अधिसूचनाएं
सीएसडी.बीओएस. 4638 /13.01.01/2006-07 मई 24, 2007 बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 35क द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और दिनांक 26 दिसंबर, 2005 की अपनी अधिसूचना संदर्भ आरपीसीडी.बीओएस.सं.441/13.01.01/2005-06 में आंशिक आशोधन करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक एतद् द्वारा इसके संलग्नक में विनिर्दिष्ट सीमा तक बैंकिंग ओम्बड्समैन योजना, 2006 में संशोधन करता है। ये संशोधन तत्काल प्रभावी होंगे। रिज़र्व बैंक इसके द्वारा निदेश देता है कि सभी वाणिज्य बैंक, क
सीएसडी.बीओएस. 4638 /13.01.01/2006-07 मई 24, 2007 बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 35क द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और दिनांक 26 दिसंबर, 2005 की अपनी अधिसूचना संदर्भ आरपीसीडी.बीओएस.सं.441/13.01.01/2005-06 में आंशिक आशोधन करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक एतद् द्वारा इसके संलग्नक में विनिर्दिष्ट सीमा तक बैंकिंग ओम्बड्समैन योजना, 2006 में संशोधन करता है। ये संशोधन तत्काल प्रभावी होंगे। रिज़र्व बैंक इसके द्वारा निदेश देता है कि सभी वाणिज्य बैंक, क
आरबीआइ/2006-07/377 बैंपविवि. सं. डीआइआर. बीसी. 93/13.03.00/2006-07 7 मई 2007 17 वैशाख 1929 (शक) सभी वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) महोदयबैंकों द्वारा अत्यधिक ब्याज लगाये जाने के संबंध में शिकायतें कृपया वर्ष 2007-08 के वार्षिक नीति वक्तव्य के पैराग्राफ 168 (प्रतिलिपि संलग्न) का अवलोकन करें ।2. रिज़र्व बैंक और बैंकिंग ओम्बड्समैनों के कार्यालयों में अनेक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं जो कुछ ऋणों और अग्रिमों पर अत्यधिक ब्याज और प्रभार लगाने से संबंधित हैं ।
आरबीआइ/2006-07/377 बैंपविवि. सं. डीआइआर. बीसी. 93/13.03.00/2006-07 7 मई 2007 17 वैशाख 1929 (शक) सभी वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) महोदयबैंकों द्वारा अत्यधिक ब्याज लगाये जाने के संबंध में शिकायतें कृपया वर्ष 2007-08 के वार्षिक नीति वक्तव्य के पैराग्राफ 168 (प्रतिलिपि संलग्न) का अवलोकन करें ।2. रिज़र्व बैंक और बैंकिंग ओम्बड्समैनों के कार्यालयों में अनेक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं जो कुछ ऋणों और अग्रिमों पर अत्यधिक ब्याज और प्रभार लगाने से संबंधित हैं ।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: फ़रवरी 25, 2026