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विदेशी मुद्रा (फोरेक्‍स) लेनदेन

उत्तर: एक प्राधिकृत व्‍यक्ति वह प्रतिष्‍ठान है जो भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा फोरेक्‍स कारोबार के लिए प्राधिकृत है। यह कोई प्राधिकृत डीलर हो सकता है, कोई मनी-चेंजर, विदेश स्थित बैंकिंग इकाई या फिर फेमा की धारा 10 की उप-धारा (1) के तहत प्राधिकृत कोई अन्‍य व्‍यक्ति हो सकता है। प्राधिकृत व्‍यक्तियों की सूची यहां उपलब्‍ध है।

नहीं। मॉडल शिक्षा ऋण योजना, 2022 वर्तमान में केवल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) पर लागू है। एससीबी की सूची यहां उपलब्ध है।

उत्तर: भारतीय रुपये (आईएनआर) के माध्यम से निपटान की व्यवस्था मौजूदा प्रणाली के साथ की गई एक अतिरिक्त व्यवस्था है, जो मुक्त रूप से परिवर्तनीय मुद्राओं का उपयोग करती है और यह एक प्रकार से पूरक व्यवस्था के रूप में काम करेगी। इससे वास्तविक (मुक्त रूप से परिवर्तनीय) मुद्रा पर निर्भरता कम होगी।
उत्तर: टोकन को वापस वास्तविक कार्ड विवरण में बदलने को डी-टोकनाइजेशन के रूप में जाना जाता है।
सरकारी प्रति‍भूति अधि‍नि‍यम, 2006 का उद्देश्य सरकारी प्रति‍भूति से संबधि‍त कानून तथा आरबीआई द्वारा इसके प्रबंधन और इससे संबंधि‍त मामले में समेकन और संशोधन करना है ।
It is not necessary that individual alongwith his related parties have shareholding in the NOFHC. However, if any individual belonging to the Promoter Group chooses to become a promoter of the NOFHC, he along with his relatives (as defined in Section 6 of the Companies Act 1956) and along with entities in which he and / or his relatives hold not less than 50 per cent of the voting equity shares can hold voting equity shares not exceeding 10 per cent of the total voting equity shares of the NOFHC. [para 2 ( C ) (ii) (a) of the guidelines]

उत्तर: डेबिट कार्ड बैंको द्वारा जारी किए जाते हैं। क्रेडिट कार्ड अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (भुगतान बैंकों को छोड़कर), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (अन्य बैंकों के सहयोग से), शहरी सहकारी बैंकों, और गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों (आरबीआई से अनुमोदन के अधीन) द्वारा जारी किए जाते हैं। प्रीपेड कार्ड पात्र बैंकों और अधिकृत गैर-बैंकों द्वारा जारी किए जाते हैं।

यहां समूह संस्थाएं का अर्थ समूह में आरबीआई विनियमित संस्थाओं को संदर्भित करती हैं, जो परिपत्र में उल्लिखित समूह संस्था की परिभाषा को पूरा करती हैं। इसलिए, यदि सनदी लेखाकार फर्म का कोई भागीदार समूह में आरबीआई विनियमित संस्था में निदेशक है, तो उक्त फर्म को समूह में आरबीआई विनियमित संस्थाओं में से किसी के एससीए/एसए के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, अगर किसी लेखापरीक्षा फर्म को एससीए/एसए के रूप में नियुक्ति के लिए समूह में आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं में से किसी द्वारा विचार किया जा रहा है, जिसका भागीदार किसी भी समूह संस्था (जो आरबीआई द्वारा विनियमित नहीं है) में निदेशक है, तो उक्त लेखापरीक्षा फर्म एसीबी के साथ-साथ बोर्ड/एलएमसी को उचित प्रकटीकरण करेगा।

उत्तर: दिनांक ०२ सितंबर २०२२ के परिपत्र के अनुलग्नक I के पैरा १ में निर्दिष्ट किया गया है कि ये दिशानिर्देश 'डिजिटल उधार' पर लागू होते हैं। इसलिए, यदि कोई उधार लेनदेन 'डिजिटल उधार' की परिभाषा के तहत अर्हता प्राप्त करता है, तो ही इस तरह के उधार की सुविधा देने वाले सेवा प्रदाता को एलएसपी के रूप में नामित किया जाएगा।

उत्तर: खंड 34 के प्रावधान, जिसमें ऋण के हस्तांतरण के समय केवल नकद आधार पर हस्तांतरण अपेक्षित है, और जो बनाए रखे गए आर्थिक हित से संबन्धित है का हस्तांतरण खंड 15 के प्रावधानों का अल्पीकरण किए बिना होगा। हालांकि, यह दोहराया जाता है कि हस्तातरणकर्ता द्वारा खंड 15 के तहत आर्थिक हित के किसी भी प्रतिधारण के परिणामस्वरूप क्रेडिट विस्तार नहीं होना चाहिए।

उत्तर: आईआईबी सरकारी प्रतिभूति है और निवेश पर मास्टर परिपत्र के पैरा 2(i) में निर्दिष्ट के अनुसार वर्गीकृत किया जाना चाहिए:

वर्गीकरण

i) बैंक का सम्पूर्ण निवेश पोर्टफोलियो (एसएलआर प्रतिभूति और गैर-एसएलआर प्रतिभूति सहित) तीन वर्गों के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाना चाहिए

उदा. ‘परिपक्वता तक रखना’

‘बिक्री के लिए उपलब्ध’ और ‘ट्रेडिंग के लिए रखना’

* हालांकि, तुलन पत्र (Balance Sheet) में, निवेशों को वर्तमान 6 वर्गीकरणों के अनुसार ही वर्गीकृत जारी किया जाएगा:

उदा. क) सरकारी प्रतिभूतियाँ,

ख) अन्य अनुमोदित प्रतिभूतियाँ

ग) शेयर

घ) डिबेंचर एवं बॉन्ड,

च) सब्सिडीयरी /संयुक्त उद्यम और

छ) अन्य (सीपी, म्यूचल फंड इकाई, इत्यादि)।


भारतीय रिज़र्व बैंक
वित्तीय बाजार परिचालन विभाग
विनिमय दर – 1945-1971

कार्य दिवसों का औसत भारतीय रुपये (आईएनआर) से 100 यूएसडी
1945-46 332.25
1946-47 331.96875
1947-48 331.75
1948-49 331.75
1949-50 407.4375
1950-51 477.50
1951-52 478.15625
1952-53 478.25
1953-54 476.25
1954-55 477.78125
1955-56 478.9375
1956-57 479.22
1957-58 478.32
1958-59 476.54
1959-60 476.80
1960-61 476.82
1961-62 477.20
1962-63 477.20
1963-64 478.29

कार्य दिवसों का औसत 1 यूएसडी के बदले 100 भारतीय रुपये (आईएनआर)
1960-61 20.97
1965-66 20.90
1966-67 20.86 / 13.20
1967-68 13.22
1968-69 13.12
1969-70 13.26
1970-71 13.23

परिपत्र में दिए गए निर्देश आरबीआई के दिनांक 26 मार्च, 2019 के मास्टर निदेश – बाह्य वाणिज्यिक उधार, व्यापार ऋण और संरचित बाध्यताएं (समय-समय पर संशोधित) के तहत आने वाले उत्पादों पर लागू नहीं हैं और बैंक उपरोक्त मास्टर निदेश में निहित प्रासंगिक अनुदेशों द्वारा निर्देशित हो सकते हैं।

उत्तर. परिपत्र में उधारकर्ताओं से पत्राचार को निम्नानुसार परिकल्पित किया गया है:

() स्वीकृति के समय:

  1. वार्षिक ब्याज दर/वार्षिक प्रतिशत दर (एपीआर), जो भी लागू हो, मुख्य तथ्य विवरण (केएफएस) और ऋण करार में प्रकट की जाएगी।
  2. ऋण पर बेंचमार्क ब्याज दर में परिवर्तन का संभावित प्रभाव।

(बी) ऋण की अवधि के दौरान:

  1. इसके बाद, बाह्य बेंचमार्क दर के कारण ईएमआई/अवधि में किसी भी वृद्धि की सूचना दी जाएगी; तथा
  2. त्रैमासिक विवरण उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें न्यूनतम अब तक वसूले गए मूलधन और ब्याज, ईएमआई राशि, शेष ईएमआई की संख्या तथा ऋण की अवधि के लिए वार्षिक ब्याज दर का प्रकटीकरण किया जाएगा।

उत्तर: मास्टर निदेश- भारतीय रिज़र्व बैंक (जमाराशियों पर ब्याज दर) निदेश, 2025 के पैराग्राफ 4.22 के अनुसार पुनर्निवेश जमाराशियां वह जमाराशियां हैं जहां ब्याज (जब भी देय हो) परिपक्वता तक उसी अनुबंधित दर पर पुनर्निवेशित किया जाता है जिसे परिपक्वता तिथि पर मूल राशि के साथ आहरित किया जा सकता है।

उत्तर: वार्षिक

उत्तर: मास्टर निदेशों के पैराग्राफ 5.1 के अनुसार विनियमित संस्थाओं (आरई) को धोखाधड़ी की घटनाओं को, लागू कानूनों के अधीन, तुरंत कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) को रिपोर्ट करना अपेक्षित है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की धारा 33 के तहत, किसी व्यक्ति को सभी अपराधों के बारे में एलईए को रिपोर्ट करना अनिवार्य नहीं है, बल्कि केवल उन अपराधों के बारे में रिपोर्ट करना आवश्यक है जो उस धारा में सूचीबद्ध हैं। हालाँकि, विनियमित संस्था को सूचित किया जाता है कि वे ₹1 लाख या उससे अधिक की राशि से जुड़ी धोखाधड़ी की घटनाओं की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से एलईए को करें।

भारतीय रिज़र्व बैंक के एजीआर ढांचे में आरबीआई ओम्बड्समैन (आरबीआइओ), उपभोक्ता शिक्षण और संरक्षण कक्ष (सीईपीसी) और सीईपीडी शामिल हैं। आरबीआइओ आरबी-आइओएस, 2021 के ढांचे के तहत कार्य करते हैं। आरबी-आइओएस, 2021 के दायरे में नहीं आने वाली आरई के विरुद्ध शिकायतें सीईपीसी प्राप्त करती हैं। सीईपीडी आरबी-आइओएस के तहत अपीलीय प्राधिकारी (एए) को सहायता प्रदान करती है और अपील मामलों को संसाधित करती है।

उत्तर: गैर-बैंकों द्वारा स्थापित, उनके स्वामित्व वाले एवं उनके द्वारा परिचालित किए जाने वाले एटीएम को व्हाइट लेबल एटीएम कहा जाता है। गैर-बैंक एटीएम परिचालक भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्राधिकृत होते हैं। प्राधिकृत व्हाइट लेबल एटीएम परिचालकों की सूची भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है https://rbi.org.in/hi/web/rbi/payment-and-settlements/other-links/information-useful-to-banks-fis/payment-system-operators

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पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022

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