प्रेस प्रकाशनियां
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, फलटण को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 28 मई 2025 के निदेश CO.DOS.SED.No.S1580/12-22-321/2025-26 के माध्यम से 29 नवंबर 2025 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे और इस अवधि को 24 नवंबर 2025 के निदेश DOR.MON.D-41/12.28.017/2025-26 के माध्यम से 28 फरवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक के लिए बढ़ाया गया था। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 28 फरवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि यशवंत को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, फलटण को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 28 मई 2025 के निदेश CO.DOS.SED.No.S1580/12-22-321/2025-26 के माध्यम से 29 नवंबर 2025 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे और इस अवधि को 24 नवंबर 2025 के निदेश DOR.MON.D-41/12.28.017/2025-26 के माध्यम से 28 फरवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक के लिए बढ़ाया गया था। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 28 फरवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम)की धारा 56 के साथ पठित धारा 22 के अंतर्गत दिनांक 11 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा “इंडियन मर्केंटाइल को- ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ” का लाइसेंस रद्द कर दिया है। परिणामस्वरूप, बैंक 13 फरवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकता है। सहकारी समितियों के आयुक्त और रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश से भी अनुरोध किया गया है कि वे बैंक का समापन करने और बैंक के लिए एक परिसमापक नियुक्त करने का आदेश जारी करें।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (बीआर अधिनियम)की धारा 56 के साथ पठित धारा 22 के अंतर्गत दिनांक 11 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा “इंडियन मर्केंटाइल को- ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, लखनऊ” का लाइसेंस रद्द कर दिया है। परिणामस्वरूप, बैंक 13 फरवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकता है। सहकारी समितियों के आयुक्त और रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश से भी अनुरोध किया गया है कि वे बैंक का समापन करने और बैंक के लिए एक परिसमापक नियुक्त करने का आदेश जारी करें।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 24 अक्तूबर 2025 को पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र (सीएमई) संबंधी दो मसौदा निदेश, अर्थात: (i) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र) निदेश, 2025 और (ii) भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र) निदेश, 2025, जारी किए थे और इन पर हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी थी। मसौदा निदेशों का मुख्य उद्देश्य (i) भारतीय कंपनियों द्वारा अधिग्रहणों के वित्तपोषण हेतु बैंकों को सक्षम बनाने के लिए एक ढांचा प्रदान करना; (ii) सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों के बदले ऋण देने संबंधी विनियामकीय सीमा को पूर्ण रूप से हटाते हुए, बैंकों द्वारा, आरईआईटी, आईएनवीआईटी के शेयरों, इकाइयों के बदले दिए जाने वाले ऋण की सीमा को बढ़ाना; और (iii) पूंजी बाज़ार मध्यस्थों (सीएमआई) को ऋण देने के लिए एक बेहतर सिद्धांत
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 24 अक्तूबर 2025 को पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र (सीएमई) संबंधी दो मसौदा निदेश, अर्थात: (i) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र) निदेश, 2025 और (ii) भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - पूंजी बाज़ार एक्सपोज़र) निदेश, 2025, जारी किए थे और इन पर हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी थी। मसौदा निदेशों का मुख्य उद्देश्य (i) भारतीय कंपनियों द्वारा अधिग्रहणों के वित्तपोषण हेतु बैंकों को सक्षम बनाने के लिए एक ढांचा प्रदान करना; (ii) सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों के बदले ऋण देने संबंधी विनियामकीय सीमा को पूर्ण रूप से हटाते हुए, बैंकों द्वारा, आरईआईटी, आईएनवीआईटी के शेयरों, इकाइयों के बदले दिए जाने वाले ऋण की सीमा को बढ़ाना; और (iii) पूंजी बाज़ार मध्यस्थों (सीएमआई) को ऋण देने के लिए एक बेहतर सिद्धांत
दिनांक 6 फरवरी 2026 के विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज जन सामान्य से टिप्पणियों के लिए निम्नलिखित संशोधन निदेश के मसौदे जारी किए: i) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - ऋण सुविधाएं) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 - टिप्पणी के लिए मसौदा ii) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - संकेन्द्रण जोखिम प्रबंधन) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 - टिप्पणी के लिए मसौदा
दिनांक 6 फरवरी 2026 के विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज जन सामान्य से टिप्पणियों के लिए निम्नलिखित संशोधन निदेश के मसौदे जारी किए: i) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - ऋण सुविधाएं) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 - टिप्पणी के लिए मसौदा ii) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - संकेन्द्रण जोखिम प्रबंधन) द्वितीय संशोधन निदेश, 2026 - टिप्पणी के लिए मसौदा
वर्तमान में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) और आवास वित्त कंपनियों को वसूली एजेंट की नियुक्ति संबंधी मामलों पर विस्तृत अनुदेश जारी किए गए हैं। समीक्षा करने पर, यह निर्णय लिया गया है कि ऋण की वसूली और वसूली एजेंटों की नियुक्ति संबंधी मामलों पर सभी विनियमित संस्थाओं को व्यापक अनुदेश जारी किए जाएं, जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ वसूली की प्रक्रिया के दौरान उधारकर्ताओं से उचित व्यवहार, ऋणदाता के कर्मचारियों और वसूली एजेंटों का आचरण, समुचित सावधानी, प्रशिक्षण, वसूली एजेंटों के लिए आचार संहिता आदि जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए। 2. तदनुसार, 6 फरवरी 2026 के विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य में की गई
वर्तमान में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) और आवास वित्त कंपनियों को वसूली एजेंट की नियुक्ति संबंधी मामलों पर विस्तृत अनुदेश जारी किए गए हैं। समीक्षा करने पर, यह निर्णय लिया गया है कि ऋण की वसूली और वसूली एजेंटों की नियुक्ति संबंधी मामलों पर सभी विनियमित संस्थाओं को व्यापक अनुदेश जारी किए जाएं, जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ वसूली की प्रक्रिया के दौरान उधारकर्ताओं से उचित व्यवहार, ऋणदाता के कर्मचारियों और वसूली एजेंटों का आचरण, समुचित सावधानी, प्रशिक्षण, वसूली एजेंटों के लिए आचार संहिता आदि जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए। 2. तदनुसार, 6 फरवरी 2026 के विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य में की गई
Currently, instructions on customer appropriateness and suitability and other related matters in the context of insurance agency business have been issued to Scheduled Commercial Banks (excluding Regional Rural Banks) and Housing Finance Companies. Upon a review, it has been decided to issue comprehensive instructions on advertising, marketing and sales of financial products and services (including third-party products and services) to all banks and NBFCs, which shall include various aspects related thereto, such as activities of Direct Sales Agents (DSAs) / Direct Marketing Agents (DMAs), dark patterns, prevention of mis-selling, etc.
Currently, instructions on customer appropriateness and suitability and other related matters in the context of insurance agency business have been issued to Scheduled Commercial Banks (excluding Regional Rural Banks) and Housing Finance Companies. Upon a review, it has been decided to issue comprehensive instructions on advertising, marketing and sales of financial products and services (including third-party products and services) to all banks and NBFCs, which shall include various aspects related thereto, such as activities of Direct Sales Agents (DSAs) / Direct Marketing Agents (DMAs), dark patterns, prevention of mis-selling, etc.
जन सामान्य के सूचनार्थ एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए की उप-धारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 9 फरवरी 2026 को जारी निदेश संदर्भ सं. DDN.DOS.QAG.No.S168/03-04-007/2025-2026 के द्वारा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, देहरादून (बैंक) को कतिपय निदेश जारी किए हैं, जिसके तहत दिनांक 10 फरवरी 2026 को कारोबार समाप्ति के पश्चात बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक के लिखित रूप में पूर्व अनुमोदन के बिना, कोई भी ऋण और अग्रिम प्रदान या नवीकृत नहीं करेगा, निवेश नहीं करेगा, निधियां उधार लेने और नई जमाराशियों की स्वीकृति सहित किसी दायित्व का वहन नहीं करेगा, किसी भी भुगतान का संवितरण नहीं करेगा या संवितरण करने के लिए सहमति नहीं देगा,
जन सामान्य के सूचनार्थ एतद्द्वारा यह अधिसूचित किया जाता है कि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए की उप-धारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 9 फरवरी 2026 को जारी निदेश संदर्भ सं. DDN.DOS.QAG.No.S168/03-04-007/2025-2026 के द्वारा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, देहरादून (बैंक) को कतिपय निदेश जारी किए हैं, जिसके तहत दिनांक 10 फरवरी 2026 को कारोबार समाप्ति के पश्चात बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक के लिखित रूप में पूर्व अनुमोदन के बिना, कोई भी ऋण और अग्रिम प्रदान या नवीकृत नहीं करेगा, निवेश नहीं करेगा, निधियां उधार लेने और नई जमाराशियों की स्वीकृति सहित किसी दायित्व का वहन नहीं करेगा, किसी भी भुगतान का संवितरण नहीं करेगा या संवितरण करने के लिए सहमति नहीं देगा,
6 फरवरी 2026 को जारी विकासात्मक एवं विनियामक नीतियों संबंधी वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसरण में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज जन सामान्य अभिमत के लिए निम्नलिखित मसौदा संशोधन निदेश जारी किए हैं, जो आरबीआई के विनियामक विभाग द्वारा जारी मौजूदा निदेशों में संशोधन का प्रस्ताव रखते हैं:
6 फरवरी 2026 को जारी विकासात्मक एवं विनियामक नीतियों संबंधी वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसरण में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज जन सामान्य अभिमत के लिए निम्नलिखित मसौदा संशोधन निदेश जारी किए हैं, जो आरबीआई के विनियामक विभाग द्वारा जारी मौजूदा निदेशों में संशोधन का प्रस्ताव रखते हैं:
भारतीय रिज़र्व बैंक ने सीकर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सीकर को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 26 अक्तूबर 2018 के निदेश सं. DCBS. CO BSD-I/D-2/ 12.27.215/ 2018-19 के माध्यम से छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए। इन निदेशों को समय-समय पर संशोधित किया गया और पिछली बार इसे 9 मार्च 2026 को कारोबार समाप्ति तक बढ़ाया गया था।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने सीकर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सीकर को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 26 अक्तूबर 2018 के निदेश सं. DCBS. CO BSD-I/D-2/ 12.27.215/ 2018-19 के माध्यम से छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए। इन निदेशों को समय-समय पर संशोधित किया गया और पिछली बार इसे 9 मार्च 2026 को कारोबार समाप्ति तक बढ़ाया गया था।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत श्री गुरु राघवेंद्र सहकार बैंक नियमित, बेंगलुरु को दिनांक 2 जनवरी 2020 के निदेश सं. DOS.CO.UCB.BSD-III.D-2/12.23.283/2019-20 के माध्यम से 10 जुलाई 2020 को कारोबार की समाप्ति तक, छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 10 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत श्री गुरु राघवेंद्र सहकार बैंक नियमित, बेंगलुरु को दिनांक 2 जनवरी 2020 के निदेश सं. DOS.CO.UCB.BSD-III.D-2/12.23.283/2019-20 के माध्यम से 10 जुलाई 2020 को कारोबार की समाप्ति तक, छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 10 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
जनवरी 2026 माह के दौरान नागरिक चार्टर के अंतर्गत कार्य-निष्पादन का विश्लेषण किया गया है, और उसका सारांश नीचे दिया गया है विवरण आवेदनों की संख्या क माह की शुरुआत में लंबित आवेदन 3,392 ख माह के दौरान प्राप्त आवेदन 19,850 ग अतिरिक्त जानकारी के लिए आवेदकों को वापस भेजे गए 477 कुल (क+ख-ग) 22,765 घ माह के दौरान प्रसंस्कृत किए गए आवेदन – समय- सीमा के भीतर – समय- सीमा के बाद 19,932 19,916 16 (99.9%) (0.1%)
जनवरी 2026 माह के दौरान नागरिक चार्टर के अंतर्गत कार्य-निष्पादन का विश्लेषण किया गया है, और उसका सारांश नीचे दिया गया है विवरण आवेदनों की संख्या क माह की शुरुआत में लंबित आवेदन 3,392 ख माह के दौरान प्राप्त आवेदन 19,850 ग अतिरिक्त जानकारी के लिए आवेदकों को वापस भेजे गए 477 कुल (क+ख-ग) 22,765 घ माह के दौरान प्रसंस्कृत किए गए आवेदन – समय- सीमा के भीतर – समय- सीमा के बाद 19,932 19,916 16 (99.9%) (0.1%)
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत लोकपावनी महिला सहकारी बैंक नियमित, मांड्या को दिनांक 29 जुलाई 2025 के निदेश सं. BLR.DOS.SSMS.No.S628/09-01-242/2025 के माध्यम से 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक, छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत लोकपावनी महिला सहकारी बैंक नियमित, मांड्या को दिनांक 29 जुलाई 2025 के निदेश सं. BLR.DOS.SSMS.No.S628/09-01-242/2025 के माध्यम से 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक, छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत सोनपेठ नागरी सहकारी बैंक मार्यदित, सोनपेठ, जिला- परभणी, महाराष्ट्र को दिनांक 29 जुलाई 2025 के निदेश सं. NGP.DOS.SSM 3.No.S403/15-04-395 /2025-2026 के माध्यम से 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक, छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत सोनपेठ नागरी सहकारी बैंक मार्यदित, सोनपेठ, जिला- परभणी, महाराष्ट्र को दिनांक 29 जुलाई 2025 के निदेश सं. NGP.DOS.SSM 3.No.S403/15-04-395 /2025-2026 के माध्यम से 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक, छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 8 जून 2023 के विकासात्मक और विनियामकीय नीति पर अपने वक्तव्य के एक भाग के रूप में, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित एक्सपोज़र के संबंध में समाधान योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु मौजूदा विवेकपूर्ण मानदंडों को युक्तिसंगत बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की घोषणा की थी, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ विभिन्न विनियमित संस्थाओं (आरई) पर लागू विनियामकीय निर्देशों में सामंजस्य स्थापित करना शामिल था। मौजूदा विनियामकीय निर्देशों की व्यापक समीक्षा के आधार पर, जिसमें दायरा, कवरेज और विवेकपूर्ण आवश्यकताएं शामिल हैं, सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए निम्नलिखित मसौदा निदेश जारी किए जा रहे हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 8 जून 2023 के विकासात्मक और विनियामकीय नीति पर अपने वक्तव्य के एक भाग के रूप में, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित एक्सपोज़र के संबंध में समाधान योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु मौजूदा विवेकपूर्ण मानदंडों को युक्तिसंगत बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की घोषणा की थी, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ विभिन्न विनियमित संस्थाओं (आरई) पर लागू विनियामकीय निर्देशों में सामंजस्य स्थापित करना शामिल था। मौजूदा विनियामकीय निर्देशों की व्यापक समीक्षा के आधार पर, जिसमें दायरा, कवरेज और विवेकपूर्ण आवश्यकताएं शामिल हैं, सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए निम्नलिखित मसौदा निदेश जारी किए जा रहे हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि इरिंजालकुडा टाउन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, केरल को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 29 जुलाई 2025 के निदेश CO.DOS.SED.No.D-01/12-22-350/2025-2026 के माध्यम से 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि इरिंजालकुडा टाउन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, केरल को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 29 जुलाई 2025 के निदेश CO.DOS.SED.No.D-01/12-22-350/2025-2026 के माध्यम से 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त निदेश की परिचालन अवधि को 30 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति से आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (आईएमसीबीएल), लखनऊ को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 28 जनवरी 2022 के निदेश DOS.CO.OCCD.185569/12.28.007/2021-22 के माध्यम से 27 जुलाई 2022 को कारोबार की समाप्ति तक, यथासमय किए गए संशोधनों के अनुसार, छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे, जिसकी वैधता अवधि को पिछली बार दिनांक 14 अक्तूबर 2025 के निदेश DOR.MON.No.D-34/12.28.007/2025-26 द्वारा 27 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक बढ़ा दिया गया था।। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त
भारतीय रिज़र्व बैंक ने इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (आईएमसीबीएल), लखनऊ को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 28 जनवरी 2022 के निदेश DOS.CO.OCCD.185569/12.28.007/2021-22 के माध्यम से 27 जुलाई 2022 को कारोबार की समाप्ति तक, यथासमय किए गए संशोधनों के अनुसार, छह माह की अवधि के लिए निदेश जारी किए थे, जिसकी वैधता अवधि को पिछली बार दिनांक 14 अक्तूबर 2025 के निदेश DOR.MON.No.D-34/12.28.007/2025-26 द्वारा 27 जनवरी 2026 को कारोबार की समाप्ति तक बढ़ा दिया गया था।। भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से संतुष्ट है कि जन हित में, उक्त
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 21 जुलाई 2022 के निदेश सं. CO.DOS.SED.No.S2574/12-07-05/2022-23 द्वारा “द सूरी फ्रेंड्स यूनियन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड” सूरी, (पश्चिम बंगाल) को 22 जनवरी
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 21 जुलाई 2022 के निदेश सं. CO.DOS.SED.No.S2574/12-07-05/2022-23 द्वारा “द सूरी फ्रेंड्स यूनियन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड” सूरी, (पश्चिम बंगाल) को 22 जनवरी
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि कोणार्क अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, उल्हासनगर को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 23 अप्रैल 2024 के निदेश CO.DOS.SED.No.S592/45-11-001/2024-25 के माध्यम
भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि कोणार्क अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, उल्हासनगर को बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत दिनांक 23 अप्रैल 2024 के निदेश CO.DOS.SED.No.S592/45-11-001/2024-25 के माध्यम
भारतीय रिज़र्व बैंक के विनियमित संस्थाओं के साथ निरंतर बातचीत के भाग के रूप में, गवर्नर ने आज मुंबई में चुनिंदा शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (एमडी और सीईओ) के साथ बैठक की। ऐसी बैठक पिछली बार 19 मार्च 2025 को आयोजित की गई थी।
भारतीय रिज़र्व बैंक के विनियमित संस्थाओं के साथ निरंतर बातचीत के भाग के रूप में, गवर्नर ने आज मुंबई में चुनिंदा शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (एमडी और सीईओ) के साथ बैठक की। ऐसी बैठक पिछली बार 19 मार्च 2025 को आयोजित की गई थी।
कृपया एफएमआरडी मास्टर निदेश सं. 1/2016-17- मास्टर निदेश - जोखिम प्रबंधन और अंतर-बैंक लेनदेन तथा विभिन्न विनियमित संस्थाओं (आरई) पर लागू पूंजी पर्याप्तता निदेश, 2025 संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड का संदर्भ लें, जो अन्य बातों के साथ-साथ नेट ओपन पोजिशन की गणना और विदेशी मुद्रा जोखिम पर पूंजी प्रभार की गणना के लिए कार्यप्रणाली निर्दिष्ट करते हैं। (1) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड) दूसरा संशोधन निदेश, 2026 (2) भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड) दूसरा संशोधन निदेश, 2026
कृपया एफएमआरडी मास्टर निदेश सं. 1/2016-17- मास्टर निदेश - जोखिम प्रबंधन और अंतर-बैंक लेनदेन तथा विभिन्न विनियमित संस्थाओं (आरई) पर लागू पूंजी पर्याप्तता निदेश, 2025 संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड का संदर्भ लें, जो अन्य बातों के साथ-साथ नेट ओपन पोजिशन की गणना और विदेशी मुद्रा जोखिम पर पूंजी प्रभार की गणना के लिए कार्यप्रणाली निर्दिष्ट करते हैं। (1) भारतीय रिज़र्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक - पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड) दूसरा संशोधन निदेश, 2026 (2) भारतीय रिज़र्व बैंक (लघु वित्त बैंक - पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड) दूसरा संशोधन निदेश, 2026
पृष्ठ अंतिम बार अपडेट किया गया: फ़रवरी 27, 2026