लक्षित दीर्घकालिक रिपो परिचालन (टीएलटीआरओ)
टीएलटीआरओ 2.0 से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
FAQs on Non-Banking Financial Companies
Exemptions to the companies not accepting public deposits
देशी जमा
I . देशी जमा
फेमा 1999 के तहत विदेशी देयताओं और परिसंपत्तियों (एफएलए) पर वार्षिक रिटर्न
एफएलए रिटर्न जमा करने के लिए पात्र संस्थाएं और आवश्यकताएं
उत्तर: यदि साझेदारी फर्मों, शाखाओं या ट्रस्टियों के पास नवीनतम वित्तीय वर्ष के मार्च अंत तक कोई जावक एफडीआई बकाया है, तो उन्हें एफएलए रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है।
रिटेल डायरेक्ट योजना
खाता खोलने से संबंधित प्रश्न
दिनांक 31 जनवरी 2024 और 16 फरवरी 2024 की प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड पर लगाए गए कारोबारी प्रतिबंध
पेटीएम पेमेंट्स बैंक वॉलेट
नहीं। 15 मार्च 2024 के बाद आप वॉलेट में टॉप-अप या पैसे ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे अथवा इस वॉलेट में कैशबैक या रिफंड के अलावा कोई क्रेडिट प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
भारत में सरकारी प्रतिभूति बाजार – एक प्रवेशिका
प्रतिभूति की खरीद में निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए :-(i) किस प्रतिभूति में निवेश किया जाए - यह परिपक्वता और कूपन पर निर्भर करता है । परिपक्वता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह निर्धारित करता है कि कोई शहरी सहकारी बैंक जैसे निवेशक को कितना जोखिम है - परिपक्वता उच्चतर होने पर ब्याज दर जोखिम अथवा बाजार जोखिम अधिक होगा । यदि निवेश सांविधिक अपेक्षा को पूरा करने के लिए है तो अनावश्यक बाजार जोखिम न लेने तथा कम अवधि वाली प्रतिभूतियाँ खरीदने का परामर्श दिया जाता है । न्यूनतर परिपक्वता अवधि में (5-10 वर्ष) ऐसी प्रतिभूतियाँ खरीदनी सुरक्षित होंगी जो तरल हैं अर्थात जिनका बाजार में अपेक्षाकृत बड़ी राशि में लेन-देन होता है । ऐसी प्रतिभूतियों की जानकारी सीसीआइएल की वेबसाइट (http://www.ccilindia.com/OMMWCG.aspx) से प्राप्त की जा सकती है, जो एनडीएस-ओएम पर तुरंत द्वितीयक बाजार के व्यापार आँकड़े प्रदान करता है । चूंकि तरल प्रतिभूतियों में मूल्यन अधिक पारदर्शी है, इन प्रतिभूतियों का मूल्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है जिससे इन मामलों में मूल्य के बारे में गलत जानकारी के अवसर कम हो जाते हैं । प्रतिभूति की कूपन दर भी निवेशक के लिए उसी प्रकार महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रतिभूति से कुल वापसी को प्रभावित करती है । यह निर्णय लेने के लिए कि कौन सी प्रतिभूति खरीदी जाए, निवेशक को प्रतिभूति की परिपक्वता पर आय (वाइटीएम) भी देखना चाहिए (वाइटीएम पर विस्तृत चर्चा के लिए पैरा 24.4 के अंतर्गत बॉक्स III देखें) । अत: एक बार परिपक्वता और आय का निर्णय होने पर शहरी सहकारी बैंक एनडीएस-ओएम पर व्यापारित प्रतिभूति की मूल्य/आय संबंधी जानकारी देखने के बाद अथवा बैंक अथवा प्राथमिक व्यापारी अथवा ब्रोकर से मोल भाव करके प्रतिभूति का चयन करें ।(ii) कहाँ से और किससे खरीदें - पारदर्शी मूल्यन के अनुसार एनडीएस-ओएम सबसे अधिक सुरक्षित है क्यों कि यह गतिशील और बेनामी मंच है जहाँ कारोबार का प्रसार होता है तथा व्यापार के प्रति-पक्ष सामने नहीं आते । यदि ये व्यापार टेलीफोन बाजार पर आयोजित किए जाते हैं तो किसी बैंक अथवा पीडी से सीधे व्यापार करना सुरक्षित है । यदि ब्रोकर का उपयोग करते हैं तो यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरतनी पड़ेगी कि ब्रोकर एनएसई, बीएसई अथवा भारत की ओटीसी एक्सचेंज में पंजीकृत है । सामान्यतया सक्रिय ऋण बाजार ब्रोकर उन सौदों के इच्छुक नहीं होंगे जो बाजार के हिस्से से कम होंगे (सामान्यतया 5 करोड़) । अत: किसी बैंक, पीडी अथवा एनडीएस-ओएम पर सौदा करना बेहतर होगा जिसमें विषम मात्रा के लिए भी क्रीन उपलब्ध है । जहाँ भी ब्रोकर का उपयोग किया जाता है, वहाँ ब्रोकर के माध्यम से निपटान नहीं किया जाना चाहिए । किसी बैंक, पीडी अथवा वित्तीय संस्था को छोड़कर किसी अन्य पार्टी से कारोबार नहीं किया जाना चाहिए ताकि विपरीत मूल्य के जोखिम से बचा जा सके ।(iii) सही मूल्यन कैसे सुनिश्चित किया जाए - चूंकि शहरी सहकारी बैंक जैसे छोटे निवेशकों की अपेक्षाएँ कम होती हैं, उन्हें वह मूल्य मिल सकता है जो मानक बाजार माँग से खराब हो । मूल्य की सुनिश्चितता देखते हुए खरीदने के लिए केवल तरल प्रतिभूतियों का चयन किया जाए । कम अपेक्षा वाले निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प गैर स्पर्धी मार्ग के माध्यम से भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा आयोजित प्राथमिक नीलामी में खरीदना होगा । चूंकि बॉण्ड नीलामी प्रत्येक माह में दो बार होती है, खरीद को नीलामी के साथ जोड़ा जा सकता है । कृपया सरकारी प्रतिभूतियों के मूल्य सुनिश्चित करने पर ब्योरे के लिए प्रश्न सं.14 देखें ।
बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी) तथा व्यापार ऋण
ई. औसत परिपक्वता अवधि
उत्तर: आप उदाहरण के लिए /documents/87730/39016390/12EC160712_A6.pdf से संदर्भ कर सकते हैं।
भारतीय मुद्रा
ख) बैंकनोट
वर्ष 1938 में मुद्रित भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी अब तक का उच्चतम मूल्यवर्ग का नोट ₹10000 का था, जिसे जनवरी 1946 में विमुद्रीकृत कर दिया गया । वर्ष 1954 में ₹10000 का नोट पुन: प्रारम्भ किया गया । इन नोटों को 1978 में विमुद्रीकृत कर दिया गया ।
कोर निवेश कंपनियां
कोर निवेश कंपनियां (सीआईसी)
उत्तर: नहीं, उन्हें केवल एनबीएफसी के रूप में कारोबार जारी रखने, पूंजी पर्याप्तता और क्रेडिट/निवेश मानदंडों के समेकन के संबंध में सांविधिक लेखा परीक्षक प्रमाणपत्र जमा करने के मानदंडों से छूट दी गई है।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 10, 2022