Fair Lending Practice – Penal Charges in Loan Accounts
हाँ। आरई एक उपयुक्त बोर्ड अनुमोदित नीति तैयार कर सकते हैं और दंडात्मक शुल्क की एक उपयुक्त संरचना अपना सकते हैं जो ऋण अनुबंध के महत्वपूर्ण नियमों और शर्तों के गैर-अनुपालन के साथ 'उचित' और 'अनुरूप' हो।
आरबी-आइओएस, 2021 ने प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, भौतिक और ईमेल शिकायतों की प्राप्ति को केंद्रीकृत किया है, इसके दायरे में और अधिक आरई को लाया गया है, शिकायतों के सीमित आधार और ओम्बड्समैन के क्षेत्राधिकार के अंतर को समाप्त कर दिया है और अब सेवा में कमी से संबंधित सभी शिकायतों को आरबी-आइओएस के तहत शामिल किया गया है। शिकायतकर्ता आरई के विरुद्ध सीएमएस पोर्टल https://cms.rbi.org.in/ पर 24x7 ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं या सीआरपीसी को ईमेल / भौतिक रूप में अपनी शिकायत भेज सकते हैं (प्रश्न 16 देखें)। उन्नत सीएमएस पोर्टल के साथ आरबी-आइओएस से शिकायतकर्ता को प्राप्त होने वाले मुख्य लाभ निम्नानुसार हैं:
- सीएमएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया में सरलीकरण;
- सीएमएस पोर्टल/सीआरपीसी पर शिकायत देश में कहीं से भी दर्ज की जा सकती है, चाहे शिकायतकर्ता, आरई या इसमें शामिल शाखा का पता कुछ भी हो;
- देश में कहीं से भी भौतिक/ईमेल शिकायतें दर्ज कराने के लिए एक पता और एक ईमेल;
- ऑनलाइन शिकायत के पंजीकरण पर शिकायतकर्ता को स्वचालित पावती;
- शिकायत की स्थिति हेतु रीयल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा;
- ‘एक राष्ट्र एक ओम्बड्समैन’ दृष्टिकोण से सुविधा.
- सीएमएस पर ही अतिरिक्त दस्तावेजों को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा;
- शिकायत के निर्णय/समापन की सूचना देने वाला विस्तृत पत्र;
- आरबीआई द्वारा प्रदान किए गए निवारण के संबंध में शिकायतकर्ता द्वारा ऑनलाइन और स्वैच्छिक प्रतिपुष्टि प्रस्तुत करने की सुविधा।
उत्तर: नहीं। भले ही किसी कंपनी की खाता बंद करने की अवधि, संदर्भ अवधि (मार्च के अंत) से अलग हो, आईटीईएस सर्वेक्षण की जानकारी कंपनी के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर सर्वेक्षण संदर्भ अवधि के लिए रिपोर्ट की जानी चाहिए।
शिक्षा ऋण से संबंधित सेवा में कमी के संबंध में किसी भी बैंक के विरुद्ध किसी विशिष्ट शिकायत के मामले में, इसे संबंधित बैंक के पास दर्ज किया जा सकता है। यदि एक महीने के भीतर शिकायत का कोई जवाब नहीं मिलता है या बैंक से असंतोषजनक प्रतिक्रिया दी जाती है, तो शिकायत 'रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2021' के तहत दर्ज की जा सकती है। शिकायतें आरबीआई के शिकायत प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) पोर्टल https://cms.rbi.org.in पर ऑनलाइन दर्ज की जा सकती हैं। शिकायतें समर्पित ई-मेल के माध्यम से भी दर्ज की जा सकती हैं या भारतीय रिज़र्व बैंक, चौथी मंजिल, सेक्टर 17, चंडीगढ़ - 160017, में स्थापित 'केंद्रीकृत प्राप्ति और प्रोसेसिंग केंद्र' (सीआरपीसी) को, योजना में दिए गए प्रारूप के अनुसार, भौतिक रूप में भेजी जा सकती हैं।
उत्तर: संशोधित मास्टर निदेशों के अनुसार, बैंकों को आरबीआई को ऐसे प्रमाणपत्र/फ्लैश रिपोर्ट प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है।
उत्तर: खुदरा ई₹ का निर्माण और निर्गमन कागजी मुद्रा जारी करने की व्यवस्था के समान है, अर्थात आरबीआई ई₹ का निर्माण करता है और उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप से बैंकों और गैर-बैंकों को जारी करता है। इसके पश्चात, बैंक और गैर-बैंक अपने ग्राहकों के लिए उनके मोबाइल फोन पर ई₹वॉलेट खोलने और उन्हें ऑनबोर्ड करने की सुविधा प्रदान करने के लिए जिम्मेदार हैं। दिनांक 01 दिसंबर, 2022 से खुदरा खंड (आम जनता के लिए) के अंतर्गत ई₹ जारी करना, वितरण और उपयोग पायलट मोड में लाइव है। देश भर में पहचाने गए पायलट बैंकों और गैर-बैंकों के उपयोगकर्ता और व्यापारी ई₹ का उपयोग कर सकते हैं।
उत्तर. यदि किसी ग्राहक के पास ओवीडी नहीं है, तब भी वह बैंक में 'लघु खाता' खोल सकता है। इस प्रयोजन के लिए, बैंक ग्राहक से एक स्व-सत्यापित फोटोग्राफ प्राप्त करेगा और बैंक का नामित अधिकारी अपने हस्ताक्षर से प्रमाणित करेगा कि खाता खोलने वाले व्यक्ति ने उसकी उपस्थिति में अपने हस्ताक्षर अथवा अंगूठे का निशान लगाया है। लघु खाता प्रारंभ में बारह महीने की अवधि के लिए चालू रहेगा और यह केवाईसी पर मास्टर निदेश के पैरा 23 के तहत दी गई शर्तों के अधीन है।
उत्तर: दंड से संबंधित प्रावधान इन निदेशों के पैरा 15 में निहित हैं। बैंकों द्वारा उनकी व्यापक बोर्ड अनुमोदित नीति के अनुसार समयपूर्व आहरण एवं आंशिक समयपूर्व आहरण की विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की जाती है।
उत्तर: भारत सरकार द्वारा दिनांक 25 मार्च 2025 की प्रेस विज्ञप्ति आईडी 2115009 द्वारा जीएमएस के मध्यम और दीर्घावधि सरकारी जमा (एमएलटीजीडी) घटकों को समाप्त कर दिया गया है। तदनुसार, नवीनीकरण सहित एमएलटीजीडी जुटाना 26 मार्च 2025 से बंद कर दिया गया है। जीएमएस के तहत एसटीबीडी से संबंधित प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं है।
इस पहल में कई विनियामकों के बीच सहयोग शामिल है:
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भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) – बैंकिंग और भुगतान प्रणालियों हेतु
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) – प्रतिभूति बाज़ारों हेतु
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भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई)– बीमा उत्पादों के लिए
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पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए)- पेंशन से संबंधित नवोन्मेषों हेतु (हालांकि पीएफ़आरडीए के पास एक अलग विनियामक सैंडबॉक्स नहीं है, लेकिन यह इंटर ऑपरेबल विनियामक सैंडबॉक्स (आईओआरएस) का एक हिस्सा है।
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अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफ़एससीए) – अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों में फिनटेक इकाई के लिए फ्रेमवर्क के अनुलग्नक I Framework for FinTech Entity in the International Financial Services Centres में निर्दिष्ट डोमेन क्षेत्रों में परीक्षण के लिए गुजरात अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय टेक-सिटी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (GIFT IFSC) का एकीकृत विनियामक प्राधिकरण।
उत्तर: म्युचुअल फंड कंपनियां प्रत्येक वर्ष 15 जुलाई या उससे पहले प्रश्नावली-4 (Excel प्रारूप) के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तुत कर सकती हैं।
उत्तर: फेमा, 1999 के तहत उल्लंघनों के शमन के लिए आवेदन करते समय आवेदनकर्ता से अपेक्षित है कि वह निर्धारित फॉर्मेट में आवेदन पत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, बाह्य वाणिज्यिक उधार, पारदेशीय प्रत्यक्ष निवेश और शाखा कार्यालय/ संपर्क कार्यालय, यथालागू, से संबंधित अनुबंधों (उपर्युक्त प्रश्न 4 के उत्तर में किए गए उल्लेख के अनुसार उक्त अनुबंध ‘निदेश- फेमा 1999 के तहत उल्लंघनों का शमन’ में उपलब्ध हैं) के अनुसार ब्योरा दें और साथ में इस आशय का एक वचन-पत्र कि वे प्रवर्तन निदेशालय की जाँच के अधीन नही हैं, निरस्त चेक की प्रतिलिपि तथा संस्था के बहिर्नियम भी संलग्न किए जाएं। रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत किए गए आवेदन में संपर्क का ब्योरा अर्थात आवेदक/ प्राधिकृत व्यक्ति या आवेदक के प्रतिनिधि का नाम, टेलीफोन/ मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी भी दिया जाए।
सीटीएस को मूल रूप से तीन अलग-अलग भौगोलिक सीटीएस ग्रिड्स के साथ लागू किया गया था, जो क्रमशः नई दिल्ली, चेन्नई और मुंबई में 1 फरवरी 2008, 24 सितंबर 2011 और 27 अप्रैल 2013 से प्रभाव में आए। समय के साथ, देश भर के सभी स्थानों को इन तीनों ग्रिड्स में से किसी एक के दायरे में लाया गया। पूरे चेक मात्रा के सीटीएस में माइग्रेशन के बाद, पारंपरिक चेक समाशोधन तंत्र को देशभर में बंद कर दिया गया है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि उनके सभी शाखाएँ सीटीएस से जुड़ी हों। 13, तीनों ग्रिड्स को मिलाकर एक राष्ट्रीय ग्रिड का निर्माण किया गया, जिसे नेशनल ग्रिड क्लियरिंग हाउस (एनजीसीएच), चेन्नई द्वारा प्रबंधित किया जाता है जो अक्तूबर 2023 से प्रभावी है।
हाँ। किसी विशेष ऋण/उत्पाद श्रेणी के भीतर दंडात्मक शुल्क की संरचना उधारकर्ता के संविधान के बावजूद एक समान होनी चाहिए।
Ans: In terms of MD-TLE dated September 24, 2021, Primary (Urban) Co-operative Banks (PUCBs), State Co-operative Banks (StCBs) and Central Co-operative Banks (CCBs) have been recognised as eligible transferors of stressed loans. The relevant provisions of circular “Guidelines on Sale of Financial Assets to Securitisation Company/Reconstruction Company (SC/RC) by Multi State Urban Cooperative Banks’ dated March 28, 2014, in terms of which only multistate cooperative banks could sell stressed assets to ARCs have been repealed. Accordingly, all cooperative banks are permitted to transfer stressed assets to ARCs in compliance with the provisions of the MD-TLE and other extant regulatory instructions.
उत्तर. 01 जुलाई 2019 से, आरबीआई ने आरटीजीएस लेनदेन के लिए अपने द्वारा लगाए गए प्रसंस्करण शुल्क को माफ कर दिया है। बैंक अपने ग्राहकों को यह लाभ दे सकते हैं।
आरटीजीएस प्रणाली के माध्यम से धन हस्तांतरण की पेशकश के लिए बैंकों द्वारा लगाए गए सेवा शुल्क को युक्तिसंगत बनाने की दृष्टि से, शुल्कों का एक व्यापक ढांचा निम्नानुसार अनिवार्य किया गया है:
अ) आवक लेनदेन - नि: शुल्क, कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
ब) बाहरी लेनदेन - ₹ 2,00,000/- से ₹ 5,00,000/-: ₹ 25/- से अधिक नहीं (कर को छोड़कर, यदि कोई हो)
₹ 5,00,000/- से अधिक: ₹ 50 से अधिक नहीं (कर को छोड़कर, यदि कोई हो)
बैंक कम दर चार्ज करने का निर्णय ले सकते हैं लेकिन आरबीआई द्वारा निर्धारित दरों से अधिक शुल्क नहीं ले सकते।
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निर्दिष्ट तारीख के लिए सूचकांक अनुपात की गणना हेतु, कैलेंडर माह के पहले दिन के लिए और आगामी कैलेंडर माह के पहले दिन प्रतिदिन ‘संदर्भित डबल्यूपीआई’ का प्रयोग करके ‘संदर्भित डबल्यूपीआई’’ का रैखिक रूप से अंतर्वेशन किया जाएगा।
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किसी भी दिन के लिए संदर्भित डबल्यूपीआई की गणना के लिए फार्मूला निम्न है:

[Ref WPIM = Ref WPI for the first day of the calendar month in which Date falls, Ref WPIM+1 = Ref WPI for the first day of the calendar month following the settlement date, D = Number of days in month (e.g. 31 days in August), and t= settlement date (e.g. August 6)]
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अंतर्वेशन के माध्यम से गणना किए गए प्रतिदिन संदर्भित डबल्यूपीआई का उदाहरण निम्न है:
| दिनांक | संदर्भित डबल्यूपीआई (दी गई) | टी-1 | डी | संदर्भित डबल्यूपीआई (अंतर्वेशन) |
| 1-मई-13 | 168.8 | |||
| 2-मई-13 | 1 | 31 | 168.85 | |
| 3-मई-13 | 2 | 31 | 168.90 | |
| 4-मई-13 | 3 | 31 | 168.95 | |
| 5-मई-13 | 4 | 31 | 168.99 | |
| 6-मई-13 | 5 | 31 | 169.04 | |
| 7-मई-13 | 6 | 31 | 169.09 | |
| 8-मई-13 | 7 | 31 | 169.14 | |
| 9-मई-13 | 8 | 31 | 169.19 | |
| 10-मई-13 | 9 | 31 | 169.24 | |
| 11-मई-13 | 10 | 31 | 169.28 | |
| 12-मई-13 | 11 | 31 | 169.33 | |
| 13-मई-13 | 12 | 31 | 169.38 | |
| 14-मई-13 | 13 | 31 | 169.43 | |
| 15-मई-13 | 14 | 31 | 169.48 | |
| 16-मई-13 | 15 | 31 | 169.53 | |
| 17-मई-13 | 16 | 31 | 169.57 | |
| 18-मई-13 | 17 | 31 | 169.62 | |
| 19-मई-13 | 18 | 31 | 169.67 | |
| 20-मई-13 | 19 | 31 | 169.72 | |
| 21-मई-13 | 20 | 31 | 169.77 | |
| 22-मई-13 | 21 | 31 | 169.82 | |
| 23-मई-13 | 22 | 31 | 169.86 | |
| 24-मई-13 | 23 | 31 | 169.91 | |
| 25-मई-13 | 24 | 31 | 169.96 | |
| 26-मई-13 | 25 | 31 | 170.01 | |
| 27-मई-13 | 26 | 31 | 170.06 | |
| 28-मई-13 | 27 | 31 | 170.11 | |
| 29-मई-13 | 28 | 31 | 170.15 | |
| 30-मई-13 | 29 | 31 | 170.20 | |
| 31-मई-13 | 30 | 31 | 170.25 | |
| 1-जून-13 | 170.3 |
उत्तर: हां एनबीएफसी और एनबीएफसी-आईएफसी को आईडीएफ प्रायोजित करने के लिए रिजर्व बैंक से पूर्वानुमोदन लेने की जरूरत है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने धन के हस्तांतरण को सक्षम करने के लिए विभिन्न प्रकार की भुगतान प्रणालियों को अधिकृत किया है। भारत में उपलब्ध विभिन्न भुगतान प्रणालियों का अवलोकन प्राप्त करने के लिए आप भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर निम्नलिखित लिंक का संदर्भ ले सकते हैं:
उत्तर: हाँ, इसकी अनुमति है। 1 जुलाई 2016 से यूरो में किए जाने वाले व्यापार लेनदेन सहित सभी पात्र चालू खाता लेनदेन का अगली सूचना जारी किए जाने तक एसीयू व्यवस्था के बाहर निपटान करने की अनुमति है।
1भारत के बाहर निवास करने वाला कोई व्यक्ति भारतीय मुद्रा, प्रतिभूति अथवा भारत में स्थित किसी चल संपत्ति को धारित, स्वाधिकृत, अंतरित अथवा में निवेश कर सकता है यदि ऐसी मुद्रा, प्रतिभूति अथवा संपत्ति को ऐसे व्यक्ति द्वारा तब अर्जित, धारित क्यीअथवा स्वाधिकृत किया गया था जब वह भारत का निवासी था अथवा उसने उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति से विरासत में पाया हो जो भारत में निवास करता था।
2भारत में निवास करने वाले व्यक्ति ”को फेमा 1999 की धारा 2 (v) में निम्नानुसार परिभाषित किया गया है:
(i) पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान एक सौ बयासी दिन से अधिक दिन के लिए भारत में निवास करने वाला व्यक्ति लेकिन इसमें निम्नलिखित शामिल नहीं हैं:
(ए) कोई व्यक्ति जो निम्नलिखित करणों से भारत के बाहर गया हो अथवा जो भारत के बाहर रेहता हो, दोनों मामले में:
(ए) भारत के बाहर नौकरी करने के लिए अथवा नौकरी मिल जाने पर, अथवा
(बी) भारत के बाहर कोई कारोबार करने अथवा भारत के बाहर कोई आजीविका करने, अथवा
(सी) कोई अन्य प्रयोजन से, जिन परिस्थितियों में उसने किसी अनिश्चित अवधि के लिए अपने भारत के बाहर रहने के इरादे को निर्दिष्ट किया हो।
(बी) कोई व्यक्ति जो निम्नलिखित कारणों से भारत में आया हो अथवा रेहता हो, दोनों मामलों में से अन्यथा
(ए) भारत में नौकरी करने के लिए अथवा मिल जाने पर, अथवा
(बी) भारत में कोई कारोबार करने अथवा भारत मे कोई आजीविका करने, अथवा
(सी) कोई अन्य प्रयोजन से, जिन परिस्थितियों में उसने किसी अनिश्चित अवधि के लिए अपने भारत में रहने के इरादे को निर्दिष्ट किया हो।
(ii) भारत में पंजीकृत अथवा निगमित कोई व्यक्ति अथवा निगमित निकाय;
(iii) भारत एक बाहर निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा भारत में स्वाधिकृत अथवा नियंत्रित कोई कार्यालय, शाखा अथवा एजन्सि
राज्य/केन्द्र सरकार के लेनदेन करने वाली मान्यता प्राप्त बैकों को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा पारिश्रमिक अदा किया जाता है। ऐसे पारिश्रामिक को एजेंसी कमीशन कहा जाता है। वर्तमान में (1 जुलाई 2019) से लागू एजेंसी कमीशन की दरें निम्नानुसार हैं :-
| क्रम सं. | लेनदेन का प्रकार | इकाई | संशोधित दर | |
| क | (i) | प्राप्तियां – भौतिक मोड | प्रति लेनदेन | ₹ 40/- |
| (ii) | प्राप्तियां-ई-मोड * | प्रति लेनदेन | ₹ 9/- | |
| ख | (i) | भुगतान - पेंशन | प्रति लेनदेन | ₹ 75/- |
| (ii) | भुगतान - पेंशन के अलावा | प्रति ₹ 100 टर्नओवर | 6.5 पैसे | |
| * इस संदर्भ में, यह नोट करें कि उपरोक्त टेबल में 'प्राप्तियां -ई-मोड' जोकि क्रम संख्या क(ii) के सामने दर्शाई गई हैं, वे ऐसे लेनदेन हैं जो कि इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से प्रेषक के बैंक खाते से निधियों के प्रेषण के रूप में है और ऐसे सभी लेनदेनों में नकद राशि/लिखतों की भौतिक प्राप्ति शामिल नहीं है। | ||||
उत्तर: विदेश यात्रा से वापस आने पर यात्रियों को मुद्रा नोट तथा यात्री चेकों के रूप में धारित खर्च न की गई विदेशी मुद्रा को वापस आने की तारीख से 180 दिन के भीतर अभ्यर्पित कर देनी चाहिए। तथापि वे भविष्यकालीन उपयोग के लिए विदेशी मुद्रा नोटों अथवा यात्री चेकों के रूप में 2000 अमरीकी डॉलर के रूप में अथवा अपने निवासी विदेशी मुद्रा (घरेलू)[आरएफ़सी(घरेलू)]खातों में जमा कर विदेशी मुद्रा रख सकते हैं।
उत्तर : (i) सामान्य बैंकिंग चैनल के मार्फत प्राप्त आवक विप्रेषण जिनमें खाताधारक द्वारा विदेशी मुद्रा में लिए गए ऋण की प्राप्त राशि या विदेश से प्राप्त निवेश राशि या विशिष्ट जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए प्राप्त राशि शामिल नहीं है;
(ii) सौ प्रतिशत निर्यात उन्मुख किसी इकाई या (ए) निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र अथवा (बी) सॉफ्टवेयर टेक्नॉलॉजी पार्क अथवा (सी) ईलेक्ट्रानिक हार्डवेयर टेक्नालाजी पार्क की किसी इकाई द्वारा ऐसी ही इकाइयों अथवा घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र (DTA) की इकाई को किए गए माल की आपूर्ति के लिए विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान;
(iii) देशी प्रशुल्क क्षेत्र (DTA) की किसी इकाई द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थित किसी इकाई को माल की आपूर्ति के लिए विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान;
(iv) प्रति (काउंटर) व्यापार के प्रयोजन हेतु प्राधिकृत व्यापारी के पास रखे गए खाते से निर्यातक को प्राप्त भुगतान। (प्रति (काउंटर) व्यापार वह व्यवस्था है, जिसमें रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार भारत से निर्यातित माल के मूल्य पर भारत में आयातित माल के मूल्य का समायोजन समाविष्ट है);
(v) माल अथवा सेवाओं के निर्यात के संबंध में निर्यातक द्वारा प्राप्त अग्रिम विप्रेषण;
(vi) भारत में प्राधिकृत व्यापारी के पास Bank for Foreign Economic Affairs, Moscow के खाते में धारित अमरीकी डॉलर में स्टेट क्रेडिट की चुकौती निरूपित करने वाली निधियों में से भारत से माल और सेवाओं के निर्यात के लिए प्राप्त भुगतान;
(vii) किसी व्यावसायिक (प्रोफेशनल) द्वारा अपनी व्यक्तिगत क्षमता में सेवाएं प्रदान करने के लिए प्राप्त निदेशक की फीस, परामर्श फीस, व्याख्यान फीस, मानदेय तथा इसी प्रकार के अन्य अर्जनों सहित व्यावसायिक अर्जन;
(viii) खाते से पूर्व में आहरित अप्रयुक्त विदेशी मुद्रा पुन: जमा करना;
(ix) EEFC खाता धारक निर्यातक द्वारा खाता धारक के आयातक ग्राहक को प्रदान किए गए व्यापार संबंधी ऋण/ अग्रिम (मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुपालन के अधीन) की चुकौती निरुपित करने वाली राशि; और
(x) भारत सरकार के विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड द्वारा अनुमोदित प्रायोजित एडीआर/ जीडीआर योजना के तहत निवासी खाता धारक द्वारा धारित शेयरों के एडीआर्स/ जीडीआर्स में रूपांतरण पर प्राप्त विनिवेश आगम राशि।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022