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मास्टर परिपत्र – धन अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस)

आरबीआई/2015-16/88
मास्टर परिपत्र सं.1/2015-16

1 जुलाई 2015

सभी प्राधिकृत व्यक्ति, जो धन अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस) के तहत भारतीय एजेंट हैं

महोदया/महोदय,

मास्टर परिपत्र – धन अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस)

धन अंतरण सेवा योजना विदेश से भारत में लाभार्थियों को व्यक्तिगत विप्रेषणों के अंतरण का एक शीघ्र और आसान तरीका है। भारत में केवल आवक व्यक्तिगत विप्रेषण जैसे परिवार के भरण-पोषण के लिए विप्रेषण तथा भारत का दौरा करने वाले विदेशी पर्यटकों के पक्ष में विप्रेषण की अनुमति है। धन अंतरण सेवा योजना के तहत भारत से बाहर विप्रेषण की अनुमति नहीं है।

2. नए अनुदेश जारी होने पर, इस मास्टर परिपत्र को समय-समय पर अद्यतन किया जाता है। मास्टर परिपत्र किस तारीख तक अद्यतन है, इसका उचित रूप में उल्लेख किया जाता है।

3. सामान्य मार्गदर्शन के लिए इस मास्टर परिपत्र का संदर्भ लिया जाए। आवश्यक होने पर विस्तृत जानकारी के लिए प्राधिकृत व्यक्ति और प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक संबंधित परिपत्रों/ अधिसूचनाओं का संदर्भ लें।

भवदीय,

(बी.पी.कानूनगो)
प्रधान मुख्य महाप्रबंधक


अनुक्रमणिका

भाग-ए

खंड I

धन अंतरण सेवा योजना के तहत भारतीय एजेंटों को अनुमति (प्राधिकार) देने के लिए दिशा-निर्देश

खंड II

विदेशी प्रधान अधिकारियों के लिए दिशा-निर्देश

खंड III

भारतीय एजेंटों द्वारा उप-एजेंटों की नियुक्ति के लिए दिशा-निर्देश

खंड IV

मौजूदा भारतीय एजेंटों की अनुमति (प्राधिकार) के नवीकरण के लिए दिशा-निर्देश

खंड V

भारतीय एजेंटों का निरीक्षण

खंड VI

भारतीय एजेंटों के लिए अपने ग्राहक को जानिये/धन शोधन निवारण/आतंकवाद के वित्तपोषण के प्रतिरोध संबंधी दिशा-निर्देश

खंड VII

सामान्य अनुदेश

भाग-बी

रिपोर्ट/विवरण

संलग्नक-I: धन अंतरण सेवा योजना के अंतर्गत भारतीय एजेंटों के उप एजेंटों के लिए फार्मेट

संलग्नक-II:-------------- को समाप्त तिमाही के दौरान धन अंतरण सेवा योजना के जरिये प्राप्त विप्रेषणों के ब्योरे दर्शानेवाला विवरण

संलग्नक-III: भारतीय एजेंटों द्वारा रखे गये संपार्श्विक का विवरण

परिशिष्ट

भाग-ए

खंड ।

धन अंतरण सेवा योजना के तहत भारतीय एजेंटों को अनुमति (प्राधिकार) देने के लिए दिशा-निर्देश

1. परिचय

1.1 धन अंतरण सेवा योजना विदेश से भारत में लाभार्थियों को व्यक्तिगत विप्रेषणों के अंतरण का एक शीघ्र और आसान तरीका है। भारत में केवल आवक व्यक्तिगत विप्रेषण जैसे परिवार के भरण-पोषण के लिए विप्रेषण तथा भारत का दौरा करने वाले विदेशी पर्यटकों के पक्ष में विप्रेषण अनुमत हैं। धन अंतरण सेवा योजना के तहत भारत से बाहर विप्रेषण की अनुमति नहीं है। यह प्रणाली विदेशी प्रधान अधिकारी के रूप में ज्ञात विदेश में प्रख्यात धन अंतरण कंपनियों तथा भारतीय एजेंटों के रूप में ज्ञात भारतीय एजेंटों के बीच एक गठ-जोड़ है जो भारत में लाभार्थियों को चालू विनिमय दरों पर निधियों का वितरण करेंगे। भारतीय एजेंट को विदेशी प्रधान अधिकारी को कोई राशि विप्रेषित करने की अनुमति नहीं है। धन अंतरण सेवा योजना के तहत विप्रेषक और लाभार्थी केवल व्यक्ति ही हैं।

सांविधिक आधार

1.2 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 10 (1) के तहत प्रदान की गयी शक्तियों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक धन अंतरण सेवा योजना के तहत भारतीय एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए किसी व्यक्ति को आवश्यक अनुमति (प्राधिकार) प्रदान कर सकता है। रिज़र्व बैंक द्वारा विशेष रूप से अनुमति प्राप्त किये बिना कोई व्यक्ति किसी भी क्षमता में भारत में सीमापार से धन अंतरण का कारोबार नहीं कर सकता है।

1.3 ये दिशानिर्देश भारतीय एजेंटों को अनुमति (प्राधिकार) प्रदान करने तथा उन्हें दिए गए मौजूदा धन अंतरण सेवा योजना अनुमोदनों के नवीकरण के लिए मूल शर्तें निर्धारित करते हैं। इन दिशानिर्देशों में विदेशी प्रधान अधिकारियों और भारतीय एजेंटों द्वारा उप-एजेंटों की नियुक्ति संबंधी दिशानिर्देशों का भी समावेश है। ये दिशानिर्देश सर्वसमावेशी नहीं हैं और किसी संस्था (कंपनी) (एंटिटी) को अनुमति देते समय निर्णय करने में अन्य संगत जानकारी, सुरक्षात्मक पहलुओं (security considerations), आदि पर विचार किया जाएगा। ये दिशानिर्देश रिज़र्व बैंक के पास नयी व्यवस्थाओं, भारतीय एजेंटों, आदि को दिए गए अनुमोदनों के नवीकरण संबंधी सभी लंबित आवेदनपत्रों पर भी लागू होंगे। पात्रता मानदंड पूरे न करने वाले मौजूदा भारतीय एजेंटों को रिज़र्व बैंक के अनुमोदन से चरणबद्ध तरीके से मानदंड पूरे करने होंगे अथवा धन अंतरण का कारोबार तत्काल समाप्त करना होगा।

2. दिशा-निर्देश

प्रवेश मानदंड

(i) भारतीय एजेंट बनने के लिए आवेदक 6 मार्च 2006 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं. 25 (ए.पी.(एफएल सीरीज़) परिपत्र सं. 02) में यथा परिभाषित कोई प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी -। बैंक अथवा कोई प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी -।। अथवा कोई संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक (एफएफएमसी) अथवा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अथवा डाक विभाग होना चाहिए।

(ii) आवेदक के पास न्यूनतम रु. 50 लाख की निवल स्वाधिकृत निधियाँ होनी चाहिए।

टिप्पणी: (i) स्वाधिकृत निधियां: (प्रदत्त ईक्विटी पूंजी + मुक्त आरक्षित निधियां + लाभ-हानि खाते में जमा का इति शेष) से घटायें (हानि का संचित शेष, आस्थगित राजस्व व्यय तथा अन्य अगोचर परिसंपत्तियां)

(ii) निवल स्वाधिकृत निधियां: (आवदेक की) स्वाधिकृत निधियों से उसकी सहायक कंपनियों, उसी समूह की कंपनियों, सभी (अन्य) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के शेयरों में निवेश की राशि, इसके साथ ही स्वाधिकृत निधियों के 10 प्रतिशत से अधिक उसकी सहायक कंपनियों और उसी समूह की कंपनियों के डिबेंचरों, बाँडों के बही मूल्य, दिए गए बकाया ऋणों तथा अग्रिमों और जमा की गयी राशियों को घटाएं।

3. रिज़र्व बैंक को आवेदन करने के लिए प्रक्रिया

भारतीय एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक अनुमति हेतु आवेदन पत्र रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के उस क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत किए जाएंगे जिसके अधिकार क्षेत्र में आवेदक का पंजीकृत कार्यालय आता हो1 तथा नीचे खंड-॥ में दिए गए ब्योरों के अनुसार आवेदक के प्रस्तावित विदेशी प्रधान अधिकारी से संबंधित दस्तावेज तथा निम्नलिखित दस्तावेज उसके साथ अनुलग्न किए जाएं:

ए. इस आशय का एक घोषणा पत्र कि आवेदक अथवा उसके निदेशकों के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय/राजस्व आसूचना निदेशालय अथवा किसी कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी है/अनिर्णित नहीं हैं और आवेदक अथवा उसके निदेशकों के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला दायर नहीं है/लंबित नहीं है।

बी. इस आशय का एक घोषणा पत्र कि रिज़र्व बैंक से अनुमति (प्राधिकार) प्राप्त करने पर तथा धन अंतरण परिचालन प्रारंभ करने से पहले, आवेदक 'अपने ग्राहक को जानने संबंधी मानक/धन-शोधन निवारण मानदण्ड/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध करने/धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अंतर्गत बैंकों के दायित्व विषय पर भारतीय रिज़र्व, बैंकिंग विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय द्वारा नवीनतम मास्टर परिपत्र में दिए गए दिशानिर्देशों एवं इस बाबत अब तक जारी तथा भविष्य में जारी होने वाले अनुदेशों को, आवश्यक परिवर्तनों सहित, भारतीय एजेंटों एवं अपने उप-एजेंटों पर लागू करने के लिए 'अपने ग्राहक को जानने/धन-शोधन निवारण/आतंकवाद के वित्तपोषण के प्रतिरोध के संबंध में उचित नीतिगत फ्रेमवर्क तैयार करके लागू करेगा।

सी. जिसके साथ धन अंतरण सेवा योजना को कार्यान्वित किया जाना है उस विदेशी प्रधान अधिकारी का नाम और पता।

डी. विदेशी प्रधान अधिकारी द्वारा योजना के परिचालन के पूरे ब्योरे।

ई. भारत में उन शाखाओं की सूची तथा पते जिन पर आवेदक द्वारा धन अंतरण सेवा प्रदान की जाएगी।

एफ. इस योजना के तहत प्रति माह/वर्ष कारोबार की अनुमानित मात्रा।

जी. आवेदक के पिछले दो वित्तीय वर्षों के लेखा-परीक्षित तुलन पत्र और लाभ तथा हानि लेखे, यदि उपलब्ध हों, अथवा अद्यतन लेखा-परीक्षित लेखे की एक प्रति के साथ आवेदन की तारीख को निवल स्वाधिकृत निधियों की स्थिति के संबंध में सांविधिक लेखापरीक्षक/कों का प्रमाणपत्र।

एच. आवेदक की संस्था के बहिर्नियम और अंतर्नियम (मेमोरेंडम ऐंड अर्टिकल्स आफ एसोसिएशन) जहाँ या तो धन अंतरण कारोबार करने के लिए कोई प्रावधान हो अथवा तत्संबंधी यथोचित संशोधन कंपनी लॉ बोर्ड के पास फाइल किया गया है।

आई. आवेदक के कम से कम दो बैंकरों से मुहरबंद लिफाफे में गोपनीय रिपोर्टें।

जे. वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत आवेदक की सहयोगी/संबद्ध संस्था के ब्योरे।

के. आवेदक द्वारा धन अंतरण कारोबार करने के लिए उसके बोर्ड के प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति।

एल. प्रस्तावित विदेशी प्रधान अधिकारी से आवेदक के साथ गठ-जोड़ व्यवस्था करने तथा आवश्यक संपार्श्विक भी प्रस्तुत करने के लिए सहमति दर्शाने वाला पत्र।

4. संपार्श्विक आवश्यकता

विदेशी प्रधान अधिकारी द्वारा भारत में किसी नामित बैंक में भारतीय एजेंट के पक्ष में 3 दिन के औसत आहरणों के समतुल्य अथवा 50,000 अमरीकी डॉलर, जो भी उच्चतर हो, संपार्श्विक के रूप में रखे जाएं। 50,000 अमरीकी डॉलर की न्यूनतम राशि विदेशी मुद्रा जमा के रूप में रखी जाएगी जबकि शेष राशि बैंक गारंटी के रूप में रखी जा सकती है। भारतीय एजेंटों द्वारा संपार्श्विक की पर्याप्तता की पुनरीक्षा, पिछले तीन महीनों के दौरान प्राप्त विप्रेषणों के आधार पर, तिमाही अंतरालों पर की जाएगी।

5. अन्य शर्ते

ए) इस व्यवस्था के तहत केवल सीमा-पार से व्यक्तिगत विप्रेषणों, जैसे परिवार के भरण-पोषण के लिए विप्रेषणों तथा भारत का दौरा / भ्रमण करने वाले विदेशी पर्यटकों के पक्ष में विप्रेषणों की ही अनुमति दी जाएगी। इस व्यवस्था के जरिये धर्मार्थ संस्थाओं/ट्रस्टों को दान/अंशदान, व्यापार संबद्ध विप्रेषण, संपत्ति की खरीद के लिए विप्रेषण, अनिवासी विदेशी खाते में निवेश अथवा जमा नहीं किया जाएगा।

बी) इस योजना के तहत व्यक्तिगत विप्रेषण के लिए 2500 अमरीकी डॉलर की सीमा रखी गयी है। भारत में लाभार्थी को रू. 50,000/- तक की राशि का नकद में भुगतान किया जा सकता है। इस सीमा से अधिक राशि का भुगतान आदाता खाता चेक/ डिमांड ड्राफ्ट/ भुगतान आदेश, आदि के जरिये अथवा लाभार्थी के बैंक खाते में सीधे ही जमा करते हुए किया जाएगा। तथापि, अपवादात्मक स्थितियों में जहाँ लाभार्थी विदेशी पर्यटक है, वहां इससे अधिक राशि नकद वितरित की/दी जा सकती है। इस प्रकार के लेनदेनों का पूरा ब्योरा लेखा-परीक्षकों / निरीक्षकों द्वारा छान-बीन के लिए अभिलेख में रखा जाएगा।

सी) इस योजना के तहत, एकल व्यक्तिगत लाभार्थी द्वारा किसी एक कैलेण्डर वर्ष के दौरान केवल 30 विप्रेषण प्राप्त किये जा सकते हैं।

6. भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्णयों के लिए मानदंड

(i) भारतीय एजेंटों में उच्च प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण में लाभप्रद ढंग से कार्य करने की शक्ति तथा सक्षमता होने की आवश्यकता है। चूँकि पहले से ही अनेक भारतीय एजेंट कार्यरत हैं, अत: अनुमति (प्राधिकार) ऐसे भारतीय एजेंटों को चयनित आधार पर जारी की जाएगी, जो उल्लिखित आवश्यकताएं पूरी करते हों, जिनके पास आवश्यक व्यापक पहुँच (outreach) हो तथा जो ग्राहक सेवा और दक्षता पूर्ण सेवा के अंतर्राष्ट्रीय तथा घरेलू सर्वोच्च मानकों के अनुरूप कार्य कर सकते हों।

(ii) भारतीय एजेंट को अनुमति (प्राधिकार) जारी होने की तारीख से छ: महीनों की अवधि के भीतर योजना के तहत अपने धन अंतरण परिचालन प्रारंभ करने चाहिए और भारतीय रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को सूचित करना चाहिए।

खंड ।।

विदेशी प्रधान अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश

विदेशी धन अंतरण परिचालकों, जिन्हें विदेशी प्रधान अधिकारी कहा जाता है, के साथ व्यवस्था करने वाले भारतीय एजेंट इसे नोट करें कि पर्याप्त मात्रा में कारोबार करने वाले, ट्रैक रिकार्ड तथा व्यापक पहुँच वाले विदेशी प्रधान अधिकारियों पर ही इस योजना के तहत विचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, धन अंतरण व्यवस्था लागू करने का मुख्य उद्देश्य देश में नागरिकों को सस्ती एवं प्रभावी धन अंतरण की सुविधा प्रदान करना है, इसलिए ऐसे विप्रेषण परिचालकों, जिनकी देश में पहुँच एवं शाखा विस्तार सीमित है और विदेश में करोबार स्थानीय है, के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाता है।

आवेदक भारतीय एजेंटों को उनके विदेशी प्रधान अधिकारियों के संबंध में निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए / निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूर्ण करना चाहिए:

ए. विदेशी प्रधान अधिकारियों को भुगतान प्रणाली संबंधी कार्य प्रारंभ करने/परिचालन करने के लिए भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के तहत भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक से आवश्यक प्राधिकार प्राप्त करने चाहिए। इस प्रकार का प्राधिकार प्रदान करने से पहले, रिज़र्व बैंक भारत सरकार की सहायता से विदेशी प्रधान अधिकारी की पृष्ठभूमि और पूर्ववृत्त का सत्यापन करेगा।

बी. विदेशी प्रधान अधिकारी धन अंतरण कार्यकलाप करने के लिए संबंधित देश के केंद्रीय बैंक/ सरकार अथवा वित्तीय विनियामक प्राधिकारी द्वारा लाइसेंस प्राप्त पंजीकृत संस्था होनी चाहिए। विदेशी प्रधान अधिकारी के पंजीकरण का देश धन शोधन निवारण मानकों का अनुपालनकर्ता होना चाहिए।

सी. विदेशी प्रधान अधिकारी की न्यूनतम निवल मालियत अद्यतन लेखा परीक्षित तुलनपत्र के अनुसार कम से कम 1 मिलियन अमरीकी डालर होनी चाहिए, जो हर समय बनाये रखी जानी चाहिए। तथापि, रिज़र्व बैंक, वित्तीय कार्रवाई कार्य दल के सदस्य देशों में समाविष्ट और संबंधित केंद्रीय बैंक/सरकार अथवा वित्तीय विनियामक प्राधिकारी द्वारा पर्यवेक्षित विदेशी प्रधान अधिकारियों के मामले में न्यूनतम निवल मालियत संबंधी मानदंड में छूट देने पर विचार कर सकता है।

डी. विदेशी प्रधान अधिकारी धन अंतरण कारोबार में सुविनियमित बाजारों में परिचालन के ट्रैक रिकार्ड के साथ सुस्थापित होना चाहिए।

ई. विदेशी प्रधान अधिकारी के साथ गठ-जोड़ व्यवस्था होने के परिणामस्वरूप दोनों ओर औपचारिक धन अंतरण सुविधाओं में पर्याप्त वृद्धि होनी चाहिए।

एफ. विदेशी प्रधान अधिकारी विदेशी व्यापार/ उद्योग निकायों के पास पंजीकृत होना चाहिए।

जी. विदेशी प्रधान अधिकारी के पास किसी अंतर्राष्ट्रीय ऋण पात्रता निर्धारण एजेंसी से प्राप्त अच्छी रेटिंग होनी चाहिए।

एच. विदेशी प्रधान अधिकारी को अपने न्यूनतम दो बैंकरों से गोपनीय रिपोर्टें प्रस्तुत करनी चाहिए।

आई. विदेशी प्रधान अधिकारी को अपने मूल/मेजबान देश में धन शोधन निवारण मानदंडों को पूरा करने के लिए की गयी कार्रवाई संबंधी, किसी स्वतंत्र सनदी लेखाकार द्वारा प्रमाणित, एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए।

जे. विदेशी प्रधान अधिकारी भारत में अपने एजेंटों और उप-एजेंटों के कार्यकलापों के लिए पूर्णत: जिम्मेदार होगा।

के. विदेशी प्रधान अधिकारी द्वारा विप्रेषक तथा भारत में सभी पे-आउट से संबंधित लाभार्थियों के यथोचित रिकार्ड रखे जाने चाहिए। रिज़र्व बैंक अथवा भारत सरकार की अन्य एजेंसियों अर्थात वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, एफआइयु-आइएनडी, आदि द्वारा मांगे जाने पर सभी रिकार्ड उपलब्ध कराए जाने चाहिए। विप्रेषकों तथा लाभार्थियों के पूरे ब्योरे, मांगे जाने पर, विदेशी प्रधान अधिकारी द्वारा दिये जाने चाहिए।

खंड ।।।

भारतीय एजेंटों द्वारा उप-एजेंटों की नियुक्ति के लिए दिशानिर्देश

1. योजना

इस योजना के तहत, भारतीय एजेंट धन अंतरण कारोबार करने के प्रयोजन के लिए कतिपय शर्तें पूर्ण करने वाली एंटिटीज़ के साथ उप एजेंसी करार कर सकते हैं।

2. उप-एजेंट

उप-एजेंट के पास कारोबार करने के लिए स्थान होना चाहिए और जिसकी वास्तविकता/सदाशयता भारतीय एजेंट को स्वीकार्य होनी चाहिए। भारतीय एजेंट उप-एजेंट के साथ पारस्परिक करार के जरिये करार की अवधि और कमीशन अथवा शुल्क निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र हैं। भारतीय एजेंट द्वारा उप-एजेंटों के परिसरों तथा रिकार्डों की लेखा-परीक्षा और प्रत्यक्ष निरीक्षण क्रमश: महीने में और वर्ष में कम से कम एक बार की जानी/किया जाना चाहिए।

3. भारतीय एजेंटों द्वारा उप-एजेंटों के संबंध में जानकारी प्रस्तुत करने की प्रक्रिया

भारतीय एजेंटों को तिमाही के दौरान नियुक्त उप-एजेंटों से संबंधित आवश्यक जानकारी विनिर्दिष्ट फार्मेट (संलग्नक-I) में, साफ्ट प्रति के रूप में, संबंधित तिमाही की समाप्ति से 15 दिनों के भीतर भारतीय रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय, जिसके क्षेत्राधिकार में भारतीय एजेंट का पंजीकृत कार्यालय आता है, को वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के जरिये गृह मंत्रालय, भारत सरकार को आगे प्रस्तुत करने के लिए प्रेषित करनी चाहिए। यदि गृह मंत्रालय को कोई आपत्ति होगी, तो संबंधित उप-एजेंसी व्यवस्था तत्काल समाप्त करनी होगी।

भारतीय एजेंट संलग्नक-I में जानकारी देने के साथ-साथ इस आशय का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेंगे कि उनके द्वारा नियुक्त उप-एजेंट पात्रता मानदंड पूर्ण करते हैं और उनके संबंध में समुचित सावधानी, जहां कहीं लागू हो, बरती गयी है।

4. उप-एजेंटों संबंधी समुचित सावधानी

प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक, प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-।।, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक और डाक विभाग से भिन्न उप-एजेंटों के संबंध में समुचित सावधानी बरतते समय भारतीय एजेंट और विदेशी प्रदान अधिकारियों द्वारा निम्नलिखित न्यूनतम जांच की जानी चाहिए:

  • उप-एजेंट की मौजूदा कारोबारी गतिविधियां/इस क्षेत्र में उनकी स्थिति।

  • उप-एजेंट के पक्ष में दुकान और संस्थापना / लागू अन्य म्युनिसिपल प्रमाणन।

  • संबंधित स्थान पर उप-एजेंट की भौतिक उपस्थिति का सत्यापन।

  • स्थानीय पुलिस प्राधिकारियों से उप-एजेंट के संबंध में आचरण प्रमाणपत्र। (निगमित संस्थाओं के संबंध में संस्था के बहिर्नियम और अंतर्नियम तथा निगमन प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रतिलिपि)

टिप्पणी: यद्यपि उप-एजेंट के संबंध में स्थानीय पुलिस से आचरण प्रमाणपत्र प्राप्त करना भारतीय एजेंटों के लिए अनिवार्य नहीं है, फिर भी भारतीय एजेंट उप-एजेंटों के रूप में ऐसे व्यक्तियों/कंपनियों (संस्थाओं) की नियुक्ति करने से बचें, जिनके खिलाफ कानून व्यवस्था स्थापित/लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा मामले(case)/कार्यवाही प्रारंभ की गयी हो अथवा लंबित हों।

  • विगत आपराधिक मामले, कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसी द्वारा उप-एजेंटों और/ अथवा उसके निदेशकों/भागीदारों के विरुद्ध चलाये गये/लंबित मामलों, यदि कोई हो, के संबंध में घोषणा-पत्र।

  • उप-एजेंटों और उसके निदेशकों/भागीदारों के पैन कार्ड।

  • उप-एजेंट के निदेशकों/भागीदारों और मुख्य कार्मिकों (key persons) के फोटोग्राफ।

उपर्युक्त जांच नियमित आधार पर, किन्तु वर्ष में कम से कम एक बार, अवश्य की जानी चाहिए। भारतीय एजेंटों को उप-एजेंट के कार्य स्थल पर व्यक्तिगत रूप से दौरा करने के अतिरिक्त उनके कार्य स्थल की पुष्टि करने वाले यथोचित दस्तावेजी साक्ष्य उनसे प्राप्त करने चाहिए। भारतीय एजेंट ऐसे उप-एजेंटों के साथ करारों को रद्द करेंगे, जो इस परिपत्र की तारीख से तीन महीने के भीतर उल्लिखित मानदंड पूरे नहीं करेंगे।

5. केंद्रों का चयन

भारतीय एजेंट योजना के परिचालन के लिए केंद्रों का चयन करने के लिए स्वतंत्र हैं। तथापि, इस संबंध में रिज़र्व बैंक को सूचित किया जाए।

6. प्रशिक्षण

भारतीय एजेंटों से अपेक्षित है कि वे योजना के परिचालन और अभिलेखों के रखरखाव के संबंध में उप-एजेंटों को प्रशिक्षण दें।

7. रिपोर्टिंग, लेखापरीक्षा और निरीक्षण

भारतीय एजेंट/एजेंटों से अपेक्षित होगा कि वे अपने उप-एजेंटों द्वारा किए गए लेनदेनों की (नियमित आधार पर) जैसे मासिक आधार पर, भारतीय एजेंट द्वारा विनिर्दिष्ट सरल फार्मेट में, उन्हें (भारतीय एजेंट को) रिपोर्ट करने के लिए उचित व्यवस्था लागू करें।

भारतीय एजेंटों द्वारा कम से कम मासिक आधार पर उप-एजेंटों के सभी कार्य-स्थानों की नियमित स्पॉट लेखापरीक्षा की जानी चाहिए। ऐसी लेखापरीक्षा में समर्पित दल (dedicated team) शामिल करने चाहिए और उप-एजेंटों के अनुपालन के स्तर की जांच करने के लिए "मिस्ट्री ग्राहक" (ऐसे व्यक्ति जो संबंधित लोगों और प्रक्रिया से अपेक्षित निष्पादन के स्तर के संबंध में अनुभव प्राप्त करने और मूल्यांकन करने के लिए संभाव्य ग्राहक के रूप में कार्य करते हैं) की अवधारणा का उपयोग किया जाना चाहिए। उल्लेखानुसार, उप-एजेंटों की बहियों के निरीक्षण की एक प्रणाली भी लागू की जाए। इस निरीक्षण का प्रयोजन, जो साल में कम से कम एक बार होना है, यह सुनिश्चित करना है कि उप-एजेंटों द्वारा धन अंतरण कारोबार, करार की शर्तों के अनुसार/भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रचलित दिशानिर्देशों के अनुसार किया जा रहा है और उप-एजेंटों द्वारा आवश्यक अभिलेखों का रखरखाव किया जा रहा है।

टिप्पणी:- भारतीय एजेंट अब भी अपने उप-एजेंट के कार्यकलापों के लिए पूर्णत: जिम्मेदार हैं। जबकि भारतीय एजेंटों को स्वयं-विनियमित संस्था के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, उप-एजेंटों के यथोचित कार्यकलाप सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूर्णत: भारतीय एजेंटों की होगी तथा उप-एजेंटों के कार्यकलापों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होगा। प्रत्येक भारतीय एजेंट को उप-एजेंट की नियुक्ति करने से पहले समुचित सावधानी बरतनी चाहिए और कोई अनियमितता पाये जाने पर भारतीय एजेंट की अनुमति रद्द किए जाने की पात्र हो सकती है।

खंड IV

मौजूदा भारतीय एजेंटों को दी गयी अनुमति (प्राधिकार) के नवीकरण के लिए दिशानिर्देश

1. भारतीय एजेंटों को आवश्यक अनुमति प्रथमत: एक वर्ष के लिए जारी की जाएगी, जो रिज़र्व बैंक द्वारा, समय-समय पर जारी, सभी शर्तों तथा अन्य निर्देशों/अनुदेशों के अनुपालन करने के आधार पर एक से तीन वर्षों तक के लिए नवीकृत की जा सकती है।

2. आवेदक 6 मार्च 2006 के ए.पी.(डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं. 25 [ए.पी.(एफएल सीरीज़) परिपत्र सं.2] में यथा परिभाषित कोई प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी । बैंक अथवा प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी ।। अथवा संपूर्ण मुद्रा परिवर्तक अथवा कोई अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अथवा डाक विभाग होना चाहिए।

3. भारतीय एजेंट की न्यूनतम निवल स्वाधिकृत निधियाँ रु. 50 लाख होनी चाहिए।

4. अनुमति के नवीकरण के लिए आवेदन पत्र खंड ॥ में दिए गए ब्योरों के अनुसार विदेशी प्रधान अधिकारी से संबंधित दस्तावेजों सहित निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के उस क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत किया जाना चाहिए जिसके अधिकार क्षेत्र में भारतीय एजेंट का पंजीकृत कार्यालय आता है:

ए. इस आशय का एक घोषणा पत्र कि भारतीय एजेंट अथवा उसके निदेशकों के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय/राजस्व आसूचना निदेशालय अथवा किसी कानून लागू करने वाली एजेंसी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी है/अनिर्णित नहीं हैं और भारतीय एजेंट अथवा उसके निदेशकों के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला दायर नहीं है/लंबित नहीं है।

बी. भारतीय एजेंट द्वारा अपने ग्राहक को जानिए/धन-शोधन निवारण/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध करने संबंधी विवरण, जोखिम प्रबंधन तथा आंतरिक नियंत्रण नीतिगत ढांचा तैयार और लागू करने से संबंधित ब्योरा।

सी. भारतीय एजेंट के पिछले दो वित्तीय वर्षों के लेखापरीक्षित तुलन पत्र और लाभ-हानि लेखे, यदि उपलब्ध हों, अथवा अद्यतन लेखापरीक्षित लेखे की एक प्रति के साथ आवेदन की तारीख को निवल स्वाधिकृत निधियों की स्थिति संबंधी सांविधिक लेखा परीक्षक/कों का प्रमाणपत्र ।

डी. भारतीय एजेंट के कम से कम दो बैंकरों से मुहरबंद लिफाफे में गोपनीय रिपोर्टें।

ई. वित्तीय क्षेत्र में कार्यरत भारतीय एजेंट की सहयोगी/संबद्ध संस्था के ब्योरे।

एफ. अनुमति के नवीकरण के लिए बोर्ड के प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति।

टिप्पणी:- धन अंतरण सेवा योजना के तहत मिली अनुमति के समाप्त होने से एक माह पूर्व अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यथा निर्धारित अवधि के भीतर अनुमति के नवीकरण हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए। जब कोई एंटिटी धन अंतरण सेवा योजना के तहत अनुमति के नवीकरण के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत करती है तो नवीकरण की तारीख तक अथवा आवेदन पत्र अस्वीकृत किये जाने तक, जैसी भी स्थिति हो, अनुमति जारी/बनी रहेगी। उक्त अनुमति की समाप्ति के बाद धन अंतरण सेवा योजना के तहत अनुमति के नवीकरण के लिए आवेदन पत्र नहीं दिया जाएगा।

खंड V

भारतीय एजेंटों का निरीक्षण

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 12(1) के प्रावधानों के तहत भारतीय एजेंटों का निरीक्षण किया जा सकता है।

खंड VI

भारतीय एजेंटों के लिए अपने ग्राहक को जानिये/धन शोधन निवारण/
आतंकवाद के वित्तपोषण के प्रतिरोध संबंधी दिशानिर्देश

धन शोधन निवारण (एएमएल) मानक और आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध करने (सीएफटी) के संबंध में वित्तीय कार्रवाई कार्य दल (एफएटीएफ) की सिफारिशों के संदर्भ में सीमा-पार से आवक धन विप्रेषण कार्यकलापों के बाबत धन अंतरण सेवा योजना के तहत अपने ग्राहक को जानिये (केवाइसी) मापदंड/धन शोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध करने (सीएफटी)/धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अंतर्गत बैंकों के दायित्व के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंकिंग विनियमन विभाग, केंद्रीय कार्यालय द्वारा उनके नवीनतम मास्टर परिपत्र एवं इस विषय पर, समय-समय पर तथा भविष्य में जारी अन्य विस्तृत अनुदेशों का अनुपालन, आवश्यक परिवर्तनों सहित, धन अंतरण सेवा योजना के तहत भारतीय एजेंट के रूप में कार्यरत सभी प्राधिकृत व्यक्तियों एवं उनके उप-एजेंटों पर भी लागू होंगे।

खंड VII

सामान्य अनुदेश

सभी विदेशी प्रधान अधिकारियों से यह अपेक्षित है कि वे अपने सांविधिक लेखापरीक्षकों से निवल मालियत संबंधी प्रमाणपत्र के साथ अपना वार्षिक लेखापरीक्षण किया गया तुलन पत्र भारतीय रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय तथा भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग को प्रस्तुत करें। इसी तरह, सभी भारतीय एजेंटों से यह अपेक्षित है कि वे अपने सांविधिक लेखापरीक्षकों से अपनी निवल स्वाधिकृत निधियों संबंधी प्रमाणपत्र के साथ अपना वार्षिक लेखापरीक्षण किया गया तुलन पत्र रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत करें। चूंकि विदेशी प्रधान अधिकारियों और भारतीय एजेंटों से यह अपेक्षित है कि वे निरंतरता के आधार पर न्यूनतम निवल मालियत और न्यूनतम निवल स्वाधिकृत निधियां बनाये रखें, अत: उनसे यह अपेक्षित है कि यदि उनकी निवल मालियत/ उनकी निवल स्वाधिकृत निधियां न्यूनतम स्तर से कम हो जाती हैं तो निवल मालियत/निवल स्वाधिकृत निधियां न्यूनतम आवश्यक स्तर तक लाने के लिए ब्योरे-वार समयबद्ध योजना का उल्लेख करते हुए उससे भारतीय रिज़र्व बैंक को तत्काल अवगत कराएं।

भाग – बी

रिपोर्टें/विवरण

1. भारतीय एजेंटों द्वारा प्राप्त विप्रेषणों की मात्रा से संबंधित तिमाही विवरण रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय, जिसके क्षेत्राधिकार में उनका पंजीकृत कार्यालय आता है, को संबंधित तिमाही की समाप्ति से 15 दिनों के भीतर संलग्न फॉर्मेट (संलग्नक-II) के अनुसार प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

2. भारतीय एजेंटों को अपने अतिरिक्त कार्य स्थानों (locations) के पते की सूची तिमाही आधार पर रिज़र्व बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय, जिसके क्षेत्राधिकार में उनका पंजीकृत कार्यालय आता है, को संबंधित तिमाही की समाप्ति से 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत की जाए।

3. भारतीय एजेंटों द्वारा अपने उप-एजेंटों के सभी कार्य स्थलों के पते सहित विदेशी प्रधान अधिकारी-भारतीय एजेंट-वार अपने उप-एजेंटों की सूची एक्सेल फार्मेट में, साफ्ट फार्म में, ई-मेल से प्रस्तुत की जाए। भारतीय एजेंट जब कभी अपने उप एजेंटों को नियुक्त करें/ हटाएं, तो उनके संबंध में पूर्ण रूप से अद्यतन सूची (सभी कार्य स्थलों के नाम और पते सहित) एक्सेल फार्मेट में, साफ्ट फार्म में, ई-मेल से विदेशी मुद्रा विभाग के उस क्षेत्रीय कार्यालय, जिसके अधिकारक्षेत्र में उनका पंजीकृत कार्यालय कार्यरत है, को प्रेषित करें। भारतीय एजेंट नियमित अंतराल पर रिज़र्व बैंक की वेबसाइट देखते रहें, उस पर प्रदर्शित उप ऐजेंटों की सूची से अपनी सूची को सत्यापित करते रहें और यदि उसमें कोई अंतर मिले तो उसे विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के ध्यान में तुरंत लाएं। इसके अलावा, भारतीय एजेंट भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर प्रदर्शित उक्त सूची के सही होने की पुष्टि प्रत्येक तिमाही की समाप्ति के अनुवर्ती 15 दिनों के भीतर विदेशी मुद्रा विभाग के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को पत्र भेज कर अथवा ई-मेल से करें।

4. भारतीय एजेंटों द्वारा प्रत्येक वर्ष जून और दिसंबर के अंत में धारित संपार्श्विकों संबंधी अर्ध वार्षिक विवरण संलग्न फॉर्मेट (संलग्नक-III) में संबंधित अर्ध वर्ष की समाप्ति से 15 दिनों के भीतर विदेशी मुद्रा विभाग के उस क्षेत्रीय कार्यालय, जिसके क्षेत्राधिकार में उनका पंजीकृत कार्यालय कार्यरत है, को प्रेषित किए जाएं।

नोट: सभी प्राधिकृत व्यक्ति, जो धन अंतरण सेवा योजना के अंतर्गत भारतीय एजेंट हैं, विनिर्दिष्ट विवरणों सहित अपना समस्त पत्राचार विदेशी मुद्रा विभाग के उस क्षेत्रीय कार्यालय से करें जिसके अधिकारक्षेत्र में उनका पजीकृत कार्यालय कार्यरत है।


परिशिष्ट

इस मास्टर परिपत्र में धन अंतरण सेवा योजना पर समेकित किये गये परिपत्रों/अधिसूचनाओं की सूची

क्रम सं. अधिसूचना/परिपत्र तारीख
1 धन अंतरण सेवा योजना पर अधिसूचना 4 जून 2003
2 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 18 [ए.पी.(एफएल सीरीज) परिपत्र सं. 05] 27 नवंबर 2009
3 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 19 [ए.पी.(एफएल सीरीज) परिपत्र सं. 02] 25 नवंबर 2010
4 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 21 [ए.पी.(एफएल सीरीज) परिपत्र सं. 04] 30 नवंबर 2010
5 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 24 [ए.पी.(एफएल सीरीज) परिपत्र सं. 05] 13 दिसंबर 2010
6 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 26 [ए.पी.(एफएल सीरीज) परिपत्र सं. 07] 22 दिसंबर 2010
7 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 28 [ए.पी.(एफएल सीरीज) परिपत्र सं. 09] 22 दिसंबर 2010
8 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 50 [ए.पी.(एफएल सीरीज) परिपत्र सं. 12] 6 अप्रैल 2011
9 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 52 [ए.पी.(एफएल सीरीज) परिपत्र सं. 14] 6 अप्रैल 2011
10 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 62 16 मई 2011
11 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 64 20 मई 2011
12 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 66 20 मई 2011
13 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 22 19 सितंबर 2011
14 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 24 19 सितंबर 2011
15 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 78 15 फरवरी 2012
16 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 87 29 फरवरी 2012
17 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 108 17 अप्रैल 2012
18 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 132 8 जून 2012
19 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 49 7 नवंबर 2012
20 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 67 2 जनवरी 2013
21 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 71 10 जनवरी 2013
22 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 73 10 जनवरी 2013
23 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 89 12 मार्च 2013
24 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 102 3 मई 2013
25 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 35 4 सितंबर 2013
26 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.110 4 मार्च 2014
27 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 125 25 अप्रैल 2014
28 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 144 16 जून 2014
29 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 150 25 जून 2014
30 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 8 18 जुलाई 2014
31 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.10 21 जुलाई 2014
32 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 49 16 दिसंबर 2014
33 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 67 28 जनवरी 2015
34 ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं. 88 25 मार्च 2015

1 18 जुलाई 2014 का ए.पी.(डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 8

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