एनडीएस-ओएम वेब
"बीमाकृत बैंकों" के परिसमापन आदि की स्थिति में अर्थात् ऐसे बैंक जिनका पंजीकरण निम्नलिखित कारणों से रद्द कर दिया गया है: (क) भविष्य में और जमाराशियां स्वीकार करने से प्रतिबंधित किया हो अथवा (ख) जिसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया हो या यह पाये जाने पर कि लाइसेस नहीं दिया जा सकता है, उन बैंकों के प्रति जमा बीमा दायित्व है। इन मामलों में निगम का दायित्व बीमाकृत बैंक के रूप में बैंक का पंजीकरण रद्द किए जाने की तारीख तक जमाराशियों की सीमा तक है।
पंजीकरण रद्द किए गए अन्य बैंकों के परिसमापन आदि के संबंध में अर्थात ऐसे बैंक जिनका पंजीकरण प्रीमियम का भुगतान न करने अथवा डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 की धारा 2(जीजी) के आशय के अंतर्गत पात्र सहकारी बैंकों के रूप में कार्य करना बंद कर दिया हो तो निगम का कोई दायित्व नहीं है।
उत्तरः एनईएफटी हेल्प डेस्क/आरबीआई के संपर्क बिंदु से nefthelpdeskncc@rbi.org.in पर संपर्क किया जा सकता है।
In case the aggregate amount bid is more than the reserved amount through non-competitive bidding, allotment would be made on a pro rata basis.
Example:
Suppose, the amount reserved for allotment in non competitive basis is 10 crore. The total amount bid at the auction for Non competitive segment is 12 crore. The partial allotment percentage is =10/12=83.33%.
The actual allocation in the auction will be as follows:
Bidder | Bid Amount | Allotment |
Bank1 | 2 crore | 1,66,70,000/- |
Bank2 | 3 crore | 2,50,00,000/- |
PD1 | 1 crore | 83,30,000/- |
PD2 | 1 crore | 83,30,000/- |
Bank3 | 5 crore | 4,16,70,000/- |
It may be noted that the actual allotment may vary slightly at times from the partial allotment ratio due to rounding off with a view to ensuring that the allotted amounts are in multiples of 10,000/-.
-
परिपक्व तिथि के पहले समयपूर्व मोचन की स्थिति में, निवेशक कूपन की तारीख से कुछ दिन पहले संबन्धित बैंक से संपर्क कर सकता है और आवेदन कर सकता है।
-
परिपक्वता पर शोधन की स्थिति में, निवेशक को बांड की आगामी परिपक्वता के बारे में परिपक्वता से एक महीने पहले सूचना दी जाएगी, जिसमें उन्हें एनईएफटी खाते के विवरण की पुष्टि करते हुए परिचय पत्र प्रदान करने की सूचना दी जाएगी।
-
यदि सब सही है, निवेशक इलेक्ट्रोनिक माध्यम से भुगतान के लिए परिपक्वता तिथि पर तुरंत भुगतान और भौतिक साधनों के माध्यम से कोई भी भुगतान अधिकतम पाँच दिनों के अंदर हो जाना चाहिए।
Yes, the Scheme provides the appellate mechanism for the complainant as well as the NBFC.
Any person aggrieved by an Award issued under Clause 12 or by the decision of the NBFC Ombudsman rejecting the complaint for the reasons specified in sub-clause (c) to (f) of Clause 13 of the Scheme, can approach the Appellate Authority.
The Appellate Authority is vested with a Deputy Governor-in-Charge of the department of the RBI implementing the Scheme. The address of the Appellate Authority is :
The Appellate Authority
Ombudsman Scheme for Non-Banking Financial Companies
Consumer Education and Protection Department
Reserve Bank of India
First Floor, Amar Building
Fort, Mumbai 400 001.
The complainant also has the option to explore other recourse and/or remedies available as per the law.
(कृपया उपर्युक्त प्रश्न सं. 8 का उत्तर देखें)
| ए. आरबीआई के साथ बिक्री/खरीद स्वैप कराते समय | ||
| बैंक आरबीआई के साथ 19 सितंबर 2013 को 1235 दिन के स्वैप टेनोर का स्वैप डील करता है। | ||
| नियर/स्पॉट चरण | 23 सितंबर 2013 | |
| फार चरण (स्पॉट चरण में 1235 दिन की अवधि जोड़कर) | 09 फरवरी 2017 | |
| नियर चरण (आरबीआई के लिए खरीद) | फार चरण (आरबीआई के लिए बिक्री) | |
| मूल्य तारीखें | 23 सितंबर 2013 | 09 फरवरी 2017 |
| स्वैप राशि (मूलधन) | 1 मिलियन अमरीकी डॉलर | 1 मिलियन अमरीकी डॉलर |
| अमरीकी डॉलर- भारतीय रुपया दर | 62.6390 | 70.4419* |
| *स्वैप की अवधि के लिए 62.6390 के नियर लेग दर को 3.5 प्रतिशत से छः माही आधार पर कंपाउंड करके अभिकलित किया गया | ||
| आरबीआई के साथ लेनदेन: 19 सितंबर 2013 को बैंक आरबीआई के साथ 62.6390/70.4419 पर 1 मिलियन अमरीकी डॉलर का बिक्री/खरीद स्वैप करेगा। बिक्री चरण को उस दिन के आरबीआई के संदर्भ दर पर किया जाता है। | ||
| बी. अंतर्निहित एफ़सीएनआर(बी) जमाराशि के समय से पूर्व आहरण किए जाने के कारण स्वैप के रद्द/समाप्त करने के समय | ||
| यदि स्वैप 756 दिन के बाद समाप्त किया जाता है तो स्वैप की शेष अवधि 479 दिन रहेगी। स्वैप लागत को निम्नानुसार पुनर्निर्धारित किया जाएगा: | ||
| स्वैप की पूर्ण की गई अवधि (756 दिन) के लिए लागू किए जानेवाली संशोधित स्वैप लागत 14.9% (3.5%+4.0%+7.4%) के बराबर होगी। यह मान लिया जाता है कि समाप्ती के समय 469 दिन की शेष अवधि के लिए प्रचलित अमरीकी डॉलर भारतीय रुपया स्वैप दर 7.4% होगा। | ||
| संशोधित स्वैप की लागत को बैंक द्वारा आरबीआई के साथ किए जानेवाले नए स्वैप लेनदेन (बिक्री/खरीद) के पहले चरण में समायोजित किया जाएगा। | ||
| मौजूदा स्वैप को रद्द करते समय किया जाने वाला नया स्वैप | नीयर चरण (आरबीआई के लिए बिक्री) | फार चरण (आरबीआई के लिए खरीद) |
| मूल्य तरीखे | 19 अक्तूबर 2015 | 09 फरवरी 2017 |
| दर | 84.3561 | 70.4419 |
| आरबीआई के साथ लेनदेन: 15 अक्तूबर 2015 को बैंक आरबीआई के साथ 84.3561/70.4419 पर 1 मिलियन अमरीकी डॉलर का बिक्री/खरीद स्वैप करेगा। | ||
उत्तर: हाँ, इसकी सूचना रिज़र्व बैंक, विदेशी मुद्रा विभाग, केंद्रीय कार्यालय कक्ष, संसद मार्ग, नई दिल्ली 110001 को दी जानी चाहिए।
1 7.1.5. गैर-क्रेडिट उत्पादों को जारी करना उधारकर्ताओं की पूर्ण सहमति से होगा और ऐसे उत्पादों के लिए शुल्क संरचना को ऋण कार्ड में ही उधारकर्ता को स्पष्ट रूप से सूचित किया जाएगा।
2 उनके कार्यालयों में, उनकी वेबसाइटों पर उचित व्यवहार संहिता के भाग के रूप में और उधारकर्ता को जारी किए गए ऋण कार्ड में
3 7.1.1 इन निर्देशों के आधार पर सभी आरई अपने बोर्ड के अनुमोदन से एक उचित व्यवहार संहिता (एफपीसी) स्थापित करेंगे। आरई द्वारा एफपीसी को अपने सभी कार्यालयों और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा। एफपीसी को उधारकर्ता द्वारा समझी जाने वाली भाषा में जारी किया जाना चाहिए।
4 2.1 इन निर्देशों के प्रावधान निम्नलिखित संस्थाओं पर लागू होंगे:
-
भुगतान बैंकों को छोड़कर सभी वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित);
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सभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक / राज्य सहकारी बैंक / जिला केंद्रीय सहकारी बैंक; तथा
-
सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (सूक्ष्म वित्त संस्थानों और आवास वित्त कंपनियों सहित)।
5 माइक्रोफाइनेंस गतिविधियों में लगी उन ‘गैर-लाभकारी' कंपनियों से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए, 45-आईबी और 45-आईसी से दी गई छूट वापस ले ली गई है जिनकी संपत्ति का आकार ₹100 करोड़ और उससे अधिक है।
ये सामान्य प्रश्न भारतीय रिज़र्व बैंक (बाद में इसे " बैंक " के रूप में संदर्भित किया जाता है) द्वारा, केवल सूचना और सामान्य मार्गदर्शन उद्देश्यों के लिए जारी किए जाते हैं। ईस के आधार पर किए गए कार्यों और / या निर्णयों के लिए बैंक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। स्पष्टीकरण या व्याख्या के लिए, यदि कोई हो, तो बैंक द्वारा समय-समय पर जारी किए गए प्रासंगिक परिपत्रों, दिशानिर्देशों और अधिसूचनाओं द्वारा निर्देशित हुआ जा सकता है।
उत्तर
बैंकों द्वारा एटीएम डेबिट कार्ड निःशुल्क प्रदान किए जाने चाहिए और ऐसे कार्डों पर कोई वार्षिक शुल्क नहीं लगाया जाना चाहिए।
दिनांक 04 जनवरी, 2018 के परिपत्र बैंविवि.सं.बीपी.बीसी.99/08.13.100/2017-18 के अनुसार उक्त एक्सपोजर व्यक्तिगत ऋण के रूप में पात्र नहीं हैं। ऐसे मामलों में, समाधान ढांचे के अनुबंध के भाग बी के तहत पात्र उधारकर्ताओं का समाधान किया जा सकता है।
उत्तर : नहीं।
राष्ट्रिक स्वर्ण बॉण्ड जारी किए जाने की तारीख को ग्राहक को धारिता प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। धारिता प्रमाणपत्र जारीकर्ता बैंक/ एसएचसीआईएल कार्यालय/ चुनिंदा डाकघर/ चुनिंदा स्टॉक एक्सचेंज / एजेंट से प्राप्त किया जा सकता है अथवा यदि आवेदन पत्र में ई-मेल पता दिया गया है तो धारिता प्रमाणपत्र सीधे रिज़र्व बैंक से भी ई-मेल से प्राप्त किया जा सकता है।
व्यक्तियों / संस्थाओं द्वारा ₹2000 मूल्य वर्ग के बैंकनोटों को आरबीआई के 19 निर्गम कार्यालयों में एक समय में ₹20,000 की सीमा तक बदला जा सकता है। इसके अलावा, व्यक्तियों / संस्थाओं द्वारा किसी भी राशि के लिए भारत में अपने बैंक खातों में जमा करने के लिए आरबीआई के 19 निर्गम कार्यालयों में भी ₹2000 मूल्य वर्ग के बैंकनोटों को जमा किया जा सकता है।
ऐसे एक्स्चेंज या क्रेडिट आरबीआई/सरकार के संगत विनियमों, वैध पहचान पत्र दस्तावेजों को प्रस्तुत करने और विधिवत कार्य प्रणाली जैसा कि आरबीआई द्वारा उपयुक्त होगा, के तहत किया जाएगा।
उत्तर: ऋण की स्वीकृति के समय, उधारकर्ता को ऋण चूक के मामले में उधारकर्ता से संपर्क करने के लिए अधिकृत सूचीबद्ध एजेंटों के नाम से अवगत कराया जा सकता है। हालांकि, यदि ऋण बकाया हो जाता है और उधारकर्ता को वसूली एजेंट को सौंपा गया है, तो वसूली एजेंट द्वारा वसूली के लिए उधारकर्ता से संपर्क करने से पहले ऐसे वसूली एजेंट के विवरण को ईमेल/एसएमएस के माध्यम से उधारकर्ता को सूचित किया जाना चाहिए।
उत्तर: कंपनी को इस सेवा का प्रतिशत भाग-ए के क्यू-3 (डी) में 'ऑफशोर प्रोडक्ट डेवलपमेंट' के तहत और सॉफ्टवेयर उत्पादों के लिए समेकित राशि क्यू-5 (ए-iv) के तहत उल्लेख करना चाहिए।
समिति खाते में दबाव के समाधान के लिए विभिन्न विकल्प तलाश सकती है। समिति किसी विशेष प्रस्ताव विकल्प को प्रोत्साहित करने का प्रयास नहीं करती है तथा प्रत्येक मामले की विशिष्ट आवश्यकता और स्थिति के अनुसार सुधारात्मक कार्य योजना (सीएपी) का निर्धारण करती है। समिति द्वारा सीएपी के तहत विकल्पों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:
(i) परिशोधन;
(ii) पुनर्संरचना;
(iii) वसूली
अधिक जानकारी के लिए आप दिनांक 17 मार्च 2016 के परिपत्र सं. विसविवि.एमएसएमई एण्ड एनएफएस.बीसी.सं.21/06.02.31/2015-16, को देख सकते हैं।
शिकायतकर्ता को निम्नलिखित विवरण उपलब्ध करवाने की आवश्यकता है:
- शिकायतकर्ता का नाम, आयु और लिंग;
- व्यक्तिगत ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर (सूचना प्राप्त करने के लिए अनिवार्य), और लैंडलाइन नंबर (यदि उपलब्ध हो) के साथ शिकायतकर्ता का पूरा डाक पता;
- विनियमित संस्था जिसके विरुद्ध शिकायत की गई है की शाखा या कार्यालय का नाम और पूरा पता;
- लेन-देन की तारीख और विवरण, शिकायतकर्ता की खाता संख्या, डेबिट या क्रेडिट कार्ड संख्या के विवरण सहित शिकायत उत्पन्न होने के पूरे तथ्य, इस हद तक कि वे शिकायत की विषय वस्तु के लिए प्रासंगिक हैं;
- शिकायत के निवारण के लिए आरई को प्रस्तुत अभ्यावेदन और आरई से प्राप्त उत्तर, यदि कोई हो, की तारीख और विवरण;
- शिकायतकर्ता को हुई हानि की प्रकृति और सीमा; और,
- मांगी गई राहत; साथ ही
- यह घोषणा कि आरबी-आइओएस, 2021 के खंड 10 के अनुसार शिकायत अस्वीकार्य नहीं है।
नोट: शिकायतकर्ता को शिकायत के साथ, शिकायत का समर्थन करने वाले प्रासंगिक दस्तावेजों की प्रतियां भी प्रस्तुत करनी होंगी।
यदि आपको उपरोक्त में से किसी भी आधार पर केवल अनुसूचित बैंक के विरुद्ध शिकायत है, आप गोइपोरिया समिति की सिफारिश के अनुसार शाखाओं में उपलब्ध कराए गए एक विशिष्ट शिकायत रजिस्टर में या कागज के एक टुकड़े पर लिखित रूप में संबंधित बैंक के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं। अपनी शिकायत की रसीद मांगें। आपकी शिकायत प्राप्त करने वाले अधिकारी का विवरण विशेष रूप से मांगा जा सकता है। यदि बैंक 30 दिनों के भीतर जवाब देने में विफल रहता है, तो आप बैंकिंग ओम्बड्समैन के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं। (कृपया ध्यान दें कि किसी अन्य न्यायिक फोरम में लंबित शिकायतों पर बैंकिंग ओम्बड्समैन द्वारा विचार नहीं किया जाएगा)। ग्राहक की शिकायत के समाधान के लिए बैंकिंग ओम्बड्समैन कार्यालय द्वारा कोई शुल्क नहीं लगाया जाता है। ट्रैकिंग के उद्देश्य से आपको एक विशिष्ट शिकायत पहचान संख्या दी जाएगी। (बैंकिंग ओम्बड्समैनों की सूची उनके संपर्क विवरण के साथ भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है)।
शिकायतों को उस बैंकिंग ओम्बड्समैन को संबोधित किया जाना चाहिए जिसके अधिकार क्षेत्र में बैंक की वह शाखा या कार्यालय स्थित है जिसके विरुद्ध शिकायत की गई है। शिकायत सादे कागज पर लिखकर अथवा www.bankingombudsman.rbi.org.in पर ऑनलाइन या बैंकिंग ओम्बड्समैन को ई-मेल भेजकर दर्ज कराई जा सकती है। शिकायत प्रपत्र सभी बैंक शाखाओं में भी उपलब्ध हैं।
शिकायत आपके अधिकृत प्रतिनिधि (वकील के अलावा) अथवा आपकी ओर से कार्य करने वाले किसी उपभोक्ता संघ/मंच द्वारा भी दर्ज कराई जा सकती है।
यदि आप बैंकिंग ओम्बड्समैन के निर्णय से खुश नहीं हैं, तो आप भारतीय रिज़र्व बैंक में अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकते हैं।
|
उत्तर: अपनी शिकायत के निवारण के लिए, ग्राहक को पहले संबंधित कार्ड-जारीकर्ता से संपर्क करना होगा। यदि कार्ड-जारीकर्ता शिकायत दर्ज करने के 30 दिनों की अवधि के भीतर जवाब नहीं देता है या शिकायत को पूर्णतः/आंशिक रूप से अस्वीकार कर देता है या यदि ग्राहक कार्ड-जारीकर्ता द्वारा दिए गए उत्तर/समाधान से संतुष्ट नहीं है, तो ग्राहक निम्नलिखित में से किसी भी तरीके के माध्यम से ओम्बड्समैन, रिज़र्व बैंक के पास अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है:
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1“भारत में निवास करने वाले व्यक्ति ”को फेमा 1999 की धारा 2 (v) में निम्नानुसार परिभाषित किया गया है:
(i) पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान एक सौ बयासी दिन से अधिक दिन के लिए भारत में निवास करने वाला व्यक्ति लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल नहीं हैं:
(ए) कोई व्यक्ति जो निम्नलिखित करणों से भारत के बाहर गया हो अथवा जो भारत के बाहर रहता हो, दोनों मामले में:
(ए) भारत के बाहर नौकरी करने के लिए अथवा नौकरी मिल जाने पर, अथवा
(बी) भारत के बाहर कोई कारोबार करने अथवा भारत के बाहर कोई आजीविका करने, अथवा
(सी) कोई अन्य प्रयोजन से, जिन परिस्थितियों में उसने किसी अनिश्चित अवधि के लिए अपने भारत के बाहर रहने के इरादे को निर्दिष्ट किया हो।
(बी) कोई व्यक्ति जो निम्नलिखित कारणों से भारत में आया हो अथवा रेहता हो, दोनों मामलों में से अन्यथा
(ए) भारत में नौकरी करने के लिए अथवा मिल जाने पर, अथवा
(बी) भारत में कोई कारोबार करने अथवा भारत मे कोई आजीविका करने, अथवा
(सी) कोई अन्य प्रयोजन से, जिन परिस्थितियों में उसने किसी अनिश्चित अवधि के लिए अपने भारत में रहने के इरादे को निर्दिष्ट किया हो।
(ii) भारत में पंजीकृत अथवा निगमित कोई व्यक्ति अथवा निगमित निकाय;
(iii) भारत एक बाहर निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा भारत में स्वाधिकृत अथवा नियंत्रित कोई कार्यालय, शाखा अथवा एजन्सि
(iv) भारत में निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर स्वाधिकृत अथवा नियंत्रित कोई कार्यालय, शाखा अथवा एजन्सि
उत्तर: निम्नलिखित प्रकार के नकद आहरण संबंधी लेनदेन के लिए सेवा शुल्क बैंकों द्वारा स्वयं निर्धारित किए जा सकते हैं:
(क) क्रेडिट कार्ड के उपयोग से नकदी आहरण।
(ख) विदेश में स्थित एटीएम से नकदी आहरण।
उत्तर. ग्राहक अपना केवाईसी पहचानकर्ता निम्नलिखित तरीकों से प्राप्त कर सकता है:
(ए) खाता खोलने की प्रक्रिया में जब ग्राहक का केवाईसी पहचानकर्ता सीकेवाईसीआर द्वारा तैयार किया जाता है और आरई को प्रदान कर दिया जाता है, तो आरई को उसे संबंधित ग्राहक के साथ साझा करना होगा।
(बी) ग्राहक सीकेवाईसीआर पोर्टल (www.ckycindia.in) पर भी अपने केवाईसी पहचानकर्ता को प्राप्त कर सकते हैं।
उत्तर:
| क्र सं | जमा का प्रकार |
परिपक्वता पर मूलधन का पुनर्भुगतान |
परिपक्वता पर ब्याज का पुनर्भुगतान |
i. |
अल्पावधि बैंक जमा (एसटीबीडी)* |
मोचन के समय जमा किए गए सोने के मूल्य के बराबर सोने या आईएनआर में |
जमा करते समय भारतीय रुपये में सोने के मूल्य के संदर्भ में भारतीय रुपये (आईएनआर)। |
ii. |
मध्यावधि सरकारी जमा (एमटीजीडी) |
मोचन के समय जमा किए गए सोने के मूल्य के बराबर सोने या आईएनआर में |
जमा करते समय भारतीय रुपये में सोने के मूल्य के संदर्भ में भारतीय रुपये (आईएनआर)। |
iii. |
दीर्घावधि सरकारी जमा (एलटीजीडी) |
मोचन के समय जमा किए गए सोने के मूल्य के बराबर सोने या आईएनआर में |
जमा करते समय भारतीय रुपये में सोने के मूल्य के संदर्भ में भारतीय रुपये (आईएनआर)। |
* 05 अप्रैल 2021 से प्रभावी |
|||
सभी प्रकार की जमाराशियों के मामले में, जमा करते समय मूलधन को सोने या उसके समकक्ष रुपये के मोचन का विकल्प प्राप्त किया जाएगा। इसके अलावा, एमएलटीजीडी का समय से पहले कोई भी मोचन केवल भारतीय रुपये में होगा, जबकि एसटीबीडी के मामले में यह बैंकों द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
हाँ, भारत में प्रवेश चाहने वाली विदेशी फिनटेक कंपनियाँ या वैश्विक महत्वाकांक्षाओं वाली भारतीय फिनटेक संस्थाओं के आवेदन भाग लेने के लिए पात्र हैं। ऐसे मामलों में, आईएफ़एससीए, पीआर के रूप में कार्य करेगा।
उत्तर: मौजूदा दिशानिर्देशों और निर्धारित सीमाओं के अनुसार सरकारी ट्रेजरी बिलों, सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की अनुमति है। विशेष रुपया वास्ट्रो खातों में शेष राशि का निवेश दिनांक 03 अक्तूबर, 2025 के ए.पी. (डी.आई.आर. सीरीज़) परिपत्र सं. 13 में निर्दिष्ट दिशा-निर्देशों और सीमाओं के अनुसार की अनुमति भारतीय कंपनी द्वारा जारी अपरिवर्तनीय डिबेंचर (non-convertible debenture)/बॉन्ड (bond) और कमर्शियल पेपर (commercial paper) में भी किया जा सकता हैंI इसके अलावा, लेनदेन में शामिल देश आपसी सहमति से और यथालागू विनियामक और सांविधिक दिशानिर्देशों के अनुपालन में निवेश के नए आयाम भी स्थापित कर सकते हैं।
उत्तर: चूँकि शमन की कार्यवाही स्वैच्छिक रूप से स्वीकार और प्रकट किए गए उल्लंघनों वाले मामलों में ही की जाती है, अत: विदेशी मुद्रा (शमन कार्यवाही) नियम, 2024 के अंतर्गत शमन प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील करने अथवा लगाए गए दण्ड की राशि को कम करने अथवा दण्ड की राशि के भुगतान के लिए और अधिक समय देने संबंधी अनुरोध हेतु कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
उत्तर. रिजर्व बैंक प्रस्तावित भुगतान प्रणाली की आवश्यकता, प्रस्तावित प्रणाली के तकनीकी मानकों और डिजाइन, प्रस्तावित प्रणाली के संचालन की सुरक्षा प्रक्रियाओं और नियमों और शर्तों, भुगतान निर्देशों की नेटिंग की प्रक्रिया, जोखिम प्रबंधन प्रक्रियाओं भुगतान प्रणाली शुरू करने या संचालित करने के लिए प्राधिकरण के लिए आवेदन पर निर्णय लेते समय आवेदक की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन का अनुभव और आवेदक की अखंडता, उपभोक्ता हित, मौद्रिक और ऋण नीतियां और अन्य प्रासंगिक कारकों पर विचार करेगा। (पीएसएस अधिनियम, 2007 की धारा 7)।
रिज़र्व बैंक प्राधिकरण के लिए प्राप्त सभी आवेदनों को उनकी प्राप्ति की तारीख से छह महीने के भीतर निपटाने का प्रयास करेगा।
उत्तर: ई₹ की नकदी जैसी विशेषताओं को देखते हुए, वॉलेट शेष राशि पर कोई ब्याज देय नहीं है।
Ans : ECS Debit transaction can be initiated by any institution (called ECS Debit User) which has to receive / collect amounts towards telephone / electricity / water dues, cess / tax collections, loan installment repayments, periodic investments in mutual funds, insurance premium etc. It is a Scheme under which an account holder with a bank branch can authorise an ECS User to recover an amount at a prescribed frequency by raising a debit to his / her bank account.
The User institution has to first register with an ECS Centre. The User institution has to also obtain the authorization (mandate) from its customers for debiting their account along with their bank account particulars prior to participation in the ECS Debit scheme. The mandate has to be duly verified by the beneficiary’s bank. A copy of the mandate should be available on record with the destination bank where the customer has a bank account.
उत्तर: बैच सेटलमेंट से दो घंटे की समय-सीमा की उम्मीद की जा सकती है, जिसके भीतर लाभार्थी के खाते में क्रेडिट होना चाहिए।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022