गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) - बुनियादी ढांचा वित्तीय कंपनी (इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी)
उत्तर. एनबीएफसी-आईएफसी उन पर लागू विनियामक दिशानिर्देशों (एक्सपोजर मानदंडों सहित) का पालन करते हुए इनविट्स को ऋण दे सकते हैं/ में निवेश कर सकते हैं। एनबीएफसी-आईएफसी अन्य ट्रस्ट फंडों को भी ऋण दे सकते हैं/ में भी निवेश कर सकते हैं, बशर्ते कि उनके द्वारा कुल आस्तियों के न्यूनतम 75% को बुनियादी ढांचा उधार के लिए विनियोजित करने और अन्य लागू विनियमों का अनुपालन किया जाए।
उत्तर: क्रेडिट कार्ड पर ईएमआई कार्यक्रम विशेष रूप से 'क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड पर मास्टर निदेश - जारी करना और आचार, २०२२ के पैरा 6 (बी) (iii)1 द्वारा नियंत्रित होते हैं। इस तरह के लेनदेन डिजिटल ऋण संबंधी दिशानिर्देशों के अंतर्गत नहीं आएंगे। तथापि, क्रेडिट कार्डों पर दिए जाने वाले अन्य ऋण उत्पाद जो मास्टर निदेश के उपर्युक्त पैरा के अंतर्गत कवर/परिकल्पित नहीं हैं, डिजिटल ऋण संबंधी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत निर्धारित नियमों द्वारा अभिशासित होंगे। इसके अलावा, दिशानिर्देश ईएमआई कार्यक्रमों सहित डेबिट कार्ड पर दिए गए सभी ऋणों पर भी लागू होंगे।
उत्तर: उधारदाताओं द्वारा धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत ऋण खातों के हस्तांतरण पर कोई प्रतिबंध नहीं है, जो एआरसी को छोड़कर एमडी-टीएलई के जारी होने से पहले की स्थिति थी। ऋणदाता खंड 73 का अनुपालन करते हुए अपने बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के अनुसार अनुमति प्राप्त हस्तांतरणकर्ताओं को इस तरह के एक्सपोजर को हस्तांतरित कर सकते हैं।
उत्तर: बाज़ार लागत क्या है, कृपया प्रश्न 1 और 3 के सापेक्ष दिये गए जवाब का संदर्भ लें।
ऐसी शिकायतें हैं कि पेंशन भुगतानकर्ता शाखाओं के काउंटर पर जमा किए गए जीवन प्रमाणपत्र गुम हो जाते हैं जिसके कारण मासिक पेंशन के भुगतान में देरी होती है। पेंशनरों द्वारा सामना की जा रही मुश्किलों को कम करने के लिए, एजेंसी बैंकों को निर्देश दिया गया था कि वे जीवन प्रमाणपत्र प्राप्त होने पर अनिवार्य रूप से पावती दें। उनसे यह भी अनुरोध किया गया था कि वे जीवन प्रमाणपत्र की प्राप्ति को अपने सीबीएस में भी दर्ज़ करें और यंत्रजनित पावती भी दें जिससे पावती और रिकार्डों को तत्काल अद्यतन कर देने के दोहरे उद्देश्य की पूर्ति भी हो जाएगी। बैंकों को पेंशनरों द्वारा प्रस्तुत डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र के लिए डिजिटल पावती प्रदान करने का भी निर्देश दिया गया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा स्वीकृत शिक्षा ऋणों सहित अग्रिमों पर ब्याज दरों को अविनियमित कर दिया है। ब्याज दरें बैंकों द्वारा अपने संबंधित निदेशक मंडल के अनुमोदन से निर्धारित की जाती हैं, जो आरबीआई के मास्टर निदेश- भारतीय रिज़र्व बैंक (अग्रिमों पर ब्याज दर) निदेश, 2016, समय-समय पर अद्यतन, में निहित अग्रिमों पर ब्याज दर संबंधी विनियामक दिशानिर्देशों के अधीन है।
उधारकर्ता द्वारा पुनर्भुगतान में चूक भी उधारकर्ता द्वारा ऋण पुनर्भुगतान अनुबंध के महत्वपूर्ण नियमों और शर्तों का एक प्रकार का गैर-अनुपालन है और जुर्माना, यदि लगाया जाता है, तो ऐसे चूक के लिए केवल दंडात्मक शुल्क के रूप में लगाया जा सकता है, न कि दंडात्मक ब्याज के रूप में। इस तरह के दंडात्मक शुल्क उचित होंगे और ऋणदाताओं द्वारा उनके बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से चूक राशि पर ही लगाए जाएंगे। इसके अलावा, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि दंडात्मक शुल्कों का कोई पूंजीकरण न हो यानी ऐसे शुल्कों पर कोई अतिरिक्त ब्याज की गणना न की जाए।
उत्तर: नहीं। चूंकि मुद्रा नाबालिग बच्चे से संबंधित है न कि बैंक कर्मचारी से, अत: इन निदेशों के पैरा 9.1.6 के अनुसार अतिरिक्त ब्याज नहीं दिया जा सकता है।
आरबीआई ओम्बड्समैन आरबीआई द्वारा नियुक्त आरबीआई का एक वरिष्ठ अधिकारी है, जिसे आरबी-आइओएस, 2021 के खंड 3 (1) (छ) के तहत परिभाषित "सेवा में कमी" के विरुद्ध आरई के ग्राहकों की शिकायतों का निवारण करने के लिए नियुक्त किया गया है।
“सेवा में कमी” का अर्थ विनियमित संस्था से वैधानिक रुप से या अन्यथा प्रदान करने के लिए अपेक्षित किसी भी वित्तीय सेवा या उससे संबंधित अन्य सेवा में कमी या अपर्याप्तता से है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राहक को वित्तीय नुकसान या क्षति हो सकती है या नहीं भी हो सकती है।
उत्तर: एक बार सर्वेक्षण शुरू किए जाने के बाद,एमएफ कंपनियों को आरबीआई से Excel प्रारूप में सर्वेक्षण प्रश्नावली (प्रश्नावली-4) की सॉफ्ट कॉपी के साथ एक ईमेल प्राप्त होगा ।कंपनी को इस सर्वेक्षण प्रश्नावली का उपयोग विवरण भरने के लिए करना चाहिए। Excel प्रारूप (.xls प्रारूप) में भरे हुए सर्वेक्षण प्रश्नावली (प्रश्नावली-4) को ईमेल द्वारा mf@rbi.org.in पर भेजा जाना चाहिए। एमएफ सर्वेक्षण प्रश्नावली के साथ कोई अन्य संलग्नक प्रेषित नहीं किया जाना चाहिए।
उत्तर: आईटीईएस सर्वेक्षण दौर की संदर्भ अवधि ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) है।
उत्तर: ऐसे मामलों में जहां न्यायालय के निदेशानुसार एफएमआर वापस लेना/अपराधी का नाम हटाना आवश्यक हो, विनियमित संस्थाएं तत्काल एफएमआर वापस लेने/अपराधी का नाम हटाने की व्यवस्था कर सकती हैं। ऐसे मामलों को बाद में सूचना के लिए डब्ल्यूटीडी स्तर के अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
उत्तर: भारत का कोई निवासी, जो भारत के बाहर अस्थायी दौरे पर गया है, भारत के बाहर किसी भी स्थान (नेपाल और भूतान को छोड़कर) से अपनी भारत वापसी के समय भारत सरकार के मुद्रा नोट तथा भारतीय रिज़र्व बैंक के नोट ला सकता है जिनका मूल्य रु25,000/- से अधिक न हो। कोई व्यक्ति, जो पाकिस्तान तथा बांग्लादेश का नागरिक नहीं है, नेपाल अथवा भूटान से भारत में भारत सरकार के करेंसी नोट और भारतीय रिज़र्व बैंक के नोट (किसी भी मामले में 100 रुपये मूल्यवर्ग से ऊपर के नोटों को छोड़कर) ला सकता है; बशर्ते नेपाल या भूटान से भारत की यात्रा करने वाला व्यक्ति 100 रुपये से अधिक मूल्यवर्ग के नोट 25,000 रुपये की कुल सीमा तक ला सकता है । भारत का दौरा करने वाला भारत के बाहर का निवासी कोई व्यक्ति, जो पाकिस्तान तथा बांग्लादेश का नागरिक नहीं है तथा जो पाकिस्तान तथा बांग्लादेश से न तो आ रहा है और न वहाँ जा रहा है, अगर किसी हवाई अड्डे के माध्यम से भारत में प्रवेश करता है केवल तभी भारत सरकार के मुद्रा नोट तथा भारतीय रिज़र्व बैंक के नोट ला सकता है परंतु उनका मूल्य रु25,000/- से अधिक नहीं होना चाहिए।
उत्तर: कॉरिस्पॉण्डेंट बैंकिंग का आशय किसी मध्यस्थ या एजेंट के रूप में कार्य करना है, जिसमें बैंकों को आपस में तार-अंतरण (वायर ट्रान्सफर) की सुविधा देना, व्यापारिक लेनदेन करना, जमाराशियां स्वीकार करना और दूसरे बैंक की ओर से दस्तावेज़ जुटाना करना, आदि शामिल हैं। घरेलू बैंक आमतौर पर कॉरिस्पॉण्डेंट बैंकों की सेवाओं का उपयोग उन लेनदेनों के लिए करते हैं, जो प्रायः विदेशों में प्रारम्भ होते हैं या ऐसे लेनदेन जिनका अंतिम निपटान विदेशों में होता है। घरेलू बैंक विदेशी वित्तीय बाजारों तक अपनी पहुंच बनाने और विदेशों में शाखाएं खोले बिना अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को सेवा प्रदान करने के लिए कॉरिस्पॉण्डेंट बैंकों का उपयोग करते हैं।
उत्तर. नहीं, यदि किसी आरई का कोई मौजूदा केवाईसी अनुपालक ग्राहक उसी आरई में दूसरा खाता खोलना चाहता है अथवा कोई अन्य उत्पाद/सेवा प्राप्त करना चाहता है, तो उसे कोई केवाईसी दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि उसकी पहचान और/अथवा पते से संबंधित जानकारी में कोई बदलाव न हो।
उत्तर: पात्र जमाकर्ता केवाईसी संबंधी मानदंडों को पूरा करने के पश्चात किसी भी नामित बैंक में स्वर्ण जमा खाता खोल सकता है। सामान्यतया, इस योजना के तहत जमा सीपीटीसी/जीएमएस मोबिलाइजेशन, कलेक्शन एंड टेस्टिंग एजेंट (जीएमसीटीए) में किया जाएगा, जो ग्राहकों की उपस्थिति में उनके सोने की शुद्धता का परीक्षण करेगा और और जमाकर्ता को 995 शुद्धता के मानक सोने की जमा रसीद जारी करेगा और साथ ही, जमा की स्वीकृति के बारें में ग्राहक के संबन्धित बैंक को सूचित करेगा। नामित बैंक जमाकर्ता द्वारा जमा रसीद प्राप्त करने के दिन या सीपीटीसी/जीएमसीटीए में सोना जमा होने के 30 दिनों के भीतर (बावजूद इसके कि जमाकर्ता रसीद प्रस्तुत करता है या नहीं), जो भी पहले आता है, ग्राहक के अल्पावधि बैंक जमा (एसटीबीडी), जैसा कि लागू है, में जमा करेगा।
तत्पश्चात, जमा किए गए सोने को व्यापार योग्य सोने की बिस्कुटों में बदलने की तारीख से या सीपीटीसी/जीएमसीटीए में सोने की प्राप्ति के 30 दिन बाद, जो भी पहले आता है, से जमा पर ब्याज मिलना शुरू हो जाएगा।
उत्तर: पाकिस्तान की नागरिकता/ स्वामित्व वाले व्यक्तियों/ इकाइयों द्वारा खाते खोलने और बांग्लादेश के स्वामित्व की इकाइयों द्वारा खाते खोलने के लिए रिज़र्व बैंक का पूर्व अनुमोदन आवश्यक है।
तथापि, बांग्लादेश की नागरिकता वाले व्यक्ति एनआरओ खाता खोल सकते हैं, बशर्ते ऐसे व्यक्ति(यों) के पास वैध वीज़ा हो और विदेशी नागरिक पंजीकरण कार्यालय (एफआरओ)/ विदेशी नागरिक क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) द्वारा जारी वैध आवासीय परमिट हो।
भारत में निवासी पाकिस्तान/ बांग्लादेश के नागरिक जोकि उन देशों में अल्पसंख्यक समुदायों (हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी तथा ईसाई) से आते हैं, और जिन्हें दीर्घकालिक वीज़ा (एलटीवी) प्रदान किया गया है अथवा एलटीवी के लिए जिनका आवेदन विचाराधीन है, वे किसी प्राधिकृत व्यापारी बैंक के पास केवल एक एनआरओ खाता खोल सकते हैं और वह समय-समय पर अद्यतन की गई 1 अप्रैल 2016 की अधिसूचना सं. फेमा 5(आर)/2016-आरबी में उल्लिखित शर्तों के अधीन होगा। इस प्रकार के एनआरओ खाते खोलना दिनांक 28 मार्च 2019 के एपी (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं.28 द्वारा दिए गए अनुदेश के अनुसार संबंधित प्राधिकृत बैंक द्वारा खोले गए खातों के ब्यौरे तिमाही आधार पर गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करने के अधीन होगा।
प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार के अंतर्गत प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र के हिस्से के रूप में केवल वे क्षेत्र शामिल हैं जो आबादी के बड़े हिस्से, कमजोर वर्गों और रोजगार-प्रधान क्षेत्रों जैसे कृषि, तथा सूक्ष्म और लघु उद्यमों को प्रभावित करते हैं। प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार पर विस्तृत दिशानिर्देश 24 मार्च 2025 के हमारे मास्टर निदेश – भारतीय रिज़र्व बैंक (प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार – लक्ष्य और वर्गीकरण) निदेश, 2025 में उपलब्ध हैं और समय-समय पर अद्यतन किए जाते हैं।
इंटर-ऑपरेबल विनियामक सैंडबॉक्स (आईओआरएस) नवप्रवर्तकों को एक से अधिक वित्तीय क्षेत्र विनियामकों के विनियामकीय दायरे में आने वाले हाइब्रिड वित्तीय उत्पादों/सेवाओं का परीक्षण करने के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है। विभिन्न विनियामकों के साथ अलग-अलग संपर्क करने की आवश्यकता को समाप्त करके, आईओआरएस परीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाता है और वित्तीय पारितंत्र में नवोन्मेष को बढ़ावा देता है।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022