₹2000/- मूल्यवर्ग के बैंकनोट – संचलन से हटाया जाना; वैध मुद्रा बने रहेंगे
₹2000/- मूल्यवर्ग के बैंकनोट नवंबर 2016 में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 24(1) के अंतर्गत जारी किए गए थे। मुख्यतया, ₹500/- एवं ₹1000/- मूल्यवर्ग के बैंकनोट, जो तब संचलन में थे, के वैध मुद्रा का दर्जा हटाने के पश्चात, अर्थव्यस्था में मुद्रा की आवश्यकता को जल्द पूरा करने के उद्देश्य से इन्हें जारी करने का निर्णय लिया गया था। संचलन में पर्याप्त मात्रा में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों के उपलब्ध हो जाने से ₹2000/- मूल्यवर्ग के नोट जारी करने का उद्देश्य पूरा होने के कारण वर्ष 2018-19 से ₹2000/- मूल्यवर्ग के नोटों का मुद्रण बंद है। ₹2000/- मूल्यवर्ग के अधिकांश बैंकनोट 31 मार्च 2017 के पूर्व जारी किए गए थे और वे अपनी अनुमानित आयु सीमा, जो कि 4-5 वर्ष है, के अंत में हैं। यह भी देखा गया है कि ₹2000/- मूल्यवर्ग के बैंकनोट लेन-देन के लिए आमतौर पर उपयोग में नहीं लाये जा रहे हैं। इसके अलावा, जनसाधारण की करेंसी की आवश्यकता पूर्ति के लिए अन्य मूल्यवर्ग के नोटों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है।
उपर्युक्त कारणों से एवं भारतीय रिज़र्व बैंक की ‘स्वच्छ नोट नीति’ को ध्यान में रखते हुए ₹2000/- मूल्यवर्ग के बैंकनोटों को संचलन से वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
उत्तर. एनबीएफसी-आईएफसी एक गैर-जमा स्वीकार करने वाली ऐसी एनबीएफसी है जिसकी कुल अस्ति का न्यूनतम 75% बुनियादी ढांचा उधार के लिए विनियोजित किया गया हो। इस उद्देश्य के लिए, 'इंफ्रास्ट्रक्चर लेंडिंग' (बुनियादी ढांचा उधार) शब्द का अर्थ आर्थिक मामलों के विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित बुनियादी ढांचा उप-क्षेत्रों में किसी एनबीएफसी द्वारा किसी उधारकर्ता को सावधि ऋण (टर्म लोन), किसी परियोजना कंपनी में बांड/ डिबेंचर/ वरीयता शेयर/ इक्विटी शेयरों के लिए परियोजना ऋण अंशदान (सब्सक्रिप्शन), जो कि परियोजना वित्त पैकेज के एक हिस्से के रूप में प्राप्त किया गया हो, यह अंशदान "अग्रिम की प्रकृति में" या दीर्घकालिक वित्त पोषित सुविधा के किसी अन्य रूप में हो।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपनी तीन पूर्ववर्ती ओम्बड्समैन योजनाओं अर्थात् (i) बैंकिंग ओम्बड्समैन योजना, 2006, (ii) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए ओम्बड्समैन योजना, 2018, और (iii) डिजिटल लेनदेन के लिए ओम्बड्समैन योजना, 2019 को 12 नवंबर 2021 की प्रभावी तिथि से एक योजना - 'रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2021 (योजना / आरबी-आइओएस, 2021) में एकीकृत किया। यह योजना बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), भुगतान प्रणाली प्रतिभागियों (पीएसपी) और साख सूचना कंपनियों (सीआइसी) जैसी विनियमित संस्थाओं (आरई) के ग्राहकों को एक केंद्रीकृत संदर्भ बिंदु पर अपनी शिकायतें दर्ज करने में सक्षम बनाकर भारतीय रिज़र्व बैंक में शिकायत निवारण प्रक्रिया को सरल बनाती है। इस योजना का उद्देश्य आरई की ओर से सेवा में कमी से संबंधित ग्राहक शिकायतों का त्वरित, नि:शुल्क और संतोषजनक तरीके से समाधान करना है। ये ‘अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न’ आरबी-आइओएस, 2021 और संबंधित पहलुओं पर जानकारी प्रदान करते हैं।
रिज़र्व बैंक - एकीकृत ओम्बड्समैन योजना, 2021 (आरबी-आइओएस, 2021/योजना) का आरंभ 12 नवंबर 2021 को किया गया था। यह भारतीय रिज़र्व बैंक की तीन पूर्ववर्ती ओम्बड्समैन योजनाओं अर्थात् (i) बैंकिंग ओम्बड्समैन योजना, 2006; (ii) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए ओम्बड्समैन योजना, 2018; और (iii) डिजिटल लेनदेन के लिए ओम्बड्समैन योजना, 2019 को एकीकृत करती है। इन योजनाओं में क्षेत्राधिकार से संबंधित प्रतिबंधों के अतिरिक्त शिकायतों के सीमित और अलग-अलग आधार और आरई का सीमित कवरेज था। आरबी-आइओएस, 2021, आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं द्वारा प्रदान की गई सेवाओं में कमी से संबंधित ग्राहक शिकायतों का नि:शुल्क निवारण प्रदान करती है, यदि शिकायत का समाधान ग्राहकों की संतुष्टि के अनुसार नहीं किया जाता है या आरई द्वारा 30 दिन की अवधि के भीतर जवाब नहीं दिया जाता है।
तीन मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करने के अतिरिक्त, इस योजना में अतिरिक्त आरई, नामत:, ₹50 करोड़ और उससे अधिक के जमा आकार वाले गैर-अनुसूचित प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक और साख सूचना कंपनियां भी शामिल हैं। यह योजना भारतीय रिज़र्व बैंक के ओम्बड्समैन प्रणाली को आधिकारिक निष्पक्षता प्रदान कर 'एक राष्ट्र एक ओम्बड्समैन' का दृष्टिकोण अपनाती है।
उत्तर: मास्टर निदेश- भारतीय रिज़र्व बैंक (जमाराशियों पर ब्याज दर) निदेश, 2025 के पैरा 29.5 के अनुसार बैंक केवल चालू खाते में ब्याज मुक्त जमाराशियां स्वीकार कर सकते हैं।
उत्तर: उद्गम (UDGAM) का तात्पर्य अदावी जमा-सूचना (Unclaimed Deposits-Gateway to Access information) तक पहुंचने का प्रवेश द्वार है, जो आरबीआई द्वारा विकसित एक ऑनलाइन पोर्टल है। यह पंजीकृत उपयोगकर्ताओं को केंद्रीकृत तरीके से एक ही स्थान पर कई बैंकों में अदावी जमा/खातों की खोज करने की सुविधा प्रदान करता है।
समाधान ढांचे के अनुबंध के पैराग्राफ 4 में उल्लिखित शर्त उस तारीख के संबंध में एक सामान्य खंड है, जिसके आधार पर समाधान ढांचे के तहत समाधान के लिए पात्रता मानदंडों का मूल्यांकन किया जा सकता है। समाधान ढांचे के अनुबंध के भाग ए और भाग बी के तहत समाधान के लिए खातों की पात्रता तय करने के संबंध में संदर्भ तिथि का विशेष रूप से लागू होना क्रमशः पैराग्राफ 6 और 13 में अलग से निर्दिष्ट किया गया है, यानी, यह आवश्यकता है कि उधारकर्ताओं को मानक के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए, लेकिन 1 मार्च 2020 तक किसी भी उधार देने वाली संस्था के साथ वे 30 दिनों से अधिक समय तक चूक में नहीं हो। समाधान के लिए विचार किया जाने वाला वास्तविक ऋण वह होगा, जो समाधान को सक्रिय किए जाने की तारीख (प्रारम्भ तिथि) में बकाया है।
सामान्य निर्देश
रिज़र्व बैंक हर वर्ष कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं के निर्यात (आईटीईएस) पर सर्वेक्षण आयोजित करता है। यह सर्वेक्षण सॉफ्टवेयर और आईटीईएस/बीपीओ/एलएलपी निर्यात करने वाली कंपनियों से नवीनतम वित्तीय वर्ष (वित्तीय वर्ष) के मार्च अंत तक उनके कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और आईटी सक्षम सेवाओं के निर्यात पर जानकारी एकत्र करता है।
सर्वेक्षण के परिणाम, संबंधित बाहरी क्षेत्र के आंकड़ों के संकलन के लिए उपयोग किए जाने के अलावा देश की अर्थव्यवस्था में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली का विश्वास बढ़ाने के लिए सार्वजनिक डोमेन में जारी किए जाते हैं जो देश के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन और जोखिमो का व्यापक लेखा-जोखा विश्व स्तर पर तुलनात्मक सांख्यिकीय ढांचे में प्रदान करते हैं।
गोपनीयता खंड: कंपनी-वार प्रदान की गई जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा और रिज़र्व बैंक द्वारा केवल समेकित योग ही जारी किए जाएंगे।
नोट: प्रतिवादी कंपनियों/एलएलपी/स्वामित्व फर्म को सर्वेक्षण प्रश्नावली को Excel प्रारूप (*.xls प्रारूप) में भरना चाहिए, जो आरबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है । प्रतिवादी से अनुरोध है कि वे सर्वेक्षण प्रश्नावली भरने से पहले निर्देश पत्रक (सर्वेक्षण प्रश्नावली में उपलब्ध) को ध्यान से पढ़ें।
महत्वपूर्ण बिंदु: प्रतिवादी कंपनियों/एलएलपी/स्वामित्व फर्म को सर्वेक्षण प्रश्नावली भरने और जमा करने के लिए नीचे दिए गए बिंदुओं का पालन करना चाहिए:
(i) कंपनी को नवीनतम सर्वेक्षण प्रश्नावली का उपयोग करना चाहिए जो किसी Macro को शामिल किए बिना .xls प्रारूप में हो।
(ii) कंपनी को सर्वेक्षण प्रश्नावली को Excel 97-2003 वर्कबुक यानी केवल .xls प्रारूप में नीचे दिए गए चरणों का पालन करते हुए सेव करना चाहिए:
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ऑफिस बटन / फाइल पर जाएं → सेव एज़→ सेव एज टाइप
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"Excel 97-2003 वर्कबुक" चुनें और सर्वेक्षण प्रश्नावली को .xls प्रारूप में सेव करें।
(iii) कंपनी से अनुरोध है कि सर्वेक्षण प्रश्नावली को प्रस्तुत करते समय किसी Macro को शामिल न करें।
(iv) किसी अन्य प्रारूप (.xls प्रारूप के अलावा) में प्रस्तुत किए गए सर्वेक्षण प्रश्नावली को सिस्टम द्वारा अस्वीकार कर दिया जाएगा।
(v) सुनिश्चित करें कि सर्वेक्षण प्रश्नावली में दी गई सभी सूचनाएँ पूर्ण हैं और कोई सूचना छूटी नहीं है।
(vi) कंपनी को पार्ट-ए से डी भरने के बाद घोषणा पत्र भरना है, जो सत्यापित करने में मदद करती है कि आरबीआई को जमा करने से पहले कंपनी द्वारा दर्ज की गई जानकारी की पुन: पुष्टि की गई है। यह डेटा प्रविष्टि त्रुटियों, छूटे हुए डेटा और अन्य त्रुटियों से बचने में मदद करता है।
(vii) प्रतिवादियों से अनुरोध है कि वे प्रश्न 3 से 9 में डेटा फाइल करते समय किसी विशेष अक्षर अर्थात [!@#$%^&*_()] और अल्पविराम का उपयोग न करें।
उत्तरः आरबीआई हर साल जून के महीने के दौरान आईटीईएस सर्वेक्षण शुरू करता है, जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष के मार्च-अंत को संदर्भ तिथि के रूप में लिया जाता है।
सामान्य निर्देश
भारत में म्युचुअल फंड (एमएफ) कंपनियों और उनके परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) की विदेशी देयताओं और परिसंपत्तियों (एफएलए) पर रिज़र्व बैंक का सर्वेक्षण वार्षिक रूप से किया जाता है। यह नवीनतम वित्तीय वर्ष के मार्च अंत तक एमएफ और एएमसी से उनकी बाहरी वित्तीय देयताओं और परिसंपत्तियों पर जानकारी एकत्र करता है। इस सर्वेक्षण से एकत्र की गई जानकारी का उपयोग भारत के भुगतान संतुलन (बीओपी), अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति (आईआईपी) और अन्य संबंधित बाहरी क्षेत्र के आँकड़ों के संकलन में किया जाता है, जो देश के अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन और जोखिमो का व्यापक लेखा-जोखा विश्व स्तर पर तुलनीय सांख्यिकीय ढांचे में प्रदान करते हैं।
गोपनीयता खंड: रिज़र्व बैंक केवल समग्र स्तर पर सर्वेक्षण परिणाम जारी करता है और अनुसूची में प्रस्तुत संस्थान-वार डेटा को गोपनीय रखा जाता है।
नोट: प्रतिउत्तर देने वाली कंपनी को आरबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध सर्वेक्षण प्रश्नावली को Excel प्रारूप (*.xls प्रारूप) में भरना चाहिए। उत्तरदाताओं से अनुरोध है कि सर्वेक्षण प्रश्नावली भरने से पहले निर्देश पत्रक (सर्वेक्षण प्रश्नावली में उपलब्ध) को ध्यान से पढ़ लें।
महत्वपूर्ण बिंदु: प्रतिउत्तर देने वाली कंपनी को सर्वेक्षण प्रश्नावली भरते और जमा करते समय नीचे दिए गए बिंदुओं को पढ़ना चाहिए:
(i) कंपनी को नवीनतम सर्वेक्षण प्रश्नावली का उपयोग करना चाहिए, जो किसी मैक्रो को शामिल किए बिना .xls प्रारूप में हो।
(ii) कंपनी को सर्वेक्षण प्रश्नावली को Excel 97-2003 वर्कबुक यानी .xls फॉर्मेट में सेव करना चाहिए। नीचे दिए गए चरणों का पालन करके:
क) ऑफिस बटन/ फाइल पर जाएं → सेव ऐज़ → सेव ऐज़ टाइप
ख) "Excel 97-2003 वर्कबुक" चुनें और सर्वेक्षण अनुसूची को .xls फॉर्मेट में सेव करें।
(iii) कंपनी से अनुरोध है कि सर्वेक्षण प्रश्नावली को प्रस्तुत करते समय किसी मैक्रो को शामिल न करें।
(iv) किसी अन्य प्रारूप (.xls प्रारूप के अलावा) में प्रस्तुत किए गए सर्वेक्षण प्रश्नावली को सिस्टम द्वारा अस्वीकार कर दिया जाएगा।
(v) सुनिश्चित करें कि सर्वेक्षण प्रश्नावली में दी गई सभी जानकारी पूर्ण हैं और कोई जानकारी छूटी नहीं है।
(vi) भाग I और II भरने के बाद, कंपनी को घोषणा पत्र भरना है, जो सत्यापित करने में मदद करती है कि आरबीआई को जमा करने से पहले कंपनी द्वारा दर्ज की गई जानकारी की पुन: पुष्टि की गई है। यह डेटा प्रविष्टि त्रुटियों, छूटे हुए डेटा और अन्य त्रुटियों से बचने में मदद करता है।
उत्तर: आरबीआई हर साल जून के महीने के दौरान एमएफ सर्वेक्षण शुरू करता है, जिसमें पिछले वित्तीय वर्ष के समाप्त में अंत-मार्च संदर्भ तिथि के रूप में होता है।
[डिजिटल उधार में डिफॉल्ट लॉस गारंटी पर दिशानिर्देश 08 जून 2023 के परिपत्र विवि.सीआरई.आरईसी.21/21.07.001/2023-24 के माध्यम से जारी किए गए थे]
उत्तर: : जिस पोर्टफोलियो पर डीएलजी दिया जा सकता है, उसमें पहचानने और मापने योग्य ऋण आस्तियां शामिल होंगी जिन्हें स्वीकृत किया गया है ('डीएलजी सेट')। डीएलजी कवर के प्रयोजन के लिए यह पोर्टफोलियो निश्चित रहेगा और यह गतिशील नहीं होना चाहिए। कृपया अंत में उदाहरण देखें।
उत्तर: जैसा कि मास्टर निदेशों के अध्याय II में उल्लेख किया गया है, एससीबीएमएफ/सीओई द्वारा की गई समीक्षाओं के दायरे और आवधिकता विनियमित संस्थाओं के बोर्ड द्वारा तय की जाएगी। तदनुसार, एससीबीएमएफ/सीओई के समक्ष रखे जाने वाले धोखाधड़ी के मामलों में शामिल राशि की सीमा विनियमित संस्थाओं के बोर्ड द्वारा उनके संचालन के पैमाने और जटिलता को ध्यान में रखते हुए तय की जाएगी।
उत्तर: कार्ड जारीकर्ताओं को अवांछित क्रेडिट कार्ड जारी करने से प्रतिबंधित किया गया है और उन्हें कार्ड जारी करने से पहले ग्राहक से पूर्व और स्पष्ट सहमति लेनी होगी। हालाँकि, यदि ग्राहक को कोई अवांछित कार्ड प्राप्त होता है, तो उसे ओटीपी अथवा किसी अन्य माध्यम से कार्ड को सक्रिय करने या सक्रिय करने के लिए सहमति प्रदान करने से बचना चाहिए। यदि कार्ड को सक्रिय करने के लिए कोई सहमति प्राप्त नहीं हुई है, कार्ड-जारीकर्ता को ग्राहक से पुष्टि प्राप्त करने की तारीख से सात कार्य दिवसों के भीतर ग्राहक को बिना किसी लागत के क्रेडिट कार्ड खाता बंद करना होगा और ग्राहक को यह भी सूचित करना होगा कि क्रेडिट कार्ड खाता बंद कर दिया गया है। कार्ड-जारीकर्ता से यह सूचना प्राप्त होने पर कि कार्ड खाता बंद कर दिया गया है, ग्राहक कार्ड को नष्ट कर देगा। इसके अलावा, ग्राहक अवांछित कार्ड जारी करने के विरुद्ध कार्ड-जारीकर्ता के पास शिकायत दर्ज कर सकता है और इसे एकीकृत ओम्बड्समैन योजना के अनुसार आरबीआई ओम्बड्समैन के पास भेज सकता है (कृपया नीचे प्रश्न 17 का उत्तर देखें)।
उत्तर: ऑटोमेटेड टेलर मशीन एक कंप्यूटरीकृत मशीन है जो कि बैंक के ग्राहकों को बैंक शाखा जाने की जरूरत के बिना ही नकदी निकालने एवं अन्य वित्तीय और गैर वित्तीय लेनदेन के लिए अपने खाते तक पहुँचने (accessing) की सुविधा प्रदान करती है।
वर्तमान में देश में कुछ अध्ययनों के रूप में ई₹ के उपयोग का पायलट परीक्षण कार्य किया जा रहा है। पायलट परीक्षण खुदरा (सार्वजनिक) और थोक (बैंक और अन्य संस्थान) खंडों में किया जा रहा है।
उत्तर: डिजिटल रुपया या ई₹, भारत की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) है। यह भारत की भौतिक मुद्रा, रुपया (₹) का डिजिटल रूप है। ई₹ को भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा डिजिटल रूप में जारी किया जाता है और इसमें भौतिक नकदी जैसी ही सुविधाएँ होती हैं जैसे उपयोग की सुविधा, आरबीआई की गारंटी, निपटान की अंतिमता, आदि। ई₹ को उपयोगकर्ता के डिजिटल वॉलेट में संग्रहित किया जाता है और इसका उपयोग पैसे प्राप्त करने/भेजने और/या लेनदेन के लिए भुगतान करने के लिए किया जा सकता है, ठीक उसी प्रकार से जैसे किसी भी भौतिक रुपया (₹) नोट का उपयोग होता है।
भारत के केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा का लोगो और टैगलाइन निम्नवत है:

उत्तर: राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (एनईएफटी) एक राष्ट्रव्यापी केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली है जिसका स्वामित्व और संचालन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा किया जाता है। सिस्टम में भाग लेने वाले विभिन्न हितधारकों द्वारा पालन की जाने वाली प्रक्रियाओं संबंधी सूची निम्नलिखित लिंक के तहत आरबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है: https://rbi.org.in/documents/87730/39711381/NEFTPROCEDURALJANUARY2024DBA95372B2454F9F8B767824B0B6E86F.pdf.
उत्तर. केवाईसी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक विनियमित संस्था (आरई), जिसमें बैंक भी शामिल है, ग्राहक की पहचान और पता, व्यवसाय की प्रकृति और वित्तीय स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त करती हैं और उसका सत्यापन करती है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि एक विनियमित संस्था को उस ग्राहक के बारे में पता हो जिसके साथ वह व्यवहार कर रही है और विनियमित संस्था द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं का दुरुपयोग काले धन को वैध बनाना/आतंकवादी वित्तपोषण/प्रसार वित्तपोषण (एमएल/टीएफ/पीएफ) उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाता हो।
उत्तर: उक्त निदेश के पैरा 4(1)(iv) के प्रयोजनों के लिए, 'व्यक्ति' शब्द में व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह, एचयूएफ, फर्म, समाज या कोई कृत्रिम संस्था शामिल होगी, चाहे वह निगमित हो अथवा नही।
उत्तर : नहीं। हालांकि, बैंकों को संग्रहण और शुद्धता परीक्षण केन्द्रों (सीपीटीसी) के नाम और रिफाइनरीज़ जिनके साथ उन्होंने त्रिपक्षीय करार किया है और इस योजना का संचालन करनेवाली शाखाएँ सहित कार्यान्वयन संबंधी ब्योरा आरबीआई को प्रस्तुत करना चाहिए। बैंकों को इस योजना के तहत सभी शाखाओं द्वारा समाहरित स्वर्ण की मात्रा संबंधी समेकित आंकड़ा मासिक आधार पर निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट करनी चाहिए।
“अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्नों’ का यह खण्ड इस विषय पर उपयोगकर्ताओं द्वारा आम तौर पर पूछे जानेवाले प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में देने का एक प्रयास है। तथापि किसी प्रकार का लेनदेन करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों/ नियमों अथवा निदेशों का संदर्भ लिया जाए। इससे संबंधित मूल विनियमावली 21 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं.फेमा 10(आर)/2015-आरबी के तहत जारी की गई विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में निवासी व्यक्ति के विदेशी मुद्रा खाते) विनियमावली, 2015 है। इस संबंध में जारी किए गए विभिन्न निदेश ‘जमा राशियां और खाते’ विषय पर जारी मास्टर निदेश सं.14 के भाग-I में समेकित किए गए हैं। मूल विनियमावली में किए गए संशोधन, यदि कोई हों, को परिशिष्ठ में जोड़ा गया है ।
उत्तर : विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) की धारा-2(वी) में ‘भारत में निवासी व्यक्ति’ को परिभाषित किया गया है; जो निम्नानुसार है:
(i) ऐसा कोई व्यक्ति जो पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान एक सौ बयासी दिन से अधिक समयावधि तक भारत में निवास कर रहा था किन्तु इसके अंतर्गत :-
(ए) ऐसा व्यक्ति शामिल नहीं है जो –
(क) भारत से बाहर रोजगार हेतु नियोजित होने के लिए या नियोजित हो जाने पर; या
(ख) भारत के बाहर कोई कारोबार करने या भारत के बाहर कोई व्यवसाय करने के लिए; अथवा
(ग) ऐसी परिस्थितियों में, किसी अन्य प्रयोजन के लिए जिनसे उसका भारत से बाहर अनिश्चित अवधि तक ठहरने का आशय उपदर्शित होता हो,
भारत से बाहर चला गया है या भारत से बाहर ठहरता है,
(बी) ऐसा व्यक्ति भी नहीं जो-
(क) भारत में रोजगार पर नियोजित होने के लिए या नियोजित होने पर, या
(ख) भारत में कोई कारोबार करने या भारत में कोई व्यवसाय चलाने के लिए; या
(ग) ऐसी परिस्थितियों में, किसी अन्य प्रयोजन के लिए जिनसे उसका भारत में अनिश्चित अवधि तक ठहरने का आशय उपदर्शित होता हो,
भारत लौट आता है या भारत में ठहरता है।
(ii) कोई व्यक्ति या भारत में पंजीकृत अथवा निगमित कोई कॉर्पोरेट निकाय ;
(iii) भारत के बाहर निवासी किसी व्यक्ति के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन भारत में कोई कार्यालय, शाखा या एजेंसी;
(iv) भारत में निवासी किसी व्यक्ति के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन भारत में कोई कार्यालय, शाखा या एजेंसी।
उ : फैक्टरिंग अधिनियम, 2011 'फैक्टरिंग बिजनेस' को इसप्रकार परिभाषित करता है, "ऐसी प्राप्तियों या वित्तपोषण के असाइनमेंट को स्वीकार करके असाइनर के प्राप्तियों के अधिग्रहण का व्यवसाय, चाहे ऋण या अग्रिम करने के माध्यम से या किसी भी प्राप्य पर प्रतिभूति ब्याज के बदले किसी अन्य तरीके से किया गया हो"
हालांकि, बैंकों द्वारा व्यवसाय के सामान्य क्रम में प्राप्य की प्रतिभूति और कमीशन एजेंट के रूप में या अन्यथा कृषि उत्पाद या किसी भी प्रकार के सामान की बिक्री के लिए की गई किसी भी गतिविधि और संबंधित गतिविधियों के लिए प्रदान की जाने वाली क्रेडिट सुविधाएं स्पष्ट रूप से फैक्टरिंग व्यवसाय की परिभाषा से बाहर हैं। फैक्टरिंग अधिनियम ने भारत में फैक्टरिंग के लिए बुनियादी कानूनी ढांचा तैयार किया है।
उत्तर: ‘अनिवासी भारतीय’ (एनआरआई) भारत से बाहर निवास करने वाला व्यक्ति है, जो भारत का नागरिक है।
भारत सरकार के 21 मार्च 2025 के राजपत्र अधिसूचना एस.ओ.1364(अ) के अनुसार किसी उद्यम को निम्नलिखित मानदंडों के आधार पर सूक्ष्म, लघु या मध्यम उद्यम के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, अर्थात:
- ऐसा सूक्ष्म उद्यम जहां संयंत्र और मशीनरी या उपस्कर में विनिधान ₹ 2.5 करोड़ से अधिक नहीं है और आवर्तन ₹ 10 करोड़ से अधिक नहीं है;
- ऐसा लघु उद्यम जहां संयंत्र और मशीनरी या उपस्कर में विनिधान ₹ 25 करोड़ से अधिक नहीं है और आवर्तन ₹ 100 करोड़ से अधिक नहीं है; और
- ऐसा मध्यम उद्यम जहां संयंत्र और मशीनरी या उपस्कर में विनिधान ₹ 125 करोड़ से अधिक नहीं है और आवर्तन ₹ 500 करोड़ से अधिक नहीं है।
ऐसे सभी उद्यमों को उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकृत करना और ‘उद्यम पंजीकरण प्रमाण-पत्र‘ प्राप्त करना आवश्यक है। जहां तक प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र के ऋण (पीएसएल) प्रयोजनों का सवाल है बैंकों को उद्यम पंजीकरण प्रमाण-पत्र (यूआरसी) में रिकॉर्ड किए गए वर्गीकरण का पालन करना होगा। (24 जुलाई 2017 का मास्टर निदेश विसविवि.एमएसएमई एंड एनएफएस.12/06.02.31/2017-18 और 28 दिसंबर 2023 का परिपत्र एफआईडीडी.एमएसएमई व एनएफएस.बीसी.सं.13/06.02.31/2023-24 को देखें)
यह प्रश्न (FAQ) इंटर-ऑपरेबल विनियामक सैंडबॉक्स (IoRS) पहल का व्यापक अवलोकन प्रदान करते हैं और संभावित प्रतिभागियों के सामान्य प्रश्नों का समाधान करते हैं:
विनियामक सैंडबॉक्स आमतौर पर नियंत्रित/परीक्षण विनियामक वातावरण में नए उत्पादों या सेवाओं के लाइव परीक्षण को संदर्भित करता है, जिसके लिए विनियामक परीक्षण के सीमित उद्देश्य के लिए कुछ विनियामक छूट की अनुमति दी जा सकती हैं।
उत्तर: हाँ। बैंकों को अपनी एचटीएम पुस्तक में टीएलटीआरओ में प्राप्त राशि के लिए निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की मात्रा को टीएलटीआरओ की परिपक्वता तक हर समय बनाए रखना होगा।
उत्तर. यह परिपत्र केवल सभी समान आवधिक किस्त आधारित वैयक्तिक ऋणों पर लागू है। यह परिपत्र अन्य प्रकार के ऋणों पर लागू नहीं है। वैयक्तिक ऋण की परिभाषा के लिए दिनांक 04 जनवरी 2018 को “एक्सबीआरएल रिटर्न्स - बैंकिंग सांख्यिकी का सुसंगतिकरण” पर रिज़र्व बैंक के परिपत्र डीबीआर.सं.बीपी.बीसी.99/08.13.100/2017-18 का संदर्भ लिया जा सकता है।
अस्वीकरण: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का यह संकलन केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से उपलब्ध कराया गया है। इस एफएक्यू और फेमा, 1999 और उसके तहत जारी किए गए नियमों/ विनियमों/ निदेशों / अनुमतियों के बीच यदि किसी प्रकार की विसंगति का मामला सामने आता है, तो जो भी अनुदेश बाद में जारी हुए हैं, वे मान्य होंगे।
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक लेनदेनों के भारतीय रुपए (आईएनआर) के माध्यम से निपटान की व्यवस्था मौजूदा प्रणाली में की गई एक अतिरिक्त व्यवस्था है।
अस्वीकरण : अक्सर पूछे जाने वाले ये प्रश्न केवल सामान्य मार्गदर्शन के प्रयोजन से हैं। यदि अक्सर पूछे जाने वाले इन प्रश्नों और फेमा, 1999 और इसके तहत जारी नियमों/विनियमों/निदेशों/अनुमतियों के बीच कोई विसंगति(यां) हो जाती है तो फेमा, 1999 और नियम आदि को ही प्रभावी माना जाएगा।
उत्तर: निवासी व्यक्तियों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के अनुसार केवल प्राधिकृत व्यक्तियों के साथ और अनुमत प्रयोजनों के लिए ही फोरेक्स लेनदेन की अनुमति है।
अप्राधिकृत व्यक्तियों और फेमा के तहत अनुमत प्रयोजनों के अलावा अन्य प्रयोजनों के लिए फोरेक्स लेनदेन करने वाले निवासी व्यक्ति स्वयं को इस अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई का भागी बना लेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQ’s) के माध्यम से उक्त विषय पर प्रयोगकर्ताओं के सामान्य प्रश्नों का उत्तर आसानी से समझ में आने वाली भाषा में देने का प्रयास किया गया है। तथापि, शमन के प्रयोजन से विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999, विदेशी मुद्रा (शमन कार्यवाही) नियम, 2024 तथा ‘निदेश- फेमा, 1999 के तहत उल्लंघनों का शमन’ का संदर्भ लिया जाए।
उत्तर: ‘उल्लंघन’ का आशय है विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999 और उसके तहत जारी किसी नियम/ विनियम/ अधिसूचना/ आदेश/ निदेश/ परिपत्र, आदि के प्रावधानों का उल्लंघन। शमन का अर्थ है उल्लंघन को स्वैच्छिक रूप से स्वीकार करना, अपना दोष मानना और उसके निवारण के लिए अनुरोध करना। फेमा, 1999 की धारा 13 में यथा-परिभाषित उल्लंघनों के अंतर्गत, उक्त अधिनियम की धारा 3(ए) के तहत हुए उल्लंघनों को छोड़कर, उल्लंघनकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद कतिपय विनिर्दिष्ट राशि के बदले उल्लंघनों का शमन करने का अधिकार रिज़र्व बैंक को प्राप्त है। यह एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत कोई व्यक्ति अथवा कंपनी स्वयं द्वारा स्वीकार किए गए उल्लंघन के शमन हेतु आवेदन करता/करती है। फेमा, 1999 के किसी उपबंध के उल्लंघन के शमन की प्रक्रिया उस व्यक्ति को एक तरह से सहूलियत प्रदान करती है, क्योंकि इसमें लेनदेन की प्रक्रियागत लागत अपेक्षाकृत कम होती है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा (शमन कार्यवाही) नियम, 2024 के नियम 9 के अंतर्गत आने वाले मामले रिज़र्व बैंक द्वारा शमन किए जाने हेतु पात्र नहीं होंगे।
उत्तर. पीएसएस अधिनियम, 2007 को राष्ट्रपति की स्वीकृति 20 दिसंबर 2007 को प्राप्त हुई और यह 12 अगस्त 2008 से प्रभावी हुआ।
ये बॉण्ड सरकारी प्रतिभूतियां हैं जिनका अंकित मूल्य स्वर्ण ग्राम में होता है। स्वर्ण अपने पास रखने का यह एक वैकल्पिक माध्यम है। निवेशकों को निर्गम मूल्य नकद रूप में अदा करना होता है। बॉण्ड की मीयाद समाप्त हो जाने पर नकद राशि प्राप्त होगी। यह बॉण्ड भारत सरकार की ओर से रिज़र्व बैंक जारी करता है।
भारत में विदेशी मुद्रा लेन देन के प्रबंध के लिए विधिक ढांचा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 द्वारा प्रदान किया गया है। विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) जो कि 1 जून 2000 से लागू हुआ, के अंतर्गत विदेशी मुद्रा से संबंधित सभी लेन देन को या तो पूंजीगत अथवा चालू खाता लेन देन के रूप में वर्गीकृत किया गया है। किसी निवासी द्वारा किए गए सभी लेनदेन जिनसे भारत के बाहर उसकी आस्तियों अथवा देयताओं जिनमें आकस्मिक देयताएँ शामिल हैं, में परिवर्तन नहीं होता है को चालू खाता लेनदेन कहते हैं।
फेमा की धारा-5 के अनुसार भारत1 में निवास करने वाले व्यक्ति के पास किसी भी चालू खाता लेनदेन के लिए विदेशी मुद्रा खरीदने अथवा बेचने की स्वतन्त्रता है। इन में अपवाद केवल उन लेनदेन, जैसे कि लाटरी जीत में से विप्रेषण; रेसिंग / राइडिंग, आदि या अन्य किसी शौक से प्राप्त आय का विप्रेषण; लाटरी टिकट, प्रतिबंधित / वर्जित पत्रिकाओं,फुटबाल पूल्स, स्वीपस्टेक, आदि की खरीद के लिए विप्रेषण; किसी ऐसी कंपनी द्वारा लाभांश का विप्रेषण जिस पर लाभांश संतुलन की आवश्यकता लागू है ; रूपी स्टेट क्रेडिट रूट के अधीन निर्यात पर कमीशन का भुगतान, सिवाय चाय और तंबाकू के निर्यात के बीजक मूल्य के 10% तक कमीशन ; भारतीय कंपनियों की विदेश में संयुक्त उद्यमों / पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्थाओं में ईक्विटी निवेश के लिए किए गए निर्यात पर कमीशन का भुगतान; नॉन – रेसीडेंट स्पैशल रूपी (खाता) योजना में धारित निधियों पर ब्याज आय का विप्रेषण तथा टेलीफोन की “काल बॅक सर्विसेज” से संबंधित भुगतान, के संबंध में है जिन के लिए विदेशी मुद्रा आहारित करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगाएं हैं।
दिनांक 3 मई 2000 (अनु-I) की अधिसूचना सं जी.एस.आर. 381 (ई) द्वारा अधिसूचित विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) नियमावली, 2000 (बाद में उन्हें “नियम” कहा जाएगा) तथा 26 मई 2015 की अधिसूचना जीएसआर 426 (ई)में दिए गए नियमों की संशोधित अनुसूची-III सरकारी राजपत्र में तथा हमारी वेबसाइट www.rbi.org.in पर उपलब्ध “अन्य विप्रेषण सुविधाएं”पर हमारे मास्टर अनुदेश के अनुबंध के रूप में उपलब्ध है।
यह “अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्न’ इस विषय पर उपयोगकर्ताओं द्वारा समान्यतः पूछे जानेवाले प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में देने का यह प्रयास है। तथापि कोई लेनदेन करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों/ नियमों अथवा निदेशों का संदर्भ लें।
उत्तर: "प्राधिकृत व्यापारी" का तात्पर्य विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 अधिनियम की धारा-10 की उप-धारा (1) के अंतर्गत रिज़र्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा अथवा विदेशी प्रतिभूतियों में व्यापार करने के लिए प्राधिकृत किये गए व्यक्ति से है (एडी की सूची www.rbi.org.in पर उपलब्ध है) और समान्यतः इनमें बैंक शामिल हैं।
चेक ट्रंकेशन का अर्थ है कि समाशोधन चक्र के दौरान ट्रांसमिशन के लिए इसकी इलेक्ट्रॉनिक छवि बनने के तुरंत बाद, भौतिक चेक के प्रवाह को रोकना। भारत की वर्तमान चेक ट्रंकेशन प्रणाली (सीटीएस) में, भौतिक चेकों को प्रस्तुत करने वाले बैंक द्वारा ट्रंकेट किया जाता है। इस प्रकार, चेक ट्रंकेशन बैंक शाखाओं के बीच समाशोधन उद्देश्यों के लिए अपवाद स्थितियों के अलावा भौतिक लिखतों को ले जाने की आवश्यकता को समाप्त कर देता है। यह प्रभावी रूप से भौतिक चेकों के परिवहन से जुड़ी लागत को समाप्त करता है, स्पष्टीकरण प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है और उनके संग्रह के लिए आवश्यक समय को कम करता है।
यह ध्यान में रखते हुए कि निधियों का निपटान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की पुस्तकों में होता है, भुगतान अंतिम और अपरिवर्तनीय हैं।
उत्तर: इंफ्रास्ट्रक्चर डेट फंड (आईडीएफ) को ट्रस्ट या कंपनी के रूप में स्थापित किया जा सकता है। एक ट्रस्ट आधारित आईडीएफ आम तौर पर सेबी द्वारा विनियमित एक म्यूचुअल फंड (एमएफ) होगा, जबकि एक कंपनी आधारित आईडीएफ सामान्य रूप से रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित एक एनबीएफसी होगा।
यदि चेक पारगमन में या समाशोधन प्रक्रिया में या भुगतानकर्ता बैंक की शाखा में भौतिक लिखत वितरण समाशोधन के तहत गुम हो जाते हैं, तो बैंक को इसे तुरंत प्रस्तुतकर्ता ग्राहक (लाभार्थी) के नोटिस में लाना चाहिए ताकि ग्राहक आहर्ता को भुगतान रोकने के लिए सूचित कर सके और यह भी ध्यान रख सके कि खोए हुए चेक से उत्पन्न होने वाले क्रेडिट की प्रत्याशा में जारी किए गए अन्य चेक खोए हुए चेकों/लिखतों की राशि के क्रेडिट न होने के कारण अस्वीकृत न हों।
हालांकि यह ध्यान दिया जा सकता है कि सीटीएस द्वारा कवर किए गए स्थानों में अदाकर्ता बैंक के हाथ में भौतिक लिखत खोने की संभावना बहुत कम है क्योंकि समाशोधन छवियों के आधार पर किया जाता है।यदि संग्राहक बैंक के पास जमा करने के बाद लिखत खो जाता है, लेकिन छवि-आधारित समाशोधन के माध्यम से भेजने के लिए उसे ट्रंकेट करने से पहले, प्रस्तुतकर्ता बैंक को ऊपर बताई गई प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
ग्राहक डुप्लीकेट लिखत प्राप्त करने के लिए संबंधित खर्चों और इसे प्राप्त करने में उचित देरी के लिए ब्याज के लिए बैंकों द्वारा प्रतिपूर्ति का हकदार है।
उत्तर: एनईएफटी निधि अंतरण या प्राप्ति के लिए निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:
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वर्ष के सभी दिनों में चौबीसों घंटे उपलब्धता।
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लाभार्थी के खाते में निकट-वास्तविक समय में धन हस्तांतरण और सुरक्षित तरीके से निपटान।
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सभी प्रकार के बैंकों की शाखाओं के वृहद नेटवर्क के माध्यम से अखिल भारतीय कवरेज।
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कागजी लिखतों को जमा करने के लिए लाभार्थी को बैंक की शाखा में जाने की आवश्यकता नहीं है। यदि प्रेषक का बैंक ऐसी सेवा प्रदान करता है, तो वह इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करके अपने घर/कार्यस्थल से प्रेषण शुरू कर सकता है।
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लाभार्थी के खाते में क्रेडिट पर एसएमएस/ई-मेल द्वारा प्रेषक को सकारात्मक पुष्टि।
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क्रेडिट या लेन-देन की वापसी में देरी के लिए दंडात्मक ब्याज प्रावधान।
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आरबीआई द्वारा बैंकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
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ऑनलाइन एनईएफटी लेनदेन के लिए बचत बैंक खाता ग्राहकों के लिए कोई शुल्क नहीं।
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लेन-देन शुल्क भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित किया गया है।
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धन हस्तांतरण के अलावा, एनईएफटी प्रणाली का उपयोग कार्ड जारी करने वाले बैंकों को क्रेडिट कार्ड की बकाया राशि के भुगतान, ऋण ईएमआई के भुगतान, आवक विदेशी मुद्रा प्रेषण आदि सहित विभिन्न प्रकार के लेनदेन के लिए किया जा सकता है।
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लेन-देन को कानूनी समर्थन प्राप्त है।
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भारत से नेपाल के लिए वन-वे फंड ट्रांसफर के लिए उपलब्ध।
उत्तर: भारत अथवा नेपाल या भूटान की मुद्रा के अलावा किसी अन्य मुद्रा में धारित किया गया अथवा रखा गया खाता विदेशी मुद्रा खाता कहलाता है।
डीआईसीजीसी निम्नलिखित जमाराशियों को छोड़कर बचत, मीयादी, चालू, आवर्ती आदि जैसे सभी बैंक जमाराशियों को बीमा प्रदान करता है:-
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विदेशी सरकारों की जमाराशियां;
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केंद्र/राज्य सरकारों की जमाराशियां;
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अंतर बैंक जमाराशियां;
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राज्य सहकारी बैंकों में रखी गई राज्य भूमि विकास बैंकों की जमाराशियां;
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भारत के बाहर प्राप्त जमाराशि के कारण देय कोई राशि; और
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रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से निगम द्वारा विशेष रूप से छूट प्राप्त कोई राशि
उत्तर: ईरान, भारत, बांगलादेश, भूटान, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव और म्यांमार के केंद्रीय बैंक तथा मुद्रा प्राधिकारी एशियाई समाशोधन संघ (एसीयु) के सदस्य देश हैं।
उत्तर: ‘भारतीय मूल का व्यक्ति’ (पीआईओ) भारत से बाहर का निवासी है, जो बांग्लादेश या पाकिस्तान अथवा केंद्र सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट ऐसे किसी अन्य देश से भिन्न किसी देश का नागरिक है, और जो निम्नलिखित शर्तें पूरी करता है:
ए) जो भारतीय संविधान के अनुसार अथवा नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) के अनुसार भारत का नागरिक था, अथवा
बी) वह ऐसे किसी भौगोलिक क्षेत्र से आता हो, जो 15 अगस्त 1947 के बाद भारत का हिस्सा बन गया; अथवा
सी) वह भारतीय नागरिक का या ऊपर उल्लिखित पैरा (ए) या (बी) में उल्लिखित किसी व्यक्ति का पुत्र /पुत्री या पोता /पोती अथवा पर-पोता/ पर-पोती है; अथवा
डी) वह किसी भारतीय नागरिक का विदेशी मूल का पति/ की पत्नी है, अथवा ऊपर उल्लिखित पैरा (ए) (बी) या (सी) में उल्लिखित किसी व्यक्ति का विदेशी मूल का पति/ की पत्नी है।
पीआईओ में नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा-7(ए) की परिभाषा के अंतर्गत ‘विदेशी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक” भी शामिल है। उक्त विदेशी भारतीय नागरिकता कार्डधारक व्यक्ति भारत के बाहर का निवासी व्यक्ति होना चाहिए।
उत्तर: विदेशी मुद्रा किसी भी प्राधिकृत व्यक्ति जैसे कि एडी श्रेणी-I बैंक तथा एडी श्रेणी- II बैंक से खरीदी जा सकती है। संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (एफ़एफ़एमसी) को भी कारोबारी तथा निजी दौरों के लिए विदेशी मुद्रा देने की अनुमति है।
भारतीय रिज़र्व बैंक सरकारों का सामान्य बैंकिंग व्यवसाय अपने स्वयं के कार्यालयों और अपने एजेंट के रूप में नियुक्त वाणिज्यिक बैंकों, सार्वजनिक और निजी दोनों, के माध्यम से करता है। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45 में यह निर्धारित है कि वह विभिन्न प्रयोजनों, जिसके अंतर्गत “इस संबंध में जनता के हित में, बैंकिंग की सुविधा, बैंकिंग का विकास और ऐसे अन्य कारक जो इसकी राय में इससे संबंधित हैं” उल्लिखित है, के लिए भारत में सभी स्थानों पर अथवा किसी स्थान पर एजेंट के रूप में अनुसूचित वाणिज्य बैंकों को नियुक्त कर सकता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक अपने केंद्रीय लेखा अनुभाग, नागपुर में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों के प्रधान खाते रखता है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने पूरे भारतवर्ष में सरकार की ओर से राजस्व संग्रह करने के साथ-साथ भुगतान करने के लिए सुसंचालित व्यवस्था की है। भारतीय रिज़र्व बैंक का सरकारी बैंकिंग प्रभाग और भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की धारा 45 के अंतर्गत नियुक्त एजेंसी बैंकों की शाखाओं का नेटवर्क सरकारी लेनदेन का कार्य करता है। वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक और निजी क्षेत्र के चुने हुए बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक के एजेंट के रूप में कार्य करते हैं। केवल एजेंसी बैंकों की नामित शाखाएं ही सरकारी बैंकिंग व्यवसाय कर सकती हैं।
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मूलधन पर मुद्रास्फीति घटक का भुगतान ब्याज के साथ नहीं किया जाएगा बल्कि उक्त को सूचकांक अनुपात के साथ मूलधन गुणक द्वारा मूलधन में समायोजित किया जाएगा। शोधन के समय पर, समायोजित ब्याज या अंकित मूल्य, जो भी अधिक है का भुगतान किया जाएगा।
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मुद्रास्फीति के सापेक्ष समायोजित मूलधन पर नियत कूपन दर का भुगतान करके मुद्रास्फीति के सापेक्ष ब्याज दर को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
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आईआईबी पर नकदी प्रवाह का उदाहरण नीचे दिया गया है।
| उदाहरण 1 (स्पष्टीकरण के लिए) | |||||||
| वर्ष | अवधि | वास्तविक कूपन | मुद्रास्फीति सूचकांक | सूचकांक अनुपात | सूचकांक समायोजित मूलधन | कूपन भुगतान | मूलधन पुनर्भुगतान |
| I | II | III | IV | Vti=(IVti/IVt0) | VI=(FV*V) | VII=(VI*III) | VIII |
| 0 | 28 मई 2013 | 1.50% | 100 | 1.00 | 100.0 | ||
| 1 | 28 मई 2014 | 1.50% | 106 | 1.06 | 106.0 | 1.59 | |
| 2 | 28 मई 2015 | 1.50% | 111.8 | 1.12 | 111.8 | 1.68 | |
| 3 | 28 मई 2016 | 1.50% | 117.4 | 1.17 | 117.4 | 1.76 | |
| 4 | 28 मई 2017 | 1.50% | 123.3 | 1.23 | 123.3 | 1.85 | |
| 5 | 28 मई 2018 | 1.50% | 128.2 | 1.28 | 128.2 | 1.92 | |
| 6 | 28 मई 2019 | 1.50% | 135 | 1.35 | 135.0 | 2.03 | |
| 7 | 28 मई 2020 | 1.50% | 138.5 | 1.39 | 138.5 | 2.08 | |
| 8 | 28 मई 2021 | 1.50% | 142.8 | 1.43 | 142.8 | 2.14 | |
| 9 | 28 मई 2022 | 1.50% | 150.3 | 1.50 | 150.3 | 2.25 | |
| 10 | 28 मई 2023 | 1.50% | 160.2 | 1.60 | 160.2 | 2.40 | 160.2 |
| उदाहरण 2 (स्पष्टीकरण के लिए) | |||||||
| 0 | 28 मई 2013 | 1.50% | 100.0 | 1.00 | 100 | 1.50 | |
| 1 | 28 मई 2014 | 1.50% | 106.0 | 1.06 | 106 | 1.59 | |
| 2 | 28 मई 2015 | 1.50% | 111.0 | 1.11 | 111 | 1.67 | |
| 3 | 28 मई 2016 | 1.50% | 104.0 | 1.04 | 104 | 1.56 | |
| 4 | 28 मई 2017 | 1.50% | 98.0 | 0.98 | 98 | 1.47 | |
| 5 | 28 मई 2018 | 1.50% | 99.0 | 0.99 | 99 | 1.49 | |
| 6 | 28 मई 2019 | 1.50% | 105.5 | 1.06 | 105.5 | 1.58 | |
| 7 | 28 मई 2020 | 1.50% | 110.2 | 1.10 | 110.2 | 1.65 | |
| 8 | 28 मई 2021 | 1.50% | 106.5 | 1.07 | 106.5 | 1.60 | |
| 9 | 28 मई 2022 | 1.50% | 104.2 | 1.04 | 104.2 | 1.56 | |
| 10 | 28 मई 2023 | 1.50% | 99.2 | 0.99 | 99.2 | 1.49 | 100 |
सीटीएस में, प्रस्तुतकर्ता बैंक (या उसकी शाखा) अपने कैप्चर सिस्टम (स्कैनर, कोर बैंकिंग या अन्य एप्लिकेशन से युक्त) का उपयोग करके डेटा (एमआईसीआर बैंड पर) और चेक की छवियों को कैप्चर करता है, यह कैप्चर सिस्टम बैंक के लिए आंतरिक है और सीटीएस के तहत डेटा और छवियों के लिए निर्धारित विनिर्देश और मानक को पूरा करता है।
डेटा / छवियों की सुरक्षा, सकुशलता और गैर-अस्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए, सीटीएस में एंड-टू-एंड पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर (पीकेआई) लागू किया गया है। आवश्यकता के भाग के रूप में, संग्रहकर्ता बैंक (प्रस्तुत करने वाला बैंक) भुगतान करने वाले बैंक (गंतव्य या अदाकर्ता बैंक) को आगे भेजने के लिए, विधिवत डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित और एन्क्रिप्टेड डेटा और कैप्चर की गई छवियों को केंद्रीय प्रसंस्करण स्थान (क्लियरिंग हाउस) को भेजता है। सीटीएस के तहत समाशोधन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए, प्रस्तुतकर्ता बैंक और अदाकर्ता बैंक या तो क्लियरिंग हाउस इंटरफेस (सीएचआई) या डेटा एक्सचेंज मॉड्यूल (डीईएम) का उपयोग करते हैं, जो उन्हें केंद्रीकृत समाशोधन हाउस (सीसीएच) के लिए सुरक्षित और सकुशल तरीके से डेटा और छवियों को जोड़ने और प्रसारित करने में सक्षम बनाता है।
समाशोधन गृह डेटा को संसाधित करता है, निपटान स्थिति पर पहुँचता है, और छवियों और आवश्यक डेटा को भुगतान करने वाले बैंकों को भेजता है। इसे प्रेजेंटेशन क्लियरिंग कहा जाता है। भुगतान करने वाले बैंक अपने सीएचआई / डीईएम के माध्यम से आगे की प्रक्रिया के लिए सीसीएच से इमेज और डेटा प्राप्त करते हैं।
अदाकर्ता बैंक का सीएचआई / डीईएम, भुगतान न किए गए लिखतों (चेकों), यदि कोई हो, के लिए रिटर्न फाइल भी तैयार करता है। अदाकर्ता बैंकों द्वारा भेजी गई रिटर्न फाइल / डेटा को रिटर्न समाशोधन सत्र में समाशोधन गृह द्वारा उसी तरह से संसाधित किया जाता है जैसे प्रस्तुतीकरण समाशोधन और रिटर्न डेटा को प्रसंस्करण के लिए प्रस्तुतकर्ता बैंकों को प्रदान किया जाता है।
समाशोधन चक्र को एक बार प्रस्तुति समाशोधन और संबंधित वापसी समाशोधन सत्र सफलतापूर्वक संसाधित होने के बाद पूर्ण माना जाता है। सीटीएस प्रौद्योगिकी का संपूर्ण सार भुगतान प्रसंस्करण के लिए चेक की छवियों (भौतिक चेक के बजाय) के उपयोग में निहित है।
| भारतीय मूल के व्यक्ति न होने वाले व्यक्तियों द्वारा द्वारा विप्रेषण (नेपाल अथवा भूटान के नागरिकों अथवा भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) को छोड़कर) | अनिवासी भारतीयों (NRIs) / भारतीय मूल के व्यक्ति (PIOs) | भारतीय एंटिटी | भारत के बाहर के निवासी द्वारा स्थापित शाखा अथवा कार्यालय |
| 1. कोई व्यक्ति भारत में किसी नौकरी से सेवा-निवृत्त हुआ हो; 2. फेमा की धारा 6 (5)1 में उल्लिखित किसी व्यक्ति से उसने परिसंपत्तियों को उत्तराधिकार में पाया हो; 3. भारत से बाहर की/का निवासी कोई विधवा/विधुर है और जिसने अपने मृतक पति/ पत्नी, जो भारत का/ की निवासी भारतीय नागरिक था/थी, की परिसंपत्तियां उत्तराधिकार में पायी हों। ऐसे विप्रेषण प्रति वित्तीय वर्ष एक मिलियन अमरीकी डालर से अधिक नहीं होने चाहिए। | 1. अनिवासी (साधारण) (NRO) खाते में जमाशेष से-घोषणा के अधीन * 2. परिसंपत्तियों की बिक्रीगत आगम राशि से 3. उत्तराधिकार / विरासत/ निष्पादित निपटान विलेख से अधिग्रहित आस्तियां प्रति वित्तीय वर्ष एक मिलियन अमरीकी डालर तक की राशि का विप्रेषण कर सकते हैं *जहां विप्रेषण एनआरओ (NRO) खाते में जमाशेष से किया जाता है/ जाना है, वहां खाताधारक व्यक्ति प्राधिकृत व्यापारी को इस आशय का वचनपत्र प्रस्तुत करेगा कि "विप्रेषक के खाते में जमाशेष से विप्रेषण किया जाना है, जिसमें जमाशेष भारत में उसे वैध रूप में प्राप्त हुई राशि है और जो किसी अन्य व्यक्ति से उधार नहीं लिया गया है अथवा किसी अन्य एनआरओ खाते से अंतरित नहीं किया गया है तथा यदि ऐसा पाया जाएगा तो खाताधारक फेमा के अंतर्गत स्वयं को दण्ड का भागी बनाएगा।" | किसी संस्था (एंटिटी) का अपने प्रवासी स्टाफ, जो भारत के निवासी है, परंतु “स्थायी रूप से भारत में निवास नहीं करते”, की भविष्य निधि / अधिवर्षिता / पेंशन निधि में अंशदान | अपेक्षित दस्तावेजों की प्रस्तुति के बाद समापन पर आगम राशि का विप्रेषण कर सकते हैं |
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मात्र रिटेल निवेशक इन प्रतिभूतियों में निवेश के लिए पात्र होंगे। रिटेल निवेशकों में वैयक्तिक, हिन्दू अविभाजित परिवार (एचयूएफ़), भारतीय कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत धर्मार्थ संस्थाएं और केंद्र, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा निगमित विश्वविद्यालय या विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) के खंड 3 के अंतर्गत घोषित विश्वविद्यालय शामिल होंगे।
उत्तर: सभी श्रेणी के विदेशी मुद्रा अर्जक जैसे व्यक्ति, कंपनियाँ, आदि जो भारत में निवास करते हैं वे विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते खोल सकते हैं।
उत्तर: उधारकर्ताओं की पहचान करने के लिए केवल बैंकों, एनबीएफसी और अन्य विनियमित एआईएफआईज की सहायता करने वाले इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्मस को पी2पी प्लेटफॉर्म नही माना जाएगा। हालांकि, ऐसे मामलों में जहां बैंकों या एनबीएफसी या एआईएफआईज के अलावा अन्य खुदरा ऋणदाता ऋण देने के लिए उक्त प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, तो उस प्लेटफॉर्म को एनबीएफसी-पी2पी के रूप में अलग से पंजीकरण करना होगा।
As on date, four NBFC Ombudsman have been appointed with their offices located at Chennai, Kolkata, New Delhi and Mumbai. The addresses, contact details and territorial jurisdiction of the Ombudsman is provided in the Annex I of the Scheme.
उत्तर: नहीं, यदि किसी एलओ/ बीओ को एक से अधिक खाते खोलने हों, तो उसे अपने एडी श्रेणी-I बैंक के माध्यम से रिज़र्व बैंक की पूर्वानुमति प्राप्त करनी होगी और अतिरिक्त खाता खोलने की आवश्यकता का उचित कारण भी देना होगा।
उत्तर: ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर विक्रेता, खरीदार और फाइनेंसर सहभागी होते हैं।
उत्तर:
ए. एसएनआरआर खाते में डेबिट के लिए (घरेलू स्तर पर आगे क्रेडिट के लिए)
पारदेशीय क्रेता के एसएनआरआर खाते में डेबिट के जरिये किसी भारतीय पक्ष द्वारा निर्यात आय प्राप्त करने के मामले में:
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निर्यात भुगतान प्राप्ति संबंधी किसी भी आवक विप्रेषण के मामले में, निर्यात दस्तावेज रखने वाला एडी बैंक फेमा के तहत निर्धारित सभी निर्यात संबंधी नियमों/विनियमों/दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करेगा।
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एसएनआरआर खाता रखने वाला एडी बैंक अपने विदेशी ग्राहक के ब्योरे रखने और संबंधित फेमा प्रावधानों के अनुपालन की समुचित सावधानी बरतने के लिए जिम्मेदार होगा। इसके अलावा, भारतीय निर्यातक के एडी बैंक (लाभार्थी के बैंक) को निधियों का अंतरण करते समय वह केवाईसी संबंधी सम्पूर्ण ब्योरा, जैसे: खाताधारक का ब्योरा (नाम, पता, देश आदि), विप्रेषण का उद्देश्य, विप्रेषित की जा रही राशि और उसकी करेंसी की जानकारी , लाभार्थी का नाम व खाता संख्या आदि की जानकारी प्रदान करें, ताकि आगे उक्त प्रेषण के संबंध में ईडीपीएमएस में प्रविष्टियां बंद करने में सहूलियत हो।
बी. एसएनआरआर खाते में क्रेडिट करने के लिए (घरेलू खाते से प्राप्त)
किसी भारतीय पक्ष द्वारा आयात के लिए भुगतान हेतु पारदेशीय विक्रेता के एसएनआरआर खाते में क्रेडिट के माध्यम में:
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आयात भुगतान संबंधी किसी भी जावक विप्रेषण के मामले में, आयात दस्तावेज रखने वाला एडी बैंक फेमा के तहत आयात संबंधी सभी निर्धारित नियमों/विनियमों/ दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करेगा।
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वह अपने पारदेशीय ग्राहक का एसएनआरआर खाता रखने वाले एडी बैंक को आयातक से संबंधित सभी आवश्यक ब्योरे भी प्रेषित करेगा।
सी. इसी प्रकार, बाह्य वाणिज्यिक उधार, व्यापार ऋण, विदेशी निवेश, आदि के मामले में, निवासी ग्राहक के खाते रखने वाले नामित प्राधिकृत व्यापारी बैंक फेमा प्रावधानों जिसमें एफआईआरसी जारी करना, जहां भी लागू हो, का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे, , यह उसी तरीके से करना होगा जैसे किसी आवक विप्रेषण के तहत मुक्त रूप से परिवर्तनीय मुद्रा में प्राप्त निधियों के मामलों में किया जाता है। इसके अलावा, लेनदेन में शामिल बैंक ऊपर उल्लिखित प्रक्रिया के समान ही लेनदेन के ब्योरे साझा करने के लिए उत्तरदायी होंगे।
उत्तर. संस्थाओं (गैर-व्यक्तियों) द्वारा किए गए ₹50 करोड़ और उससे अधिक के सभी एकल भुगतान लेनदेन में प्रेषक और लाभार्थी एलईआई सूचना शामिल होनी चाहिए। यह एनईएफटी और आरटीजीएस भुगतान प्रणालियों के माध्यम से किए गए लेनदेन पर लागू होता है।
आरटीजीएस के मामले में, उपरोक्त मानदंड को पूरा करने वाले ग्राहक भुगतान और अंतर-बैंक लेनदेन दोनों में एलईआई जानकारी शामिल होनी चाहिए।
एनबीएफसी सहित सभी उधार दाता संस्थाओं के सभी कृषि ऋण एक्सपोजर, जो 7 जुलाई 2016 के मास्टर निदेश विसविवि.केंका.प्लान.1/04.09.01/2016-17 (अद्यतित) के पैरा 6.1 में सूचीबद्ध प्रकार के हैं, किंतु जिसमें डेयरी, मत्स्य पालन, पशुपालन, पोल्ट्री, मधुमक्खी पालन और रेशम पालन जैसी संबन्धित गतिविधियां शामिल नहीं है, को समाधान ढांचे के दायरे से बाहर रखा गया है। उपर्युक्त के अनुपालन में, किसान परिवारों को दिए गए ऋण समाधान ढांचे के तहत समाधान के लिए पात्र होंगे, यदि वे समाधान ढांचे की अपवर्जन सूची की किसी अन्य शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।
जी नहीं, 'नो फ्रील' खातों पर 24 नवंबर 2005 के परिपत्र शबैवि.बीपीडी.परि.सं. 19/13.01.000/2005-06 में निहित अनुदेशों के अधिक्रमण में बैंकों को अब अपने सभी ग्राहकों को 'बुनियादी बचत बैंक जमा खाता' प्रदान करने के लिए 17 अगस्त 2012 के परिपत्र शबैवि.बीपीडी.परि. सं. 5/13.01.000/2012-13 द्वारा सूचित किया गया है जिसमें उसमें वर्णित प्रकार से न्यूनतम आम सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। बैंकों से अपेक्षित है कि वे अपने वर्तमान के 'नो फ्रील' खातों को'बुनियादी बचत बैंक जमा खाता' में परिवर्तित कर दें।
उत्तर
नहीं। नो फ्रिल खातों पर 13 दिसंबर 2005 के परिपत्र ग्राआऋवि.आरएफ.बीसी.54/07.38.01/2005-06 और दिनांक 27 दिसंबर 2005 को जारी परिपत्र संख्या आरपीसीडी. सीओ. सं. आरआरबी. बीसी. 58/03.05.33(एफ)/2005-06 में निहित निर्देशों का अधिक्रमण करते हुए, बैंकों को अब 22 अगस्त 2012 के परिपत्र संख्या आरपीसीडी.सीओ.आरआरबी.आरसीबी.बीसी.सं.24/07.38.01/2012-13 के दिशानिर्देशों के अनुसार अपने सभी ग्राहकों को एक 'आधारभूत बचत बैंक जमा खाता' प्रदान करने की सूचना दी गई है, जो उसमें बताए गए अनुसार न्यूनतम सामान्य सुविधाएं प्रदान करेगा। बैंकों को मौजूदा 'नो-फ्रिल्स' खातों' को 'आधारभूत बचत बैंक जमा खातों' में बदला जाना आवश्यक है।
उत्तर: हाँ, एमडी के पैराग्राफ 7(ख) और 7(ग) के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के क्रेडिट कार्ड जारी करना संभव बनाया गया है, जिन्हें संबंधित ऋण खाते के लिए निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुरूप विभिन्न ऋण खातों में उपलब्ध सीमाओं तक पहुंचने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, बैंक से ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ उठाने वाले ग्राहक को सुविधा के अंतर्गत उपलब्ध धनराशि प्राप्त करने के लिए एक प्रकार का क्रेडिट कार्ड जारी किया जा सकता है। इस क्रेडिट कार्ड के उपयोग की शर्तें (ब्याज शुल्क, पुनर्भुगतान अनुसूची, जुर्माना, नकद निकासी सीमा आदि) ओवरड्राफ्ट सुविधा पर लागू नियमों और शर्तों के अनुरूप होंगी।
इसके अलावा, पैरा 7(ग) के माध्यम से कार्ड जारीकर्ताओं को उनकी क्रेडिट कार्ड नीति में परिकल्पित व्यावसायिक क्रेडिट कार्ड डिजाइन करने के लिए पर्याप्त लचीलापन प्रदान किया गया है। हालाँकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बैंक नकद क्रेडिट/ऋण खातों के लिए डेबिट कार्ड जारी नहीं कर सकते हैं।
उत्तर: डीईए निधि में जमा की गई राशि बैंकों (वाणिज्यिक बैंकों, सहकारी बैंकों) के साथ रखे गए किसी भी जमा खाते में क्रेडिट शेष है, जिसे जमाकर्ता द्वारा 10 साल अथवा उससे अधिक समय से संचालित नहीं किया गया है, अथवा 10 वर्षों से अथवा उससे अधिक दावा न की गई कोई शेष राशि है और इसमें निम्नलिखित शामिल हैं: (ए) बचत बैंक जमा खातें;
(बी) सावधि अथवा मीयादी जमा खातें;
(सी) संचयी/आवर्ती जमा खातें;
(डी) चालू जमा खातें;
(ई) किसी भी रूप अथवा नाम में अन्य जमा खाते;
(एफ) नकदी ऋण खातें;
(जी) बैंकों द्वारा उचित विनियोजन उपरांत ऋण खाते;
(एच) साख पत्र/गारंटी आदि जारी करने अथवा किसी प्रतिभूति जमाराशि के बदले मार्जिन राशि;
(आई) बकाया टेलीग्राफिक अंतरण, मेल ट्रांसफर, मॉंग ड्राफ्ट, भुगतान आदेश, बैंकर्स चेक, विविध जमाराशियां खाते, उनका खाते, अंतर-बैंक समाशोधन समायोजन, असमायोजित राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण(एनईएफटी) क्रेडिट शेष और ऐसे अन्य अस्थायी खाते, स्वचालित टेलर मशीन (एटीएम) लेनदेन, आदि के कारण असंगत क्रेडिट शेष ;
(जे) बैंकों द्वारा जारी किए गए किसी भी प्रीपेड कार्ड में शेष बची शेष राशि, परंतु यात्री चेक अथवा अन्य समान लिखतों के खिलाफ बकाया राशि नहीं, जिनकी कोई परिपक्वता अवधि नहीं है;
(के) मौजूदा विदेशी मुद्रा विनियमों के अनुसार विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलने के उपरांत बैंकों द्वारा रखी गई विदेशी मुद्रा जमा से रुपये में लाभ; और (एल) ऐसी अन्य राशियाँ जो रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट की जा सकती हैं।
उत्तर: नहीं। 04 मार्च 2024 तक, 30 बैंक उद्गम (UDGAM) पोर्टल का हिस्सा हैं, और वे आरबीआई के जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) निधि में लगभग 90% अदावी जमा (मूल्य के संदर्भ में) को कवर करते हैं। इन बैंकों की सूची UDGAM के होम पेज (https://udgam.rbi.org.in/unclaimed-deposits/#/login) और आरबीआई की दिनांक 05 अक्टूबर 2023 को जारी प्रेस विज्ञप्ति (https://rbi.org.in/web/rbi/-/press-releases/money-market-operations-as-on-december-15-2023) पर उपलब्ध है। शेष बैंक भी इसमें शामिल होने की प्रक्रिया में हैं।
उत्तर. एनबीएफसी के लिए स्केल-आधारित विनियमों (एसबीआर) के अंतर्गत, कोई भी एनबीएफसी-आईएफसी मिडिल लेयर या अपर लेयर में हो सकती है (और बेस लेयर में नहीं), जैसा भी मामला हो। कोई एनबीएफसी-आईएफसी जिस लेयर में आएगी, उसके आधार पर एक्सपोज़र सीमाएँ नीचे दी गई हैं:
| मिडिल लेयर में एनबीएफसी-आईएफसी के लिए एक्सपोजर सीमा (टियर 1 पूंजी के % के रूप में) | बड़े एक्सपोज़र फ्रेमवर्क के अनुसार अपर लेयर में एनबीएफसी-आईएफसी के लिए एक्सपोज़र सीमा (पात्र पूंजी आधार के % के रूप में) | |
| एकल उधारकर्ता | 30% | 25% (बोर्ड की मंजूरी के साथ अतिरिक्त 5%) |
| उधारकर्ताओं का एकल समूह | 50% | 35% |
उत्तर: इस योजना के तहत निम्नलिखित के लिए विप्रेषण की सुविधा उपलब्ध नहीं है:
(i) विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) विनियमावली, 2000 की अनुसूची-। के तहत विशेष रूप से निषिद्ध किसी भी प्रयोजन (जैसे लॉटरी टिकट खरीदने/ जुए में दांव लगाने, निषिद्ध पत्रिकाओं की खरीद, आदि) अथवा अनुसूची-॥ के तहत प्रतिबंधित किसी भी मद के लिए विप्रेषण;
(ii) पारदेशीय विनिमय गृहों/ पारदेशीय प्रतिपक्ष को मार्जिन अथवा मार्जिन कॉल के लिए भारत से विप्रेषण;
(iii) पारदेशीय द्वितीयक बाजार में भारतीय कंपनियों द्वारा जारी विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांडों की खरीद के लिए विप्रेषण;
(iv) विदेशों में विदेशी मुद्रा की ट्रेडिंग के लिए विप्रेषण;
(v) पूंजी खाता लेनदेनों के लिए यह योजना उन देशों के लिए उपलब्ध नहीं है जिनकी पहचान वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) ने समय समय पर “असहयोगी देशों एवं क्षेत्राधिकारों” के रूप में की है।
(vi) जिन व्यक्तियों या संस्थाओं की पहचान आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने के कारण बेहद जोखिम वालों के रूप में की गई हो तथा जिसके बारे में रिज़र्व बैंक ने बैंकों को अलग से सूचित किया हो उन्हें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विप्रेषण भेजने की अनुमति भी नहीं है।
(vii) एक निवासी द्वारा दूसरे निवासी को एलआरएस के तहत विदेश में रखे गए विदेशी मुद्रा खाते में क्रेडिट के लिए विदेशी मुद्रा में उपहार देना।
नहीं, सरफेसी अधिनियम, 2002 के अंतर्गत मौजूद और पहले ही बेची जा चुकी आस्तियों को वेबसाइट पर प्रकाशित करने की आवश्यकता नहीं है।
निम्नलिखित परिस्थितियों में आरई के पास मौजूद प्रतिभूति आस्तियों को वेबसाइट से हटा दिया जाएगा:
(i) जब प्रतिभूति आस्ति बेची जा चुकी हो; अथवा
(ii) जब प्रतिभूति लेनदार को बकाया राशि प्राप्त हो गई हो (जिसमें मूलधन, ब्याज और उधारकर्ता द्वारा प्रतिभूति लेनदार को देय कोई अन्य बकाया राशि शामिल है) अथवा उधारकर्ता से सहमत निपटान राशि का भुगतान हो गया हो।
उत्तर: सर्वेक्षण वार्षिक रूप से संचालित किया जाता है।
वर्तमान में, यूपीआई-पे नउ लिंकेज के माध्यम से प्रेषण प्राप्त करने के लिए भारत में भाग लेने वाले बैंक हैं:
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एक्सिस बैंक
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डीबीएस बैंक इंडिया
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आईसीआईसीआई बैंक
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इंडियन बैंक
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इंडियन ओवरसीज बैंक
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भारतीय स्टेट बैंक
उत्तर: यह सीमा डीएलजी सेट से किसी भी समय संवितरित कुल राशि पर लागू होती है (उपर्युक्त प्र.1 के उत्तर के साथ पढ़ें)। कृपया अंत में उदाहरण देखें।
उत्तर: नेपाल में रहने वाले लाभार्थी को प्रति लेनदेन 2 लाख रुपये तक विप्रेषित किया जा सकता है; बशर्ते प्रेषक का खाता भारत में किसी भी एनईएफटी सक्षम बैंक शाखा में हो।
वॉक-इन / गैर-ग्राहक, नेपाल में रहने वाले लाभार्थी को, प्रति लेनदेन ₹50,000 तक भेजे जा सकते हैं।
उत्तर. अनिवासी प्रतिपक्ष/ पारदेशीय संस्थाओं के संबंध में, प्राधिकृत व्यापारी बैंक कृपया उक्त परिपत्र के पैरा 2 में निहित निर्देश का संदर्भ लें।
उत्तर: (ए) नीचे दिए गए मौजूदा दिशानिर्देश आरई को हरित जमाराशि पर अलग-अलग ब्याज दर की पेशकश करने की अनुमति नहीं देते हैं:
(बी) आरई अपने ग्राहकों को आय के आवंटन/उपयोग की परवाह किए बिना सहमत नियमों और शर्तों और उपरोक्त निर्देशों के अनुसार हरित जमाराशि पर ब्याज का भुगतान करेंगे। (सी) हरित जमाराशि की समयपूर्व निकासी पर कोई प्रतिबंध नहीं है, हालांकि, आरई को ऊपर उल्लिखित मौजूदा दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। इसके अलावा, समय से पहले निकासी का हरित जमाराशि की आय का उपयोग करके शुरू की गई गतिविधियों/परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022