सूक्ष्मवित्त (माइक्रोफाइनेंस) ऋणों के लिए विनियामकीय ढांचे
समाधान ढ़ांचे के तहत केवल ऐसी समाधान योजनाओं पर विचार किया जाएगा, जिन्हें सीआरए से अवशिष्ट ऋण के लिए आरपी4 या इससे बेहतर का क्रेडिट अभिमत मिलता है। यदि एक से अधिक सीआरए से क्रेडिट अभिमत लिया जाता है, तो ऐसे सभी क्रेडिट अभिमत आरपी4 या बेहतर होने चाहिए।
उत्तर: ट्रेड्स सहित सभी प्राधिकृत भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों (पीएसओ) की सूची निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है www.rbi.org.in → "भुगतान और निपटान प्रणाली" ड्रॉप डाउन → " ग्राहकों के लिए उपयोगी सूचना" → "प्राधिकृत संस्थाओं की सूची - भुगतान प्रणाली परिचालक”। यह निम्नलिखित वेब लिंक पर उपलब्ध है: /en/web/rbi/-/publications/certificates-of-authorisation-issued-by-the-reserve-bank-of-india-under-the-payment-and-settlement-systems-act-2007-for-setting-up-and-operating-payment-system-in-india-12043
उत्तर: रिज़र्व बैंक द्वारा डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड पर बीमा कवर की कोई आवश्यकता निर्धारित नहीं की गई है। हालाँकि, यदि कोई कार्ड-जारीकर्ता अथवा कार्ड भुगतान नेटवर्क मानार्थ या प्रभार्य (कार्डधारक की सहमति से) बीमा कवर प्रदान करता है, तो कार्ड-जारीकर्ता द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रासंगिक नामांकन विवरण बीमा कंपनी द्वारा दर्ज किया गया है और प्रत्येक विवरण में अन्य जानकारी के साथ बीमा की उपलब्धता भी शामिल है। जानकारी में बीमा कवर, बीमा कंपनी का नाम/पता और टेलीफोन नंबर से संबंधित विवरण भी शामिल होगा जो बीमा कवर से संबंधित दावों को संभालेगा। समूह बीमा पॉलिसी के मामले में, कार्ड-जारीकर्ता के संबंधित अधिकारियों का संपर्क विवरण निर्धारित प्रारूप में प्रदान किया जाएगा।
उत्तर: किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में विप्रेषण किए जा सकते हैं।
ये अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा केवल सूचना और सामान्य मार्गदर्शन उद्देश्यों के लिए जारी किए जाते हैं। इनके आधार पर की गई कार्रवाइयों और / या निर्णयों के लिए बैंक को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है। स्पष्टीकरणों या व्याख्याओं के लिए, यदि कोई हो, तो बैंक द्वारा समय-समय पर जारी प्रासंगिक परिपत्रों और अधिसूचनाओं द्वारा निर्देशित हो सकते है।
उत्तर: नहीं, भले ही किसी कंपनी की खाता बंद करने की अवधि, संदर्भ अवधि (मार्च के अंत) से अलग हो। एमएफ सर्वेक्षण की जानकारी कंपनी के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर सर्वेक्षण संदर्भ अवधि के लिए रिपोर्ट की जानी चाहिए।
उत्तर: नवीनतम लेखापरीक्षित वित्तीय विवरणों के अनुसार, न्यूनतम रु.500 करोड़ की निवल संपत्ति या न्यूनतम 1000 करोड़ रुपये का कारोबार वाले प्रतिष्ठानों के अलावा नियंत्रित वित्तीय प्रतिष्ठानों और अनिवासियों (व्यक्तियों के अलावा) को गैर-रिटेल प्रयोक्ताओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। अन्य सभी प्रकार के प्रयोक्ताओं को रिटेल प्रयोक्ता के लिए रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
उत्तर: ये दिशानिर्देश ऐसे सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिए जाने वाले 'डिजिटल ऋणों' पर लागू होते हैं, जो डिजिटल उधार दिशानिर्देशों पर हमारे ०२ सितंबर २०२२ के परिपत्र के अनुसार 'डिजिटल उधार ऐप/ प्लेटफॉर्म' (डीएलए) की परिभाषा को पूरा करते हैं।
बैंक दिनांक 1 अप्रैल 2023 के ‘अग्रिमों के संबंध में आय निर्धारण, आस्ति वर्गीकरण तथा प्रावधानीकरण से संबंधित विवेकपूर्ण मानदंड’ पर मास्टर परिपत्र के पैरा 3.2.3 द्वारा निर्देशित हो सकते हैं - जिसके अनुसार एनपीए, शुल्क, कमीशन और इसी तरह की आय के संबंध में जो अर्जित हुई है, उसे वर्तमान अवधि में अर्जित करना बंद कर देना चाहिए और पिछली अवधि के संबंध में, यदि एकत्र नहीं किया गया है, वापस कर दिया जाना चाहिए।तदनुसार, एनपीए खातों के संबंध में, दंडात्मक शुल्क उस सीमा तक वापस कर दिया जाएगा, जब तक कि यह आय की गैर-मान्यता के विशिष्ट उद्देश्य के लिए संग्रहीत न रह जाए। तथापि, यह उधारकर्ता की ऋणदाता के प्रति कुल देनदारी का हिस्सा होगा, जब तक कि इसमें बैंक की बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के अनुसार छूट नहीं दे दिया जाता है।
उत्तर. नहीं। इन निदेशों के पैरा 20.2.1 के अनुसार, बैंक एफ़सीएनआर(बी) योजना के तहत आवर्ती जमा स्वीकार नहीं कर सकते हैं।
उत्तर: निर्यात सेवा के प्रकार के अनुसार कुल इनवाइस मूल्य मूल रूप से भारतीय रुपये (आईएनआर) (जिसमें विदेश में सहायक (कों)/ सहयोगी(यों) के बिलिंग भी शामिल होना चाहिए) में होना चाहिए।
बैंकों से अपेक्षित है कि यूएसडी में मूल्यांकित चेकों के लिए वसूली नीति को पारदर्शी बनाएं जिसमें उपर्युक्त विवरण के अनुसार सभी संगत पहलू शामिल हों। बैंकों से अपेक्षित है कि इस नीति का अपनी शाखाओं में, अपने वेबसाइट, आदि पर व्यापक रूप से प्रसार करें। नीति की एक प्रति शाखा प्रबंधक के पास उपलब्ध रहेगी ताकि ग्राहक उसे पढ़ सकें। बैंकों को सूचित किया गया है कि वसूली में विलंब/प्राप्य राशियों, आदि में विलंब जैसी शिकायतों को दूर करें। ग्राहक शिकायतों के निवारण के लिए रिज़र्व बैंक की बैंकिंग ओम्बड्समैन योजना, 2006 का सहारा ले सकते हैं।
नीचे दिए गए प्रश्न 14 के तहत सूचीबद्ध शिकायतों को छोड़कर, आरई की ओर से 'सेवा में कमी' से संबंधित सभी शिकायतों को आरबी-आइओएस, 2021 के तहत संचलित किया जाता है। आरबी-आइओएस, 2021 के अनुसार ‘सेवा में कमी’ का अर्थ ‘विनियमित संस्था से वैधानिक रुप से या अन्यथा प्रदान करने के लिए अपेक्षित किसी भी वित्तीय सेवा या उससे संबंधित अन्य सेवा में कमी या अपर्याप्तता से है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राहक को वित्तीय नुकसान या क्षति हो सकती है या नहीं भी हो सकती है।‘
उत्तर: यह नीति किसी विशिष्ट देश को लक्षित कर के नहीं बनाई गई है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में भारतीय रुपये (आईएनआर) के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने हेतु लागू किए जा रहे सुविचारित उपायों का एक हिस्सा है।
उत्तर. ग्राहक को ऑनबोर्ड करने के लिए आरई के पास निम्नलिखित विकल्प हैं:
(ए) प्रत्यक्ष ऑनबोर्डिंग:
- आरई की शाखा/कार्यालय में जाएं ;
- ई-केवाईसी प्रमाणीकरण (ओटीपी के साथ-साथ बायोमेट्रिक आधारित प्रमाणीकरण) का उपयोग करना; आधार संख्या के प्रमाण का ऑफलाइन सत्यापन करना; ओवीडी अथवा समतुल्य ई-दस्तावेज़ की प्रमाणित प्रति प्राप्त करना; केवाईसी पर एमडी के पैरा 16 के अनुसार 'डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया' करना।
- निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं का अनुपालन करने वाली वीडियो आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया (वी-सीआईपी)।
(बी) अप्रत्यक्ष ऑनबोर्डिंग:
- आधार ओटीपी आधारित ई-केवाईसी अधिप्रमाणन का प्रयोग करना;
- सीकेवाईसीआर, डिजिलॉकर, समतुल्य ई-दस्तावेज आदि जैसे डिजिटल चैनलों का उपयोग करना और गैर-डिजिटल प्रणाली जैसे एनआरआई और पीआईओ के लिए अनुमत अतिरिक्त प्रमाणन अधिकारियों द्वारा प्रमाणित ओवीडी की प्रति प्राप्त करना।
उत्तर: बैंक और सीपीटीसी/जीएमसीटीए इस संबंध में एक पारस्परिक रूप से स्वीकार्य प्रक्रिया बनायें और और संबंधित सीपीटीसी/जीएमसीटीए को इसकी सूचना दें।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम (एमएसएमईडी), 2006 के अधिनियमन के साथ, एमएसएमई इकाइयों द्वारा आपूर्ति की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के लिए, क्रेताओं द्वारा भुगतान निम्नानुसार किया जाना है:
- क्रेता को, उसके और आपूर्तिकर्ता के बीच लिखित रूप में सहमत तारीख को या उससे पूर्व आपूर्तिकर्ता को भुगतान करना होगा और यदि कोई करार नहीं हुआ हो तो नियत दिन से पूर्व भुगतान करना होगा। आपूर्तिकर्ता और क्रेता के बीच की सहमत अवधि 45 (पैंतालीस) दिन से अधिक नहीं होगी।
- यदि क्रेता आपूर्तिकर्ता को राशि का भुगतान नहीं कर पाया तो वह राशि पर नियत दिन या निर्धारित तारीख से रिज़र्व बैंक द्वारा अधिसूचित बैंक दर का तीन गुना चक्रवृद्धी ब्याज, मासिक आधार पर भुगतान करने हेतु बाध्य होगा।
- आपूर्तिकर्ता द्वारा माल की आपूर्ति या दी गई सेवा के लिए क्रेता उक्त (ii) में सूचित ब्याज के भुगतान हेतु बाध्य होगा।
- किसी देय राशि में विवाद होने पर संबंधित राज्य सरकार द्वारा गठित सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा सेवा परिषद से संपर्क किया जाएगा।
इसके अलावा, बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे विशेष रूप से एमएसएमई से की गई खरीद के लिए भुगतान संबंधी दायित्व को पूरा करने के लिए बड़े उधारकर्ताओं के लिए कार्यशील पूंजी की समग्र सीमा के भीतर उप-सीमाएं निर्धारित करें। (कृपया 16 अक्तूबर 2000 के परिपत्र आईईसीडी/5/08.12.01/2000-01 देखें, जिसे 30 मई 2003 के परिपत्र सं.आईईसीडी.सं.20/08.12.01/2002-03 के माध्यम से दोहराया गया है)।
आप आरबीआई के फिनटेक विभाग द्वारा आयोजित समन्वय समूह को iors@rbi.org.in पर ईमेल के माध्यम से एकल आवेदन पत्र जमा करके आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र इस लिंक के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है: https://rbi.org.in/documents/d/rbi/hindi_regulatorysandbox-form-1-?fileEntryId=131893514
उत्तर: शमन पर लगाई जाने वाली दंड की राशि की गणना संबंधी मार्गदर्शी सिद्धांत ‘निदेश- फेमा 1999 के तहत उल्लंघनों का शमन’ के पैरा 5.4 में दिया गया है। तथापि, यह नोट किया जाए की उपर्युक्त मार्गदर्शी ढांचा केवल विभिन्न कार्यालयों में शमन प्राधिकारियों द्वारा लगाई जाने वाली दंड की राशि को मोटे तौर पर मानकीकृत करने के प्रयोजन के लिए है तथा दंड की वास्तविक राशि भिन्न हो सकती है जो जो कि ‘निदेश- फेमा 1999 के तहत उल्लंघनों का शमन’ के पैरा 5.3 में उल्लिखित कारकों की दृष्टि से मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
उत्तर. हाँ। देश में भुगतान प्रणाली का संचालन शुरू करने से पहले सभी संस्थाओं, चाहे वे घरेलू हों या विदेशी, को रिज़र्व बैंक से लाइसेंस/अनुमोदन/प्राधिकार प्राप्त करने की आवश्यकता है। पीएसएस अधिनियम इंगित करता है कि "कोई भी व्यक्ति रिज़र्व बैंक द्वारा जारी प्राधिकरण के तहत और उसके अनुसार भुगतान प्रणाली को संचालित नहीं कर सकता है"। विशिष्ट भुगतान प्रणालियों के लिए मानदंड भी निर्दिष्ट किए गए हैं जो संबंधित भुगतान प्रणाली दिशानिर्देशों/निर्देशों का हिस्सा हैं|
प्राधिकरण के लिए आवेदन का फॉर्म और तरीका https://rbi.org.in/documents/87730/30842423/PSSR23022022d57d6e9afaf44d97b9ed577d9d1c7c2b.pdf पर उपलब्ध है।
उत्तर: आवश्यक खुले पैसे उपलब्ध कराने की सुविधा सभी ई₹ वॉलेट में उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति किसी व्यापारी से ₹15 का सामान खरीदना चाहता है, लेकिन उसके ई₹ वॉलेट में केवल ₹20 मूल्यवर्ग उपलब्ध है, तो वह पैसे भेजते समय राशि फ़ील्ड में ₹15 दर्ज कर सकता है। ₹15 स्वचालित रूप से व्यापारी के खाते में जमा हो जाएँगे, तथा शेष ₹5 ई₹ वॉलेट में वापस आ जाएँगे।
चेक संग्रह के लिए ₹1,00,000/- तक तथा बचत खाता धारकों के लिए कोई सेवा शुल्क नहीं है। इसके ऊपर के चेक और अन्य खाता प्रकारों के लिए, सेवा शुल्क संबंधित बैंक द्वारा तय किया जा सकता है और अपने ग्राहकों को उनकी चेक संग्रह नीति के हिस्से के रूप में सूचित किया जाएगा।
उत्तर. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ‘गैर-लाभकारी’ कंपनियों (यानी., कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 या कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के तहत निगमित कंपनियां) को दी गई छूट उन पर लागू है जो निदेशों में परिभाषित माइक्रोफाइनेंस ऋण प्रदान कर रही हैं और 25 अगस्त, 2016 को जारी हमारे ‘मास्टर निदेश - भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों से छूट’ (समय-समय पर संशोधित) के पैरा 2(i) में निर्दिष्ट शर्तों के अधीन हैं। यह छूट एनबीएफआई व्यवसाय में कार्यरत अन्य ‘गैर-लाभकारी’ कंपनियों को लागू नहीं है और ऐसी कंपनियों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य है, यदि ये कंपनियां हमारी प्रेस प्रकाशनी 1998-99/1269 दिनांक 08 अप्रैल, 1999 में निर्दिष्ट मुख्य व्यवसाय मानदंड को पूरा करती है।
Ans : User institutions enjoy many advantages as well. For instance,
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Savings on administrative machinery and costs of printing, dispatch and reconciliation of paper instruments that would have been used had beneficiaries not opted for ECS Credit.
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Avoid chances of loss / theft of instruments in transit, likelihood of fraudulent encashment of paper instruments, etc. and subsequent correspondence / litigation.
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Efficient payment mode ensuring that the beneficiaries get credit on a designated date.
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Cost effective.
Residents are permitted to hold foreign currency up to US$2,000 or its equivalent provided the foreign exchange was -
- acquired by him while on a visit to any place outside India by way of payment for services not arising from any business in or anything done in India;
or
- acquired by him, from any person not resident in India and who is on a visit to India, as honorarium or gift or for services rendered or in settlement of any lawful obligation,
or
- acquired by him by way of honorarium or gift while on a visit to any place outside India;
or
- acquired by him from an authorised person for travel abroad and represents the unspent amount thereof.
उत्तर: टीएलटीआरओ 2.0 के तहत प्राप्त धनराशि को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और एमएफआई के निवेश ग्रेड बॉन्ड, वाणिज्यिक पत्र (सीपी) और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) में अभिनियोजित किया जाना है, जैसाकि 17 अप्रैल 2020 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है।
ऑन टैप टीएलटीआरओ / प्रत्यावर्तित टीएलटीआरओ / टीएलटीआरओ 2.0 के लेनदेन से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर: नहीं। एनईएफटी एक क्रेडिट-पुश प्रणाली है, अर्थात, लेन-देन भुगतानकर्ता/ विप्रेषक/प्रेषक द्वारा केवल लाभार्थी को धन का भुगतान/हस्तांतरण/प्रेषण के लिए किया जा सकता है।
इस योजना के तहत फ्रैंचाइज़ी नियुक्त करने के लिए एडी श्रेणी-I बैंक/ एडी श्रेणी-II अथवा एफएफएमसी को रिज़र्व बैंक के संबंधित कार्यालय में फॉर्म आरएमसी-एफ Form RMC-F (जैसा कि फेमा 1999 के तहत रिपोर्टिंग पर एफईडी मास्टर निदेश संख्या 18/2015-16 के भाग I: अनुबंध- II में दिया गया है) में आवेदन करना चाहिए। इस आवेदन के साथ इस आशय की घोषणा संलग्न होनी चाहिए कि फ्रैंचाइज़ी का चयन करते समय पर्याप्त सावधानी बरती गई है एवं ऐसी संस्थाएं फ्रैंचाइज़ी करार के प्रावधानों एवं मुद्रा परिवर्तन के संबंध में रिज़र्व बैंक के लागू विनियमों के पालन के लिए वचनबद्ध हैं। प्रथम फ्रैंचाइज़ी करार के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। तत्पश्चात, जब भी नए फ्रैंचाइज़ी करार हों तो ऊपर उल्लिखित तरीके से घोषणा संलग्न करते हुए कार्योत्तर आधार पर इसकी रिपोर्ट रिज़र्व बैंक को भेजी जाए।
क. दिवंगत व्यक्ति जमाकर्ता के नाम अथवा दो या अधिक संयुक्त जमाकर्ताओं के नाम रखी गयी मीयादी जमाराशि जिनमें एक जमाकर्ता की मृत्यु हो गई हो, के मामले में परिपक्व हो चुकी जमाराशियों पर ब्याज का भुगतान करने के लिए अलग-अलग बैंकों को अपने विविक से नियम निर्धारित करने की छूट है बशर्ते इस संबंध में उनके निदेशक मंडल द्वारा पारदर्शी नीति बनाई गई हो।
ख. दिवंगत व्यक्ति जमाकर्ता / एकमात्र स्वामित्व प्रतिष्ठान के नाम में रखे गये चालू खाते के शेष के मामले में ब्याज 1 मई 1983 से या जमाकर्ता की मृत्यु की तारीख से, इनमें से जो भी बाद में हो, से लेकर दावेदार / दावेदारों को चुकौती की तारीख तक, भुगतान की तारीख को बचत खातों पर लागू ब्याज दर पर देय होगा। फिर भी, एनआरई जमाराशियों के मामलों में, यदि दावेदार निवासी हैं, परिपक्वता पर जमाराशि को घरेलू रुपये के तौर पर माना जाएगा तथा बाद की अवधि के लिए, समान परिपक्वता वाली घरेलू जमाराशि पर लागू दर पर ब्याज का भुगतान किया जाएगा।
उत्तर: हाँ। एक आईडीएफ-एनबीएफसी द्वारा व्यक्तिगत परियोजनाओं में अधिकतम एक्सपोजर होगा
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अपनी कुल पूंजी निधि (टियर I प्लस टियर II) के 50 प्रतिशत पर और एनबीएफसी के मामले में स्वामित्व वाली निधियों के लिए नहीं।
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आईडीएफ-एनबीएफसी के बोर्ड के विवेक पर 10 प्रतिशत तक का अतिरिक्त एक्सपोजर लिया जा सकता है।
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इसके साथ ही, यदि आईडीएफ-एनबीएफसी की वित्तीय स्थिति संतोषजनक है आरबीआई संतुष्ट होने पर और आईडीएफ-एनबीएफसी से आवेदन प्राप्त होने पर, अतिरिक्त विवेकपूर्ण सुरक्षा उपायों के संबंध में ऐसी शर्तों के अधीन 15 प्रतिशत (60 प्रतिशत से अधिक) तक अतिरिक्त जोखिम की अनुमति दे सकता है।
- आईआईबी जी-सेक हैं और इसलिए लघु-बिक्री और रेपो लेन-देन किया सकता है।
उत्तर: निवासी किसी तीसरे देश में की जाने वाली अपनी यात्रा के लिए भारत में टिकिट बुक कर सकते हैं। उदाहरण के लिए निवासी लंडन से न्यू यॉर्क यात्रा के लिए भारत में देशी/ विदेशी हवाई कंपनियों के माध्यम से टिकिट बुक कर सकते हैं। तथापि वे एयर टिकिट यात्री की 250,000 अमरीकी डॉलर की समग्र एलआरएस पात्रता का भाग होंगे।
उत्तर
हाँ। हालांकि, न्यूनतम निर्धारित से अधिक सेवाओं की अनुमति देने का निर्णय बैंकों के विवेक पर छोड़ दिया गया है जो ग्राहकों को पूर्व सूचना के साथ गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से या तो अतिरिक्त सेवाएं निःशुल्क प्रदान कर सकते हैं या उचित और पारदर्शी आधार पर अतिरिक्त मूल्य वर्धित सेवाओं के लिए मूल्य वर्धित सेवाओं के लिए मूल्य निर्धारण संरचना सहित आवश्यकताओं को लागू कर सकते हैं। बैंकों को मूल्य वर्धित सेवाओं के लिए एक उचित मूल्य संरचना स्थापित करने या न्यूनतम शेष आवश्यकताओं को निर्धारित करने की आवश्यकता होती है जिसे प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना चाहिए और खाता खोलने के समय ग्राहकों को सूचित किया जाना चाहिए। ऐसी अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करना सभी 'आधारभूत बचत बैंक जमा खाता' ग्राहकों के लिए गैर-विवेकाधीन, गैर-भेदभावपूर्ण और पारदर्शी होना चाहिए। हालांकि अतिरिक्त सुविधाओं का लाभ उठाने वाले ऐसे खातों को बीएसबीडीए नहीं माना जाएगा।
रिज़र्व बैंक ने यूएसडी चेकों के वसूली के लिए समयावधि कम करने के लिए बैंकों को निम्नलिखित कदम उठाने की सिफारिश की है -
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वसूली के और अधिक त्वरित तरीकों की खोज के लिए वसूली नीति की निरंतर समीक्षा।
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वसूली शाखाओं से केद्रीय पूलिंग शाखा तथा केद्रीय पूलिंग शाखा से प्रतिनिधि बैंकों तक चेकों की आवाजाही के लिए पारगमन (transit) अवधि को कम करना।
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बढ़े परिमाण, घटी मूलभूत सुविधा लागत, आदि के लाभ उठाने के लिए विभिन्न वसूली बैंकों का एक साझा सेवा ब्यूरो बनाने के लिए उपाय।
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हाँ, संयुक्त होल्डिंग की अनुमति है।
उत्तर: हाँ।
उत्तर. गैर-बैंक पीएसपी को केवल सीपीएस की प्रत्यक्ष सदस्यता की अनुमति होगी। उन्हें सीपीएस में उप-सदस्य के रूप में किसी भी बैंक/पीएसपी को प्रायोजित करने की अनुमति नहीं होगी।
उत्तर. अन्य बातों के साथ-साथ ग्राहको को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:
(क) सूक्ष्मवित्त ऋण के किसी भी चरण में ऋणदाता के पास कोई जमाराशि/ मार्जिन/ संपार्श्विक/ प्राथमिक प्रतिभूति रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।
(ख) ऋणदाता द्वारा उधारकर्ता को उसके द्वारा समझी जानेवाली भाषा में ऋण कार्ड प्रदान करना आवश्यक है जिसमें निम्नलिखित जानकारी होनी चाहिए:
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जानकारी जो पर्याप्त रूप से उधारकर्ता की पहचान करती है;
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मूल्य निर्धारण संबंधी सरलीकृत फैक्टशीट;
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ऋण से जुड़े अन्य सभी नियम और शर्तें;
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प्राप्त किश्तों और अंतिम भुगतान सहित सभी भुगतानों के लिए ऋणदाता द्वारा पावती; तथा
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ऋणदाता के नोडल अधिकारी के नाम और संपर्क संख्या सहित शिकायत निवारण प्रणाली का विवरण।
(ग) किसी भी गैर-क्रेडिट उत्पाद की खरीद पूर्ण रूप से स्वैच्छिक है। ऐसे उत्पादों के लिए शुल्क संरचना को ऋण कार्ड में स्पष्ट रूप से सूचित किया जाएगा।
(घ) ऋणदाताओं द्वारा प्रदान किया जाने वाला प्रशिक्षण निःशुल्क है।
उत्तर: हाँ। ट्रेड्स संस्थाओं द्वारा अपनाई गई केवाईसी प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिनांक 25 फरवरी 2016 को जारी किए गए "मास्टर निदेश – अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी) संबंधी निदेश 2016" (समय-समय पर यथा संशोधित) का पालन करती है।
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उत्तर: हाँ.
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उत्तर: बैंकों, जिनमें भारत में वास्तविक परिचालन नहीं रखने वाले बैंक शामिल हैं, को उनकी विदेशी/पारदेशीय शाखाओं हेतु जमाराशियों के लिए अनुरोध करने हेतु अथवा विदेशी म्युच्युअल फंडों अथवा किसी विदेशी वित्तीय सेवा कंपनी के लिए एजेंटों के रूप में कार्य करने हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक से पूर्व अनुमोदन लेना आवश्यक है।
ये अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न केवल सूचना और सामान्य मार्गदर्शन उद्देश्यों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए जाते हैं। उसके आधार पर की गई कार्रवाई और/या लिए गए निर्णयों के लिए रिज़र्व बैंक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।
उत्तर: चूक के अंतर्गत राशि अधिकतम सीमा के रूप में कार्य करेगी, जिस पर दंडात्मक शुल्क लगाया जा सकता है।
अनुसूची 13 के लिए अनुबंध II भाग ए (संकलन के लिए नोट और निर्देश): भारतीय रिज़र्व बैंक (वित्तीय विवरण - प्रस्तुतिकरण और प्रकटीकरण) निदेश, 2021 के अनुसार, अनुसूची 13 में बैंकों के लिए सभी प्रकार की ब्याज/छूट आय शामिल होगी। तदनुसार, बैंक 'अनुसूची 14: अन्य आय' में ग्राहकों से वसूले गए शुल्कों और प्रभारों, जिनमें दंडात्मक शुल्क भी शामिल हैं, का प्रकटीकरण करेंगे।
उत्तर. इन निदेशों के पैरा 22 के अनुसार, ब्याज निम्नलिखित के अनुसार भुगतान किया जाएगा:
- यदि परिपक्वता की तारीख से नवीकरण की तारीख तक (दोनों दिन शामिल करते हुए) अवधि 14 दिनों से अधिक न हो, तो इस प्रकार नवीकृत जमाराशि पर देय ब्याज दर नवीकरण की अवधि के लिए वह उपयुक्त दर होनी चाहिए जो परिपक्वता की तारीख को अथवा जमाकर्ता द्वारा नवीकरण की मांग की तारीख को, जो भी कम हो, लागू हो।
- नवीनीकरण के सभी अन्य मामलों में, नवीनीकृत राशि पर बकाया अवधि के लिए ब्याज दर को एक नई अवधि की जमा राशि के रूप में मानकर निर्धारित किया जाएगा।
- यदि नवीनीकरण के बाद, जमा को योजना के तहत निर्धारित न्यूनतम अवधि की समाप्ति से पहले आहरित किया जाता है, फेमा, 1999 के तहत अधिकृत बैंक अपनी विवेकाधिकार पर, देय अवधि के लिए अर्थात् मूल परिपक्वता की तारीख के पार की गई अवधि के लिए भुगतान किए गए ब्याज को पुनर्प्राप्त कर सकते हैं।
कतिपय शिकायतें जिन्हें निम्नलिखित विभिन्न कारणों से अस्वीकार्य शिकायतों के रूप में वर्गीकृत किया गया है, आरबी-आइओएस, 2021 के अंतर्गत शामिल नहीं हैं।
- ऐसी शिकायतें जो संबंधित विनियमित संस्था को लिखित रूप में प्रस्तुत किए बिना सीधे ओम्बड्समैनके पास दर्ज की गई हो;
- ऐसी शिकायतें जो आरई के पास दर्ज की गई हैं, लेकिन आरई के पास शिकायत दर्ज करने की तारीख से 30 दिन की अवधि समाप्त नहीं हुई है, सिवाय उन शिकायतों के जिनके लिए शिकायतकर्ता को आरई से जवाब मिला है, और वह जवाब से संतुष्ट नहीं है;
- शिकायतकर्ता को विनियमित संस्था से शिकायत का उत्तर प्राप्त होने के एक वर्ष के बाद या, जहां उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है तो शिकायत की तारीख से एक वर्ष और 30 दिन के बाद ओम्बड्समैनके पास शिकायत दर्ज की गई है;
- जिन शिकायतों को ओम्बड्समैन/सीईपीसी द्वारा पहले ही निपटाया जा चुका है या जो समान कार्रवाई कारण और राहत के लिए आरबीआईओ के पास प्रक्रियाधीन/लंबित हैं (चाहे उसी शिकायतकर्ता से या एक या अधिक शिकायतकर्ताओं से प्राप्त हुआ हो);
- आरई के वाणिज्यिक निर्णय से संबंधित शिकायतें। उदाहरणत: ऋण प्रदान करना;
- विक्रेता और आरई के बीच किसी भी विवाद से संबंधित शिकायतें;
- अन्य अधिकारियों को संबोधित शिकायतें और सीधे ओम्बड्समैन को संबोधित नहीं है;
- आरई प्रबंधन या अधिकारियों के विरुद्ध सामान्य शिकायतें;
- ऐसे विवाद से संबंधित शिकायतें जिनमें आरई द्वारा प्रारंभ की गई कार्रवाई वैधानिक या कानून का प्रवर्तन करने वाले प्राधिकरण के आदेशों के अनुपालन में है;
- ऐसी शिकायतें जिनमें सेवा में कथित कमी आरबीआई द्वारा विनियमित न होने वाली संस्था से संबंधित है;
- आरई के बीच विवादों से संबंधित शिकायतें;
- आरई के कर्मचारी-नियोक्ता संबंध से जुड़े किसी भी विवाद से संबंधित शिकायतें;
- किसी न्यायालय, अधिकरण या मध्यस्थ या अन्य किसी मंच या प्राधिकरण के पास लंबित है या निपटाई गई है या उसके गुणागुण पर किसी न्यायालय, अधिकरण या मध्यस्थ या अन्य किसी मंच या प्राधिकरण द्वारा कार्रवाई की गई है, चाहे वह एक ही शिकायतकर्ता से या एक या अधिक शिकायतकर्ताओं के साथ, या एक या अधिक संबंधित पक्षों से प्राप्त हुई हो या नहीं;
- ऐसी शिकायतें जो अपमानजनक या तुच्छ या तंग करने वाली प्रकृति की हों;
- ऐसे दावों के लिए शिकायतें परिसीमा अधिनियम, 1963 के अनुसार निर्धारित समयावधि के समाप्त होने के बाद दर्ज की गई हो;
- अपूर्ण विवरण वाली शिकायतें और वे शिकायतें जो प्रकृति में विशिष्ट / कार्रवाई योग्य नहीं हैं;
- अधिवक्ता के माध्यम से दर्ज शिकायतें (सिवाय इसके कि अधिवक्ता स्वयं व्यथित व्यक्ति न हो);
- सुझाव देने या मार्गदर्शन या स्पष्टीकरण मांगने की प्रकृति की शिकायतें।
उत्तर: प्रमुख देशों/क्षेत्रीय समूहों के लिए संदर्भ अवधि के दौरान कुल इनवाइस मूल्य मूल रूप से भारतीय रुपये (आईएनआर) (जिसमे विदेश में सहायक (कों)/ सहयोगी(यों)) के बिलिंग भी शामिल होना चाहिए) में होना चाहिए।
उत्तर: कृपया नीचे दी गई तालिका देखें जिसमें त्रुटि कोड (घातक त्रुटि, गैर-घातक त्रुटि) उनके विवरण के साथ हैं। यदि प्रतिवादी को घातक त्रुटि कोड के साथ संसाधित डेटा की पावती मिलती है, तो इसे नीचे उल्लिखित घातक त्रुटि संदेश/विवरण का अध्ययन करना चाहिए और तदनुसार अपने डेटा को संशोधित करना चाहिए । संशोधित डेटा mf@rbi.org.in पर पुनः सबमिट किया जा सकता है। यदि कंपनी को किसी गैर-घातक त्रुटि कोड के साथ संसाधित डेटा की पावती मिलती है, तो उल्लेखित त्रुटियों का औचित्य/स्पष्टीकरण ईमेल द्वारा mfquery@rbi.org.in पर, संशोधित डेटा, यदि लागू हो, के साथ mf@rbi.org.in पर प्रदान करने की आवश्यकता है ।
क्रम सं. |
म्युचुअल फंड त्रुटि कोड और विवरण |
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मानदंड |
त्रुटि कोड |
विवरण |
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घातक त्रुटियां |
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1 |
यदि अनुभाग I के ब्लॉक-I के आइटम 1.(i) में दिए गए म्यूचुअल फंड कंपनी का नाम NULL है |
MF_F_003 |
म्युचुअल फंड कंपनी का नाम नहीं दिया गया है। कृपया अनुभाग I में म्यूचुअल फंड कंपनी का नाम प्रदान करें। |
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2 |
यदि अनुभाग I के ब्लॉक-I के आइटम 1.(iii) में दिए गए परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी का नाम NULL है |
MF_F_004 |
परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) का नाम नहीं दिया गया है। कृपया अनुभाग I में एएमसी का नाम प्रदान करें। |
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3 |
अगर म्यूचुअल फंड कंपनी का CIN नंबर खाली है या CIN की संख्या 21 अक्षर से कम है |
MF_F_006 |
अनुभाग I में अमान्य CIN नंबर दिया गया है। कृपया सुनिश्चित करें कि कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई संपत्ति प्रबंधन कंपनी का सही 21-अंकीय CIN दर्ज किया गया है। |
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4 |
यदि अनुभाग I के ब्लॉक-I के आइटम 2 (i) में दिए गए संपर्क व्यक्ति का नाम NULL है |
MF_F_007 |
संपर्क व्यक्ति का नाम प्रदान नहीं किया गया है। कृपया अनुभाग I में संपर्क व्यक्ति का नाम प्रदान करें. |
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5 |
यदि अनुभाग I के ब्लॉक-I के आइटम 2 (v) में संपर्क के लिए दिए गए ईमेल आईडी NULL है |
MF_F_008 |
संपर्क व्यक्ति का ई-मेल प्रदान नहीं किया गया है। कृपया अनुभाग I में संपर्क व्यक्ति की ई-मेल आईडी प्रदान करें। |
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गैर-घातक त्रुटियाँ |
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6 |
कंपनी के नाम में परिवर्तन के मामले में, यदि कंपनी का पुराना नाम नहीं दिया गया है |
MF_NF_001 |
पुरानी कंपनी का नाम नहीं दिया गया है। कृपया अनुभाग I में पुरानी कंपनी का नाम प्रदान करें। |
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7 |
कंपनी के नाम में परिवर्तन के मामले में, यदि कंपनी का नया नाम नहीं दिया गया है |
MF_NF_002 |
नई कंपनी का नाम नहीं दिया गया है। कृपया अनुभाग I में नई कंपनी का नाम प्रदान करें। |
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8 |
कंपनी के नाम में परिवर्तन के मामले में, यदि परिवर्तन की प्रभावी तिथि नहीं दी गई है |
MF_NF_003 |
म्यूचुअल फंड कंपनी के नाम में परिवर्तन की प्रभावी तिथि नहीं दी गई है। कृपया अनुभाग I में कंपनी के नाम में परिवर्तन की प्रभावी तिथि प्रदान करें। |
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9 |
यदि ब्लॉक 1 अनिवासी के नाम में जारी उपर बकाया रह रही यूनिटें में अंकित मूल्य विचलन 10% से अधिक है और (विचलन=(वर्तमान वर्ष की कुल अंकित मूल्य - पिछले वर्ष की कुल अंकित मूल्य)*100/( पिछले वर्ष की कुल अंकित मूल्य)) |
MF_NF_004 |
ब्लॉक-1: वर्तमान सर्वेक्षण वर्ष (2024-25 दौर) में बताए गए पिछले वर्ष (मार्च 2024 के अंत) के लिए अनिवासी द्वारा धारित इकाइयों का कुल अंकित मूल्य, पिछले सर्वेक्षण वर्ष (2023-24 दौर) में वर्तमान वर्ष की रिपोर्टिंग (मार्च 2024 के अंत) के साथ असंगत है। |
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10 |
यदि ब्लॉक 1 अनिवासी के नाम में जारी उपर बकाया रह रही यूनिटें में बाजार मूल्य विचलन 10% से अधिक है, |
MF_NF_005 |
ब्लॉक-1: वर्तमान सर्वेक्षण वर्ष (2024-25) में रिपोर्ट किए गए पिछले वर्ष (मार्च 2024 के अंत) के लिए अनिवासी द्वारा धारित इकाइयों का कुल बाजार मूल्य पिछले सर्वेक्षण वर्ष (2023-24) में वर्तमान वर्ष की रिपोर्टिंग (मार्च 2024 अंत) के साथ असंगत है। |
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11 |
यदि पिछले वर्ष और वर्तमान वर्ष दोनों अंकित मूल्य > 1000 (लाख रुपये में) और ब्लॉक 1 अनिवासी के नाम में जारी उपर बकाया रह रही यूनिटें में विचलन 50% से अधिक है |
MF_NF_006 |
ब्लॉक-1: अनिवासी द्वारा धारित यूनिट के अंकित मूल्य में पिछले वर्ष से वर्तमान वर्ष में ज्यादा विचलन है। |
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12 |
यदि पिछले वर्ष और वर्तमान वर्ष दोनों में बाजार मूल्य > 1000 (लाख रुपये में) और ब्लॉक 1 अनिवासी के नाम में जारी उपर बकाया रह रही यूनिटें में विचलन 50% से अधिक है |
MF_NF_007 |
ब्लॉक-1: अनिवासी द्वारा धारित यूनिट के बाजार मूल्य में पिछले वर्ष से वर्तमान वर्ष में ज्यादा विचलन है। |
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13 |
यदि XX (कोई विशिष्ट देश नहीं) और IN (भारत) के लिए डेटा का योग ₹50,000 लाख से अधिक है और ब्लॉक 1 अनिवासी के नाम में जारी उपर बकाया रह रही यूनिटें (कॉलम 6) में वर्तमान सर्वेक्षण वर्ष के कुल से इसका अनुपात 50% से अधिक है |
MF_NF_008 |
ब्लॉक-1: अनिवासी द्वारा धारित यूनिट के अंकित मूल्य के लिए विदेशी देश के नाम के बजाय "कोई विशिष्ट देश नहीं और भारत " चुना गया है। |
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14 |
यदि विदेशी देयताओं का विचलन ब्लॉक 2 अन्य विदेशी देयताएँ में 10% अधिक है |
MF_NF_009 |
ब्लॉक-2: वर्तमान सर्वेक्षण वर्ष (2024-25 दौर) में रिपोर्ट किए गए पिछले वर्ष (मार्च 2024 अंत) के लिए अन्य विदेशी देयताएँ पिछले सर्वेक्षण वर्ष (2023-24 दौर) में वर्तमान वर्ष की रिपोर्टिंग (मार्च 2024 अंत) के साथ असंगत हैं। |
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15 |
यदि पिछले वर्ष और वर्तमान वर्ष दोनों के लिए विदेशी देयताएँ > 1000 (लाख रुपये में) और ब्लॉक 2 अन्य विदेशी देयताएँ में विचलन 50% से अधिक है |
MF_NF_010 |
ब्लॉक-2: अन्य विदेशी देयताओं में पिछले वर्ष से वर्तमान वर्ष में अधिक विचलन है। |
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16 |
यदि ब्लॉक 3 अन्य विदेशी आस्तियां में विदेशी संपत्ति विचलन 10% से अधिक है |
MF_NF_011 |
ब्लॉक-3: वर्तमान सर्वेक्षण वर्ष (2024-25 दौर) में रिपोर्ट किए गए पिछले वर्ष (मार्च 2024 अंत) के लिए अन्य विदेशी परिसंपत्ति पिछले सर्वेक्षण वर्ष (2023-24 दौर) में रिपोर्ट किए गए वर्तमान वर्ष (मार्च 2024 के अंत) के साथ असंगत है। |
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17 |
यदि पिछले वर्ष और वर्तमान वर्ष दोनों की विदेशी संपत्ति > 1000 (लाख रुपये में) और ब्लॉक 3 अन्य विदेशी आस्तियां में विचलन 50% से अधिक है |
MF_NF_012 |
ब्लॉक-3: अन्य विदेशी परिसंपत्तियों में पिछले वर्ष से वर्तमान वर्ष में अधिक विचलन है। |
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18 |
यदि नीचे दिए गए सभी ब्लॉकों का योग (ब्लॉक 1 कॉलम 6 और 8, ब्लॉक 2 कॉलम 12, ब्लॉक 3 कॉलम 19) अशक्त या शून्य है |
MF_NF_013 |
कंपनी ने शून्य जानकारी दी है अर्थात कंपनी की कोई विदेशी देयताएँ और संपत्ति नहीं है। |
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19 |
यदि ब्लॉक 1 अनिवासी के नाम में जारी उपर बकाया रह रही यूनिटें में देश वर्ष (अनिवासियों के लिए यूनिट) के लिए उपलब्ध नहीं है |
MF_NF_014_B1 |
ब्लॉक-1: ब्लॉक-1 में यूनिट धारक के निवास का देश नहीं दिया गया है। |
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20 |
यदि ब्लॉक 2 अन्य विदेशी देयताएँ में देश (देयता प्रकार) उपलब्ध नहीं है |
MF_NF_014_B2 |
ब्लॉक-2: अनिवासी का देश (अन्य विदेशी देयताएँ) ब्लॉक-2 में नहीं दिया गया है। |
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21 |
यदि ब्लॉक 3 अन्य विदेशी आस्तियां में देश (संपत्ति प्रकार) उपलब्ध नहीं है |
MF_NF_014_B3 |
ब्लॉक-3: ब्लॉक-3 में अनिवासी (अन्य विदेशी आस्तियां) का देश नहीं दिया गया है। |
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22 |
यदि XX (कोई विशिष्ट देश नहीं) और IN (भारत) के लिए डेटा का योग रु.50,000 लाख से अधिक है और ब्लॉक 1 अनिवासी के नाम में जारी उपर बकाया रह रही यूनिटें बाजार मूल्य के लिए(कॉलम 8) में वर्तमान सर्वेक्षण वर्ष के लिए कुल से इसका अनुपात 50% से अधिक है। |
MF_NF_015 |
ब्लॉक-1: अनिवासी द्वारा धारित यूनिट के बाजार मूल्य के लिए विदेशी देश के नाम के बजाय "कोई विशिष्ट देश नहीं और भारत" चुना गया है। |
उत्तर: विशेष रुपया वोस्ट्रो खाते (एसआरवीए) में शेष राशि को मुक्त रूप से परिवर्तनीय मुद्रा और/ अथवा अंतर्निहित लेनदेन के आधार पर उस लाभार्थी व्यापारिक साझेदार देश की मुद्रा में प्रत्यावर्तित किया जा सकता है, जिसके लिए खाते में क्रेडिट किया गया था। उदहरणार्थ : एसवीआरए के माध्यम से आयात भुगतान के लिए किसी भी रुपया वोस्ट्रो खाते की तरह विदेशी निर्यातक को मुक्त रूप से परिवर्तनीय मुद्रा में या विदेशी निर्यातक की घरेलू मुद्रा में निधियों को विप्रेषित किया जा सकता है।
उत्तर. केवाईसी पहचानकर्ता का अर्थ है केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआर) द्वारा आरई के ग्राहक को सौंपा गया एकमात्र नंबर अथवा कोड। यदि ग्राहक खाता खोलने के लिए आरई से संपर्क करता है, तो वह अपना केवाईसी पहचानकर्ता प्रदान कर सकता है और आरई को सीकेवाईसी से वैध केवाईसी डेटा डाउनलोड करने की सहमति दे सकता है। इससे ग्राहक को दूसरे आरई के साथ खाता खोलते समय फिर से केवाईसी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
उत्तर : इस योजना के तहत दो या अधिक पात्र जमाकर्ताओं की संयुक्त जमा की अनुमति है। जमा राशि ऐसे जमाकर्ताओं के नाम से खोले गए संयुक्त जमा खाते में जमा की जाएगी। नामांकन सहित बैंक खातों के संयुक्त संचालन पर मौजूदा नियम लागू होंगे।
जी नहीं, आईओआरएस में आवेदन करने के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं है। हालाँकि, आईओआरएस के अंतर्गत परीक्षण के लिए संबंधित पीआर का सैंडबॉक्स शुल्क, यदि कोई हो, लागू हो सकता है।
उत्तर: शमन आदेश में उल्लिखित शमन राशि का भुगतान ‘भारतीय रिज़र्व बैंक’ के पक्ष में आहरित डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से अथवा राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (NEFT) या तत्काल सकल निपटान (RTGS) के माध्यम से अथवा किसी अन्य स्वीकार्य इलेक्ट्रॉनिक या ऑनलाइन भुगतान माध्यम से ऐसे उल्लंघन के शमन आदेश की तारीख से 15 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। डिमांड ड्राफ्ट किस प्रकार आहरित और जमा किया जाना है/ इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों से निधि अंतरण के लिए बैंक खाते का ब्योरा शमन आदेश में दर्शाया जाएगा।
फाइनेंशियल मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर (एफएमआई) को भाग लेने वाले संस्थानों के बीच एक बहुपक्षीय प्रणाली के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें सिस्टम के ऑपरेटर शामिल हैं, जिसका उपयोग भुगतान, प्रतिभूतियों, डेरिवेटिव या अन्य वित्तीय लेनदेन के समाशोधन, निपटान या रिकॉर्ड करने के उद्देश्यों के लिए किया जाता है। (कृपया लिंक: https://rbi.org.in/hi/web/rbi/-/oversight-framework-for-financial-market-infrastructures-fmis-and-retail-payment-systems-rpss-3864 के तहत उपलब्ध "वित्तीय बाजार इन्फ्रास्ट्रक्चर और खुदरा भुगतान प्रणाली के लिए ओवरसाइट फ्रेमवर्क" देखें।) एफएमआई शब्द आमतौर पर व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण भुगतान प्रणालियों, सेंट्रल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरीज (सीएसडी), सिक्योरिटीज सेटलमेंट सिस्टम्स (एसएसएस), सेंट्रल काउंटर पार्टियों (सीसीपी) और ट्रेड रिपॉजिटरीज (टीआर) को संदर्भित करता है जो वित्तीय लेनदेन की समाशोधन, निपटान और रिकॉर्डिंग की सुविधा प्रदान करता है। सीएसडी, एसएसएस, सीसीपी को पीएसएस अधिनियम के तहत "भुगतान प्रणाली" के रूप में नामित किया गया है। टीआर को परिभाषित किया गया है और पीएसएस अधिनियम के तहत कवर किया गया है।
एफएमआई भुगतान और निपटान प्रणाली समिति (सीपीएसएस को भुगतान और बाज़ार अवसंरचना पर समिति के रूप में पुनर्नामित किया गया है- सीपीएमआई) और प्रतिभूति आयोगों का अंतर्राष्ट्रीय संगठन (आईओएससीओ) द्वारा जारी किए गए वित्तीय बाज़ार इन्फ्रास्ट्रक्चर (पीएफएमआई) के सिद्धांतों के अनुरूप नियमों और विनियमों के लिए एक निरंतर आधार पर अधीन हैं। रिज़र्व बैंक ने 13 जून 2020 को "आरबीआई ने वित्तीय बाज़ार इन्फ्रास्ट्रक्चर के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए नीति दस्तावेज़ जारी किया" https://rbi.org.in/hi/web/rbi/-/press-releases/reserve-bank-of-india-publishes-the-oversight-framework-for-financial-market-infrastructures-and-retail-payment-systems-49947 पर एक प्रेस प्रकाशनी जारी की है।
उत्तर: जी, हाँ, डिजिटल रुपया (ई₹) में दशमलव या भिन्नात्मक मान वाली राशि से संबंधित भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। इसमें डिजिटल भुगतान मोड के माध्यम से किए गए पारंपरिक मुद्रा लेनदेन के समान, दो दशमलव स्थानों तक किसी भी राशि के लिए लेनदेन किया जा सकता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने निधि अंतरण को सक्षम बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की भुगतान प्रणालियों को अधिकृत किया है। भारत में उपलब्ध विभिन्न भुगतान प्रणालियों का अवलोकन करने के लिए, आप आरबीआई की वेबसाइट पर निम्नलिखित लिंक देख सकते हैं: https://rbi.org.in/web/rbi/payment-and-settlements.
Ans : Yes, the banking system too benefits from ECS Credit Scheme such as –
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Freedom from paper handling and the resultant disadvantages of handling, presenting and monitoring paper instruments presented in clearing. Ease of processing and return for the destination bank branches.
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Smooth process of reconciliation for the sponsor banks.
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Cost effective.
- आईआईबी जी-सेक है और अनुमोदित सरकारी बाज़ार उधारी कार्यक्रम के रूप में जारी किया गया है।
- अतः, आईआईबी को स्वतः ही एसएलआर स्थिति मिल जाएगी।
उत्तर: प्रेषक और लाभार्थी क्रमशः अपने बैंक के एनईएफटी ग्राहक सुविधा केंद्र (सीएफसी) से संपर्क करके एनईएफटी लेनदेन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। बैंकों के एनईएफटी सीएफसी का विवरण संबंधित बैंकों की वेबसाइटों पर उपलब्ध है। सदस्य बैंकों के सीएफसी का विवरण आरबीआई की वेबसाइट /en/web/rbi/-/customer-facilitation-centres-neft-updated-as-on-june-16-2023-2070-1 पर भी उपलब्ध है।
लेन-देन को तेजी से ट्रैक करने के उद्देश्य से, आपको आपके बैंक को लेन-देन से संबंधित कुछ विवरण प्रदान करने की आवश्यकता हो सकती है जैसे कि विशिष्ट लेनदेन संदर्भ (यूटीआर) संख्या / लेनदेन संदर्भ संख्या, लेनदेन की तिथि, प्रेषक आईएफएससी, राशि, लाभार्थी का नाम, लाभार्थी आईएफएससी, आदि।
उत्तर: जहां किसी अनिवासी भारतीय निकट संबंधी (कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(77)में यथा प्रभाषित किए गए “निकट संबंधी ”) का चिकित्सा व्यय किसी निवासी व्यक्ति द्वारा उठाया जाता है, ऐसा व्यय निवासी से निवासी को लेनदेन होने के कारण अधिसूचना सं फेमा 14(आर) / 2016- आर बी दिनांक 2 मई 2016 के विनियम 6(2) के अधीन “उससे संबंधित सेवाओं” के अधीन कवर किया जाए ।
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: दिसंबर 11, 2022