एनबीएफसी/एचएफसी से उच्च रेटिंग वाली पूलित परिसंपत्तियां खरीदने के लिए भारत सरकार द्वारा पीएसबी को पेशकश की गई आंशिक ऋण गारंटी योजना
भारत सरकार (जीओआई) द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को वित्तीय रूप से मजबूत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) / हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) से उच्च-रेटेड पूलित संपत्ति खरीदने के लिए प्रदान की गई आंशिक ऋण गारंटी पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – दिनांक 10 अगस्त 2019 के उसकी अधिसूचना के तहत
सरकारी प्रतिभूतियों के लिए प्राथमिक बाजार में खुदरा भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेज़री बिलों की नीलामी में गैर-प्रतिस्पर्धी बोली लगाने की सुविधा शुरू की गई है। इससे निवेशक स्वीकृत प्रतिस्पर्धी बोलियों के भारित औसत दर पर एक निश्चित संख्या में प्रतिभूतियों की खरीद करने में सक्षम होगा।
उत्तर
सभी मौजूदा 'नो-फ्रिल्स' खाते 13 दिसंबर 2005 के परिपत्र ग्राआऋवि. आरएफ. बीसी. 54/07.38.01/2005-06 और दिनांक 27 दिसंबर 2005 के परिपत्र सं आरपीसीडी. सीओ.सं. आरआरबी. बीसी. 58/03.05.33(एफ)/2005-06 द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार खोले गए तथा 22 अगस्त 2012 के परिपत्र ग्राआऋवि.सीओ.आरआरबी.आरसीबी.बीसी.सं.24/07.38.01/2012-13 में जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में बीएसबीडीए में परिवर्तित किए गए। साथ ही उक्त परिपत्र के तहत खोले गए नए खातों को बीएसबीडीए माना जाना चाहिए। विशेष रूप से बीएसबीडीए ग्राहकों के लिए मूल्य वर्धित सेवाओं के लिए उचित मूल्य संरचना के तहत अतिरिक्त सुविधाओं का लाभ लेने वाले खातों को बीएसबीडीए के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
यह “अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्न’ इस विषय पर उपयोगकर्ताओं द्वारा समान्यतः पूछे जानेवाले प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में देने का प्रयास है। तथापि कोई लेनदेन करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों/ नियमों अथवा निदेशों का संदर्भ लें। इससे संबंधित मूल विनियम हैं -1 अप्रैल 2016 की अधिसूचना सं. फेमा 13 (आर)/2016- आरबी द्वारा जारी किए विदेशी मुद्रा प्रबंध (आस्तियों का विप्रेषण) विनियमावली, 2016। जारी किए गए दिशानिर्देश आस्तियों के विप्रेषण पर मास्टर निदेश सं. 13 में समेकित किए गए हैं।
'आस्तियों के विप्रेषण’ का तात्पर्य भारत से बाहर ऐसी निधियों के विप्रेषण से है जो किसी बैंक / किसी फर्म / किसी कंपनी में जमा धनराशि का प्रतिनिधित्व करती है, जैसे:
1. भविष्य निधि शेष
2. अधिवर्षिता लाभ
3. बीमा पॉलिसी के दावे की अथवा परिपक्वता राशि
4. शेयरों, प्रतिभूतियों, अचल सम्पत्ति अथवा भारत में धारित अन्य आस्ति की बिक्रीगत राशि
उत्तर. इन निर्देशों की प्रभावी तिथि 1 अप्रैल 2022 है। हालांकि, कुछ विनियमित संस्थाओं (आरई) द्वारा व्यक्त कार्यान्वयन संबंधी कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए, आरई को सूचित किया जाता है कि वे इन निर्देशों को पूरी तरह से जल्द से जल्द (अधिकतम 1 अक्टूबर 2022 तक) सर्वोत्तम प्रयास के आधार पर लागू करें।
उत्तर. रिज़र्व बैंक निम्नलिखित सीपीएस का स्वामित्व और परिचालन करता है:
i. तत्काल सकल निपटान (आरटीजीएस) प्रणाली - यह देश की बड़ी राशि की भुगतान प्रणाली है और इसे मार्च 2004 में आरंभ किया गया था। इसे बाद में उन्नत सुविधाओं जैसे हाइब्रिड कार्यक्षमता, चलनिधि प्रबंधन कार्यों, भविष्य की तारीख की कार्यक्षमता, मापक्रमणीयता, आदि के साथ आईएसओ 20022 मानक पर निर्मित अगली पीढ़ी के आरटीजीएस (एनजी-आरटीजीएस) के रूप में परिवर्तित किया गया था। लेनदेनों का निपटान आरबीआई की बहियों में सकल आधार पर वास्तविक समय में होता है और इसकी न्यूनतम सीमा रु.2 लाख है। आरटीजीएस, सीसीआईएल और एनपीसीआई जैसी सहायक भुगतान प्रणालियों से आने वाली बहुपक्षीय निवल निपटान बैच (एमएनएसबी) फाइलों का भी निपटान करता है। यह 14 दिसंबर 2020 से वर्ष के सभी दिन चौबीसों घंटे उपलब्ध रहता है।
ii. राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (एनईएफटी) प्रणाली – यह एक खुदरा भुगतान प्रणाली है और इसे नवंबर 2005 में शुरू किया गया था। एनईएफटी एक स्ट्रेट थ्रू प्रोसेस है जो 16 दिसंबर 2019 से 24x7x365 आधार पर आधे-घंटे के 48 बैचों में परिचालित होता है । इसके अंतर्गत किसी एक लेनदेन में अंतरित की जा सकने वाली राशि के लिए कोई न्यूनतम सीमा अथवा अधिकतम सीमा नहीं है, जिसके कारण एनईएफटी एक लोकप्रिय हाइब्रिड भुगतान प्रणाली के रूप में उभरा है।
उत्तर: एचटीएम, एएफ़एस और एचएफ़टी के लिए निर्दिष्ट मूल्य मापदंड के अनुसार लागू होगा।
गणना (निवेशों पर हमारे एमसी से दिये गए पैरा सं)
3.1 परिपक्वता तक रखना
i) एचटीएम के अंतर्गत वर्गीकृत निवेश बाजार को चिन्हित करने की आवश्यकता नहीं है और लागत दर पर ही लिया जाएगा, जब तक कि यह अंकित मूल्य से ज्यादा नहीं हो, जिसमें परिपक्वता की बची हुई अवधि पर प्रीमियम चुका देना चाहिए। बैंक को ‘अनुसूची 13 – अर्जित ब्याज: मद II – निवेशों पर आय’ में परिशोधित राशि को कटौती के रूप में प्रदर्शित करना चाहिए। हालांकि कटौती अलग से प्रदर्शित करने की आवश्यकता नहीं है। प्रतिभूति का बही मूल्य संबन्धित लेखांकन अवधि के दौरान परिशोधित राशि तक कम करना जारी रखना चाहिए।
आईआईबी के मामले में, अंकित मूल्य का अर्थ मुद्रास्फीति समायोजित मूलधन होगा।
3.2 बिक्री के लिए उपलब्ध
बिक्री वर्ग हेतु उपलब्ध वैयक्तिक स्क्रिप्स तिमाही और अधिक अंतराल पर बाजार को चिन्हित किया जाएगा। इस श्रेणी के अंतर्गत घरेलू प्रतिभूतियों का स्क्रिप-वार मूल्यांकन किया जाएगा और उपरोक्त मद 2 (i) में निर्दिष्ट प्रत्येक वर्गीकरण के लिए मूल्यह्रास /बढ़ोतरी को लगाया जाएगा और इस श्रेणी के अंतर्गत विदेशी निवेश का मूल्य स्क्रिप वार मूल्यांकन किया जाएगा और मूल्यह्रास / बढ़ोतरी को पांच वर्गीकरणों (उदाहरण सरकारी प्रतिभूतियाँ (स्थानीय प्राधिकारियों सहित), शेयर, डिबेंचर एवं बॉन्ड, अनुषंगी और /या संयुक्त उद्यम और अन्य निवेश (निर्दिष्ट किया जाना) के लिए संकलित किया जाएगा। इसके अलावा, घरेलू और विदेशी प्रतिभूतियों दोनों में किसी विशेष वर्गीकरण में निवेश को उस श्रेणी के तहत निवेश के मूल्यह्रास/मूल्यवृद्धि को प्राप्त करने के उद्देश्य से संकलित किया जा सकता है। निवल मूल्यह्रास, यदि कोई हो, निवल मूल्यवृद्धि के लिए प्रदान किया जाएगा, यदि कोई हो, नजरअंदाज किया जाना चाहिए। किसी एक वर्गीकरण में प्रदान किए जाने वाले निवल मूल्यह्रास को किसी अन्य वर्गीकरण में निवल मूल्यवृद्धि के कारण कम नहीं किया जाना चाहिए। बैंक तीन वर्गों के (सरकारी प्रतिभूति (स्थानीय प्राधिकारियों सहित), अनुषंगी और / या बाहरी संयुक्त उद्यम और अन्य निवेश (निर्दिष्ट किया जाना) के अंतर्गत विदेशी प्रतिभूतियों को रिपोर्ट करते रहना चाहिए। वैयक्तिक प्रतिभूतियों का बही मूल्य बाजार को चिन्हित करने के बाद कोई परिवर्तन नहीं होगा।
3.3 ट्रेडिंग के लिए रखना
ट्रेडिंग श्रेणी के लिए रखे गए व्यक्तिगत शेयरों को मासिक या अधिक लगातार अंतराल पर बाजार में चिह्नित किया जाएगा और बिक्री के लिए उपलब्ध श्रेणी के मामले में प्रदान किया जाएगा। परिणामस्वरूप, इस वर्ग में वैयक्तिक प्रतिभूतियों के बही मूल्य बाज़ार को चिन्हित होने के बाद किसी तरह का परिवर्तन नहीं होगा।
फिमडा ने सूचित किया बाज़ार में उद्धृत मूल्य वास्तविक मूल्य होगा और बॉन्ड के खरीद और बिक्री के लिए ((वास्तविक मूल्य * सूचकांक अनुपात जो की स्वच्छ मूल्य है) + (उपचित ब्याज जो कि खंडित अवधि ब्याज है) विचारणीय होगा। बैंक द्वारा वर्गीकरण, मूल्यांकन और निवेश पोर्टफोलियो पर मास्टर परिपत्र के पैरा 5.2 के अनुसार, खंडित अवधि ब्याज का पूंजीकरण नहीं किया जाना चाहिए बल्कि व्यय मद के रूप में समझना चाहिए। वर्तमान मूल्यांकन मापदंड के अनुरूप होने के लिए, केवल केवल स्वच्छ मूल्य को लागत दर के रूप में समझना चाहिए।
बाज़ार मूल्य को चिन्हित करने के संबंध में, आईआईबी के मामले, स्वच्छ मूल्य, यदि उपलब्ध हो, को उद्धृत किया जाए। यदि यह उद्धृत नहीं है, स्वच्छ मूल्य पर पहुँचने के लिए फिमडा की मूल्यांकन प्रक्रिया का अनुसरण करना चाहिए।
5.2 खंडित ब्याज अवधि
बैंक को लागत के रूप में विक्रेता को भुगतान किए गए खंडित अवधि ब्याज को पूंजीकृत नहीं करना चाहिए, बल्कि सरकारी एवं अन्य अनुमोदित प्रतिभूतियों में निवेश के संदर्भ में लाभ एवं हानि खाता के अंतर्गत व्यय के मद के रूप में समझा जाना चाहिए। यह भी नोट किया जाए कि ऊपर लेखांकन प्रक्रिया को कराधान प्रभाव को को संदर्भ में नहीं लेता है और इस प्रकार बैंक को आयकर प्राधिकारियों द्वारा निर्धारित तरीके से उनकी आवश्यकताओं का अनुपालन करना चाहिए।
यदि यह उद्धृत नहीं किए गए एसएलआर प्रतिभूति के अंतर्गत होता है तो स्वच्छ मूल्य पर पहुँचने के लिए फिमडा मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
स्थानीय चेक
समाशोधन गृह के क्षेत्राधिकार में स्थानीय चेक देय हैं और जो उस केंद्र में प्रचलित समाशोधन प्रणाली के माध्यम से प्रस्तुत किए जाएंगे। स्थानीय चेकों से उत्पन्न क्रेडिट, संबंधित संग्राहक बैंक की चेक संग्रहण नीति (सीसीपी) में दर्शाए अनुसार, ग्राहक के खाते में दिया जाएगा।
संबंधित संग्राहक बैंक के सीसीपी के होते हुए भी, आदर्श रूप से, स्थानीय समाशोधन के संबंध में, सामान्य सुरक्षा उपायों को ध्यान मे रखते हुये बैंक अगले कार्य दिवस पर संबंधित रिटर्न समाशोधन के बंद होने के तुरंत बाद या समाशोधन में प्रस्तुति के दिन से तीसरे कार्य दिवस पर व्यवसाय शुरू होने के एक घंटे के भीतर ग्राहकों के खातों में दिए गए शेडो क्रेडिट के उपयोग की अनुमति देंगे।
ग्रिड-आधारित चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) समाशोधन के तहत, ग्रिड क्षेत्राधिकार में आने वाली बैंक शाखाओं पर आहरित सभी चेकों को स्थानीय चेकों के रूप में माना और समाशोधित किया जाता है। ग्रिड समाशोधन, बैंकों को, ग्रिड क्षेत्र में अपनी सेवा शाखाओं के माध्यम से एकल समाशोधन गृह में/कई शहरों से चेक प्रस्तुत करने/प्राप्त करने की अनुमति देता है।
ऊपर निर्दिष्ट अवधि से परे, यदि क्रेडिट में कोई देरी होती है तो, ग्राहक संबंधित संग्राहक बैंक के सीसीपी में निर्दिष्ट दर पर मुआवजा प्राप्त करने का हकदार है। यदि स्थानीय चेकों की वसूली में देरी के लिए सीसीपी में कोई दर निर्दिष्ट नहीं की गई है, तो देरी की संबंधित अवधि के लिए बचत बैंक ब्याज दर पर मुआवजा देना होगा।
बाहरी चेक
राज्यों की राजधानियों/प्रमुख शहरों/अन्य स्थानों पर आहरित चेकों की वसूली के लिए अधिकतम समय-सीमा क्रमश: 7/10/14 दिन है।
यदि वसूली में इस अवधि से अधिक कोई देरी होती है, तो ग्राहक संबंधित बैंक के सीसीपी में निर्दिष्ट दर पर मुआवजा प्राप्त करने का हकदार है। यदि सीसीपी में दर निर्दिष्ट नहीं है, तो संबंधित परिपक्वता के लिए सावधि जमा पर ब्याज दर का भुगतान किया जाना है। बैंकों की चेक संग्रहण नीति यह भी बताती है कि किस सीमा तक बाहरी चेकों को तत्काल/तत्काल क्रेडिट दिया जाता है।
उत्तर: यह स्पष्ट किया जाता है कि ‘हस्तांतरण का समय’ का अर्थ वह अवधि है जब संबन्धित जोखिम और प्रतिफल (रिवार्ड), हस्तांतरित आर्थिक हितकी सीमा तक और जैसा कि ऋण भागीदारी, निर्धारण या नवीयन अनुबंध में प्रलेखित है, हस्तांतरणकर्ता और हस्तांतरिती पर बाध्यकारी हो जाता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 28 अप्रैल 2001 को 'शिक्षा ऋण योजना' पर परिपत्र ग्राआऋवि.पीएलएनएफएस.बीसी.सं.83/06.12.05/2000-01 जारी किया था, जिसमें सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को भारतीय बैंक संघ (आईबीए) द्वारा तैयार मॉडल शिक्षा ऋण योजना को अपनाने की सूचना दी गई थी। इस योजना को आईबीए द्वारा समय-समय पर संशोधित किया गया है और इसका नवीनतम संशोधन मॉडल शिक्षा ऋण योजना (एमईएलएस), 2022 है।
शिक्षा ऋण पर बैंकों के लिए दिशा-निर्देशों के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए कृपया एमईएलएस, 2022 और इससे संबंधित परिपत्र देखें। उक्त योजना की प्रति आईबीए की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
इसे नोट किया जाए कि एमईएलएस, 2022 बैंकों को शिक्षा ऋण योजना के परिचालन हेतु व्यापक दिशा-निर्देश प्रदान करता है तथा लागू करने वाले बैंकों के पास उपयुक्त समझे जाने पर परिवर्तन करने का विवेकाधिकार होगा।
उत्तर: 'डिजिटल लेंडिंग' में आरई को परिचालन संबंधी नम्यता प्रदान करने के लिए डिजिटल लेंडिंग परिभाषा में ‘मुख्य रूप से निर्बाध डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग' वाक्यांश का उपयोग किया गया है। इसलिए भले ही ग्राहक के साथ कुछ भौतिक इंटरफेस मौजूद हो, फिर भी उधार ‘डिजिटल उधार’ की परिभाषा के अंतर्गत आएगा। तथापि, ऐसा करते समय, आरई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दिशानिर्देशों के अंतर्निहित उद्देश्य का पालन किया गया है।
मौजूदा ऋणों के मामले में भी, निर्देश 1 अप्रैल, 2024 से लागू होंगे और नई दंडात्मक शुल्क व्यवस्था में बदलाव 1 अप्रैल, 2024 को या उसके बाद आने वाली अगली समीक्षा/नवीनीकरण तिथि पर सुनिश्चित किया जाएगा, लेकिन 30 जून 2024 के बाद नहीं।
'सूचना का प्रकाशन - सरफेसी अधिनियम, 2002 के तहत प्रतिभूति आस्तियां ' पर 25 सितंबर 2023 को जारी परिपत्र पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू)
वित्तीय आस्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन (सरफेसी) अधिनियम, 2002 के अंतर्गत विनियमित संस्थाओं (आरई) के पास मौजूद प्रतिभूति आस्तियों का परिपत्र की तारीख पर अथवा उसके बाद उनकी वेबसाइट पर प्रकाशन किया जाना चाहिए।
'हरित जमाराशियों के अंगीकरण हेतु ढांचा' पर 11 अप्रैल, 2023 का परिपत्र
उत्तर: यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन यदि आरई अपने ग्राहकों से हरित जमाराशि जुटाने का इरादा रखते हैं तो उन्हें इसमें निर्धारित ढांचे का पालन करना चाहिए।
उत्तर: कार्डों को उनके जारी करने, कार्ड धारक द्वारा उनके उपयोग और भुगतान के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। कार्ड तीन प्रकार के होते हैं (क) डेबिट कार्ड, (ख) क्रेडिट कार्ड, (ग) प्रीपेड कार्ड।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022