(राशि करोड़ रुपये में और दर प्रतिशत में) मुद्रा बाज़ार@ मात्रा (एक चरण) भारित औसत दर सीमा क. ओवरनाइट खंड (I+II+III+IV) 0.00 - - I. मांग मुद्रा 0.00 - - II. ट्राइपार्टी रेपो 0.00 - - III. बाज़ार रेपो 0.00 - - IV. कॉरपोरेट बॉण्ड में रेपो 0.00 - - ख. मीयादी खंड I. सूचना मुद्रा** 0.00 - -
(राशि करोड़ रुपये में और दर प्रतिशत में) मुद्रा बाज़ार@ मात्रा (एक चरण) भारित औसत दर सीमा क. ओवरनाइट खंड (I+II+III+IV) 0.00 - - I. मांग मुद्रा 0.00 - - II. ट्राइपार्टी रेपो 0.00 - - III. बाज़ार रेपो 0.00 - - IV. कॉरपोरेट बॉण्ड में रेपो 0.00 - - ख. मीयादी खंड I. सूचना मुद्रा** 0.00 - - II. मीयादी मुद्रा@@ 0.00 - -
(राशि करोड़ रुपये में और दर प्रतिशत में) मुद्रा बाज़ार@ मात्रा (एक चरण) भारित औसत दर सीमा क. ओवरनाइट खंड (I+II+III+IV) 6,72,117.29 4.87 3.99-6.00 I. मांग मुद्रा 13,319.43 5.04 4.50-5.10 II. ट्राइपार्टी रेपो 4,86,262.60 4.86 4.70-5.00 III. बाज़ार रेपो 1,67,724.36 4.86 3.99-5.25 IV. कॉरपोरेट बॉण्ड में रेपो 4,810.90 5.09 5.00-6.00 ख. मीयादी खंड I. सूचना मुद्रा** 458.50 5.22 4.60-5.75
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम)की धारा 56 के साथ पठित धारा 22 के अंतर्गत दिनांक 11 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा “इंडियन मर्केंटाइल को- ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ” का लाइसेंस रद्द कर दिया है। परिणामस्वरूप, बैंक 13 फरवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकता है। सहकारी समितियों के आयुक्त और रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश से भी अनुरोध किया गया है कि वे बैंक का समापन करने और बैंक के लिए एक परिसमापक नियुक्त करने का आदेश जारी करें।
निम्नलिखित राज्य सरकारों ने नीलामी के माध्यम से कुल ₹37,900 करोड़ (अंकित मूल्य) की राशि के लिए स्टॉक की बिक्री का प्रस्ताव किया है। क्र. सं. राज्य जुटाई जाने वाली राशि (₹ करोड़) अतिरिक्त उधार (ग्रीनशू विकल्प (₹ करोड़) अवधि (वर्ष) नीलामी का प्रकार 1. आंध्रप्रदेश 500 - 11 प्रतिफल 2. असम 1000 - 7 जनवरी 2026 को जारी 7.57% असम एसजीएस 2036 का पुनर्निर्गम मूल्य
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 24 अक्तूबर 2025 को पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र (सीएमई) संबंधी दो मसौदा निदेश, अर्थात: (i) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र) निदेश, 2025 और (ii) भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र) निदेश, 2025, जारी किए थे और इन पर हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी थी। मसौदा निदेशों का मुख्य उद्देश्य (i) भारतीय कंपनियों द्वारा अधिग्रहणों के वित्तपोषण हेतु बैंकों को सक्षम बनाने के लिए एक ढांचा प्रदान करना; (ii) सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों के बदले ऋण देने संबंधी विनियामकीय सीमा को पूर्ण रूप से हटाते हुए, बैंकों द्वारा, आरईआईटी, आईएनवीआईटी के शेयरों, इकाइयों के बदले दिए जाने वाले ऋण की सीमा को बढ़ाना; और (iii) पूंजी बाज़ार मध्यस्थों (सीएमआई) को ऋण देने के लिए एक बेहतर सिद्धांत
दिनांक 6 फरवरी 2026 के विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज जन सामान्य से टिप्पणियों के लिए निम्नलिखित संशोधन निदेश के मसौदे जारी किए: i) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - ऋण सुविधाएं) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 - टिप्पणी के लिए मसौदा ii) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - संकेन्द्रण जोखिम प्रबंधन) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 - टिप्पणी के लिए मसौदा
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 6 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा डीसीबी बैंक लिमिटेड (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी गैर-कृषि-अंतिम उपयोगों के लिए स्वर्ण आभूषणों और आभूषणों की गिरवी पर दिए गए ऋण संबंधी निदेशों के कतिपय प्रावधानों के अननुपालन के लिए ₹29.60 लाख (उनतीस लाख साठ हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46(4)(i) के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के तहत आरबीआई को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 6 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘स्वयं सहायता समूह सदस्यों संबंधी ऋण सूचना रिपोर्टिंग’ और ‘अपने ग्राहक को जानिए’ संबंधी निदेशों के कतिपय प्रावधानों के अननुपालन के लिए ₹32.50 लाख (बत्तीस लाख पचास हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, प्रत्यय विषयक जानकारी कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 की धारा 23(4) के साथ पठित धारा 25(1)(iii) और बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46(4)(i) और 51(1) के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के तहत आरबीआई को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 10 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा नवी फिंसर्व लिमिटेड (कंपनी) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘वसूली एजेंट’ संबंधी निदेशों के कतिपय प्रावधानों के अननुपालन के लिए ₹3.80 लाख (तीन लाख अस्सी हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58बी(5)(एए) के साथ पठित धारा 58जी(1)(बी) के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: फ़रवरी 27, 2026