प्रेस प्रकाशनियां
अक्तूबर 2025 माह के दौरान नागरिक चार्टर के अंतर्गत कार्य-निष्पादन का विश्लेषण किया गया है, और उसका सारांश नीचे दिया गया है
अक्तूबर 2025 माह के दौरान नागरिक चार्टर के अंतर्गत कार्य-निष्पादन का विश्लेषण किया गया है, और उसका सारांश नीचे दिया गया है
दिनांक 29 जुलाई 2025 के उपर्युक्त निदेशों के पैरा 7(बी) के अनुसार, यह निर्धारित किया गया है कि रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के परामर्श से, एक अधिसूचना द्वारा, कतिपय वैकल्पिक निवेश निधियों (एआईएफ) को उपरोक्त निदेशों (पैराग्राफ 5 - "सामान्य आवश्यकता" को छोड़कर) और इसी संबंध में जारी 19 दिसंबर 2023 और 27 मार्च 2024 के पिछले परिपत्रों के दायरे से छूट दे सकता है।
दिनांक 29 जुलाई 2025 के उपर्युक्त निदेशों के पैरा 7(बी) के अनुसार, यह निर्धारित किया गया है कि रिज़र्व बैंक, भारत सरकार के परामर्श से, एक अधिसूचना द्वारा, कतिपय वैकल्पिक निवेश निधियों (एआईएफ) को उपरोक्त निदेशों (पैराग्राफ 5 - "सामान्य आवश्यकता" को छोड़कर) और इसी संबंध में जारी 19 दिसंबर 2023 और 27 मार्च 2024 के पिछले परिपत्रों के दायरे से छूट दे सकता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (आईएमसीबीएल), लखनऊ को दिनांक 28 जनवरी 2022 के निदेश DOS.CO.OCCD.185569/12.28.007/2021-22 के माध्यम से 27 जुलाई 2022 तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे, जिसकी वैधता अवधि को समय-समय पर संशोधित किया गया तथा इसे पिछली बार दिनांक 17 जुलाई 2025 के निदेश DOR.MON.No.D-22/12.28.007/2025-26 के माध्यम से 27 अक्तूबर 2025 तक बढ़ाया गया था। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (आईएमसीबीएल), लखनऊ को दिनांक 28 जनवरी 2022 के निदेश DOS.CO.OCCD.185569/12.28.007/2021-22 के माध्यम से 27 जुलाई 2022 तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे, जिसकी वैधता अवधि को समय-समय पर संशोधित किया गया तथा इसे पिछली बार दिनांक 17 जुलाई 2025 के निदेश DOR.MON.No.D-22/12.28.007/2025-26 के माध्यम से 27 अक्तूबर 2025 तक बढ़ाया गया था। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दि सूरी फ्रेंड्स यूनियन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सूरी, पश्चिम बंगाल को दिनांक 21 जुलाई 2022 के निदेश सं. CO.DOS.SED.No.S2574/12-07-005/2022-23 के माध्यम से 22 जनवरी 2023 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे, जिसकी वैधता अवधि को समय-समय पर संशोधित किया गया तथा पिछली बार इसे दिनांक 17 जुलाई 2025 के निदेश DOR.MON.D-21/12.29.046/2025-26 के द्वारा 22 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति तक बढ़ाया गया था। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 22 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दि सूरी फ्रेंड्स यूनियन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सूरी, पश्चिम बंगाल को दिनांक 21 जुलाई 2022 के निदेश सं. CO.DOS.SED.No.S2574/12-07-005/2022-23 के माध्यम से 22 जनवरी 2023 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे, जिसकी वैधता अवधि को समय-समय पर संशोधित किया गया तथा पिछली बार इसे दिनांक 17 जुलाई 2025 के निदेश DOR.MON.D-21/12.29.046/2025-26 के द्वारा 22 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति तक बढ़ाया गया था। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 22 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत निदेश – दि कोणार्क अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, उल्हासनगर- अवधि बढ़ाना भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 23 अप्रैल 2024 के निदेश CO.DOS.SED.No.S592/45-11-001/2024-25 के माध्यम से दि कोणार्क अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, उल्हासनगर को 23 अप्रैल 2024 को कारोबार की समाप्ति से छह माह की अवधि के लिए निदेशाधीन रखा था। इन निदेशों की वैधता अवधि को समय-समय पर बढ़ाया गया, तथा पिछली बार इसे 23 अक्तूबर 2025 तक बढ़ाया गया था। 2. जनता के सूचनार्थ एतद्द्वारा अधिसूचित किया जाता है कि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक एतद्द्वारा निदेश देता है कि उपर्युक्त निदेश, दिनांक 17 अक्तूबर 2025 के निदेश DOR.MON/D-37/12.22.805/2025-26 के अनुसार 23 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति से 23 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक बैंक पर लागू रहेंगे, जो कि समीक्षाधीन होगा।
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत निदेश – दि कोणार्क अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, उल्हासनगर- अवधि बढ़ाना भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 23 अप्रैल 2024 के निदेश CO.DOS.SED.No.S592/45-11-001/2024-25 के माध्यम से दि कोणार्क अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, उल्हासनगर को 23 अप्रैल 2024 को कारोबार की समाप्ति से छह माह की अवधि के लिए निदेशाधीन रखा था। इन निदेशों की वैधता अवधि को समय-समय पर बढ़ाया गया, तथा पिछली बार इसे 23 अक्तूबर 2025 तक बढ़ाया गया था। 2. जनता के सूचनार्थ एतद्द्वारा अधिसूचित किया जाता है कि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए की उप-धारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक एतद्द्वारा निदेश देता है कि उपर्युक्त निदेश, दिनांक 17 अक्तूबर 2025 के निदेश DOR.MON/D-37/12.22.805/2025-26 के अनुसार 23 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति से 23 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक बैंक पर लागू रहेंगे, जो कि समीक्षाधीन होगा।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने पुणे सहकारी बैंक लिमिटेड, शिवाजीनगर, पुणे को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 9 मार्च 2023 के निदेश सं. CO.DOS.SED.No.S8240/12-22-493/2022-2023 के माध्यम से छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए। इन निदेशों की वैधता अवधि को समय-समय पर संशोधित किया गया और पिछली बार इसे 10 दिसंबर 2025 को कारोबार समाप्ति तक बढ़ाया गया था।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने पुणे सहकारी बैंक लिमिटेड, शिवाजीनगर, पुणे को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 9 मार्च 2023 के निदेश सं. CO.DOS.SED.No.S8240/12-22-493/2022-2023 के माध्यम से छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए। इन निदेशों की वैधता अवधि को समय-समय पर संशोधित किया गया और पिछली बार इसे 10 दिसंबर 2025 को कारोबार समाप्ति तक बढ़ाया गया था।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, प्रतापगढ़ को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 15 अप्रैल 2024 के निदेश CO.DOS.SED.No.S369/45-11-001/2024-25 के माध्यम से 15 अक्तूबर 2024 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे, जिसकी वैधता अवधि को पिछली बार दिनांक 8 जुलाई 2025 के निदेश DOR.MON/D-19/12.28.017/2025-26 द्वारा 15 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति तक बढ़ा दिया गया था।। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 15 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, प्रतापगढ़ को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 15 अप्रैल 2024 के निदेश CO.DOS.SED.No.S369/45-11-001/2024-25 के माध्यम से 15 अक्तूबर 2024 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे, जिसकी वैधता अवधि को पिछली बार दिनांक 8 जुलाई 2025 के निदेश DOR.MON/D-19/12.28.017/2025-26 द्वारा 15 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति तक बढ़ा दिया गया था।। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 15 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 15 अप्रैल 2024 के निदेश CO.DOS.SED. No. S370/45-11-001/2024-2025 के माध्यम से सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई को 15 अक्तूबर 2024 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेशाधीन रखा था, जिसे समय- समय पर संशोधित किया गया और पिछली बार इसकी वैधता अवधि को 15 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति तक बढ़ाया गया था।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 15 अप्रैल 2024 के निदेश CO.DOS.SED. No. S370/45-11-001/2024-2025 के माध्यम से सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई को 15 अक्तूबर 2024 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेशाधीन रखा था, जिसे समय- समय पर संशोधित किया गया और पिछली बार इसकी वैधता अवधि को 15 अक्तूबर 2025 को कारोबार की समाप्ति तक बढ़ाया गया था।
रिज़र्व बैंक का अपने विनियामक ढांचे को अनुकूलतम बनाने के लिए निरंतर प्रयास रहा है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ विनियामक बोझ और अनुपालन लागत को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, साथ ही मौजूदा अनुदेशों की वैधता का समय पर पुनर्मूल्यांकन भी किया गया है।
रिज़र्व बैंक का अपने विनियामक ढांचे को अनुकूलतम बनाने के लिए निरंतर प्रयास रहा है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ विनियामक बोझ और अनुपालन लागत को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, साथ ही मौजूदा अनुदेशों की वैधता का समय पर पुनर्मूल्यांकन भी किया गया है।
जन सामान्य के सूचनाथर् एतारा यह अिधसूिचत कया जाता है क बककारी िविनयमन अिधिनयम, 1949 क धारा 56 के साथ पठत धारा 35ए क उप-धारा (1) के अंतगर्त िनिहत शिय का योग करते ए, भारतीय रज़वर् बक ने दनांक 6 अूबर 2025
जन सामान्य के सूचनाथर् एतारा यह अिधसूिचत कया जाता है क बककारी िविनयमन अिधिनयम, 1949 क धारा 56 के साथ पठत धारा 35ए क उप-धारा (1) के अंतगर्त िनिहत शिय का योग करते ए, भारतीय रज़वर् बक ने दनांक 6 अूबर 2025
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: फ़रवरी 13, 2026