था या उसने उक्त अधिनियम के किसी प्रावधान का या इसके तहत बनाए गए किसी नियम, विनियम, अधिसूचना, निदेश या आदेश का उल्लंघन किया है।
यदि प्राधिकृत व्यक्ति के किसी कार्यालय द्वारा किसी सांविधिक या विनियामकीय प्रावधान का उल्लंघन किया जाता है तो रिज़र्व बैंक को यह अधिकार भी है कि वह ऐसे किसी भी कार्यालय को प्रदत्त प्राधिकार को रद्द कर दे। रिज़र्व बैंक किसी भी समय किसी प्राधिकार/लाइसेंस की मौजूदा शर्तों को बदल या रद्द कर सकता है अथवा नई शर्तें लगा सकता है।
उत्तर: विदेशी अभिदाय विनियमन अधिनियम, 1976 गृह मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है तथा उसकी निगरानी भी उनके द्वारा की जाती है। उनका पता नीचे दिया गया है:-
गृह मंत्रालय, एफसीआरए विंग, पहली मंज़िल, मेज़र ध्यान चंद नेशनल स्टेडियम, प्रगति मैदान के पास, नई दिल्ली- 110001.
इस संबंध में रिज़र्व बैंक से कोई विशिष्ट अनुमोदन अपेक्षित नहीं है।
बैंकों को चेक फॉर्म पर स्टाम्प लगाते समय सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि यह तिथि, प्राप्तकर्ता का नाम, राशि और हस्ताक्षर जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों में हस्तक्षेप न करे। रबर स्टैम्प आदि का उपयोग छवि में इन बुनियादी विशेषताओं के स्पष्ट रूप को कम / निष्प्रभ नहीं करना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान चेक के सभी आवश्यक तत्व एक छवि में समाविष्ठ हो जाएं, और बैंकों / ग्राहकों को इस संबंध में उचित सावधानी बरतनी होगी।
बैंकों को सीटीएस-2010 मानक के अतिरिक्त उन सुरक्षा विशेषताओं को भी सत्यापित करना आवश्यक है जिन्हें स्वेच्छा से लागू किया गया है।
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नीलामी में ऐसे निवेशकों के भागीदारी के लिए गैर-प्रतिस्पर्धी योजना बनायी है। इस योजना के अंतर्गत, निवेशकों को बोली की राशि निर्दिष्ट करनी अपेक्षित है और न कि मूल्य जिस पर पर वे सबस्क्राइब करना चाहते हैं। ऐसे निवेशकों को आबंटन प्रतिस्पर्धी बोली में आए भारित औसत मूल्य पर किया जाता है।
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वर्तमान में नीलामी में, अधिसूचित राशि का 5 प्रतिशत तक गैर-प्रतिस्पर्धी बोली के लिए आरक्षित है, जबकि रिटेल भागीदारी को बढ़ाने के लिए आईआईबी के मामले में अधिसूचित राशि का 20 प्रतिशत तक ऐसी बोली के लिए निर्धारित है।
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रिटेल निवेशक प्राथमिक डीलर (पीडी) और बैंक के माध्यम से गैर-प्रतिस्पर्धी बोली में भागीदारी कर सकेंगे। वे ऐसी भागीदारी के लिए पीडी और बैंक के साथ गिल्ट खाता या डिमेट खाता खोल सकेंगे।
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निवेशक को निवेश करने के लिए किसी भी बैंक के साथ बीएलए खोलने की आवश्यकता नहीं है।
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धन की प्राप्ति और आरबीआई के सीबीएस (ई-कुबेर) पर निवेशक के पंजीकरण के बाद, आरबीआई प्रत्येक निवेशक के लिए बीएलए खोलेगा और निवेशक द्वारा रखे गए आईआईएनएसएस-सी के इकाइयों की संख्या निर्दिष्ट करते हुए “धारिता प्रमाणपत्र” जारी करेगा।
These FAQs are issued by the Reserve Bank of India for information and general guidance purposes only. The Bank will not be held responsible for actions taken and/or decisions made based on the same. For clarifications or interpretations, if any, one may be guided by the relevant circulars and notifications issued from time to time by the Bank.
उत्तर: आईडीएफ-एनबीएफसी के लिए प्रवेश बिंदु मानदंड निम्नलिखित हैं:
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300 करोड़ रुपये की न्यूनतम निवल स्वाधिकृत निधि (एनओएफ);
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जोखिम भारित आस्तियों के लिए पूंजी (सीआरएआर) 15%;
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निवल अग्रिम के 3% से कम निवल एनपीए;
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यह आवेदन से पहले कम से कम 5 साल के लिए अस्तित्व में होना चाहिए:
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इसे पिछले तीन वर्षों में लाभदायक होना चाहिए था;
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इसका प्रदर्शन संतोषजनक और पर्यवेक्षी चिंताओं से मुक्त होना चाहिए;
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इसमें न्यूनतम, क्रिसिल की 'ए' की क्रेडिट रेटिंग ग्रेड या अन्य मान्यता प्राप्त रेटिंग एजेंसियों जैसे फिच, केयर, ब्रिकवर्क और आईसीआरए द्वारा जारी समकक्ष रेटिंग होनी चाहिए।
उत्तर: हाँ, इसकी सूचना रिज़र्व बैंक, विदेशी मुद्रा विभाग, केंद्रीय कार्यालय कक्ष, संसद मार्ग, नई दिल्ली 110001 को दी जानी चाहिए।
उत्तर : नहीं। ईईएफसी खाते में धारित निधियों में से रुपये में आहरण पर कोई प्रतिबंध नहीं है। तथापि, रुपए में आहरित राशि विदेशी मुद्रा में रूपांतरण तथा खाते में पुन: जमा के लिए पात्र नहीं होगी ।
उत्तर
नहीं, बीएसबीडीए ग्राहक का उसी बैंक में कोई अन्य बचत बैंक खाता नहीं हो सकता है। यदि सरलीकृत केवाईसी मानदंडों के आधार पर 'आधारभूत बचत बैंक जमा खाता' खोला जाता है, तो उक्त खाते को अतिरिक्त रूप से 'लघु खाता' माना जाएगा और ऐसे खातों के लिए निर्धारित शर्तों के अधीन होगा, जैसा कि 'छोटा खाता खोलने' पर हमारे दिनांक 26 अप्रैल 2011 के परिपत्र आरपीसीडी.सीओ.आरसीबी.एएमएल.बीसी.सं.63/07.40.00/2010-11 में और 8 अगस्त 2011 के परिपत्र आरपीसीडी.सीओ.आरआरबी.एएमएल.बीसी.सं.15/03.05.33(ई)/2011-12 परिपत्रों में दर्शाया गया है।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022