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आरबीआई ने संशोधन संबंधी निदेश/ परिपत्र जारी किए

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने आज सात निदेश/परिपत्र जारी किए, जिनमें बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं पर लागू मौजूदा निदेश /परिपत्रों में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। इनमें से तीन संशोधन तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएंगे (भाग ए), जबकि शेष चार संशोधनों पर जनता से सुझाव मांगे गए हैं (भाग बी)।

इन प्रस्तावों की पूरी जानकारी निम्नानुसार है।

क. 1 अक्तूबर 2025 से लागू होने वाले निदेश

1. भारतीय रिज़र्व बैंक (अग्रिम पर ब्याज दर) (संशोधन निदेश), 2025

दिनांक 3 मार्च 2016 के भारतीय रिज़र्व बैंक (अग्रिम पर ब्याज दर) निदेश, 2016 के अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) को सभी अस्थिर दर वाले व्यक्तिगत या खुदरा ऋण (आवास, ऑटो, आदि)को बेंचमार्क करना होगा और एमएसएमई को दिए गए अस्थिर दर वाले ऋणों के लिए एक बाहरी बेंचमार्क निर्धारित करना होगा। बैंक बाहरी बेंचमार्क पर कितना स्प्रेड रखना है, यह तय करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन ऋण जोखिम प्रीमियम को छोड़कर, स्प्रेड के सभी घटकों में तीन वर्ष में केवल एक बार ही परिवर्तित किया जा सकता है। इसके अलावा, समीकृत मासिक किश्त (ईएमआई) आधारित व्यक्तिगत ऋण के मामले में, ईएमआई आधारित व्यक्तिगत ऋण पर अस्थायी ब्याज दर रीसेट करने संबंधी दिनांक 18 अगस्त 2023 के परिपत्र के अनुसार विनियमित संस्थाओं को ब्याज दर रीसेट करते समय उधारकर्ताओं को नियत दर पर स्विच करने का एक अनिवार्य विकल्प देना होगा।

उपरोक्त संशोधित निदेशों के अनुसार, यह प्रस्ताव है कि उधारकर्ताओं को लाभ पहुँचाने और ऋणदाताओं को अधिक लचीलापन प्रदान करने के लिए, उपरोक्त प्रावधानों में संशोधन किया जाए।

  1. बैंक तीन वर्ष से पहले, उधारकर्ता के लाभ के लिए अन्य स्प्रेड घटकों को कम कर सकते हैं;
  2. बैंक अपनी इच्छानुसार, रीसेट के समय उनकी इच्छानुसार नियत दर पर स्विच करने का विकल्प दे सकते हैं।

2. भारतीय रिज़र्व बैंक (स्वर्ण और चांदी संपार्शविक के एवज उधार देने संबंधी) - (प्रथम संशोधन) निदेश, 2025

सामान्यतः बैंकों को किसी रूप में स्वर्ण/चांदी खरीदने के लिए या मूल स्वर्ण /चांदी को गिरवी रखकर उधार देने से निषिद्ध किया गया है। हालांकि, ज्वेलर्स को कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करने के लिए अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) को एक कार्व-आउट दिया गया है।

प्रस्तावित संशोधन निदेशों के अनुसार, निम्नलिखित प्रस्तावित है:

  1. ऐसे उधारकर्ताओं की किसी भी आवश्यकता आधारित कार्यशील पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए कार्व-आउट की सुविधा बढ़ाना, जो अपने विनिर्माण या औद्योगिक प्रसंस्करण गतिविधियों में कच्चे माल या इनपुट के रूप में स्वर्ण का उपयोग करते हैं।
  2. टियर 3 और टियर 4 शहरी सहकारी बैंकों को भी कार्यशील पूंजी ऋण देने की अनुमति प्रदान करना जैसे एससीबी के लिए प्रस्तावित है।

उपरोक्त अनुदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक (स्वर्ण और चाँदी संपार्शविक के एवज उधार) निदेश, 2025 के अंतर्गत उचित रूप से शामिल किया जाएगा।

 

3. भारतीय रिज़र्व बैंक (बासेल III पूंजी विनियमन - अतिरिक्त टियर 1 पूंजी में स्थायी ऋण लिखत (पीडीआई) –विदेशी मुद्रा में अंकित लिखतों//विदेशी रुपया में अंकित बॉन्ड के लिए पात्र सीमा निदेश, 2025

रिज़र्व बैंक ने “बासेल III पूंजी विनियमन - अतिरिक्त टियर 1 पूंजी में स्थायी ऋण लिखत (पीडीआई) –विदेशी मुद्रा में अंकित लिखतों//विदेशी रुपया में अंकित बॉन्ड के लिए पात्र सीमा निदेश, 2025” विषय पर 4 अक्तूबर 2021 दिनांकित परिपत्र DOR.CAP.REC.No.56/21.06.201/2021-22 जारी किया था जो अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) पर लागू होता है और इसमें विदेशी मुद्रा में अंकित पीडीआई /विदेशी रुपया में अंकित बॉन्ड के लिए पात्र सीमा निर्धारित की गई है। ये अनुदेश “बासेल III पूंजी विनियमन” पर 1 अप्रैल 2025 के मास्टर परिपत्र DOR.CAP.REC.2/21.06.201/2025-26 के अनुबंध 4 के पैराग्राफ 1.16 के उप-पैराग्राफ (ii) में भी शामिल किए गए हैं।

रिज़र्व बैंक ने आज “भारतीय रिज़र्व बैंक (बासेल III पूंजी विनियमन - अतिरिक्त टियर 1 पूंजी में स्थायी ऋण लिखत (पीडीआई) –विदेशी मुद्रा में अंकित लिखतों//विदेशी रुपया में अंकित बॉन्ड के लिए पात्र सीमा निदेश, 2025” जारी किया है जो विदेशी मुद्रा में अंकित पीडीआई /विदेशी रुपया में अंकित बॉन्ड के लिए मौजूदा पात्र सीमा को संशोधित करता है, जिससे बैंकों को विदेशी बाजारों के माध्यम से अपनी टियर 1 पूंजी को बढ़ाने के लिए अधिक अवसर मिलेंगे।

बी. निदेश/परिपत्र जो सार्वजनिक प्रतिक्रिया के लिए मसौदे के रूप में जारी किए जा रहे हैं

4. भारतीय रिज़र्व बैंक (स्वर्ण धातु ऋण) निदेश, 2025

स्वर्ण धातु ऋण (जीएमएल) योजना दिनांक 31 दिसंबर 1998 के 'स्वर्ण ऋण' संबंधी परिपत्र के माध्यम से शुरू की गई थी ताकि आभूषण निर्यातकों को बैंकों द्वारा आयातित कच्चे स्वर्ण के रूप में कार्यशील पूंजी वित्तपोषण की सुविधा प्रदान की जा सके। इस योजना को पिछले कुछ वर्षों में उदार बनाया गया है, जिसमें, अन्य बातों के साथ-साथ, बैंकों को घरेलू आभूषण निर्माताओं को जीएमएल प्रदान करने की अनुमति दी गई है, तथा स्वर्ण मौद्रीकरण योजना के अंतर्गत जुटाई गई स्वर्ण जमाराशियों से भी ऐसा किया जा रहा है।

योजना को और अधिक उदार बनाने, आभूषण उद्योग में पात्र उधारकर्ता वर्गों पर लागू मौजूदा विनियमों में सामंजस्य स्थापित करने और बैंकों को अपनी जीएमएल नीति तैयार करने हेतु अधिक परिचालनात्मक स्वतंत्रता प्रदान करने के उद्देश्य से, जीएमएल पर व्यापक निदेशों का एक मसौदा जारी किया जा रहा है। इन निदेशों का मसौदा, इसे और अधिक सिद्धांत-आधारित बनाने के अलावा, मौजूदा जीएमएल योजना में निम्नलिखित प्रमुख संशोधनों को शामिल करता है:

  1. बैंक निर्यातकों के अलावा ज्वेलर्स को दी जाने वाली जीएमएल के लिए पुनर्भुगतान अवधि निर्धारित कर सकते हैं, जो 270 दिनों (वर्तमान 180 दिनों से) की संशोधित अधिकतम सीमा के अधीन होगी;
  2. मौजूदा दिशानिर्देश, आभूषण निर्यातकों और घरेलू आभूषण निर्माताओं के लिए जीएमएल के विस्तार की अनुमति देते हैं। आभूषण निर्माण की आउटसोर्सिंग के लिए घरेलू गैर-निर्माताओं को भी जीएमएल की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

5. वृहत् एक्सपोज़र ढांचा (संशोधन परिपत्र), 2025; और अंतर- समूह लेनदेन और एक्सपोज़र प्रबंधन पर दिशानिर्देश (संशोधन परिपत्र), 2025

दिनांक 3 जून 2019 के वृहत् एक्सपोज़र ढांचा (एलईएफ) पर परिपत्र, दिनांक 9 सितंबर 2021 के वृहत् एक्सपोज़र ढांचा - ऑफसेटिंग के लिए ऋण जोखिम न्यूनीकरण (सीआरएम) - भारत में विदेशी बैंक शाखाओं के अपने प्रधान कार्यालय के साथ गैर-केंद्रीय रूप से समाशोधित व्युत्पन्न लेनदेन (एलईएफ़-सीआरएम) और दिनांक 11 फरवरी 2014 के अंतर- समूह लेनदेन और एक्‍सपोजर के प्रबंधन पर दिशानिर्देश संबंधी परिपत्र, बैंक के अपने प्रतिपक्षकारों के साथ-साथ अपने समूह संस्थाओं के लिए एक्सपोजर पर विवेकपूर्ण मानदंड निर्धारित करते हैं।

उक्त दोनों संशोधन परिपत्र, भारत में शाखाओं के रूप में कार्यरत विदेशी बैंकों के ऋणों के विवेकपूर्ण उपचार के कुछ पहलुओं को स्पष्ट करने तथा एलईएफ और आईटीई के अंतर्गत कुछ विवेकपूर्ण मानदंडों को संरेखित करने के लिए मौजूदा मानदंडों में संशोधन करते हैं। प्रमुख परिवर्तनों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. विदेशी बैंकों की भारतीय शाखाओं का उनके प्रधान कार्यालय और प्रधान कार्यालय की शाखाओं/सहायक शाखाओं के प्रति एक्सपोज़र, केवल एलईएफ के लिए गिना जाएगा, आईटीई के लिए नहीं। ऐसे एक्सपोज़र, जब किसी केंद्रीय प्रतिपक्षकार के माध्यम से समाशोधित किए जाते हैं, सकल आधार पर विचार किए जाएँगे।
  2. किसी विदेशी बैंक की भारतीय शाखा द्वारा आरबीआई के साथ एक विशेष व्यवस्था के अंतर्गत, प्रधान कार्यालय से प्राप्त और नकद/ भारमुक्त अनुमोदित प्रतिभूतियों के रूप में रखी गई धनराशि को, ऐसी शाखाओं के प्रधान कार्यालय के साथ गैर-केंद्रीकृत समाशोधित डेरिवेटिव लेनदेन की भरपाई के लिए सीआरएम के रूप में माना जाता है। किसी विदेशी बैंक शाखा के अपने प्रधान कार्यालय में किसी भी एक्सपोज़र पर सीआरएम लाभ का विस्तार करने का प्रस्ताव है।
  3. आईटीई के अंतर्गत एक्सपोज़र की गणना को एलईएफ के अंतर्गत गणना के अनुरूप बनाने का प्रस्ताव है, अर्थात, तुलन-पत्रेतर एक्सपोज़रों की ऋण समतुल्यता तय करने के लिए ऋण रूपांतरण कारक का लाभ, और प्रतिपक्षकार के लिए एक्सपोज़रों को ऑफसेट करने के लिए ऋण जोखिम शमन तकनीक, अब से आईटीई एक्सपोज़रों के लिए अनुमति दी जाएगी।
  4. आईटीई सीमा, जो वर्तमान में चुकता पूंजी और आरक्षित निधियों से जुड़ी है, को बैंकों की टियर-1 पूंजी से जोड़ने का प्रस्ताव है।

6. भारतीय रिज़र्व बैंक (साख सूचना रिपोर्टिंग) (पहला संशोधन) निदेश, 2025 का मसौदा

मास्टर निदेश - भारतीय रिज़र्व बैंक (साख सूचना रिपोर्टिंग) निदेश, 2025, ऋण संस्थाओं (सीआई) द्वारा साख सूचना कंपनियों (सीआईसी) को पाक्षिक या उससे कम अंतराल पर साख सूचना प्रस्तुत करना अनिवार्य करता है। ऋण हामीदारी प्रक्रियाओं में साख सूचना रिपोर्टों पर सीआई की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए, यह आवश्यक है कि सीआईसी द्वारा प्रदान की जाने वाली साख सूचना रिपोर्ट (सीआईआर) में नवीनतम जानकारी शामिल हो। तदनुसार, मास्टर निदेश - भारतीय रिज़र्व बैंक (साख सूचना रिपोर्टिंग) निदेश, 2025 के प्रावधानों जो सीआई द्वारा सीआईसी को साख सूचना की रिपोर्टिंग की आवृत्ति से संबंधित हैं, की समीक्षा की गई।

सीआई द्वारा सीआईसी को ऋण सूचना प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को साप्ताहिक में परिवर्तित करने का प्रस्ताव है। संशोधनों के मसौदे में सीआई द्वारा त्वरित डेटा प्रस्तुति और त्रुटि सुधार की सुविधा के लिए उपाय भी अनिवार्य किए गए हैं। इसके अलावा, सीआईसी द्वारा साख सूचना के एकत्रीकरण को सुगम बनाने के लिए, उपभोक्ता खंड के रिपोर्टिंग प्रारूप में एक अलग फ़ील्ड में केंद्रीय अपने ग्राहक को जानिए (सीकेवाईसी) संख्या दर्ज करने का प्रस्ताव है।

बैंकों, बाज़ार सहभागियों और अन्य इच्छुक पक्षों से 20 अक्तूबर 2025 तक मसौदा निदेशों/ परिपत्रों के मसौदों पर टिप्पणियाँ आमंत्रित हैं। टिप्पणियाँ/प्रतिक्रियाएँ रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध 'कनेक्ट टू रेगुलेट' खंड के अंतर्गत दिए गए लिंक के माध्यम से प्रस्तुत की जा सकती हैं। वैकल्पिक रूप से, टिप्पणियाँ प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक, विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक, 12वीं/13वीं मंजिल, शहीद भगत सिंह मार्ग, फोर्ट, मुंबई - 400 001 को या ईमेल द्वारा भेजी जा सकती हैं।

(पुनीत पंचोली)  
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/1197

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