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स्वचालित डेटा प्रवाह

बैंकों से भारतीय रिज़र्व बैंक को स्वचालित डेटा प्रवाह (एडीएफ)

भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्वचालित डेटा प्रवाह (एडीएफ) के लक्ष्यों और उद्देश्यों का वर्णन करते हुए अपनी वेबसाइट पर एक दृष्टिकोण पत्र रखा है और बैंकों को स्वचालित डेटा प्रवाह को लागू करने की सूचना दी है। दृष्टिकोण पत्र को होम >> प्रेस विज्ञप्ति >> 11 नवंबर 2010 लिंक के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। बैंक व्यक्तिगत रूप से एडीएफ पर आरबीआई के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।

अपने कई कार्यों में, भारतीय रिज़र्व बैंक बैंकों द्वारा प्रस्तुत किए गए डेटा पर निर्भर करता है और डेटा की गुणवत्ता का बहुत महत्व है। सही और सुसंगत डेटा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए, भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्वचालित डेटा प्रवाह (एडीएफ) पर परियोजना शुरू की है।
एनडीएस-ओएम रिज़र्व बैंक के स्‍वामित्‍व में सरकारी प्रतिभूतियों के सैंकडरी बाजार में सौदे करने के लिए स्‍क्रीन पर आधारित एक इलेक्‍ट्रानिक छद्म आर्डर मैचिंग सिस्‍टम है। इस समय सिस्‍टम की सदस्‍यता बैंकों, प्राथमिक व्‍यापारियों, बीमा कंपनियों, म्‍युच्‍युअल फंड, आदि के लिए उपलब्‍ध है अर्थात् ऐसी इकाइयां जो रिज़र्व बैंक के साथ एसजीएल खाते रखती हैं। ये एनडीएस के प्राथमिक सदस्‍य होते हैं और उन्‍हें रिज़र्व बैंक द्वारा एनडीएस-ओएम का सदस्‍य बनने की अनुमति दी गई है। ऐसे गिल्‍ट अकाउंट होल्‍डर्स जिनके पीएम के साथ गिल्‍ट खाते हैं उन्‍हें एनडीएस-ओएम में अप्रत्‍यक्ष एक्‍सेस की अनुमति दी गई है अर्थात् वे अपने प्राथमिक सदस्‍यों को अपनी ओर से एनडीएस-ओएम सिस्‍टम में आर्डर देने का अनुरोध कर सकते हैं।

“अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्नों’ का यह खण्ड इस विषय पर उपयोगकर्ताओं द्वारा आम तौर पर पूछे जानेवाले प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में देने का एक प्रयास है। तथापि किसी प्रकार का लेनदेन करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों/ नियमों अथवा निदेशों का संदर्भ लिया जाए। इससे संबंधित मूल विनियमावली 31 मार्च 2016 की अधिसूचना सं.फेमा 22(आर)/2016-आरबी के तहत जारी की गई विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में शाखा कार्यालय/ संपर्क कार्यालय/ परियोजना कार्यालय या अन्य कोई कारोबारी स्थान स्थापित करना) विनियमावली, 2016 है। उक्त दिशानिर्देश विदेशी संस्थाओं द्वारा भारत में शाखा कार्यालय (बीओ)/ संपर्क कार्यालय (एलओ)/ परियोजना कार्यालय (पीओ) या अन्य कोई कारोबारी स्थान स्थापित करने से संबन्धित हैं

उत्तर: यदि नामित प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक द्वारा एलओ/बीओ के संबंध में लेखापरीक्षक द्वारा कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नोटिस किए जाते हैं अथवा एलओ/ बीओ एएसी की प्रस्तुति में कोई चूक कर रहा हो, तो रिज़र्व बैंक को तत्काल इस बात की सूचना दी जानी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले इन प्रश्नों में उपयोगकर्ताओं द्वारा सामान्य रूप से पूछे जाने वाले प्रश्नों को आसानी से समझ में आने वाली भाषा में शामिल करने का प्रयास किया गया है। एफएफएमसी, गैर-बैंक एडी श्रेणी II और प्राधिकृत व्यक्तियों की फ्रैंचाइज़ी को प्राधिकृत करने सहित मुद्रा परिवर्तन गतिविधियों के साथ-साथ उनके ग्राहकों/घटकों के साथ विदेशी मुद्रा लेनदेन के संचालन से जुड़े विषय पर निदेश मुद्रा परिवर्तन गतिविधियों पर जारी मास्टर निदेश में दिए गए हैं जिसे समय-समय पर अद्यतन किया जाता है।

रिज़र्व बैंक, वर्तमान में, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 की धारा 10(1) के तहत निम्नलिखित को प्राधिकार जारी करता है:

  • चुनिंदा बैंकों को (प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी- I के रूप में) ताकि वे समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार सभी अनुमति प्राप्त चालू और पूंजी खाता लेनदेन कर सकें

  • चुनिंदा संस्थाओं को (प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी- II के रूप में) ताकि वे निर्दिष्ट गैर-व्यापारिक चालू खाता लेनदेन, संपूर्ण मुद्रा परिवर्तकों के लिए अनुमन्य सभी गतिविधियों और रिज़र्व बैंक द्वारा तय की गयी किसी भी अन्य गतिविधि को संचालित कर सकें

  • चुनिंदा वित्तीय और अन्य संस्थानों को (प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी- III के रूप में) ताकि वे अपने कारोबार/गतिविधियों से जुड़े विशिष्ट विदेशी मुद्रा लेनदेन कर सकें

  • चुनिंदा पंजीकृत कंपनियों को संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (एफएफएमसी) के रूप में ताकि वे विनिर्दिष्ट उद्देश्यों, यथा निजी और कारोबारी विदेश यात्रा, के लिए विदेशी मुद्रा की खरीद और विदेशी मुद्रा की बिक्री कर सकें ।

उत्तर. विधिक संस्था पहचानकर्ता (एलईआई) एक 20-कैरेक्टर का अल्फ़ा-न्यूमेरिक कोड है, जिसका उपयोग दुनिया भर में वित्तीय लेनदेन के लिए पार्टियों की विशिष्ट पहचान करने के लिए किया जाता है। बेहतर जोखिम प्रबंधन के लिए वित्तीय डेटा रिपोर्टिंग सिस्टम की गुणवत्ता और सटीकता में सुधार के लिए इसे लागू किया गया है। इसका उपयोग एक वैश्विक संदर्भ डेटा सिस्टम बनाने के लिए किया जाता है जो किसी भी अधिकार क्षेत्र में वित्तीय लेनदेन में भाग लेने वाली प्रत्येक कानूनी इकाई की विशिष्ट रूप से पहचान करता है। इसे ग्लोबल लीगल एंटिटी आइडेंटिफ़ायर फ़ाउंडेशन (जीएलईआईएफ) द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी स्थानीय परिचालन इकाई (एलोयू), जिसे एलईआई के कार्यान्वयन और उपयोग का समर्थन करने का कार्य सौंपा गया है, से प्राप्त किया जा सकता है। भारत में, लीगल एंटिटी आइडेंटिफ़ायर इंडिया लिमिटेड (एलईआईएल) (https://www.ccilindia-lei.co.in/) से एलईआई प्राप्त किया जा सकता है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा एलईआई के जारीकर्ता के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

वाणिज्यिक बैंकों (आरआरबी को छोड़कर), यूसीबी और एनबीएफसी (एचएफसी सहित) के 'सांविधिक केंद्रीय लेखा परीक्षकों (एससीए) / सांविधिक लेखा परीक्षकों (एसए) की नियुक्ति के लिए दिशानिर्देशों पर आरबीआई द्वारा दिनांक 27 अप्रैल, 2021 का परिपत्र जारी किया गया जिसका मूल उद्देश्य स्वामित्व-तटस्थ विनियमों को स्थापित करना, लेखा परीक्षकों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना, लेखा परीक्षकों की नियुक्तियों में हितों के टकराव से बचना और आरबीआई विनियमित संस्थाओं में लेखा परीक्षा की गुणवत्ता और मानकों में सुधार करना है। ये दिशानिर्देश सभी विनियमित संस्थाओं में सांविधिक लेखा परीक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने में मदद करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि नियुक्तियां समय पर, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से की जाती हैं।

मामले में कुछ स्पष्टीकरण मांगे जाने के मद्देनजर निम्नानुसार अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) और आवश्यक स्पष्टीकरण प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया है

समूह संस्थाएं समूह में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित उन संस्थाओं को संदर्भित करती हैं, जो परिपत्र1 में उल्लिखित समूह संस्था की परिभाषा को पूरा करती हैं। हालांकि, यदि समूह संस्थाओं (जो कि आरबीआई द्वारा विनियमित नहीं हैं) के लिए लेखापरीक्षा/गैर-लेखापरीक्षा कार्य में लगी एक लेखापरीक्षा फर्म को एससीए/एसए के रूप में नियुक्ति के लिए समूह में आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं में से किसी द्वारा विचार किया जा रहा है, तो आरबीआई विनियमित संस्था के बोर्ड/एसीबी/एलएमसी की यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि हितों का कोई टकराव न हो और लेखा परीक्षकों की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो, और इसे बोर्ड/एसीबी/एलएमसी की बैठकों के कार्यवृत्त में उपयुक्त रूप से दर्ज किया जाए।
प्राधिकृत बैंकों द्वारा केंद्र सरकार के पेंशनरों को पेंशन के भुगतान की योजना

सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियोंको पेंशन का भुगतान, जिसमें मूल पेंशन का भुगतान, बढ़ी हुई महंगाई राहत (डीआर), और सरकारों द्वारा समय-समय पर घोषित अन्‍य लाभ शामिल हैं और यह भारत सरकार और राज्‍य सरकारों के संबंधित मंत्रालयों / विभागों द्वारा तैयार किए संबंधित योजना से संचालित‍ होते हैं। इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक ने कुछ अनुदेश जारी किए हैं जो 01 अप्रैल 2025 के एजेंसी बैंकों द्वारा सरकारी पेंशन का संवितरण से संबंधित मास्‍टर परिपत्र में उपलब्‍ध है।भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किए गए अनुदेशों से संबंधित कुछ मुद्दों पर स्पष्टीकरण प्रश्‍न और उत्‍तर के रूप में निम्‍नानुसार है।

हां, बैंकों को केंद्र सरकार के पेंशनरों के मामले में नया खाता खोलने के लिए आग्रह नहीं करना चाहिए । यदि उत्‍तरजीवी जीवनसाथी (पति/पत्‍नी) के लिए पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) में परिवार पेंशन के लिए प्राधिकार उपलब्‍ध है तो इस उद्देश्य से परिवार पेंशनर द्वारा नया खाता खोले बिना वर्तमान खाते में ही परिवार पेंशन जमा किया जाना चाहिए।

उत्तर. परिवर्णी शब्द 'आरटीजीएस' का अर्थ रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट है, जिसे एक ऐसी प्रणाली के रूप में समझाया जा सकता है जहां प्रत्येक लेनदेनसे संबंधित धन अंतरण का (नेटिंग के बिना) भुगतान निरंतर और वास्तविक समय में होता है। 'रीयल टाइम' का अर्थ है निर्देशों के प्राप्त होने के समय ही प्रसंस्करण होना; ' ग्रॉस सेटलमेंट' का अर्थ है कि निधि अंतरण निर्देशों का निपटान अलग-अलग होता है।

उत्तर. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (पीएसएस अधिनियम) की धारा 10(2) के साथ पठित धारा 18 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आरबीआई ने यह मास्टर निदेश जारी किया है।

अमेरिकी डॉलर चेक वसूली के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बैंको द्वारा अपने सामान्य बैंकिंग परिचालन के एक भाग के रूप में दी जाने वाली सेवाओं में से एक है उनके ग्राहकों द्वारा जमा किए गए चेकों की वसूली, इनमें से कुछ चेक ऐसे बैंकों पर आहरित या देय हो सकते हैं जो देश से बाहर स्थित हों ऐसे चेक विदेशी मुद्रा चेक (फारेन करेन्सी चेक ) कहलाते हैं और वर्तमान में ऐसे अधिकांश चेक अमेरिकी डॉलर में मूल्यांकित होते हैं जो संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित बैंकों द्वारा देय होते हैं। जनता को बेहतर जानकारी देने के प्रयोजन से अमेरिकी डॉलर में मूल्यांकित चेकों पर अक्सर पूछे जाने वाले ये प्रश्न तैयार किये गये हैं।

भारतीय रुपए के अलावा अन्य मुद्राओं जैसे यूरो, पाउंड स्टर्लिंग, अमेरिकी डॉलर, येन आदि में मूल्यांकित चेक विदेशी मुद्रा चेक कहलाते हैं। विदेशी मुद्रा चेक में डिमांड ड्राफ्ट, वैयक्तिक चेक, बैंकर्स चेक, कैशियर चेक, ट्रेवलर चेक आदि शामिल होते हैं। चूंकि ऐसे चेक भारत में देय नहीं होते, इसलिए उगाही प्रक्रिया के लिए इन्हें संबंधित देश में भेजने की ज़रुरत होती है।

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पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022

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