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अक्‍तूबर 10, 2023
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) फ्रेमवर्क - सरकारी एनबीएफसी तक विस्तार

भा.रि.बैंक/2022-2023/118 संदर्भ सं.पवि.कें.का.पीपीजी/एसईसी.04/11.01.005/2022-23 19 सितम्बर 2022 अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी सभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक (यूसीबी) महोदया/प्रिय महोदय, अनुपालन कार्य और मुख्य अनुपालन अधिकारी (सीसीओ) की भूमिका - शहरी सहकारी बैंक कॉरपोरेट गवर्नेंस के समग्र ढांचे के हिस्से के रूप में, अनुपालन कार्य एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, आनुपातिकता के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, शहरी सहकारी बैंकों में अनुपालन कार्य

भा.रि.बैंक/2022-2023/118 संदर्भ सं.पवि.कें.का.पीपीजी/एसईसी.04/11.01.005/2022-23 19 सितम्बर 2022 अध्यक्ष/प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी सभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक (यूसीबी) महोदया/प्रिय महोदय, अनुपालन कार्य और मुख्य अनुपालन अधिकारी (सीसीओ) की भूमिका - शहरी सहकारी बैंक कॉरपोरेट गवर्नेंस के समग्र ढांचे के हिस्से के रूप में, अनुपालन कार्य एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, आनुपातिकता के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, शहरी सहकारी बैंकों में अनुपालन कार्य

सितंबर 13, 2023
जिम्मेदार उधार आचरण – वैयक्तिक ऋणों के पुनर्भुगतान/निपटान पर चल/अचल संपत्ति दस्तावेज़ मुक्त करना

आरबीआई/2011-12/62 शबैंवि.बीपीडी (पीसीबी).एमसी.सं.5 /13.05.000/2012-13 2 जुलाई 2012 मुख्य कार्यपालक अधिकारीसभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक महोदया / महोदय मास्टर परिपत्र अग्रिमों का प्रबंधन - शहरी सहकारी बैंक कृपया उपर्युक्त विषय पर 1 जुलाई, 2011 का हमारा मास्टर परिपत्र शबैवि.बीपीडी (पीसीबी) एमसी.सं. 5/13. 05. 000/2011-12 देखें (भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट www.rbi.org.in पर उपलब्ध)। संलग्न मास्टर परिपत्र में  30 जून 2012 तक जारी सभी अनुदेशों / दिशानिर्देशों को स

आरबीआई/2011-12/62 शबैंवि.बीपीडी (पीसीबी).एमसी.सं.5 /13.05.000/2012-13 2 जुलाई 2012 मुख्य कार्यपालक अधिकारीसभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक महोदया / महोदय मास्टर परिपत्र अग्रिमों का प्रबंधन - शहरी सहकारी बैंक कृपया उपर्युक्त विषय पर 1 जुलाई, 2011 का हमारा मास्टर परिपत्र शबैवि.बीपीडी (पीसीबी) एमसी.सं. 5/13. 05. 000/2011-12 देखें (भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट www.rbi.org.in पर उपलब्ध)। संलग्न मास्टर परिपत्र में  30 जून 2012 तक जारी सभी अनुदेशों / दिशानिर्देशों को स

अगस्त 18, 2023
उचित उधार प्रथा - ऋण खातों में दंडात्मक शुल्क

आरबीआई/2023-24/53
विवि.एमसीएस.आरईसी.28/01.01.001/2023-24

18 अगस्त 2023

सभी वाणिज्यिक बैंक (भुगतान बैंकों को छोड़कर, लघु वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित)
सभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक
सभी एनबीएफसी (एचएफसी सहित) और
अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान (एक्जिम बैंक, नाबार्ड, एनएचबी, सिडबी और एनएबीएफआईडी)

महोदया/ महोदय,

उचित उधार प्रथा - ऋण खातों में दंडात्मक शुल्क

दंडात्मक ब्याज के प्रकटीकरण में तर्कसंगतता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित संस्थाओं (आरई) के लिए विभिन्न दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। वर्तमान दिशानिर्देशों के अंतर्गत, ऋण देने वाली संस्थाओं के पास ब्याज की दंडात्मक दरें लगाने के लिए बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति तैयार करने की परिचालन स्वायत्तता है। यह पाया गया है कि कई आरई, ऐसी शर्तें जिन पर क्रेडिट सुविधाएं स्वीकृत की गई थीं, उधारकर्ता द्वारा उनकी चूक/गैर-अनुपालन किए जाने के मामले में, लागू ब्याज दरों के अलावा, दंडात्मक ब्याज दरों का प्रयोग कर रही हैं।

2. दंडात्मक ब्याज/शुल्क लगाने का इरादा अनिवार्य रूप से ऋण अनुशासन की भावना निर्माण करना है, न की ऐसे शुल्क ब्याज की अनुबंधित दर से अधिक राजस्व वृद्धि उपकरण के रूप में उपयोग करने के लिए है। हालाँकि, पर्यवेक्षी समीक्षाओं में दंडात्मक ब्याज/शुल्क लगाने संबंध में आरई द्वारा भिन्न प्रथाएं जिनसे ग्राहकों में शिकायतें और विवाद उत्पन्न होते हैं के उदाहरण मिले हैं।

3. ऋणों पर दंडात्मक ब्याज/शुल्क वसूलने के लिए आरई द्वारा अपनाई गई प्रथाओं की समीक्षा करने पर, अपनाए जाने हेतु निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए हैं: -

(i) उधारकर्ता द्वारा ऋण अनुबंध के महत्वपूर्ण नियमों और शर्तों का अनुपालन न करने पर कोई दंड, यदि लगाया जाता है, तो उसे 'दंडात्मक शुल्क' के रूप में माना जाएगा, और इसे 'दंडात्मक ब्याज' के रूप में नहीं लगाया जाएगा, जो अग्रिमों पर लगाए गए ब्याज की दर में जोड़ा जाता है। दंडात्मक शुल्कों का कोई पूंजीकरण नहीं किया जाएगा अर्थात ऐसे शुल्कों पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं लिया जाएगा। हालाँकि, इससे ऋण खाते में ब्याज चक्रवृद्धि की सामान्य प्रक्रियाएँ प्रभावित नहीं होंगी।

(ii) आरई द्वारा ब्याज दर में कोई अतिरिक्त घटक शामिल नहीं किए जाएंगे और इन दिशानिर्देशों का अक्षरश: अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

(iii) आरई को दंडात्मक शुल्क अथवा ऋण पर समान शुल्क, चाहे उसे किसी भी नाम से जाना जाए, पर बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति तैयार करनी होगी।

(iv) दंडात्मक शुल्क की मात्रा उचित होगी और किसी विशेष ऋण/उत्पाद श्रेणी के भीतर भेदभाव किए बिना ऋण अनुबंध के महत्वपूर्ण नियमों और शर्तों के अनुपालन न करने के अनुरूप होगी।

(v) 'व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को, व्यवसाय के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए' स्वीकृत किए गए ऋणों के मामले में दंडात्मक शुल्क, महत्वपूर्ण नियमों और शर्तों के समान गैर-अनुपालन के लिए गैर-व्यक्तिगत उधारकर्ताओं पर लागू दंडात्मक शुल्क से अधिक नहीं होगा।

आरबीआई/2023-24/53
विवि.एमसीएस.आरईसी.28/01.01.001/2023-24

18 अगस्त 2023

सभी वाणिज्यिक बैंक (भुगतान बैंकों को छोड़कर, लघु वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित)
सभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक
सभी एनबीएफसी (एचएफसी सहित) और
अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान (एक्जिम बैंक, नाबार्ड, एनएचबी, सिडबी और एनएबीएफआईडी)

महोदया/ महोदय,

उचित उधार प्रथा - ऋण खातों में दंडात्मक शुल्क

दंडात्मक ब्याज के प्रकटीकरण में तर्कसंगतता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित संस्थाओं (आरई) के लिए विभिन्न दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। वर्तमान दिशानिर्देशों के अंतर्गत, ऋण देने वाली संस्थाओं के पास ब्याज की दंडात्मक दरें लगाने के लिए बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति तैयार करने की परिचालन स्वायत्तता है। यह पाया गया है कि कई आरई, ऐसी शर्तें जिन पर क्रेडिट सुविधाएं स्वीकृत की गई थीं, उधारकर्ता द्वारा उनकी चूक/गैर-अनुपालन किए जाने के मामले में, लागू ब्याज दरों के अलावा, दंडात्मक ब्याज दरों का प्रयोग कर रही हैं।

2. दंडात्मक ब्याज/शुल्क लगाने का इरादा अनिवार्य रूप से ऋण अनुशासन की भावना निर्माण करना है, न की ऐसे शुल्क ब्याज की अनुबंधित दर से अधिक राजस्व वृद्धि उपकरण के रूप में उपयोग करने के लिए है। हालाँकि, पर्यवेक्षी समीक्षाओं में दंडात्मक ब्याज/शुल्क लगाने संबंध में आरई द्वारा भिन्न प्रथाएं जिनसे ग्राहकों में शिकायतें और विवाद उत्पन्न होते हैं के उदाहरण मिले हैं।

3. ऋणों पर दंडात्मक ब्याज/शुल्क वसूलने के लिए आरई द्वारा अपनाई गई प्रथाओं की समीक्षा करने पर, अपनाए जाने हेतु निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए हैं: -

(i) उधारकर्ता द्वारा ऋण अनुबंध के महत्वपूर्ण नियमों और शर्तों का अनुपालन न करने पर कोई दंड, यदि लगाया जाता है, तो उसे 'दंडात्मक शुल्क' के रूप में माना जाएगा, और इसे 'दंडात्मक ब्याज' के रूप में नहीं लगाया जाएगा, जो अग्रिमों पर लगाए गए ब्याज की दर में जोड़ा जाता है। दंडात्मक शुल्कों का कोई पूंजीकरण नहीं किया जाएगा अर्थात ऐसे शुल्कों पर कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं लिया जाएगा। हालाँकि, इससे ऋण खाते में ब्याज चक्रवृद्धि की सामान्य प्रक्रियाएँ प्रभावित नहीं होंगी।

(ii) आरई द्वारा ब्याज दर में कोई अतिरिक्त घटक शामिल नहीं किए जाएंगे और इन दिशानिर्देशों का अक्षरश: अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

(iii) आरई को दंडात्मक शुल्क अथवा ऋण पर समान शुल्क, चाहे उसे किसी भी नाम से जाना जाए, पर बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति तैयार करनी होगी।

(iv) दंडात्मक शुल्क की मात्रा उचित होगी और किसी विशेष ऋण/उत्पाद श्रेणी के भीतर भेदभाव किए बिना ऋण अनुबंध के महत्वपूर्ण नियमों और शर्तों के अनुपालन न करने के अनुरूप होगी।

(v) 'व्यक्तिगत उधारकर्ताओं को, व्यवसाय के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए' स्वीकृत किए गए ऋणों के मामले में दंडात्मक शुल्क, महत्वपूर्ण नियमों और शर्तों के समान गैर-अनुपालन के लिए गैर-व्यक्तिगत उधारकर्ताओं पर लागू दंडात्मक शुल्क से अधिक नहीं होगा।

अगस्त 18, 2023
आईडीएफ़-एनबीएफ़सी के लिए विनियामक ढांचे की समीक्षा

आरबीआई/2023-24/54
विवि.एसआईजी.एफ़आईएन.आरईसी.31/03.10.001/2023-24

18 अगस्त 2023

सभी इंफ्रास्ट्रेंक्चर डेब्ट फंड-एनबीएफ़सी (आईडीएफ़-एनबीएफ़सी)

महोदय/ महोदया,

आईडीएफ़-एनबीएफ़सी के लिए विनियामक ढांचे की समीक्षा

आधारभूत संरचना क्षेत्र को वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए आईडीएफ़-एनबीएफ़सी को सक्षम बनाने और एनबीएफ़सी द्वारा आधारभूत संरचना को वित्तपोषण को नियंत्रित करनेवाले विनियमों को समानीकरण करने के लिए भारत सरकार के साथ विचार-विमर्श करने के बाद आईडीएफ़-एनबीएफ़सी पर लागू दिशानिर्देशों की समीक्षा की गई है।

2. आईडीएफ़-एनबीएफ़सी के लिए संशोधित विनियामक ढांचा अनुबंध में दिया गया है। ये दिशानिर्देश इस परिपत्र की तारीख से प्रभावी होंगे।

भवदीय,

(जे.पी.शर्मा)
मुख्य महाप्रबंधक

आरबीआई/2023-24/54
विवि.एसआईजी.एफ़आईएन.आरईसी.31/03.10.001/2023-24

18 अगस्त 2023

सभी इंफ्रास्ट्रेंक्चर डेब्ट फंड-एनबीएफ़सी (आईडीएफ़-एनबीएफ़सी)

महोदय/ महोदया,

आईडीएफ़-एनबीएफ़सी के लिए विनियामक ढांचे की समीक्षा

आधारभूत संरचना क्षेत्र को वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए आईडीएफ़-एनबीएफ़सी को सक्षम बनाने और एनबीएफ़सी द्वारा आधारभूत संरचना को वित्तपोषण को नियंत्रित करनेवाले विनियमों को समानीकरण करने के लिए भारत सरकार के साथ विचार-विमर्श करने के बाद आईडीएफ़-एनबीएफ़सी पर लागू दिशानिर्देशों की समीक्षा की गई है।

2. आईडीएफ़-एनबीएफ़सी के लिए संशोधित विनियामक ढांचा अनुबंध में दिया गया है। ये दिशानिर्देश इस परिपत्र की तारीख से प्रभावी होंगे।

भवदीय,

(जे.पी.शर्मा)
मुख्य महाप्रबंधक

अगस्त 18, 2023
समान मासिक किस्तों (ईएमआई) आधारित व्यक्तिगत ऋण पर अस्थायी (फ्लोटिंग) ब्याज दर का पुनर्निर्धारण

संदर्भ.संख्या एमपीडी.बीसी.244/07.01.279/2003-04 5 नवंबर 2003 कार्तिक 14, 1925 (सं) सभी प्राथमिक डीलर महोदय प्राथमिक डीलरों की कॉल/नोटिस मनी मार्केट तक पहुंच कृपया गवर्नर के पत्र सं एमपीडी.बीसी.241/07.01.279/2003-04 दिनांक 3 नवंबर 2003 के साथ संलग्न वर्ष 2003-04 के लिए मौद्रिक और ऋण नीति की मध्यावधि समीक्षा पर उनके वक्तव्य के पैराग्राफ 62 और 63 (पैराग्राफ की प्रति संलग्न) देखें। 2. यह पुनर्स्मरण किया जाए कि अप्रैल 2002 के वार्षिक नीति वक्तव्य के बाद, जुलाई 2002 में यह

संदर्भ.संख्या एमपीडी.बीसी.244/07.01.279/2003-04 5 नवंबर 2003 कार्तिक 14, 1925 (सं) सभी प्राथमिक डीलर महोदय प्राथमिक डीलरों की कॉल/नोटिस मनी मार्केट तक पहुंच कृपया गवर्नर के पत्र सं एमपीडी.बीसी.241/07.01.279/2003-04 दिनांक 3 नवंबर 2003 के साथ संलग्न वर्ष 2003-04 के लिए मौद्रिक और ऋण नीति की मध्यावधि समीक्षा पर उनके वक्तव्य के पैराग्राफ 62 और 63 (पैराग्राफ की प्रति संलग्न) देखें। 2. यह पुनर्स्मरण किया जाए कि अप्रैल 2002 के वार्षिक नीति वक्तव्य के बाद, जुलाई 2002 में यह

जून 08, 2023
डिजिटल उधार में डिफॉल्ट लॉस गारंटी (डीएलजी) पर दिशानिर्देश
आरबीआई/2023-24/41 विवि.सीआरई.आरईसी.21/21.07.001/2023-24 08 जून, 2023 सभी वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंक सहित) प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक, केंद्रीय सहकारी बैंक; और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (आवास वित्त कंपनियां सहित) महोदया/महोदय डिजिटल उधार में डिफॉल्ट लॉस गारंटी (डीएलजी) पर दिशानिर्देश 10 अगस्त, 2022 को जारी आरबीआई की प्रेस विज्ञप्ति “डिजिटल ऋण पर कार्य दल की सिफ़ारिशें – कार्यान्वयन” के अनुबंध-II की धारा सी के पैरा (3.4.3.1) का संदर्भ दिया जाता
आरबीआई/2023-24/41 विवि.सीआरई.आरईसी.21/21.07.001/2023-24 08 जून, 2023 सभी वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंक सहित) प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक, केंद्रीय सहकारी बैंक; और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (आवास वित्त कंपनियां सहित) महोदया/महोदय डिजिटल उधार में डिफॉल्ट लॉस गारंटी (डीएलजी) पर दिशानिर्देश 10 अगस्त, 2022 को जारी आरबीआई की प्रेस विज्ञप्ति “डिजिटल ऋण पर कार्य दल की सिफ़ारिशें – कार्यान्वयन” के अनुबंध-II की धारा सी के पैरा (3.4.3.1) का संदर्भ दिया जाता
जून 08, 2023
समझौता निपटान और तकनीकी रूप से बट्टे खाते डालने (राइट-ऑफ) के लिए रूपरेखा
आरबीआई/2023-24/40 विवि.एसटीआर.आरईसी.20/21.04.048/2023-24 08 जून 2023 वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित) प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक / राज्य सहकारी बैंक / केंद्रीय सहकारी बैंक अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (आवास वित्त कंपनियों सहित) महोदया/महोदय, समझौता निपटान और तकनीकी रूप से बट्टे खाते डालने (राइट-ऑफ) के लिए रूपरेखा भारतीय रिज़र्व बैंक ने विनियमित संस्थाओं (आरई) को दबावग्रस्त खातों से संबंध
आरबीआई/2023-24/40 विवि.एसटीआर.आरईसी.20/21.04.048/2023-24 08 जून 2023 वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित) प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक / राज्य सहकारी बैंक / केंद्रीय सहकारी बैंक अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (आवास वित्त कंपनियों सहित) महोदया/महोदय, समझौता निपटान और तकनीकी रूप से बट्टे खाते डालने (राइट-ऑफ) के लिए रूपरेखा भारतीय रिज़र्व बैंक ने विनियमित संस्थाओं (आरई) को दबावग्रस्त खातों से संबंध
अप्रैल 11, 2023
हरित जमाराशियों के अंगीकरण हेतु ढांचा
आरबीआई/2023-24/14 विवि.एसएफजी.आरईसी.सं.10/30.01.021/2023-24 11 अप्रैल 2023 लघु वित्त बैंकों सहित सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, स्थानीय क्षेत्र के बैंकों और भुगतान बैंकों को छोड़कर) आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) सहित सभी जमा स्वीकार करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) महोदया / महोदय, हरित जमाराशियों के अंगीकरण हेतु ढांचा जलवायु परिवर्तन को 21वीं सदी में वैश्विक समाज और अर्थव्यवस्था के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक माना
आरबीआई/2023-24/14 विवि.एसएफजी.आरईसी.सं.10/30.01.021/2023-24 11 अप्रैल 2023 लघु वित्त बैंकों सहित सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, स्थानीय क्षेत्र के बैंकों और भुगतान बैंकों को छोड़कर) आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) सहित सभी जमा स्वीकार करने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) महोदया / महोदय, हरित जमाराशियों के अंगीकरण हेतु ढांचा जलवायु परिवर्तन को 21वीं सदी में वैश्विक समाज और अर्थव्यवस्था के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक माना
फ़रवरी 20, 2023
भारतीय लेखा मानकों (इंड एएस) का कार्यान्वयन
भा.रि.बैंक/2022-2023/182 विवि.एसीसी.आरईसी.सं.104/21.07.001/2022-23 20 फरवरी 2023 महोदय/महोदया भारतीय लेखा मानकों (इंड एएस) का कार्यान्वयन कृपया उक्त विषय पर दिनांक 13 मार्च 2020 को जारी परिपत्र विवि(एनबीएफसी). सीसी.पीडी.सं.109/22.10.106/2019-20 के साथ पठित आस्ति पुनर्निर्माण कंपनियों के लिए जारी दिनांक 01 अप्रैल 2022 के मास्टर परिपत्र विवि.एसआईजी.एफआईएन.आरईसी 1/26.03.001/2022-23 के पैरा 13 (iii) का संदर्भ लें। 2. यह पाया गया है कि इंड एएस (Ind AS) के कार्यान्वयन के पर
भा.रि.बैंक/2022-2023/182 विवि.एसीसी.आरईसी.सं.104/21.07.001/2022-23 20 फरवरी 2023 महोदय/महोदया भारतीय लेखा मानकों (इंड एएस) का कार्यान्वयन कृपया उक्त विषय पर दिनांक 13 मार्च 2020 को जारी परिपत्र विवि(एनबीएफसी). सीसी.पीडी.सं.109/22.10.106/2019-20 के साथ पठित आस्ति पुनर्निर्माण कंपनियों के लिए जारी दिनांक 01 अप्रैल 2022 के मास्टर परिपत्र विवि.एसआईजी.एफआईएन.आरईसी 1/26.03.001/2022-23 के पैरा 13 (iii) का संदर्भ लें। 2. यह पाया गया है कि इंड एएस (Ind AS) के कार्यान्वयन के पर
दिसंबर 01, 2022
विदेशी क्षेत्राधिकारों एवं अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफ़एससी) में भारतीय बैंकों तथा अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों (एआईएफ़आई) की सहायक कंपनियों और शाखाओं का परिचालन - वैधानिक/नियामक मानदंडों का अनुपालन
आरबीआई/2022-23/145 विवि.एमआरजी.आरईसी.87/00-00-020/2022-23 01 दिसम्बर 2022 विदेशी क्षेत्राधिकारों एवं अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफ़एससी) में भारतीय बैंकों तथा अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों (एआईएफ़आई) की सहायक कंपनियों और शाखाओं का परिचालन - वैधानिक/नियामक मानदंडों का अनुपालन जैसा कि आपको विदित है, रिज़र्व बैंक द्वारा दिनांक 1 दिसंबर 2008 के परिपत्र संख्या डीबीओडी.सं.बीपी.बीसी.89/21.04.141/2008-09 और दिनांक 12 मई 2014 के परिपत्र संख्या डीबीओडी.सं.बीपी.बीसी.11
आरबीआई/2022-23/145 विवि.एमआरजी.आरईसी.87/00-00-020/2022-23 01 दिसम्बर 2022 विदेशी क्षेत्राधिकारों एवं अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (आईएफ़एससी) में भारतीय बैंकों तथा अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों (एआईएफ़आई) की सहायक कंपनियों और शाखाओं का परिचालन - वैधानिक/नियामक मानदंडों का अनुपालन जैसा कि आपको विदित है, रिज़र्व बैंक द्वारा दिनांक 1 दिसंबर 2008 के परिपत्र संख्या डीबीओडी.सं.बीपी.बीसी.89/21.04.141/2008-09 और दिनांक 12 मई 2014 के परिपत्र संख्या डीबीओडी.सं.बीपी.बीसी.11

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पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: अप्रैल 02, 2025

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