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सूक्ष्मवित्त (माइक्रोफाइनेंस) ऋणों के लिए विनियामकीय ढांचे

उत्तर. सूक्ष्मवित्त ऋणों के लिए विनियामकीय ढांचा केवल निर्देशों के पैरा 2.14 और पैरा 9.25 के तहत परिभाषित आरई/ संस्थाओं पर लागू होता है। हालांकि, सूक्ष्मवित्त क्षेत्र में काम करने वाले अन्य ऋणदाताओं के लिए इन ग्राहक-केंद्रित निर्देशों का पालन करना विवेकपूर्ण हो सकता है।

The complainant is required to give details such as,The name and the address of the complainantThe name and address of the branch or office of the System Participant against whom the complaint is made;The facts giving rise to the complaint, supported by documents, if any;The nature and extent of the loss caused to the complainant;The relief sought for; andDeclaration that the complaint is maintainable under Clause 9(3) of the Scheme.
बैंकों को आरबीआई के साथ आईएसडीए करार करने की आवश्यकता नहीं है।

समाधान ढ़ांचे के तहत केवल ऐसी समाधान योजनाओं पर विचार किया जाएगा, जिन्हें सीआरए से अवशिष्ट ऋण के लिए आरपी4 या इससे बेहतर का क्रेडिट अभिमत मिलता है। यदि एक से अधिक सीआरए से क्रेडिट अभिमत लिया जाता है, तो ऐसे सभी क्रेडिट अभिमत आरपी4 या बेहतर होने चाहिए।

उत्तर: ट्रेड्स सहित सभी प्राधिकृत भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों (पीएसओ) की सूची निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है www.rbi.org.in → "भुगतान और निपटान प्रणाली" ड्रॉप डाउन → " ग्राहकों के लिए उपयोगी सूचना" → "प्राधिकृत संस्थाओं की सूची - भुगतान प्रणाली परिचालक”। यह निम्नलिखित वेब लिंक पर उपलब्ध है: /en/web/rbi/-/publications/certificates-of-authorisation-issued-by-the-reserve-bank-of-india-under-the-payment-and-settlement-systems-act-2007-for-setting-up-and-operating-payment-system-in-india-12043

उत्तर: रिज़र्व बैंक द्वारा डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड पर बीमा कवर की कोई आवश्यकता निर्धारित नहीं की गई है। हालाँकि, यदि कोई कार्ड-जारीकर्ता अथवा कार्ड भुगतान नेटवर्क मानार्थ या प्रभार्य (कार्डधारक की सहमति से) बीमा कवर प्रदान करता है, तो कार्ड-जारीकर्ता द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रासंगिक नामांकन विवरण बीमा कंपनी द्वारा दर्ज किया गया है और प्रत्येक विवरण में अन्य जानकारी के साथ बीमा की उपलब्धता भी शामिल है। जानकारी में बीमा कवर, बीमा कंपनी का नाम/पता और टेलीफोन नंबर से संबंधित विवरण भी शामिल होगा जो बीमा कवर से संबंधित दावों को संभालेगा। समूह बीमा पॉलिसी के मामले में, कार्ड-जारीकर्ता के संबंधित अधिकारियों का संपर्क विवरण निर्धारित प्रारूप में प्रदान किया जाएगा।

उत्तर: टोकनाइजेशन अनुरोध के लिए पंजीकरण केवल अतिरिक्त प्रमाणीकरण कारक (एएफए) के माध्यम से स्पष्ट ग्राहक सहमति के साथ किया जाता है, न कि चेक बॉक्स, रेडियो बटन आदि के एक बलपूर्वक / डिफ़ॉल्ट / स्वचालित चयन के माध्यम से। ग्राहक को उपयोग के मामले का चयन करना और सीमा निर्धारित करने का भी विकल्प दिया जाएगा।
नहीं । यह सरकारी प्रतिभूति अधिनियम या सरकारी प्रतिभूति विनियम के अंतर्गत नहीं आते है ।
The requirement is that the companies in the Promoter Group in which the public hold not less than 51 per cent of the voting equity shares shall hold not less than 51 per cent of the total voting equity shares of the NOFHC.[ para 2 (C) (ii) (b) of the guidelines] A company in which public holds 51 per cent need not necessarily be listed. For the purpose of these guidelines, ‘public shareholding’ implies that no person along with his relatives (as defined in Section 6 of the Companies Act, 1956) and entities in which he and / or his relatives hold not less than 50 per cent of the voting equity shares, by virtue of his shareholding or otherwise, exercises ‘significant influence’ or ‘control’ (as defined in Accounting Standard 23) over the company.
यदि संयुक्‍त खरीद है तो विशिष्ट आवेदन पर यह सीमा पहले आवेदक पर लागू होगी।

उत्तर: किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में विप्रेषण किए जा सकते हैं।


ये अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा केवल सूचना और सामान्य मार्गदर्शन उद्देश्यों के लिए जारी किए जाते हैं। इनके आधार पर की गई कार्रवाइयों और / या निर्णयों के लिए बैंक को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है। स्पष्टीकरणों या व्याख्याओं के लिए, यदि कोई हो, तो बैंक द्वारा समय-समय पर जारी प्रासंगिक परिपत्रों और अधिसूचनाओं द्वारा निर्देशित हो सकते है।

उत्तर: नहीं, भले ही किसी कंपनी की खाता बंद करने की अवधि, संदर्भ अवधि (मार्च के अंत) से अलग हो। एमएफ सर्वेक्षण की जानकारी कंपनी के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर सर्वेक्षण संदर्भ अवधि के लिए रिपोर्ट की जानी चाहिए।

भाग लेने वाले बैंक चरणबद्ध तरीके से अपने संबंधित यूपीआई ऐप में एक अपडेट जारी करेंगे और ग्राहकों को अपने यूपीआई ऐप को अपडेट करना होगा ताकि वैश्विक प्रेषण सुविधा को उनके एप में सक्षम किया जा सके।
बैंकों को यह व्यवस्था करने के अनुदेश दिए गए हैं कि वरिष्ठ नागरिकों, अशक्त व्यक्तियों आदि जिन्हें ₹2,000/- मूल्य वर्ग के बैंकनोट बदलने/जमा करने हैं, को कम असुविधा हो।

उत्तर: नवीनतम लेखापरीक्षित वित्तीय विवरणों के अनुसार, न्‍यूनतम रु.500 करोड़ की निवल संपत्ति या न्यूनतम 1000 करोड़ रुपये का कारोबार वाले प्रतिष्‍ठानों के अलावा नियंत्रित वित्‍तीय प्रतिष्‍ठानों और अनिवासियों (व्‍यक्तियों के अलावा) को गैर-रिटेल प्रयोक्‍ताओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। अन्‍य सभी प्रकार के प्रयोक्‍ताओं को रिटेल प्रयोक्‍ता के लिए रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

उत्तर: ये दिशानिर्देश ऐसे सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिए जाने वाले 'डिजिटल ऋणों' पर लागू होते हैं, जो डिजिटल उधार दिशानिर्देशों पर हमारे ०२ सितंबर २०२२ के परिपत्र के अनुसार 'डिजिटल उधार ऐप/ प्लेटफॉर्म' (डीएलए) की परिभाषा को पूरा करते हैं।

बैंक दिनांक 1 अप्रैल 2023 के ‘अग्रिमों के संबंध में आय निर्धारण, आस्ति वर्गीकरण तथा प्रावधानीकरण से संबंधित विवेकपूर्ण मानदंड’ पर मास्टर परिपत्र के पैरा 3.2.3 द्वारा निर्देशित हो सकते हैं - जिसके अनुसार एनपीए, शुल्क, कमीशन और इसी तरह की आय के संबंध में जो अर्जित हुई है, उसे वर्तमान अवधि में अर्जित करना बंद कर देना चाहिए और पिछली अवधि के संबंध में, यदि एकत्र नहीं किया गया है, वापस कर दिया जाना चाहिए।तदनुसार, एनपीए खातों के संबंध में, दंडात्मक शुल्क उस सीमा तक वापस कर दिया जाएगा, जब तक कि यह आय की गैर-मान्यता के विशिष्ट उद्देश्य के लिए संग्रहीत न रह जाए। तथापि, यह उधारकर्ता की ऋणदाता के प्रति कुल देनदारी का हिस्सा होगा, जब तक कि इसमें बैंक की बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार छूट नहीं दे दिया जाता है।

उत्तर. नहीं। इन निदेशों के पैरा 20.2.1 के अनुसार, बैंक एफ़सीएनआर(बी) योजना के तहत आवर्ती जमा स्वीकार नहीं कर सकते हैं।

उत्तर: निर्यात सेवा के प्रकार के अनुसार कुल इनवाइस मूल्य मूल रूप से भारतीय रुपये (आईएनआर) (जिसमें विदेश में सहायक (कों)/ सहयोगी(यों) के बिलिंग भी शामिल होना चाहिए) में होना चाहिए।

बैंकों से अपेक्षित है कि यूएसडी में मूल्यांकित चेकों के लिए वसूली नीति को पारदर्शी बनाएं जिसमें उपर्युक्त विवरण के अनुसार सभी संगत पहलू शामिल हों। बैंकों से अपेक्षित है कि इस नीति का अपनी शाखाओं में, अपने वेबसाइट, आदि पर व्यापक रूप से प्रसार करें। नीति की एक प्रति शाखा प्रबंधक के पास उपलब्ध रहेगी ताकि ग्राहक उसे पढ़ सकें। बैंकों को सूचित किया गया है कि वसूली में विलंब/प्राप्य राशियों, आदि में विलंब जैसी शिकायतों को दूर करें। ग्राहक शिकायतों के निवारण के लिए रिज़र्व बैंक की बैंकिंग ओम्बड्समैन योजना, 2006 का सहारा ले सकते हैं।

नीचे दिए गए प्रश्न 14 के तहत सूचीबद्ध शिकायतों को छोड़कर, आरई की ओर से 'सेवा में कमी' से संबंधित सभी शिकायतों को आरबी-आइओएस, 2021 के तहत संचलित किया जाता है। आरबी-आइओएस, 2021 के अनुसार सेवा में कमीका अर्थ विनियमित संस्था से वैधानिक रुप से या अन्‍यथा प्रदान करने के लिए अपेक्षित किसी भी वित्‍तीय सेवा या उससे संबंधित अन्य सेवा में कमी या अपर्याप्‍तता से है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राहक को वित्तीय नुकसान या क्षति हो सकती है या नहीं भी हो सकती है।

उत्तर: ऊपर उल्लिखित नि: शुल्क लेन-देन बीएसबीडीए पर लागू नहीं हैं क्योंकि बीएसबीडीए से आहरण की संख्या ऐसे खातों से जुड़ी शर्तों के अधीन होती है।

उत्तर: यह नीति किसी विशिष्ट देश को लक्षित कर के नहीं बनाई गई है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में भारतीय रुपये (आईएनआर) के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने हेतु लागू किए जा रहे सुविचारित उपायों का एक हिस्सा है।

उत्तर.  ग्राहक को ऑनबोर्ड करने के लिए आरई के पास निम्नलिखित विकल्प हैं:

(ए) प्रत्यक्ष ऑनबोर्डिंग:

  • आरई की शाखा/कार्यालय में जाएं ;

  • ई-केवाईसी प्रमाणीकरण (ओटीपी के साथ-साथ बायोमेट्रिक आधारित प्रमाणीकरण) का उपयोग करना; आधार संख्या के प्रमाण का ऑफलाइन सत्यापन करना; ओवीडी अथवा समतुल्य  ई-दस्तावेज़ की प्रमाणित प्रति प्राप्त करना; केवाईसी पर एमडी के पैरा 16 के अनुसार 'डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया' करना।
  • निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं का अनुपालन करने वाली वीडियो आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया (वी-सीआईपी)।

(बी) अप्रत्यक्ष ऑनबोर्डिंग:

  • आधार ओटीपी आधारित ई-केवाईसी अधिप्रमाणन का प्रयोग करना;
  • सीकेवाईसीआर, डिजिलॉकर, समतुल्य ई-दस्तावेज आदि जैसे डिजिटल चैनलों का उपयोग करना और गैर-डिजिटल प्रणाली जैसे एनआरआई और पीआईओ के लिए अनुमत अतिरिक्त प्रमाणन अधिकारियों द्वारा प्रमाणित ओवीडी की प्रति प्राप्त करना।

उत्तर: बैंक और सीपीटीसी/जीएमसीटीए इस संबंध में एक पारस्परिक रूप से स्वीकार्य प्रक्रिया बनायें और और संबंधित सीपीटीसी/जीएमसीटीए को इसकी सूचना दें।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम (एमएसएमईडी), 2006 के अधिनियमन के साथ, एमएसएमई इकाइयों द्वारा आपूर्ति की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के लिए, क्रेताओं द्वारा भुगतान निम्नानुसार किया जाना है:

  1. क्रेता को, उसके और आपूर्तिकर्ता के बीच लिखित रूप में सहमत तारीख को या उससे पूर्व आपूर्तिकर्ता को भुगतान करना होगा और यदि कोई करार नहीं हुआ हो तो नियत दिन से पूर्व भुगतान करना होगा। आपूर्तिकर्ता और क्रेता के बीच की सहमत अवधि 45 (पैंतालीस) दिन से अधिक नहीं होगी।
  2. यदि क्रेता आपूर्तिकर्ता को राशि का भुगतान नहीं कर पाया तो वह राशि पर नियत दिन या निर्धारित तारीख से रिज़र्व बैंक द्वारा अधिसूचित बैंक दर का तीन गुना चक्रवृद्धी ब्याज, मासिक आधार पर भुगतान करने हेतु बाध्य होगा।
  3. आपूर्तिकर्ता द्वारा माल की आपूर्ति या दी गई सेवा के लिए क्रेता उक्त (ii) में सूचित ब्याज के भुगतान हेतु बाध्य होगा।
  4. किसी देय राशि में विवाद होने पर संबंधित राज्य सरकार द्वारा गठित सूक्ष्‍म और लघु उद्यम सुविधा सेवा परिषद से संपर्क किया जाएगा।

इसके अलावा, बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे विशेष रूप से एमएसएमई से की गई खरीद के लिए भुगतान संबंधी दायित्‍व को पूरा करने के लिए बड़े उधारकर्ताओं के लिए कार्यशील पूंजी की समग्र सीमा के भीतर उप-सीमाएं निर्धारित करें। (कृपया 16 अक्‍तूबर 2000 के परिपत्र आईईसीडी/5/08.12.01/2000-01 देखें, जिसे 30 मई 2003 के परिपत्र सं.आईईसीडी.सं.20/08.12.01/2002-03 के माध्‍यम से दोहराया गया है)।

आप आरबीआई के फिनटेक विभाग द्वारा आयोजित समन्वय समूह को iors@rbi.org.in पर ईमेल के माध्यम से एकल आवेदन पत्र जमा करके आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र इस लिंक के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है: https://rbi.org.in/documents/d/rbi/hindi_regulatorysandbox-form-1-?fileEntryId=131893514

उत्तर: शमन पर लगाई जाने वाली दंड की राशि की गणना संबंधी मार्गदर्शी सिद्धांत ‘निदेश- फेमा 1999 के तहत उल्लंघनों का शमन’ के पैरा 5.4 में दिया गया है। तथापि, यह नोट किया जाए की उपर्युक्त मार्गदर्शी ढांचा केवल विभिन्न कार्यालयों में शमन प्राधिकारियों द्वारा लगाई जाने वाली दंड की राशि को मोटे तौर पर मानकीकृत करने के प्रयोजन के लिए है तथा दंड की वास्तविक राशि भिन्न हो सकती है जो जो कि ‘निदेश- फेमा 1999 के तहत उल्लंघनों का शमन’ के पैरा 5.3 में उल्लिखित कारकों की दृष्टि से मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

उत्तर. हाँ। देश में भुगतान प्रणाली का संचालन शुरू करने से पहले सभी संस्थाओं, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, को रिज़र्व बैंक से लाइसेंस/अनुमोदन/प्राधिकार प्राप्त करने की आवश्यकता है। पीएसएस अधिनियम इंगित करता है कि "कोई भी व्यक्ति रिज़र्व बैंक द्वारा जारी प्राधिकरण के तहत और उसके अनुसार भुगतान प्रणाली को संचालित नहीं कर सकता है"। विशिष्ट भुगतान प्रणालियों के लिए मानदंड भी निर्दिष्ट किए गए हैं जो संबंधित भुगतान प्रणाली दिशानिर्देशों/निर्देशों का हिस्सा हैं|

प्राधिकरण के लिए आवेदन का फॉर्म और तरीका https://rbi.org.in/documents/87730/30842423/PSSR23022022d57d6e9afaf44d97b9ed577d9d1c7c2b.pdf पर उपलब्ध है।

उत्‍तर: आवश्यक खुले पैसे उपलब्ध कराने की सुविधा सभी ई₹ वॉलेट में उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति किसी व्यापारी से ₹15 का सामान खरीदना चाहता है, लेकिन उसके ई₹ वॉलेट में केवल ₹20 मूल्यवर्ग उपलब्ध है, तो वह पैसे भेजते समय राशि फ़ील्ड में ₹15 दर्ज कर सकता है। ₹15 स्वचालित रूप से व्यापारी के खाते में जमा हो जाएँगे, तथा शेष ₹5 ई₹ वॉलेट में वापस आ जाएँगे।

चेक संग्रह के लिए ₹1,00,000/- तक तथा बचत खाता धारकों के लिए कोई सेवा शुल्क नहीं है। इसके ऊपर के चेक और अन्य खाता प्रकारों के लिए, सेवा शुल्क संबंधित बैंक द्वारा तय किया जा सकता है और अपने ग्राहकों को उनकी चेक संग्रह नीति के हिस्से के रूप में सूचित किया जाएगा।

उत्तर. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ‘गैर-लाभकारी’ कंपनियों (यानी., कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 या कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के तहत निगमित कंपनियां) को दी गई छूट उन पर लागू है जो निदेशों में परिभाषित माइक्रोफाइनेंस ऋण प्रदान कर रही हैं और 25 अगस्त, 2016 को जारी हमारे ‘मास्टर निदेश - भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों से छूट’ (समय-समय पर संशोधित) के पैरा 2(i) में निर्दिष्ट शर्तों के अधीन हैं। यह छूट एनबीएफआई व्यवसाय में कार्यरत अन्य ‘गैर-लाभकारी’ कंपनियों को लागू नहीं है और ऐसी कंपनियों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य है, यदि ये कंपनियां हमारी प्रेस प्रकाशनी 1998-99/1269 दिनांक 08 अप्रैल, 1999 में निर्दिष्ट मुख्य व्यवसाय मानदंड को पूरा करती है।

उत्तर. इन दोनों प्रकार के लघु पीपीआई से नकद आहरण अथवा निधियों के अंतरण की अनुमति नहीं है।
जी हां, तथापि, न्‍यूनतम निर्धारित सेवाओं के अतिरिक्‍त सेवाओं की अनुमति देने का निर्णय बैंकों के विवेक पर छोड़ दिया गया है जो या तो अतिरिक्‍त सेवाएं नि:शुल्‍क दे सकते हैं अथवा एक उचित एवं पारदर्शी आधार पर अतिरिक्‍त मूल्यवर्द्धित (वैल्‍यू ऍडेड) सेवाओं के लिए मूल्‍यन संरचना सहित ऐसी अपेक्षाएं निर्दिष्‍ट कर सकते हैं जिन्‍हें कि ग्राहकों को पूर्व सूचना देते हुए एक नि:पक्षपाती रूप में लागू किया जाना होगा। बैंकों से अपेक्षित है कि वे मूल्यवर्द्धित सेवाओं के लिए एक उचित मूल्‍यन संरचना स्‍थापित करें अथवा न्‍यूनतम शेष रखने की आवश्‍यकता निर्धारित करें जिसे सुस्‍पष्‍ट रूप से प्रदर्शित किया जाए और साथ ही साथ खाता खोलते समय ग्राहक को बतायी जाए। ऐसी अतिरिक्‍त सेवाएं देना सभी बुनियादी बचत बैंक जमा खाता ग्राहकों के लिए गैर-विवेकपूर्ण, पक्षपातरहित एवं पारदर्शी होना चाहिए। तथापि, अतिरिक्‍त सुविधाओं युक्‍त ऐसे खातों को बीएसबीडीए के रूप में नहीं माना जाएगा।

Ans : User institutions enjoy many advantages as well. For instance,

  • Savings on administrative machinery and costs of printing, dispatch and reconciliation of paper instruments that would have been used had beneficiaries not opted for ECS Credit.

  • Avoid chances of loss / theft of instruments in transit, likelihood of fraudulent encashment of paper instruments, etc. and subsequent correspondence / litigation.

  • Efficient payment mode ensuring that the beneficiaries get credit on a designated date.

  • Cost effective.

Residents are permitted to hold foreign currency up to US$2,000 or its equivalent provided the foreign exchange was -

    1. acquired by him while on a visit to any place outside India by way of payment for services not arising from any business in or anything done in India;

or

    1. acquired by him, from any person not resident in India and who is on a visit to India, as honorarium or gift or for services rendered or in settlement of any lawful obligation,

or

    1. acquired by him by way of honorarium or gift while on a visit to any place outside India;

or

    1. acquired by him from an authorised person for travel abroad and represents the unspent amount thereof.
जब एक बार जीओएच को एनडीएस-ओएम वेब माड्यूल में एक्‍सेस प्रदान कर दिया जाता है, प्राथमिक व्‍यापारी जीएएच के अंतर्गत प्रयोगकर्ता का निर्माण कर सकता है, जो सिस्‍टम में लॉग कर सकता है।
हाँ। एप्रोच पेपर की सिफारिशों के अनुसार तैयार किया जाने वाला रोडमैप बैंकों को एडीएफ प्राप्त करने के लिए माइलस्टोन स्थापित करने में सक्षम करेगा जो समय-समय पर कार्यान्वयन में हुई प्रगति की निगरानी में भी मदद करेगा।

उत्तर: टीएलटीआरओ 2.0 के तहत प्राप्त धनराशि को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और एमएफआई के निवेश ग्रेड बॉन्ड, वाणिज्यिक पत्र (सीपी) और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) में अभिनियोजित किया जाना है, जैसाकि 17 अप्रैल 2020 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है।

ऑन टैप टीएलटीआरओ / प्रत्यावर्तित टीएलटीआरओ / टीएलटीआरओ 2.0 के लेनदेन से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उ. नहीं , व्यक्तिगत संव्यबहारों में ईसीएस डेबिट द्वारा संग्रहित की जाने वाली राशि की कोई सीमा नही है.
Foreign exchange for travel abroad can be purchased from banks against rupee payment in cash up to Rs.50,000/-. However, if the rupee equivalent exceeds Rs.50,000/-, the entire payment should be made by way of a crossed cheque/banker’s cheque/pay order/demand draft only.

उत्तर: नहीं। एनईएफटी एक क्रेडिट-पुश प्रणाली है, अर्थात, लेन-देन भुगतानकर्ता/ विप्रेषक/प्रेषक द्वारा केवल लाभार्थी को धन का भुगतान/हस्तांतरण/प्रेषण के लिए किया जा सकता है।

इस योजना के तहत फ्रैंचाइज़ी नियुक्त करने के लिए एडी श्रेणी-I बैंक/ एडी श्रेणी-II अथवा एफएफएमसी को रिज़र्व बैंक के संबंधित कार्यालय में फॉर्म आरएमसी-एफ Form RMC-F (जैसा कि फेमा 1999 के तहत रिपोर्टिंग पर एफईडी मास्टर निदेश संख्या 18/2015-16 के भाग I: अनुबंध- II में दिया गया है) में आवेदन करना चाहिए। इस आवेदन के साथ इस आशय की घोषणा संलग्न होनी चाहिए कि फ्रैंचाइज़ी का चयन करते समय पर्याप्त सावधानी बरती गई है एवं ऐसी संस्थाएं फ्रैंचाइज़ी करार के प्रावधानों एवं मुद्रा परिवर्तन के संबंध में रिज़र्व बैंक के लागू विनियमों के पालन के लिए वचनबद्ध हैं। प्रथम फ्रैंचाइज़ी करार के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। तत्पश्चात, जब भी नए फ्रैंचाइज़ी करार हों तो ऊपर उल्लिखित तरीके से घोषणा संलग्न करते हुए कार्योत्तर आधार पर इसकी रिपोर्ट रिज़र्व बैंक को भेजी जाए।

भारतीय रिज़र्व बैंक केवल एसजीएल फॉर्म में प्रतिभूति जारी करेगा। इन प्रतिभूतियों को एग्रीगेटर या फेसिलिटेटर के सीएसजीएल खाते में जमा किया जाएगा। उनके द्वारा प्रतिभूतियों को निवेशकों के गिल्ट खाते में या डिमटेरियलाईज़्ड खाते में में क्रेडिट किया जाएगा।
Name and address of the complainant, the name and address of the branch or office of the bank against which the complaint is made, facts giving rise to the complaint supported by documents, if any, the nature and extent of the loss caused to the complainant, the relief sought from the Banking Ombudsman and a declaration about the compliance with conditions which are required to be complied with by the complainant under Clause 9(3) of the Banking Ombudsman Scheme.
The Government of India notifies the auction of government securities. It also notifies the amount and whether it will be a new loan or reissue of an existing loan. It also announces whether the bidders have to bid for the price or the coupon(interest rate).The competitive bidders put in competitive bids for the price or the coupon. The cutoff price or the coupon is then announced by RBI on the basis of the bids received. All successful bidders will be allotted the security auctioned either in full or in part.Example:Recently, an auction was held for government of India's 11 year Government Stock in which the notified amount was Rs.5,000 crore. The coupon rate for cut-off yield was 9.40 per cent. The weighted average yield was, however, 9.36 per cent since allotments were made to different successful bidders at the rates quoted by them at or below the cut off rates (i.e. multiple price auction system).

क. दिवंगत व्यक्ति जमाकर्ता के नाम अथवा दो या अधिक संयुक्त जमाकर्ताओं के नाम रखी गयी मीयादी जमाराशि जिनमें एक जमाकर्ता की मृत्यु हो गई हो, के मामले में परिपक्व हो चुकी जमाराशियों पर ब्याज का भुगतान करने के लिए अलग-अलग बैंकों को अपने विविक से नियम निर्धारित करने की छूट है बशर्ते इस संबंध में उनके निदेशक मंडल द्वारा पारदर्शी नीति बनाई गई हो।

ख. दिवंगत व्यक्ति जमाकर्ता / एकमात्र स्वामित्व प्रतिष्ठान के नाम में रखे गये चालू खाते के शेष के मामले में ब्याज 1 मई 1983 से या जमाकर्ता की मृत्यु की तारीख से, इनमें से जो भी बाद में हो, से लेकर दावेदार / दावेदारों को चुकौती की तारीख तक, भुगतान की तारीख को बचत खातों पर लागू ब्याज दर पर देय होगा। फिर भी, एनआरई जमाराशियों के मामलों में, यदि दावेदार निवासी हैं, परिपक्वता पर जमाराशि को घरेलू रुपये के तौर पर माना जाएगा तथा बाद की अवधि के लिए, समान परिपक्वता वाली घरेलू जमाराशि पर लागू दर पर ब्याज का भुगतान किया जाएगा।

The criteria for investment under the automatic route are as under:The total financial commitment of the Indian party in Joint Ventures/Wholly Owned Subsidiaries in any country other than Nepal, Bhutan and Pakistan is up to US$ 100 million or its equivalent in any one financial year or 100% of the net worth whichever is lower, and the investment is in a lawful activity permitted by a host country. The financial commitment in respect of Joint Ventures/Wholly Owned Subsidiaries in Myanmar and SAARC countries (other than Nepal, Bhutan and Pakistan) is up to US$ 150 million or its equivalent in any one financial year. (Please also see answer to Question No. 20).The Indian party is not on the Reserve Bank caution/defaulters list or under investigation by the Enforcement DirectorateThe Indian party routes all the transactions relating to the investment in a Joint Venture/Wholly Owned Subsidiary through only one branch of an authorised dealer to be designated by it.In respect of investments in non-core activities (refer Ques.15) the investing company has a proven track record.

उत्तर: हाँ। एक आईडीएफ-एनबीएफसी द्वारा व्यक्तिगत परियोजनाओं में अधिकतम एक्सपोजर होगा

  1. अपनी कुल पूंजी निधि (टियर I प्लस टियर II) के 50 प्रतिशत पर और एनबीएफसी के मामले में स्वामित्व वाली निधियों के लिए नहीं।

  2. आईडीएफ-एनबीएफसी के बोर्ड के विवेक पर 10 प्रतिशत तक का अतिरिक्त एक्सपोजर लिया जा सकता है।

  3. इसके साथ ही, यदि आईडीएफ-एनबीएफसी की वित्तीय स्थिति संतोषजनक है आरबीआई संतुष्ट होने पर और आईडीएफ-एनबीएफसी से आवेदन प्राप्त होने पर, अतिरिक्त विवेकपूर्ण सुरक्षा उपायों के संबंध में ऐसी शर्तों के अधीन 15 प्रतिशत (60 प्रतिशत से अधिक) तक अतिरिक्त जोखिम की अनुमति दे सकता है।

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पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022

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